प्रेग्नेंसी में कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं, ताकि यह पता चले कि गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सटीक जानकारी मिल सके। इसमें यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड स्कैन शामिल हैं। बता दें कि सबसे पहला टेस्ट प्रेग्नेंसी को कंफर्म करने के लिए पहली तिमाही के शुरुआती चरण में किया जाता है। इसके बाद 12वें हफ्ते में स्कैन और अल्ट्रासाउंड आदि किए जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में एनोमली स्कैन भी किया जाता है? यह एक जरूरी स्कैन है। सवाल है इस स्कैन से क्या पता चलता है? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
एनोमली स्कैन क्या है?- What Is Anomaly Scan
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डॉ. शोभा गुप्ता के मुताबिक, "एनोमली स्कैन एक विस्तृत अल्ट्रासाउंड है। इसे प्रेग्नेंसी के 18वें से 20वें हफ्ते के बीच किया जाता है। इस स्कैन के जरिए बच्चे के शारीरिक विकास, उसके मुख्य अंगों जैसे दिल, दिमाग, किडनी और हड्डियों की बारीकी से जांच होती है। इस स्कैन के जरिए यह भी पता चलता है कि बच्चे में किसी तरह की स्ट्रक्चरल असामान्यताएं या जन्मजात विकारों तो नहीं है। यही नहीं, एनोमली स्कैन के जरिए बच्चे की सही उम्र का अनुमान लगाया जा सकता है और प्लेसेंटा तथा एमनियोटिक फ्लूइड की स्थिति की भी सटीक जांच की जाती है।" इस संबंध में ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर रिसर्च (NIHR) की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि बच्चों में जन्मजात शारीरिक कमियों का पता लगाने के लिए आमतौर पर 18 से 20 हफ्तों के बीच एनोमली स्कैन किया जाता है। हालांकि, पहली तिमाही यानी 11 से 13वें हफ्ते में होने वाला NT स्कैन भी शुरुआती विसंगतियों को पकड़ने में मददगार होता है, लेकिन शिशु के अंगों की पूरी और विस्तृत जांच केवल 18 से 20 हफ्तों के मुख्य एनोमली स्कैन में ही संभव हो पाती है, क्योंकि तभी उनके शरीर के अंग पूरी तरह विकसित हो चुके होते हैं।
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प्रेग्नेंसी में एनोमली स्कैन कराने के फायदे
प्रेग्नेंसी में हर महिला को एनोमली स्कैन करवाना चाहिए। इससे उन्हें कुछ जरूरी लाभ मिल सकते हैं, जैसे-
अंगों की जांच
प्रेग्नेंसी में गर्भस्थ शिशु के अंगों की सटीक जानकारी मिलना बहुत जरूरी है। एनोमली स्कैन के जरिए शिशु के दिमाग, रीढ़ की हड्डी, दिल, चेहरे, किडनी और हाथ-पैरों की बारीकी से जांच की जाती है। इस तरह की जांच से यह जाना जाता है कि कहीं शिशु को कोई जन्मजात बीमारियां या कमियां तो नहीं हैं। ऐसा करके समय पर खतरों को टाला जा सकता है या जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।
शिशु का विकास
एनोमली स्कैन के जरिए शिशु के विकास के बारे में भी पता चलता है। ध्यान रखें कि शिशु का विकास सही गति में हो रहा है या नहीं, यह जानना बहुत जरूरी है। अगर किसी वजह से शिशु का विकास बाधित होता है, तो जन्म के बाद उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के खतरों का अंदाजा लगाने के लिए एनोमली स्कैन किया जाता है। इसके जरिए शिशु के सिर की चौड़ाई या जांघ की हड्डी की लंबाई का पता चलता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एनोमली स्कैन के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा गर्भावस्था के हफ्तों के हिसाब से बिल्कुल सही तरीके से बढ़ रहा है।
प्लेसेंटा और एमनियोटिक फ्लूइड का स्तर
प्लेसेंटा और एमनियोटिक फ्लूइड, प्रेग्नेंसी में दोनों ही अहम भूमिका अदा करते हैं। प्लेसेंटा वह अंग है, जिसके जरिए शिशु को पोषण और ऑक्सीजन मिलता है। इसी तरह, एमनियोटिक फ्लूइड में शिशु 9 महीने सर्वाइव करता है। एमनियोटिक फ्लूइड के स्तर की जांच करना बहुत जरूरी होता है। इसके स्तर में आयी कमी गर्भवस्थ शिशु के लिए जोखिम भरा हो सकता है। एनोमली स्कैन की मदद से गर्भनाल की स्थिति की जांच की जाती है, ताकि यह पता चल सके कि वह गर्भाशय के मुंह को रोक तो नहीं रही है। इसके साथ ही, यह गर्भ में बच्चे के आस-पास एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा को भी मापता है।
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एनोमली स्कैन स्कैन से पहले कैसे करें तैयारी?
डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "किसी भी तरह के टेस्ट से पहले कुछ खास किस्म की तैयारी करने की जरूरत होती है। हालांकि, एनोमली स्कैन में ऐसा कुछ नहीं है। इस टेस्ट के जरिए गर्भवती महिला को खाली पेट रहने की जरूरत भी नहीं है। हालांकि, यह सुनिश्चित जरूर करें कि टेस्ट से ब्लैडर हल्का भरा हुआ हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे गर्भाशय थोड़ा ऊपर की ओर उठ जाता है, जिससे बच्चे की तस्वीरें बिल्कुल साफ दिखाई देती हैं। इसलिए टेस्ट से करीब 40-45 मिनट पहले एक्सपर्ट्स गर्भवती महिला को 2-3 गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं।"
एनोमली स्कैन कैसे किया जाता है?
एनोमली स्कैन पूरा करने के लिए सोनोग्राफर कुछ स्टेप्स फॉलो करते हैं, जैसे-
- जांच से ठीक पहले महिला को एक स्ट्रेचर पर सीधे लिटाया जाता है और पेट पर एलर्जी-रहित अल्ट्रासाउंड जेल लगाया जाता है। यह इस जांच का सबसे पहला कदम होता है।
- सोनोग्राफर महिला के पेट की त्वचा पर एक छोटा सा हैंडहेल्ड डिवाइस घुमाता है। इसे ट्रांसड्यूसर भी कहा जाता है। इस डिवाइस हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स छोड़ता है, जिससे मॉनिटर पर गर्भस्थ शिशु की लाइव तस्वीरें नजर आने लगती हैं।
- शिशु की तस्वीर नजर आते ही एक्सपर्ट शिशु के अंदरूनी-बाहरी अंगों जैसे उसका सिर, पेट और जांघ की हड्डी, दिमाग, दिल, रीढ़ की हड्डी, किडनी और हाथ-पैरों की बनावट की बारीकी से जांच करते हैं।
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एनोमली स्कैन से पता चलने वाली बीमारियां
- यह दिमाग और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी जन्मजात कमियों जैसे न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स का पता लगाने में मदद करता है।
- यह स्कैन जन्म से पहले ही दिल की बनावट में मौजूद कुछ खराबियों को पकड़ सकता है।
- सिर और चेहरे की असामान्यताएं जैसे कि कटे हुए होंठ या चेहरे की बनावट से जुड़ी कमियों का भी पता लगाया जाता है।
- एनोमली स्कैन पेट की बाहरी परत या दीवार में किसी तरह की खराबी के होने की भी सटीक जानकारी देता है।
- छाती और पेट को अलग करने वाली मांसपेशी (डायाफ्राम) में कोई असामान्यता तो नहीं है, इसका भी एनोमली स्कैन से पता लगाया जाता है।
- एनोमली स्कैन किडनी या पेशाब की नली से जुड़ी समस्याओं की जानकारी देता है।
- इस स्कैन की मदद से बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से सही से बढ़ रहा है या नहीं, यह भी पता लगाया जाता है।
- शिशु के दिमाग के अंदरूनी हिस्सों में जरूरत से ज्यादा फ्लूइड तो नहीं भर गया है, इसकी जानकारी भी एनोमली स्कैन से मिलती है।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में हर महिला को प्रोफेशनल से एनोमली स्कैन करवाना चाहिए। यह गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी कई जानकारियों के लिए अहम है। यहां तक एनोमली स्कैन से बच्चों में कोई जन्मजात बीमारी तो नहीं है, इसका भी पता लगाया जा सकता है। इसी से अंदाजा लगता है कि एनोमली स्कैन गर्भवती महिलाओं के लिए कितना जरूरी है।
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FAQ
क्या एनोमली स्कैन से गर्भवती महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान होता है?
नहीं, यह पूरी तरह से सुरक्षित और दर्द रहित स्कैन है। इसमें ध्वनि तरंगों यानी साउंड वेव का उपयोग किया जाता है, जो आमतौरपर नुकसान नहीं पहुंचाती है।एनोमली स्कैन की रिपोर्ट में शिशु में शारीरिक कमी आने पर डॉक्टर क्या करते हैं?
ऐसी स्थिति में डॉक्टर माता-पिता की काउंसलिंग करते हैं और कुछ मामलों में गर्भ में ही शिशु का इलाज शुरू कर दिया जाता है।
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Jul 14, 2026 15:42 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 14, 2026 15:42 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta