जब कपल्स नेचुरल पेरेंट्स नहीं बन पाते, तो वे IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के जरिए पेरेंट्स बनने की कोशिश करते हैं। हालांकि, आमतौर पर IVF ट्रीटमेंट के दौरान महिलाएं सफलतापूर्वक प्रेग्नेंट हो जाती है, लेकिन कुछ मामलों में पूरी प्रक्रिया सही तरीके से होने के बावजूद भी IVF सफल नहीं हो पाता। बार-बार IVF असफल होने के कारणों को जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट Dr. Shobha Gupta से बात की।
Dr. Shobha Gupta के अनुसार, IVF फेल होने के पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं होता। महिला की उम्र, अंडों और स्पर्म की क्वालिटी, यूटरस की स्थिति, हार्मोन, लाइफस्टाइल और कई अन्य मेडिकल कारण इसकी सफलता को प्रभावित कर सकते हैं।
IVF बार-बार फेल होने के कारण
Dr. Shobha Gupta ने बताया कि हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर IVF साइकल के असफल होने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में भी सफलता नहीं मिलेगी। कई मामलों में असफलता के पीछे ऐसे कारण होते हैं, जिनकी पहचान कर उनका इलाज किया जा सकता है। सबसे पहले इसके कारणों को समझने की जरूरत है।”
1. बढ़ती उम्र का असर
Dr. Shobha Gupta कहती हैं, “IVF की सफलता में महिला की उम्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ओवरी में एग्ज की संख्या और क्वालिटी दोनों कम होने लगती हैं। खासतौर पर यह बदलाव 35 साल के बाद तेजी से दिखाई देता है। कम क्वालिटी वाले एग्ज से बनने वाले एम्ब्रियो में क्रोमोसोम्स से जुड़ी परेशानियां होने का रिस्क हो सकता है। इस वजह से प्रेग्नेंसी की संभावना काफी कम हो जीती है या फिर शुरुआत में ही गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।”
2. एम्ब्रियो की क्वालिटी बेहतर न होना
Dr. Shobha Gupta ने बताया कि IVF लैब में एम्ब्रियो कई बार देखने में नॉर्मल लगता है, लेकिन उसमें कई अनुवांशिक दोष हो सकते हैं, जो माइक्रोस्कोप से दिखाई नहीं देते। ऐसे एम्ब्रियो को जब यूटरस में ट्रांसफर किया जाता है, तो वह सफलतापूर्वक इम्पलांट नहीं हो पाते। ऐसे में कई महिलाओं को शुरुआत में ही मिसकैरेज हो जाता है। इसलिए अनुभवी फर्टिलिटी एक्सपर्ट से IVF ट्रीटमेंट जरूरी होती है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर डॉक्टर पेरिइम्प्लांट जेनेटिक टेस्टिंग (PGT) का इस्तेमाल करके बेहतर एम्ब्रियो चुन सकते हैं।
3. दवाओं का ओवरी पर असर न होना
Dr. Shobha Gupta के मुताबिक, “IVF के दौरान महिलाओं के एग्ज की संख्या बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। कई बार कुछ महिलाओं में हार्मोनल इंजेक्शन देने के बावजूद कम एग्ज बनते हैं, एग्ज की पूरी तरह से ग्रोथ नहीं हो पाती या ओवेरियन रिजर्व पहले से ही कम होता है। ऐसी कंडीशन में अच्छे एम्ब्रियो बनने की संभावना भी कम हो सकती है।”

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4. यूटरस में इम्प्लांटेशन की समस्या
Dr. Shobha Gupta ने कहा कि कई बार एम्ब्रियो तो अच्छी क्वालिटी का होता है, लेकिन वह गर्भाशय की परत पर चिपक नहीं पाते। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसमें एंडोमेट्रियम का बहुत ज्यादा पतला होना, यूटरस में पॉलिप होना, फाइब्रॉइड्स होना, यूटरस में इंफेक्शन या हार्मोन अंसुतलन शामिल हो सकते हैं।
5. स्पर्म की क्वालिटी या संख्या कम होना
Dr. Shobha Gupta का कहना है, “आमतौर पर IVF के असफल होने का कारण सिर्फ महिला से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन करीब आधे मामलों में पुरुष भी IVF की असफलता के पीछे जिम्मेदार होते हैं। अगर पुरुष के स्पर्म क्वालिटी सही नहीं मिलती, स्पर्म की संख्या कम होती है या फिर उसका आकार असामान्य होता है, तो फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। ऐसे केस में Sperm DNA Fragmentation Test कराने की सलाह दी जा सकती है।”
6. क्रोमोसोम या जेनेटिक समस्याएं
Dr. Shobha Gupta ने बताया कि कई बार स्पर्म और एग्ज दोनों ही सामान्य होने के बावजूद एम्ब्रियो में क्रोमोसोम की संख्या या आकार में परेशानी हो सकती है। ऐसे में एम्ब्रियों को इम्पलांट नहीं किया जाता या फिर शुरुआत में ही गर्भपात हो सकता है। अगर किसी का बार-बार IVF फेल हो रहा है, तो दोनों पार्टनर्स का Karyotyping या जेनेटिक टेस्ट किया जा सकता है।
7. लाइफस्टाइल में बदलाव और स्ट्रेस होना
Dr. Shobha Gupta ने कहा कि कई बार IVF में लाइफस्टाइल भी बहुत अहम भूमिका निभा सकता है। अगर पार्टनर्स स्मोक या शराब बहुत ज्यादा पीते हैं। मोटापे से ग्रस्त है, जंक फूड खाते हैं या फिर फिजिकली एक्टिव नहीं है, तो भी IVF ट्रीटमेंट पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अगर पार्टनर्स बहुत ज्यादा स्ट्रेस में रहते हैं, तो भी IVF ट्रीटमेंट प्रभावित हो सकता है।
क्या कहती है स्टडी?
Reproductive Biology and Endocrinology के मुताबिक, बार-बार इम्प्लांट फेल (RIF) होने का कारण सिर्फ एम्ब्रियो ही नहीं, बल्कि गर्भाशय, पुरुष के स्पर्म, हार्मोन, इंफेक्शन, इम्यूनिटी और IVF प्रोटोकॉल भी भूमिका निभा सकते हैं। रिसर्चर्स का मानना है कि बार-बार IVF असफल होने पर हर कपल का चेकअप होता है। इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि बढ़ती उम्र, मोटापा, धूम्रपान, स्ट्रेस, यूटरस की समस्याएं, क्रोनिक एंडोमेट्राइटिस और क्रोमोसोम संबंधी परेशानियां भी IVF की सफलता को प्रभावित कर सकती हैं।
बार-बार IVF फेल होने पर ये चेकअप जरूरी
Dr. Shobha Gupta कहती हैं कि अगर दो से तीन बार IVF फेल हो गया है, तो पार्टनर्स को कुछ चेकअप की सलाह दी जा सकती है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डॉक्टर महिला और पुरुष की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए ही टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
- यूटरस की जांच (Hysteroscopy या Uterine Cavity Assessment)
- इंफेक्शन की जांच
- कुछ मरीजों के लिए इम्यूनोलॉजिकल टेस्ट
- क्रायोटाइपिंग
- सीमन एनालिसिस
- स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन
- एंडोमेट्रियल रेस्पिटिविटी एस्समेंट
- हार्मोन प्रोफाइल
- थायराइड और प्रोलैक्टिन जांच
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निष्कर्ष
Dr. Shobha Gupta कपल्स को सलाह देती हैं कि अगर पहली बार IVF फेल हो गया है, तो इसका कतई मतलब नहीं है कि दोबारा मां नहीं बना जा सकता। डॉक्टर फेल होने के कारणों को चेक करके दोबारा इलाज शुरू करते हैं। सही कारण की पहचान करके और लाइफस्टाइल में बदलाव करके IVF के जरिए मां बना जा सकता है।
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FAQ
एक IVF साइकिल फेल होने के बाद दूसरी साइकिल शुरू करने में कितना गैप रखना चाहिए?
आमतौर पर एक फेल IVF साइकिल के बाद शरीर और हार्मोनल संतुलन को सामान्य होने के लिए कम से कम एक से दो का आराम देने की सलाह दी जाती है। इससे महिला शारीरिक और मानसिक रूप से अगले प्रयास के लिए तैयार हो पाती है।क्या गर्भाशय का 'स्क्रैच टेस्ट' (Endometrial Scratching) आईवीएफ सफलता दर बढ़ा सकता है?
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है। एम्ब्रियो ट्रांसफर से एक महीने पहले गर्भाशय की अंदरूनी परत पर हल्का सा स्क्रैच लगाने से शरीर में ऐसे ग्रोथ फैक्टर्स एक्टिव होते हैं जो भ्रूण को गर्भाशय की दीवार से चिपकने में मदद करते हैं।
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Aug 03, 2026 16:09 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Shobha Gupta