IVF (In Vitro Fertilization) ऐसे कपल्स को कराने की सलाह दी जाती है, जिन्हें लंबे समय तक कोशिश करने के बावजूद प्राकृतिक तरीके से प्रेग्नेंसी नहीं हो पा रही है। IVF प्रोसस के बारे में ज्यादा जानकारी न होने के कारण लोगोंं में कई तरह के मिथक भी फैले हुए हैं। इस वजह से कई बार लोग IVF प्रोसेस कराने से डरते भी हैं। इसलिए IVF के पूरे प्रोसेस को समझने के लिए हमने Dr. Hrishikesh Pai, Consultant Gynaecologist & IVF Specialist, Lilavati Hospital Mumbai and Fortis Hospitals Delhi & Chandigarh से बात की।
IVF किन कपल्स को कराने की सलाह दी जाती है?
Cleveland Clinic के मुताबिक IVF कराने की सलाह इन कपल्स को दी जाती है।
- फैलोपियन ट्यूब को बंद या क्षतिग्रस्त होना
- एंडोमेट्रियोसिस होना
- लो स्पर्म काउंट होना
- महिलाओं को PMOS होना
- यूटरस में गांठें बनना
- जेनेटिक बीमारियों का खतरा होना
- सारे मेडिकल टेस्ट नॉर्मल होने के बावजूद प्रेग्नेंसी न होना
IVF के स्टेप्स
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “IVF कोई एक दिन में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसमें कई स्टेज होते हैं और हर स्टेप का अपना महत्व होता है। इसलिए हर स्टेप को समझना बहुत जरूरी है।”
जांच और काउंसलिंग
Dr. Hrishikesh Pai के मुताबिक, “IVF शुरू करने से पहले महिला और पुरुष, दोनों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री चेक की जाती है। इसमें महिलाओं के हार्मोन टेस्ट, ओवरी रिजर्व की जांच, अल्ट्रासाउंड, गर्भाशय की जांच, पुरुष का सीमन एनालिसिस और जरूरत पड़ने पर संक्रमण और अन्य ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं। इन रिपोर्ट्स के आधार पर यह तय किया जाता है कि कपल के लिए IVF सबसे बेहतर विकल्प है या पहले किसी दूसरे इलाज की जरूरत है। इसी दौरान कपल को प्रक्रिया, सफलता की संभावना, रिस्क और खर्च से जुड़ी पूरी जानकारी भी दी जाती है, ताकि वे पूरी तैयारी के साथ इलाज शुरू कर सकें।”
पहला स्टेप: ओवरी स्टिमुलेशन
Dr. Hrishikesh Pai के अनुसार, “पहले स्टेप में आमतौर पर ओवरी को स्टिमुलेशन किया जाता है। दरअसल, हर महीने महिला की ओवरी में सिर्फ एक अंडाणु विकसित होता है, लेकिन IVF को सफल करने के लिए एक से ज्यादा परिपक्व अंडाणु तैयार करने की कोशिश की जाती है। इसके लिए महिलाओं को करीब आठ से 12 दिन पहले तक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। इन इंजेक्शन की मदद से ओवरी में कई फॉलिकल्स विकसित होते हैं। इस दौरान महिला को रेगुलर अस्पताल आना पड़ता है, जहां अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के जरिए यह देखा जाता है कि अंडे सही तरीके से विकसित हो रहे हैं या नहीं।”
दूसरा स्टेप: ट्रिगर इंजेक्शन
Dr. Hrishikesh Pai ने कहा कि जब अंडे पूरी तरह से परिपक्व हो जाते हैं, तो ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण स्टेप है, क्योंकि इसी इंजेक्शन के करीब 34 से 36 घंटे बाद एग रिट्रीवल किया जाता है। इसमें खास ध्यान रखा जाता कि अंडे को ओवरी से नेचुरली बाहर निकाल लिया जाए।
तीसरा स्टेप: एग रिट्रीवल
Dr. Hrishikesh Pai ने बताया कि ट्रिगर इंजेक्शन देने के बाद एग को बाहर निकालने की कोशिश की जाती है। यह बहुत ही छोटा सा प्रोसेस है, जिसमें महिला को एनेस्थीसिया या सेडेशन दिया जाता है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड की मदद से एक पतली सुई द्वारा ओवरी से अंडाणु निकाले जाते हैं। इस प्रोसेस में आमतौर पर 20 से 30 मिनट में पूरी हो जाती है। इसके बाद कुछ घंटों तक मरीज को अस्पताल में रखा जाता है और महिला को उसी दिन घर जा सकती है। इसी समय पुरुष पार्टनर का स्पर्म सैंपल लिया जाता है। अगर पहले से स्पर्म फ्रीज करके रखा गया है, तो उसका भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
चौथा स्टेप: लैब में फर्टिलाइजेशन
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “इस स्टेप पर अंडाणु और स्पर्म को मॉडर्न IVF लैब में मिलाया जाता है। अगर स्पर्म की क्वालिटी सामान्य है, तो अंडाणु और स्पर्म को एक साथ रखा जाता है, ताकि नेचुरली ही गर्भधारण हो जाए। अगर स्पर्म काउंट कम है, अंडाणु और स्पर्म की स्पीड कम है या पहले IVF में फर्टिलाइजेशन नहीं हुआ हो, तो ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) तकनीक अपनाई जाती है। इसमें एक सेहतमंद स्पर्म को सीधे अंडाणु के अंदर इंजेक्ट किया जाता है।”

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पांचवां स्टेप: एम्ब्रियो डेवलपमेंट
Dr. Hrishikesh Pai ने बताया कि फर्टिलाइजेशन के बाद बने एम्ब्रियो को अगले तीन से पांच दिनों तक खास लैब में विकसित होने दिया जाता है। इस दौरान एम्ब्रायोलॉजिस्ट लगातार उसकी क्वालिटी, कोशिकाओं की संख्या और ग्रोथ पर नजर रखते हैं। सबसे बढ़िया और क्वालिटी वाले एम्ब्रियो को ट्रांसफर के लिए चुना जाता है। अगर एक से ज्यादा अच्छे एम्ब्रियो तैयार हो जाएं, तो उन्हें भविष्य में इस्तेमाल के लिए क्रायोप्रिजर्वेशन के जरिए सेफ रखा जा सकता है।
छठा स्टेप: एम्ब्रियो ट्रांसफर
Dr. Hrishikesh Pai ने कहा, “IVF का सबसे महत्वपूर्ण प्रोसेस एम्ब्रियो ट्रांसफर है, क्योंकि इसमें चुने हुए एम्ब्रियो को बहुत ही पतले और मुलायम कैथेटर की मदद से यूटरस के अंदर रखा जाता है। यह प्रोसेस बिना किसी बड़े दर्द के पूरी हो जाती है और इसमें आमतौर पर एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं पड़ती। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद महिला को कुछ समय आराम करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही महिला को प्रोजेस्टेरोन जैसी दवाएं दी जा सकती है, ताकि भ्रूण के गर्भाशय की दीवार में सफलतापूर्वक चिपकने यानी इम्प्लांटेशन की संभावना बेहतर हो सके।”
सातवां स्टेप: प्रेग्नेंसी टेस्ट
Dr. Hrishikesh Pai के अनुसार, एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद करीब 10 से 14 दिन बाद Beta-hCG ब्लड टेस्ट के जरिए प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जाता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो कुछ दिनों बाद अल्ट्रासाउंड के जरिए गर्भ की पुष्टि की जाती है और सामान्य प्रेग्नेंसी की तरह आगे की देखभाल शुरू होती है।
IVF के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Dr. Hrishikesh Pai कपल्स को सलाह देते हैं कि सभी दवाओं को समय पर लें और किसी भी इंजेक्शन या टेस्ट को मिस न करें। स्मोकिंग और शराब बिल्कुल नहीं लेनी है। नींद पूरी करनी है और स्ट्रेस को मैनेज करना है। किसी भी दवा या सप्लीमेंट को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
निष्कर्ष
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं कि IVF सेफ और विज्ञान के आधार पर की जाने वाली प्रक्रिया है। हालांकि, हर मरीज की मेडिकल कंडीशन के अनुसार ही सफलता तय होती है, लेकिन सही समय पर चेकअप कराने और अनुभवी फर्टिलिटी एक्सपर्ट की देखरेख में इलाज कराने से कपल्स का पेरेंट्स बनने का सपना पूरा हो सकता है। इसलिए अगर किसी कपल को प्रेग्नेंसी में दिक्कत हो रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लें, ताकि समय पर इलाज हो सके।
FAQ
क्या IVF से पैदा होने वाले बच्चे सामान्य बच्चों से अलग होते हैं?
IVF तकनीक से पैदा हुए बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से बिल्कुल वैसे ही सामान्य और स्वस्थ होते हैं, जैसे प्राकृतिक रूप से पैदा हुए बच्चे। अंतर सिर्फ फर्टिलाइजेशन का होता है, जो शरीर में होने के बजाय लैब में होता है।क्या IVF के पहले प्रयास में ही सफलता मिल जाती है?
दुनिया में कोई भी डॉक्टर IVF के पहले प्रयास में शत-प्रतिशत सफलता की गारंटी नहीं दे सकता। आईवीएफ का सक्सेस रेट मुख्य रूप से महिला की उम्र, अंडों की संख्या और स्पर्म की क्वालिटी पर निर्भर करता है।
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Jul 14, 2026 20:01 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Hrishikesh D Pai