आईवीएफ की मदद से हजारों-लाखों दंपति अपने पेरेंट्स बनने के सपने को पूरा कर रहे हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया जटिल है और इसके तहत महिलाओं को कई तरह की शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यही कारण डाॅक्टर उन महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हैं, जो IVF करवा रही हैं। यहां एक सवाल अक्सर महिलाओं के मन में उठता है कि क्या IVF प्रेग्नेंसी में नाॅर्मल प्रेग्नेंसी की तुलना में अधिक देखभाल की जरूरत होती है? अगर आप भी IVF करवाने की सोच रही हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानें इसके बारे में।
क्या IVF प्रेग्नेंसी में ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है?
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वैसे तो हर तरह की प्रेग्नेंसी में महिला का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, लेकिन जब IVF प्रेग्नेंसी की बात होती है, तो ऐसे में महिलाओं को हर समय निगरानी में रहना पड़ता है। विशेषकर, पहली तिमाही में। इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे-
हार्मोनल सपोर्टः डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "IVFके दौरान महिलाओं को कई तरह के हार्मोनल बदलाव से गुजरना पड़ता है। असल में, IVF प्रक्रिया के दौरान महिलाओं का शरीर प्राकृतिक रूप से प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) का प्रोडक्शन कम करता है, इसलिए डाॅक्टर उन्हें अलग से हार्मोन की दवाएं तथा सप्लीमेंट्स देते हैं। इसमें प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन शामिल होते हैं। ये हार्मोन बच्चेदानी को मजबूत बनाते हैं और गर्भपात के जोखिम को कम करते हैं।"
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हार्मोनल बदलाव पर नजरः डॉ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, "IVF प्रेग्नेंसी महिलाओं के लिए किसी रोलर-कोस्टर राइड की तरह होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान महिलाओं को कई तरह के हार्मोन दिए जाते हैं। ऐसे में अगर उनके स्वास्थ्य पर पूरी नजर न रखी जाए, तो प्रेग्नेंसी की सटीक जानकारी नहीं मिलेगी। इसलिए, IVF के जरिए ठहरी प्रेग्नेंसी में शुरुआत में बार-बार स्कैन (अल्ट्रासाउंड) और ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। इससे प्रेग्नेंसी हार्मोन यानी एचसीजी के स्तर पर नजर रखी जाती है। साथ यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि बच्चा सही जगह पर ठहरा है और बच्चे के दिल की धड़कन सामान्य है।"
मां के स्वास्थ्य की जानकारीः डॉ. शोभा गुप्ता के मुताबिक, आमतौर पर IVF प्रक्रिया के दौरान तमाम इंजेक्शन या थेरेपी गर्भ ठहरने और इसके भ्रूण के विकास पर नजर रखी जाती है। इस प्रक्रिया के तहत महिला के स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती है। वैसे यह देखने में आता है कि ज्यादातर महिलाएं अधिक उम्र में IVF करवाती हैं। ऐसे में जटिलताओं का जोखिम अधिक होता है। यही कारण है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को होने वाली समस्या जैसे प्रेग्नेंसी में शुगर होना या प्री-एक्लेमप्सिया जैसी कंडीशन का पहले से पता लगाया जा सके और इन्हें कंट्रोल करके प्रेग्नेंसी को स्वस्थ बनाया जा सके।
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जीवनशैली पर भी रखी जाती है नजर
IVF प्रक्रिया से गुजर रही महिलाओं की जीवनशैली भी इसकी सफलता दर को प्रभावित करती है। इसलिए, रोजमर्रा की सावधानियां और जीवनशैली पर गौर किया जाना जरूरी हो जाता है, जैसे-
खान-पान का ध्यान रखनाः IVF प्रेग्नेंसी में खान-पान का ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी होता है। विशेषकर, उन्हें खराब चीजें खाने से संक्रमण न हो जाए, इस बात पर नजर रखी जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि IVF प्रेग्नेंसी में महिलाओं को अधपके अंडे और बिना उबला या पास्चराइज्ड मिल्क या डेयरी प्रोडक्ट का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, IVF प्रेग्नेंसी के दौरान कैफीन का सेवन भी सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, IVF प्रेग्नेंसी में महिला को क्या खाना है और क्या नहीं, इस बारे में डॉक्टर की सलाह मानना ज्यादा जरूरी है।
भारी काम न करेंः IVF प्रेग्नेंसी में तभी फिजिकल वर्क करना चाहिए, जब डाॅक्टर इसकी इजाजत दें। इन दिनों भारी या थका देने वाले काम बिल्कुल नहीं करने चाहिए और भारी सामान भी नहीं उठाना चाहिए। आमतौर पर IVF प्रेग्नेंसी में स्ट्रेचिंग या वाॅक करना फायदेमंद होता है।
रोजमर्रा के कामकाज को सामान्य रखेंः IVF प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को न तो बहुत ज्यादा रेस्ट करना चाहिए और न ही ओवर वर्क करना चाहिए। ज्यादा रेस्ट करना भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दिन भर थोड़ी-बहुत मूवमेंट भ्रूण के लिए अच्छी मानी जाती है।
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निष्कर्ष
यह पूरी तरह सच है कि IVF प्रेग्नेंसी में महिला को अतिरिक्त देखरेख की जरूरत होती है। यहां तक कि उन्हें अपने रोजमर्रा के कामकाज पर भी नजर रखनी चाहिए ताकि जरा भी लापरवाही न हो। इसके अलावा, जीवनशैली छोटे से छोटे बदलाव के संदर्भ में डाॅक्टर को सूचना देनी चाहिए। इस तरह IVF प्रेग्नेंसी की सफलता दर बढ़ती है और महिला का स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
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FAQ
क्या IVF प्रेग्नेंसी में वजाइनल डिलीवरी हो सकती है?
हां, IVF प्रेग्नेंसी में वजाइनल डिलीवरी पूरी तरह संभव है।क्या IVF प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में ट्रेवल करना सेफ होता है?
IVF प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में डॉक्टर लंबी या झटके वाली यात्रा करने से मना करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय भ्रूण बहुत नाज़ुक होता है और उसको स्पेशल केयर की जरूरत होती है।
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Current Version
Jul 08, 2026 15:12 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 08, 2026 15:12 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta