IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) उन महिलाओं के लिए बेहतरीन साबित हो रहा है, जो PMOS, एंडोमेट्रियोसिस या हार्मोनल बदलावों के कारण नेचुरल तरीके से प्रेग्नेंट नहीं हो पाती है, लेकिन IVF से प्रेग्नेंसी कन्फर्म होने के बाद महिलाओं को शुरुआती तीन महीने खास ध्यान रखना होती है, क्योंकि पहली तिमाही के दौरान मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए बहुत ही सेंसिटिव समय होता है। IVF से प्रेग्नेंट महिलाओं को किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए? यह जानने के लिए हमने Dr. Hrishikesh Pai, Consultant Gynaecologist & IVF Specialist, Lilavati Hospital Mumbai and Fortis Hospitals Delhi & Chandigarh से बात की। उन्होंने कहा कि इसी दौरान भ्रूण गर्भाशय में मजबूत होता है और उसके दिमाग, हार्ट, रीढ़ की हड्डी व अन्य महत्वपूर्ण अंगों का विकास शुरू होता है। इसलिए इस समय डॉक्टर की सलाह मानना और समय पर दवाएं लेना बहुत जरूरी है।
IVF से प्रेग्नेंसी में पहले 12 हफ्ते क्यों महत्वपूर्ण होते हैं?
Journal of Medicine and Life में प्रकाशित स्टडी में 155 IVF प्रेग्नेंट महिलाओं को शामिल किया गया। यह स्टडी रोमानिया के बुखारेस्ट स्थित प्रोफेसर डॉ. पनाइट सिरबू क्लिनिकल अस्पताल में जनवरी 2021 से दिसंबर 2022 के बीच की गई। इस स्टडी में 18.1% महिलाओं में हाई बीपी की समस्या पाई गई। जिन महिलाओं में बीपी की समस्या थी, उनकी औसत उम्र 38.86 साल थी, जो सामान्य महिलाओं के मुकाबले ज्यादा थी। इसके अलावा, 24.5% महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज की समस्या देखी गई। प्रीटर्म बर्थ के मामले भी 25.9% थे। इसलिए महिलाओं को किसी भी तरह की जटिलताओं से बचने के लिए शुरुआती हफ्तों में खास ध्यान देने की जरूरत होती है।
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “IVF के जरिए प्रेग्नेंट होने के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों मे तक मिसकैरेज का खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं होता। इसका यह कतई मतलब नहीं है कि हर IVF प्रेग्नेंसी में परेशानी होगी, लेकिन इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है। इन शुरुआती हफ्तों में प्लेसेंटा धीरे-धीरे विकसित होता है और भ्रूण को न्यूट्रिशन देना शुरू करता है। इसी समय हार्मोनल बदलाव भी तेजी से होते हैं, जिसकी वजह से थकान, मतली, उल्टी, मूड स्विंग और कमजोरी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।”
पहली तिमाही में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Dr. Hrishikesh Pai ने महिलाओं को सलाह दी है कि IVF से प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करना चाहिए और साथ ही डॉक्टर की दी गई सलाह जरूर माननी चाहिए।
डॉक्टर की बताई दवाएं समय पर लें
Dr. Hrishikesh Pai के मुताबिक, “IVF के बाद महिलाओं को अक्सर प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन या अन्य हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं, जो प्रेग्नेंसी को शुरुआती दिनों में सहारा देने में मदद करती हैं। कई महिलाएं थोड़ा बेहतर महसूस होने पर खुद ही दवा बंद कर देती हैं, लेकिन ऐसा करना नुकसान दे सकता है। किसी भी दवा को बदलने, बंद करने या नई दवा शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।”
रेगुलर चेकअप कराएं
Dr. Hrishikesh Pai ने बताया कि IVF प्रेग्नेंसी में रेगुलर मॉनिटरिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है। डॉक्टर समय-समय पर अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के जरिए भ्रूण के विकास और हार्मोन के स्तर की जांच करते हैं। ये टेस्ट बताते हैं कि भ्रूण सही तरह से विकसित हो रहा है या नहीं। इसलिए किसी भी अपॉइंटमेंट को बिल्कुल न टालें और डॉक्टर के बताए सभी टेस्ट कराएं, ताकि प्रेग्नेंसी मे किसी भी जटिलता का पहले ही पता चल जाए।
बैलेंस्ड डाइट जरूर लें
Dr. Hrishikesh Pai ने कहा, “प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में शरीर को न्यूट्रिशन की जरूरत होती है। इसलिए खाने में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, विटामिन और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करें। दालें, दूध, दही, पनीर, अंडे, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और साबुत अनाज शरीर को जरूरी न्यूट्रिशन देते हैं। इसलिए महिलाओं को अपने खाने का खास ध्यान रखना चाहिए। इसके साथ दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। इस दौरान महिलाओं को कच्चा या अधपका मांस, बिना पाश्चुरीकृत डेयरी प्रोडक्ट्स, जंक फूड और जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से बचना चाहिए।”

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फिजिकल एक्टिविटी करें
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “अक्सर IVF से प्रेग्नेंट महिलाओं को इस बात की कन्फ्यूजन होती है कि उन्हें पूरी प्रेग्नेंसी में आराम करना है, लेकिन ऐसा नहीं होता। किसी महिला को कोई खास कंडीशन में ही बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है, लेकिन आमतौर पर महिलाओं को सामान्य घरेलू काम करने और हल्की एक्टिविटीज करने को कहा जाता है। हालांकि, भारी वजन उठाने, बहुत ज्यादा कसरत करने, लंबी दूरी तक लगातार सफर करने और शरीर को बहुत ज्यादा थकाने वाले कामों से बचना चाहिए। हल्की सैर और डॉक्टर की सलाह पर फिजिकल एक्टिविटीज करने से मेंटल हेल्थ बेहतर रहती है।”
नींद पूरी करें
Dr. Hrishikesh Pai ने बताया कि IVF के बाद शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में कई महिलाओं को बहुत ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। इसलिए बहुत ज्यादा काम न करें और रोजाना कम से कम सात से नौ घंटे नींद पूरी करने की कोशिश करें। अच्छी नींद लेने से मेंटल हेल्थ भी ठीक रहती है और नींद के जरिए शरीर को प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में भी मदद मिलती है।
स्ट्रेस से बचें
Dr. Hrishikesh Pai ने कहा, “IVF से प्रेग्नेंसी होने के कारण महिलाओं को मिसकैरेज से लेकर हर छोटी-छोटी बात की चिंता होने लगती है। अगर उन्हें कोई छोटी सी भी दिक्कत होती है, तो वे स्ट्रेस लेने लगती हैं। कई बार वे बताती है कि उन्हें लगता है कि शिशु की ग्रोथ सही तरीके से हो रही है या नहीं या फिर उनकी रिपोर्ट ठीक आएगी या नहीं। ऐसी छोटी-छोटी बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचना, उनके स्ट्रेस में डाल सकता है। अगर मन बहुत ज्यादा बेचैन रहता है, तो डॉक्टर की सलाह से मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज या प्रेग्नेंसी के लिए सुरक्षित योग किया जा सकता है। अपनी पसंद का संगीत सुनना, किताब पढ़ना या हल्की वॉक करना भी तनाव कम करने में मदद कर सकता है।”
स्मोकिंग और शराब से बिल्कुल दूर रहे
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं कि महिलाओं को किसी भी तरह की स्मोकिंग, शराब, तंबाकू या हर्बल सप्लीमेंट्स नहीं लेने चाहिए। इससे शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है। कई महिलाएं घरेलू नुस्खे अपनाने लगती हैं, उन्हें किसी भी तरह के प्रोडक्ट्स लेने से बचना चाहिए और सिर्फ डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा लेनी चाहिए।
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निष्कर्ष
अगर महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान परिवार का सपोर्ट मिलता है, तो उसकी मेंटल हेल्थ में काफी सुधार देखा गया है और इसका असर शिशु की ग्रोथ पर भी पडता है। इसलिए IVF के बाद शुरुआती 12 हफ्तों में मेंटल और फिजिकल हेल्थ दोनों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। इस दौरान महिलाओं को डाइट, लाइफस्टाइल, नींद और स्ट्रेस पर ध्यान देना चाहिए। अगर शरीर में कोई भी बदलाव महसूस होता है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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FAQ
बच्चे की धड़कन पहली बार कब दिखाई देती है?
IVF एम्ब्रियो ट्रांसफर के लगभग तीन से चार हफ्ते बाद पहला अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इस स्कैन में डॉक्टर भ्रूण की स्थिति, उसकी धड़कन और यह देखते हैं कि कहीं जुड़वां या ट्विन प्रेगनेंसी तो नहीं है।क्या इस दौरान हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना खतरे की घंटी है?
IVF प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में हल्की स्पॉटिंग होना काफी आम है, जो अक्सर प्रोजेस्टेरोन दवाओं या भ्रूण के चिपकने के कारण होती है। लेकिन अगर ब्लीडिंग तेज हो, लाल रंग की हो या पेट में ऐंठन और तेज दर्द हो, तो बिना देर किए तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
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Jul 22, 2026 19:51 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Hrishikesh D Pai