Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

IVF vs IUI: फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानें किन कपल्स के लिए कौन सा इलाज है बेहतर

जब महिलाएं प्राकृतिक तरीके से प्रेग्नेंट नहीं हो पाती, तो वह IVF कराने के लिए डॉक्टर की सलाह लेती हैं। कई बार डॉक्टर उन्हें IVF के बजाय IUI कराने की सलाह देते हैं। आमतौर पर महिलाएं इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच के अंतर को समझ नहीं पाती। इस लेख में फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. शोभा गुप्ता ने दोनों के बीच के अंतर को विस्तार से समझाया है।

IVF (In Vitro Fertilization) और IUI (Intrauterine Insemination) दोनों ही फर्टिलिटी ट्रीटमेंट है, लेकिन अक्सर लोग इन दोनों को एक जैसी प्रक्रिया समझ लेते हैं। कोई भी महिला खुद इन दोनों प्रक्रियाओं में से एक नहीं चुन सकती, बल्कि डॉक्टर महिला की मेडिकल कंडीशन और उम्र को देखते हुए इन दोनों में से किसी एक का चुनाव करते हैं। IVF और IUI, इन दोनों का तरीका, सफलता की संभावना, खर्च और इस्तेमाल की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि दोनों में क्या अंतर है और किस स्थिति में कौन-सा विकल्प बेहतर माना जाता है। इस बारे में हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट Dr. Shobha Gupta से बात की।

IVF और IUI में अंतर

Dr. Shobha Gupta ने इन दोनों प्रक्रियाओं में फर्क को कुछ ऐसे समझाया है।

अंतर

IUI (इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन)

IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन)

कैसे होता है?

प्राकृतिक रूप से शरीर के अंदर फर्टिलाइजेशन होता है। 

लैब में शरीर के बाहर फर्टिलाइजेशन होता है।

प्रक्रिया

पुरुष के स्पर्म को पतली नली से सीधा महिला के यूटरस में डाला जाता है।

महिला के एग्स को निकालकर लैब में स्पर्म के साथ मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है, जिसे बाद में यूटरस में ट्रांसफर किया जाता है। 

जटिलता 

बहुत सरल, कम इनवेसिव, बिना एनेस्थीसिया के 5-10 मिनट में पूरी होने वाली प्रक्रिया है। 

इसमें इंजेक्शन, एग्स को निकालने की छोटी सर्जरी  और एम्ब्रियो ट्रांसफर शामिल है।

जरूरी बात 

महिला की कम से कम एक फैलोपियन ट्यूब खुली होनी चाहिए।

बंद फैलोपियन ट्यूब वाले मामलों में भी पूरी तरह कारगर है। 

 किन महिलाओं पर कौन सा प्रोसेस जरूरी 

पुरुषों में स्पर्म की हल्की कमी या महिला में बांझपन की समस्या होना 

ट्यूबल ब्लॉक, गंभीर स्पर्म समस्या, एडवांस एंडोमेट्रियोसिस, PCOS या बार-बार IUI फेल होने पर IVF कराने की सलाह दी जाती है।

समय 

ओव्यूलेशन के समय केवल 1 दिन में प्रक्रिया पूरी होती है।

एक पूरे IVF साइकिल में लगभग 2 से 5 हफ्ते का समय लगता है।

सफलता दर

क्लिनिकल प्रेग्नेंसी दर 33 फीसदी 

क्लिनिकल प्रेग्नेंसी दर 46 फीसदी 

लागत 

किफायती और कम खर्चीला इलाज 

एडवांस्ड लैब तकनीकों और दवाओं के कारण IUI की तुलना में ज्यादा खर्चीला हो सकता है।

IUI क्या है?

Cleveland Clinic के अनुसार, नेचुरल प्रेग्नेंसी में स्पर्म वजाइना से होते हुए सर्विक्स के जरिए गर्भाशय में और फिर फैलोपियन ट्यूब तक का सफर खुद तय करता है। ओवरी से एग निकलने के बाद फैलोपियन ट्यूब में पहुंचकर स्पर्म से मिलता है और फर्टिलाइज होता है। वहीं, IUI फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में एक पतली नली की मदद से स्पर्म को सीधे ही यूटरस में पहुंचा दिया जाता है। इससे स्पर्म फैलोपियन ट्यूब के बहुत करीब पहुंच जाता है।

IUI कैसे किया जाता है?

Dr. Shobha Gupta कहती हैं, "IUI के जरिए स्पर्म को एग के पास पहुंचा दिया जाता है, जिससे प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया को कुछ ही मिनटों में पूरा कर दिया जाता है, क्योंकि इसमें महिला को एनेस्थीसिया देने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें सबसे जरूरी समझने वाली बात यह है कि आमतौर पर कपल सिर्फ IVF का ही सोचकर आते हैं, लेकिन अगर कपल में बिना किसी कारण इंफर्टिलिटी होती है, पुरुषों में हल्का स्पर्म काउंट या स्पर्म की गतिशीलता कम होती है, ओव्यूलेशन की समस्या या सर्वाइकल म्यूकस से जुड़ी दिक्कत होती है, तो IUI कराने की सलाह दी जाती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है कि महिला की फैलोपियन ट्यूब खुली हो और ओवरी सामान्य रूप से काम कर रही हो, तभी IUI सफल होता है।”

iui and ivf difference

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IVF में क्या होता है?

StatPearls Publishing के मुताबिक, IVF एडवांस्ड टेक्निक है, जिसमें आमतौर पर महिला को कुछ दिन हार्मोन के इंजेक्शन देकर ओवरी में ज्यादा अंडे बनाए जाते हैं। इसके बाद एग्स को बाहर निकाला जाता है और लैब में पार्टनर के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। एम्ब्रियो बनने के बाद वापस महिला का यूटरस में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

IVF की सलाह कब दी जाती है?

Dr. Shobha Gupta का कहना हैं, “IVF की इस प्रक्रिया में करीब एक महीना तक लग सकता है और इस दौरान कई बार अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कराने पड़ते हैं। IVF की सलाह तभी दी जाती है, जब IUI से सफलता की संभावना काफी कम होती है। अगर कपल्स में ये समस्याएं होती हैं, तो ही IVF की सलाह दी जाती है।

  1. फैलोपियन ट्यूब का बंद या क्षतिग्रस्त होना
  2. पुरुषों में गंभीर स्पर्म की समस्या
  3. एंडोमेट्रियोसिस
  4. बार-बार IUI असफल होना
  5. 35 साल से ज्यादा उम्र होने पर ओवेरियन रिजर्व कम होना
  6. PMOS का गंभीर होना
  7. डोनर एग या डोनर स्पर्म की जरूरत
  8. जेनेटिक बीमारी से बचाव के लिए भ्रूण की जांच (PGT) करना

IUI और IVF में अंतर

Dr. Shobha Gupta के मुताबिक, “दोनों प्रोसेस में फर्टिलाइजेशन का मुख्य अंतर है। IUI में फर्टिलाइजेशन महिला के शरीर में ही होती है, जबकि IVF में यह लैब में की जाती है। इसमें डॉक्टर एम्ब्रियो की ग्रोथ पर नजर भी रख सकते हैं और सिर्फ स्वस्थ भ्रूण को ही ट्रांसफर किया जाता है। इसलिए कई गंभीर मामलों में IVF की सफलता का दर ज्यादा होता है।

Cureus में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इस अध्ययन में 150 महिलाओं पर IUI और 150 महिलाओं पर IVF ट्रीटमेंट किया गया। IUI महिलाओं में क्लिनिकल प्रेग्नेंसी दर 33 फीसदी था और IVF ग्रुप की महिलाओं में यह 46 फीसदी था। इसमें उम्र का फैक्टर भी काफी महत्वपूर्ण था। जो महिलाएं 30 साल से कम उम्र की थी, उनमें IVF की सफलता का दर 52 फीसदी था और IUI का दर 39% था।

IUI और IVF में खर्च

Dr. Shobha Gupta कहती हैं, “IUI तकनीक अपनाने पर खर्च कम आता है, क्योंकि इसमें दवाएं कम लगती हैं, बार-बार अस्पताल जाने की जरूरत नहीं होती और न ही अंडे निकालने जैसी प्रक्रिया करनी पड़ती है। वहीं, IVF एक एडवांस तकनीक है। इसमें हार्मोन इंजेक्शन, रेगुलर अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, एग रिट्रीवल, लैब में भ्रूण तैयार करना और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इसलिए इसका खर्च IUI से अधिक होता है।”

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निष्कर्ष

Dr. Shobha Gupta बताती हैं कि किसी भी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सफलता महिला की उम्र, एग्स की क्वालिटी, स्पर्म की कंडीशन और इंफर्टिलिटी के कारण पर निर्भर करती है। इसके अलावा, हर कपल की समस्या अलग होती है, इसलिए लोगों से सलाह लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें और जांच कराएं। फर्टिलिटी एक्सपर्ट की सलाह पर ही सही विकल्प चुनें, क्योंकि समय पर सही तकनीक से किया गया इलाज प्रेग्नेंसी की संभावना को काफी हद तक बढ़ा सकता है।

All Image Credit: Magnific 

FAQ

  • एक बार IUI फेल होने के बाद दोबारा IUI में कितना गैप रखना चाहिए?

    IUI फेल होने पर अगले ही पीरियड्स साइकिल में बिना किसी लंबे गैप के दोबारा IUI प्रक्रिया करा सकते हैं। आमतौर पर एक्सपर्ट्स तीन से चार बार IUI ट्राई करने की सलाह देते हैं और यदि फिर भी सफलता न मिले तो IVF पर स्विच करने को कहते हैं।
  • क्या पुरुष में स्पर्म काउंट जीरो होने पर भी IVF किया जा सकता है?

    अगर पुरुषों का स्पर्म काउंट जीरो होता है, तो डॉक्टर Micro -TESE या TESA जैसी सर्जिकल प्रक्रिया से सीधे स्पर्म निकालकर ICSI-IVF तकनीक के जरिए कपल के अपने ही बायोलॉजिकल बच्चे का सपना पूरा कर सकते हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 24, 2026 19:35 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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