Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

IVF ट्रीटमेंट के दौरान महिलाओं में पेट फूलने की समस्या (ब्लोटिंग) क्यों होती है? जानें इसकी वजह

IVF ट्रीटमेंट के दौरान कुछ महिलाओं को ब्लोटिंग की परेशानी हार्मोनल परिवर्तन के कारण होती है। इसके कई अन्य कारण भी हैं। जानें, इनके बारे में विस्तार से।

जब लोग प्राकृतिक तरीके से कंसीव नहीं कर पाते हैं, तो अक्सर IVF ट्रीटमेंट की मदद लेते हैं। खर्चीला होने के बावजूद IVF ट्रीटमेंट कंसीव करने की संभावना कई गुना बढ़ा देता है। यही कारण है कि कई कपल्स इस तकनीक की मदद लेते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाएं IVF ट्रीटमेंट के दौरान पेट फूलने यानी ब्लोटिंग की समस्या की शिकायत करती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर IVF ट्रीटमेंट के दौरान ब्लोटिंग क्यों होती है? आइए, वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं इसकी वजह।

IVF ट्रीटमेंट के दौरान ब्लोटिंग होने के कारण

why bloating happens during ivf treatment 01 (19)

हार्मोनल इंजेक्शन

IVF ट्रीटमेंट में सबसे अहम चरण होता है, हार्मोनल इंजेक्शन देना। असल में IVF के शुरुआती चरण में अंडाशय में कई सारे अंडे बनाने के लिए इस तरह के इंजेक्शन दिए जाते हैं। ऐसे में शरीर में अचानक एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। यही हार्मोनल बदलाव शरीर में फ्लूइड रिटेंशन (पानी जमा होना) को बढ़ावा देता है, जिससे ब्लोटिंग की समस्या होने लगती है।

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अंडाशय के आकार में परिवर्तन

स्वस्थ महिला की बात करें, तो उनके अंडाशय में हर महीने केवल एक अंडा बनता है, जिसका आकार छोटा होता है। वहीं, IVF ट्रीटमेंट की बात करें, तो इसमें दवाओं के प्रभाव के कारण एक साथ कई फॉलिकल्स विकसित होते हैं, जिससे अंडाशय का आकार सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसके आकार में परिवर्तन होने के कारण पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होता है, जो पेट फूलने जैसा प्रतीत होता है।

ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम

how long does body take to recover after egg retrieval 01 (19)

डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं कि कई मामलों में दवाओं का प्रभाव महिला के शरीर पर अधिक नजर आता है। ऐसे में ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (OHSS) जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इस कंडीशन में अंडाशय में सूजन आ जाती है और पेट के हिस्से में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। हालांकि, इसमें कई अन्य लक्षण दिख सकते हैं, लेकिन ब्लोटिंग होना सामान्य संकेतों में से एक है।

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पाचन क्षमता पर असर

चूंकि, IVF ट्रीटमेंट के दौरान कई तरह के हार्मोनल इंजेक्शन लगते हैं, ऐसे में शरीर में कुछ हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इस तरह की स्थिति पाचन पर भी नेगेटिव असर डालती है। विशेषकर, IVF ट्रीटमेंट के दौरान कई दवाएं भी लेनी पड़ती हैं, जो कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में मसल्स के संकुचन को धीमा करती हैं। नतीजतन, पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे गैस और कब्ज की शिकायत देखने को मिलती है।

निष्कर्ष

IVF ट्रीटमेंट के दौरान ब्लोटिंग होना पूरी तरह सामान्य है। इसे लेकर महिलाओं को अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है। हां, अगर महिला को ब्लोटिंग या पाचन संबंधी समस्या अधिक देखने को मिले, तो उन्हें डाॅक्टर से संपर्क कर अपनी समस्या के बारे में जानकारी देनी चाहिए। आपको जानकारी दे दें कि ज्यादातर मामलों में एग रिट्रीवल (अंडे निकालने) या पीरियड्स आने के बाद यह समस्या अपने आप पूरी तरह ठीक हो जाती है।

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FAQ

  • IVF में पेट फूलने की समस्या कब तक ठीक होती है?

    एग रिट्रीवल की प्रक्रिया के बाद जब हार्मोन का स्तर सामान्य हो जाता है, तो यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है। इस प्रक्रिया में लगभग 1 से 2 सप्ताह का समय लगता है।
  • क्या IVF के दौरान ब्लोटिंग को कम करने के लिए पानी पीना बंद कर देना चाहिए?

    नहीं। IVF ट्रीटमेंट में हो रही ब्लोटिंग का यह समाधान नहीं है। इसके विपरीत, इस दौरान खुद को हाइड्रेट रखना अधिक जरूरी है।
  • IVF ट्रीटमेंट के दौरान पेट फूलने की समस्या गंभीर होने पर डॉक्टर के पास कब जाएं?

    अगर ब्लोटिंग के साथ-साथ सांस की तकलीफ हो और अचानक वजन बढ़ने लगे, तो डाॅक्टर के पास तुरंत जाएं।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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