Breastfeeding During Pregnancy: कई महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रेस्टफीड करा रही होती हैं। ऐसे में महिला पर एक नहीं, बल्कि दो-दो नन्ही जानों की जिम्मेदारी आ जाती है। एक शिशु जो मां के दूध पर पूरी तरह आश्रित होता है और दूसरा जो गर्भ में पल रहा होता है। यह स्थिति प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होती है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि इस स्थिति को हैंडल नहीं किया जा सकता है। इस अवस्था में महिलाओं को अपने खान-पान और जीवनशैली से जुड़ी जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
1. पोषक तत्वों का रखें ध्यान
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डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "प्रेग्नेंसी के दौरान हर महिला को अतिरिक्त पोषक तत्वों की जरूरत होती है, क्योंकि उनके गर्भ में एक शिशु पल रहा होता है, जिसका विकास इन्हीं पोषक तत्वों पर निर्भर करता है। चूंकि, अब आप प्रेग्नेंट होने के साथ-साथ ब्रेस्टफीड भी करवा रही हैं, तो ऐसे में आपको अपने द्वारा लिए जा रहे पोषक तत्वों पर और भी ज्यादा गौर करना चाहिए। डाइट में अतिरिक्त कैलोरी जरूर शामिल करें। इससे मिल्क सप्लाई बढ़ती है और प्रेग्नेंट महिला के शरीर को एनर्जी भी मिलती है।"
Study: साल 2021 में प्रसिद्ध जर्नल Nutrients में प्रकाशित रिसर्च पेपर के अनुसार, गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु, स्तनपान कर रहे शिशु और मां, तीनों के स्वास्थ्य के लिए शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा, विटामिन, मिनरल्स और माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स (जैसे फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, विटामिन D, ओमेगा-3/DHA आदि) की जरूरत होती है। इसकी भरपाई सिर्फ साधारण भोजन से करना संभव नहीं होता है। इसलिए सही डाइट के साथ-साथ डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स भी लेना जरूरी होता है।
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प्रेग्नेंसी में क्या-कितनी बार खाएं?
| समय | कैसा भोजन लें | गर्भावस्था में | स्तनपान के दौरान | मिलने वाले पोषक तत्व |
| सुबह उठते ही | हल्का नाश्ता लें | एक गिलास गुनगुना पानी, 4-5 भिगोए बादाम और 2 अखरोट | एक गिलास नारियल पानी या जीरे का पानी या भीगे ड्राई फ्रूट्स | ओमेगा-3, स्वस्थ वसा |
| नाश्ता | मुख्य आहार |
बेसन/दाल का चीला या ओट्स दलिया या 2 उबले अंडे और एक गिलास दूध | मेथी या पालक का परांठा, 2 अंडे (अगर खाती हैं) और एक गिलास दूध | प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन |
| मिड-मॉर्निंग | फल एवं स्नैक्स | कोई एक मौसमी फल | एक मौसमी फल और भूनें हुए मखाने | विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट |
| दोपहर का खाना | संतुलित थाली | 2-3 रोटी, एक कटोरी दाल या राजमा, हरी सब्जी, दही या छाछ और सलाद | 2-3 रोटी या चावल, मसूर या अरहर दाल, हरी पत्तेदार सब्जी, दही और थोड़ा सा घी | कार्बोहाइड्रेट, फाइबर |
| शाम का नाश्ता | हल्का स्नैक | एक कप दूध या सूजी का हलवा या भुने चने और सूप | एक कप अजवाइन या मखाना/गोंद या मेथी का लड्डू | ऊर्जा |
| रात का खाना | संतुलित भोजन | 2 रोटी, मिक्स वेज या पनीर या चिकन/मछली (अगर खाते हैं) और खीरा | 2 रोटी या खिचड़ी या दलिया, मूंग दाल और कोई भी सब्जी | बेहतर डाइजेशन और प्रोटीन का सोर्स |
2. हाइड्रेशन को न करें नजरअंदाज
डॉ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, "प्रेग्नेंसी के साथ-साथ ब्रेस्टफीड करा रही महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है कि उनका शरीर पूर्ण रूप से हाइड्रेटेड रहे। दरअसल, प्रेग्नेंसी के समय शरीर में 40 से 50 फीसदी तक ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है, ताकि गर्भस्थ शिशु तक पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व पहुंच सके। प्रेग्नेंसी में जब शरीर हाइड्रेटेड रहता है, तो इससे एम्नियोटिक फ्लूइड का स्तर भी संतुलित बना रहता है।"
वहीं, अगर हम स्तनपान की बात करें, तो इस स्थिति में भी शरीर में पानी का होना जरूरी है। डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "ब्रेस्टमिल्क में अधिक मात्रा पानी की होती है। ऐसे में महिला को दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, इससे मिल्क सप्लाई में सुधार होता है और स्तनपान कर रहे शिशु को दूध की कमी नहीं होती है।"
3. निप्पल में दर्द होने का जोखिम
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डॉ. शोभा गुप्ता स्पष्ट करती हैं, "प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को निप्पल में दर्द होता है। विशेषकर, दूसरी तिमाही में इस तरह का एहसास अधिक होता है। अगर आप प्रेग्नेंट होने के साथ-साथ स्तनपान भी करा रही हैं, तो इन दिनों निप्पल में दर्द बढ़ सकता है। विशेषकर, जब बच्चा दूध पी रहा हो, तो उस समय दर्द में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा हार्मोनल बदलाव के कारण होता है।" जानकारी के लिए बता दें कि मिल्क प्रोडक्शन और गर्भ में शिशु का विकास एक साथ हो रहा है। ऐसे में शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस का स्तर काफी ज्यादा बढ़ सकता है। अगर आपकी तकलीफ बढ़ रही है, तो आप इस संबंध में एक बार अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकती हैं।
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डॉक्टर की सलाह
डॉ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं, "प्रेग्नेंसी के साथ-साथ ब्रेस्टफीड करा रही हैं, तो रेस्ट करने को लेकर जरा भी लापरवाही न करें और जरूरी सावधानी बरतें। हालांकि, कई बार नई मां को शिशु के कारण सोने या रेस्ट करने का समय नहीं मिलता है। इसलिए, जब भी शिशु सो रहा है, तो आपके उसके साथ-साथ सोएं और तनाव से पूरी तरह दूर रहें। ध्यान रखें कि इस अवस्था में आप पर दोहरी जिम्मेदारी है। ऐसे में तनाव बिल्कुल न लें। जरूरी हो, तो अपने करीबियों की मदद लें और डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं।"
निष्कर्ष
अगर आप उन महिलाओं में से हैं, जो प्रेग्नेंट होने के साथ-साथ स्तनपान भी करा रही हैं, तो अपना विशेष ध्यान रखें। अपने खान-पान और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करें, जैसे पर्याप्त नींद लें, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें। इसके अलावा, अगर किसी भी तरह की परेशानी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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FAQ
प्रेग्नेंसी के दौरान स्तनपान कराने से क्या गर्भाशय में संकुचन हो सकता है?
हां, स्तनपान के दौरान ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है, जिससे हल्का संकुचन पैदा हो सकता है। इसे पूरी तह गर्भावस्था में सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में सावधानी की जरूरत है।क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रेस्टफीडिंग कराने से ब्रेस्टमिल्क के स्वाद और उसकी मात्रा में बदलाव आता है?
हां, गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव होता है और कोलोस्ट्रम (पहला गाढ़ा दूध) बनता है, जिससे दूध का स्वाद बदल सकता है। साथ ही, इसकी मात्रा पर भी फर्क नजर आ सकता है।
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Current Version
Aug 05, 2026 12:54 IST
Modified By : Meera Tagore Aug 05, 2026 12:54 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta