Fri Sep 11, 2026 | 07:31 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या PCOS स्तनपान को प्रभावित करता है? जानिए सच्चाई

PCOS होने के बावजूद महिलाएं प्रसव के बाद अपने नवजात शिशु को स्तनपान करा सकती हैं। हालांकि, उन्हें कुछ विशेष समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जानें, इनके बारे में।

कई महिलाएं PCOS होने के बावजूद अपने शिशु को स्तनपान कराती हैं। PCOS में बच्चे को दूध पिलाना वैसे तो पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है लेकिन इसमें कुछ बातों की सावधानी रखनी पड़ सकती है। इसका कारण यह है कि PCOS एक हार्मोनल समस्या है और इसका असर महिला के मिल्क प्रोडक्शन पर भी पड़ सकता है। PCOS स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कैसे प्रभावित कर सकता है और इस दौरान किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए, इस लेख में इन सवालों का जवाब डॉक्टर की राय और रिसर्च के आधार पर जानते हैं। यह लेख Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता ने रिव्यू किया है।।

PCOS में बच्चे को दूध पिलाने पर क्या असर पड़ता है?

What is the impact of pcos on breastfeeding 02 (4)

PCOS में बच्चे को दूध पिलाने का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि, PCOS में मिल्क सप्लाई बाधित हो सकती है या मिल्क प्रोडक्शन की शुरुआत देरी से हो सकती है। 2024 में Journal of the Endocrine Society में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, "PCOS में बच्चे को दूध पिलाने में कोई विशेष दिक्कत नहीं आती है। हालांकि इस दौरान हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान, शरीर में Dehydroepiandrosterone-sulphate (DHEA-S) नाम का एक एंड्रोजन (मेल हार्मोन) बढ़ सकता है। PCOS वाली महिलाओं में इस हार्मोन का स्तर पहले से ही अधिक होता है और प्रेगनेंसी के दौरान इसका बढ़ा हुआ लेवल ब्रेस्ट टिशू के विकास और दूध बनने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है। इसकी वजह से शुरुआत में दूध की सप्लाई कम हो सकती है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि PCOS वाली महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा सकतीं। सही डॉक्टरी की सलाह, लैक्टेशन एक्सपर्ट की मदद और हार्मोनल मैनेजमेंट के साथ इस स्थिति को सामान्य किया जा सकता है।"

PCOS में दूध पिलाने के दौरान क्या चुनौतियां आ सकती हैं?

What is the impact of pcos on breastfeeding 01 (14)

PCOS में दूध पिलाने के दौरान महिलाओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे-

  • लेक्टोजेनेसिस में देरी: Sage Journals के अनुसार जब प्रसव के बाद महिलाओं को शुरुआती 72 घंटे में शिशु के लिए पर्याप्त दूध नहीं बनता है, इसे डिलेड लेक्टोजेनेसिस कहा जाता है।
  • पर्याप्त दूध न बननाः PCOS में हार्मोनल इंबैलेंस की दिक्कत होती है। इसका मतलब है कि दूध उत्पादन से जुड़े हार्मोन, जैसे प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन, दोनों का संतुलन बिगड़ जाता है। साथ ही इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कतें भी हो सकती हैं। ऐसे में PCOS के कारण महिलाओं में दूध की मात्रा कम हो सकती है, जो शिशु के लिए पर्याप्त नहीं होती।
  • ब्रेस्ट टिश्यूज के विकास पर असरः सामान्य महिलाओं में प्रसव के बाद ब्रेस्ट टिश्यूज विकसित होते हैं, ताकि मिल्क प्रोडक्शन और स्टोरेज पर्याप्त हो सके। PCOS की वजह से ब्रेस्ट टिश्यूज का विकास बाधित होता है। जाहिर है कि PCOS की यह स्थिति स्तनपान के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

PCOS में मिल्क प्रोडक्शन कैसे बढ़ाएं?

What is the impact of pcos on breastfeeding 03

Australian Breastfeeding Association ने PCOS में मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने के कुछ उपाय बताए हैं, जैसे-

  • बच्चे को बार-बार दूध पिलाएंः यह सच है कि PCOS होने पर मिल्क प्रोडक्शन बाधित होता है, लेकिन इसे बढ़ाया भी जा सकता है। स्तनों से जितनी बार दूध निकाला (पंप या फीड) जाता है, शरीर उतना ही अधिक दूध बनाने के लिए प्रेरित होता है।
  • शिशु के साथ शारीरिक संपर्क (Skin-to-Skin Contact) बढ़ाएं: आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शिशु को आप जितनी अपनी गोद में यानी स्किन टू स्किन टच देंगी, उतना ज्यादा आपका मिल्क प्रोडक्शन बढ़ सकता है। दरअसल, शिशु को संपर्क में रखने से महिला में ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ता है, जिससे महिला में दूध की मात्रा बढ़ती है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस को मैनेज करेंः PCOS में हार्मोनल असंतुलन होता है जिसकी वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत हो जाती है। इसका बुरा असर मिल्क प्रोडक्शन पर पड़ता है। दरअसल, PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस प्रोलैक्टिन हार्मोन के असंतुलन और स्तन टिश्यू की संवेदनशीलता को कम करके मिल्क प्रोडक्शन में कमी करता है। सरल शब्दों में समझें तो उच्च इंसुलिन स्तर स्तनों के विकास और दूध बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे प्रसव के बाद मिल्क प्रोडक्शन कम होने लगता है। महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे इंसुलिन रेजिस्टेंस को मैनेज करने की कोशिश करें। इसके लिए लो-ग्लाइसेमिक फूड्स पर अधिक जोर दें।
  • हाइड्रेटेड रहेंः PCOS में महिलाओं को दिन भर में 8-10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए । इससे मिल्क प्रोडक्शन को सपोर्ट मिलता है। दरअसल PCOS डिहाइड्रेशन के कारण मिल्क प्रोडक्शन की क्षमता बाधित होती है, जिससे दूध की मात्रा कम हो सकती है और लेट-डाउन रिफ्लेक्स (दूध उतरने की प्रक्रिया) में कठिनाई हो सकती है।
  • स्ट्रेस मैनेज करेंः PCOS में पहले से ही हार्मोनल असंतुलन का महिलाओं की मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। वहीं, अगर महिला तनाव में होती है तो इसकी वजह से उनके शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दूध उतरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और इसके मिल्क प्रोडक्शन में भी कमी आती है।
  • एक्सपर्ट की मदद लेंः अगर PCOS की वजह से मिल्क प्रोडक्शन कम हो रहा है, तो इस स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। आपको तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। वे आपको मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने के टिप्स देंगे। इसके लिए सप्लीमेंट्स आदि भी दे सकते हैं।

PCOS की दवा का स्तनपान कर रहे शिशु पर क्या असर पड़ता है?

डॉ शोभा गुप्ता कहती हैं, "स्तनपान के दौरान PCOS की दवाओं का शिशु के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ेगा या नहीं, यह दवा की प्रकृति पर निर्भर करता है। उदाहरण स्वरूप समझें, मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, क्योंकि ये दूध में बहुत कम मात्रा में पहुंचती हैं। इसलिए यह शिशु को नुकसान नहीं पहुंचाती है। हालांकि, एस्ट्रोजन जैसी गर्भनिरोधक गोलियां मिल्क प्रोडक्शन को कम कर सकती हैं, जिससे शिशु के पोषण पर असर पड़ सकता है।"

PCOS में मिल्क प्रोडक्शन कम होने पर कब जाएं डॉक्टर के पास?

What is the impact of pcos on breastfeeding 04

PCOS में मिल्क प्रोडक्शन कम होने पर आपको कुछ संकेत नजर आने पर डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए, जैसे-

  • PCOS से पीड़ित महिलाओं को यह नोटिस करना चाहिए कि उनका पहला दूध कितनी देर में आया है और दूध का फ्लो कैसा है। अगर दूध देरी से आ रहा है या कम आ रहा है, तो भी डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।
  • अगर लगातार स्तनपान कराने के बावजूद आपको लगे कि दूध शिशु के लिए पर्याप्त नहीं है, तो भी प्रोफेशनल की मदद लेना न भूलें।

निष्कर्ष

PCOS होने के बावजूद महिलाएं प्रसव के बाद अपने शिशु को दूध पिला सकती हैं। इसमें आमतौर पर किसी गंभीर समस्या का जोखिम नहीं होता। हालांकि, PCOS के बाद महिलाओं को लैक्टेशन की दिक्कत होती है यानी दूध का प्रोडक्शन कम होता है। इसलिए, जिन महिलाओं को PCOS है, उन्हें यह समझना जरूरी है कि उनका दूध शिशु के लिए पर्याप्त है या नहीं और क्या समय पर आ रहा है। अगर ऐसा नहीं है, तो उन्हें प्रोफेशनल की मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि शिशु जन्म के बाद अपने भरण-पोषण के लिए मां पर निर्भर होता है। इसलिए, मां का स्वास्थ्य बेहतर होना चाहिए। ऐसा आप PCOS से संबंधित सही जानकारी रखकर कर सकती हैं।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या PCOS स्तनपान को प्रभावित कर सकता है?

    डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं कि PCOS होने पर महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। इस वजह से प्रसव के बाद इन महिलाओं में दूध देरी से आ सकता है और मिल्क प्रोडक्शन में भी कमी आ सकती है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • क्या PCOS में महिलाएं दूध पी सकती हैं?

    2026 में Cureus Journal of Medical Science से पता चलता PCOS के मरीज दूध पी सकते हैं। यह सामान्यतः हानिकारक नहीं होता। हालांकि, PCOS से पीड़ित महिलाओं में लैक्टोज टॉलरेंस पावर कितना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें दूध पचता है या नहीं। अगर उन्हें दूध हजम नहीं होता है, तो बेहतर है कि दूध न पिएं।
  • क्या PCOS के कारण स्तनपान करते समय वजन बढ़ता है?

    PCOS से पीड़ित महिलाओं में इंसुलिन प्रतिरोध और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। यह स्थिति वजन बढ़ा सकती है। इसका मतलब है कि PCOS से ग्रस्त महिलाएं मोटापे का शिकार हो सकती हैं और उन्हें वजन कम करने में भी दिक्कतें आ सकती हैं।
  • क्या पीसीओडी में महिलाएं मां बन सकती हैं?

    Mayo clinic के अनुसार पीसीओडी से ग्रस्त महिलाएं भी मां बन सकती हैं। हालांकि, उन्हें विशेषज्ञ की देखरेख में प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करने की कोशिश करनी चाहिए। यही नहीं, पीसीओडी से पीड़ित महिलाओं को लाइफस्टाइल में भी बदलाव करने चाहिए।
  • PCOS में कितना वजन कम करना चाहिए?

    NHS के अनुसार PCOS से पीड़ित महिलाओं को कुल शरीर के वजन का केवल 5-10 फीसदी कम करना चाहिए। इससे PCOS के लक्षणों में सुधार हो सकता है, जैसे ओव्यूलेशन फिर से शुरू हो सकता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार होता है और प्रजनन क्षमता भी बेहतर होती है।

Read Next

PCOS में रात को सोने से पहले क्या करें? बेहतर हार्मोन बैलेंस के लिए अपनाएं ये आदतें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Apr 08, 2026 14:19 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Apr 08, 2026 14:19 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Apr 08, 2026 14:19 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content