प्रेग्नेंसी के दौरान एक हेल्दी बच्चे के लिए जरूरी है कि महिला अपनी डाइट में जरूरी पोषण जरूर शामिल करें। प्रेग्नेंट महिला को अक्सर यह कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी में उन्हें दो लोगों के बराबर खाना चाहिए। इतना ही नहीं, इस समय हार्मोनल, इमोशनल और शारीरिक बदलावों के कारण महिलाएं बहुत ज्यादा खाने लगती हैं। ओवरईटिंग के कारण प्रेग्नेंसी में वजन काफी ज्यादा बढ़ जाता है। बढ़ता वजन न सिर्फ महिला की सेहत के लिए बुरा होता है, बल्कि शिशु की सेहत और डिलीवरी के दौरान कई मुश्किलें हो सकती हैं। इसलिए, आइए इस लेख में Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचने के लिए क्या करना चाहिए
प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचने के टिप्स
साल 2016 में International Journal of Eating Disorders में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंसी में खाने पर कंट्रोल न करना तनाव और एंग्जायटी को बढ़ाता है। इतना ही नहीं, यह बहुत ज्यादा वजन बढ़ने का कारण बन सकता है।
Dr.(Prof.) Anju Suryapani के अनुसार प्रेग्नेंसी में परिवार का प्रेशर, क्रेविंग्स या हार्मोनल बदलावों के कारण महिलाएं जरूरत से ज्यादा खा लेती हैं। प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग करने से मां का वजन असामान्य रूप से बढ़ता है, जिससे जेस्टेशनल डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी और डिलीवरी के समय कई जोखिम बढ़ जाता है। इन खतरों को कम करने और ओवरईटिंग से बचने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो करें।
1. दो लोगों के लिए खाना खाने के मिथक से बचें
Dr. Anju Suryapani कहती हैं कि सबसे पहले महिलाओं को यह समझना जरूरी है कि गर्भ में पल रहे शिशु का आकार शुरुआती महीनों में एक छोटे बीज या फल जितना ही होता है। उसे अपने लिए अलग से पूरे भोजन की जरूरत नहीं होती है, बल्कि जो आप खाती हैं उससे भ्रूण को जरूरत का पोषण मिल जाता है। पहली तिमाही में आप नॉर्मल कैलोरी ले सकती हैं, दूसरी और तीसरी तिमाही में ज्यादा कैलोरी इनटेक की जरूरत होती है। हालांकि इसके लिए आपको बहुत ज्यादा खाने की जरूरत नहीं है। खाने में सिर्फ 300 से 450 ज्यादा कैलोरी ही पर्याप्त होती है।
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2. दिन में 5-6 छोटे मील लें
Dr. Anju Suryapani के अनुसार, अगर आप एक ही बार में पेट भरकर खाना खाएंगी तो गर्भाशय का पेट पर दबाव पड़ने के कारण ब्लोटिंग, एसिडिट और भारीपन की समस्या हो सकती है। इसके स्थान पर आप दिनभर में अपने भोजन को 5 से 6 छोटे-छोटे हिस्सों में बांट लें। हर 2 से 3 घंटे में कुछ हल्का और पौष्टिक भोजन लें। इससे आपका ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहेगा और आपको अचानक से बहुत तेज भूख नहीं लगेगी, जिससे आप ज्यादा खाने से बचेंगी।
3. थाली में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं
प्रोटीन और फाइबर पचने में थोड़ा समय लेते हैं, जिससे आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार खाने की क्रेविंग नहीं होती है। प्रोटीन के लिए आप अपनी थाली में पनीर, दही, उबला अंडा, अंकुरित अनाज, दालें और टोंड मिल्क शामिल कर सकते हैं। वहीं फाइबर के लिए आप मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और ओट्स खा सकते हैं।
साल 2020 में Journal of Obesity and Metabolic Syndrome में प्रकाशित स्टडी के अनुसार प्रोटीन भूख को कम करने वाले हार्मोन के लेवल को बढ़ाता है और भूख बढ़ाने वाले हार्मोन को कम करता है। इससे पेट भरा होने का अहसास बढ़ता है, जिससे आप कम खाते हैं।
4. असली भूख और क्रेविंग में अंतर समझें
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण मीठा, तीख या जंक फूड खाने की क्रेविंग काफी ज्यादा बढ़ जाती है। इस दौरान जब भी आपको अचानक कुछ खाने का मन करे तो तुरंत खाने के स्थान पर पहले 1 गिलास पानी या नारियल पानी पीकर 10 मिनट रुकें। कई बार हमारा शरीर डिहाइड्रेशन या प्यास को भूख समझ लेता है। अगर फिर भी खाने की इच्छा हो तो जंक फूड के स्थान पर मखाना, भुना हुआ चना या मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स खाएं।

5. प्रोसेस-फूड और सिर्फ कैलोरी से बचें
Dr. Anju Suryapani कहती हैं कि मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक्स, समोसे, पिज्जा, बिस्कुट और पैकेटबंद जूस में पोषण न के बराबर होता है, लेकिन कैलोरी बहुत ज्यादा होती है। ये चीजें खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती हैं और फिर अचानक गिरा देती है। इस कारण थोड़ी देर में फिर आपको भूख लगने लगती है। इसलिए आप प्रोसेस फूड्स या खाली कैलोरी लेने के स्थान पर घर का बना ताजा और हेल्दी खाना ही चुनें।
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6. माइंडफुल ईटिंग अपनाएं
Dr. Anju Suryapani के अनुसार, खाना खाते समय माइंडफुल ईटिंग अपनाना फायदेमंद हो सकता है। खाना खाते समय टीवी देखना, मोबाइल चलाना या किसी एंग्जायटी में रहना ओवरईटिंग का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। जब आप बिना ध्यान दिए खाती हैं तो दिमाग को पेट भरने की सिग्नल देर से मिलता है। इसलिए, आप आराम से बैठकर, चबा-चबाकर और खाने का मजा लेते हुए खाएं। भोजन खत्म करने में कम से कम 15 से 20 मिनट का समय लें।
7. पर्याप्त नींद लें
नींद की कमी और तनाव शरीर में कोर्टिसोल और घ्रेलिन जैसे हार्मोन्स को बढ़ा देते हैं, जो भूख को ज्यादा बढ़ाते हैं। रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है। इसलिए, सोने से पहले मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना बंद कर दें। इसके स्थान पर हल्का संगीत, मेडिटेशन या डॉक्टर की सलाह से हल्की वॉक करें।
साल 2013 में International Journal of Eating Disorders में प्रकाशित रिसर्च स्टडी के अनुसार नींद की समस्याओं और बिंज ईटिंग के बीच कनेक्शन है। नींद की कमी और ज्यादा खाने की आदत मिलकर एक हानिकारक हार्मोनल और मेटाबॉलिक चक्र पैदा कर सकती है, जिसका व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
निष्कर्ष
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ना एक नॉर्मल और हेल्दी प्रोसेस है, लेकिन यह वजन सही पोषण से बढ़ना चाहिए, न कि ज्यादा खाने के कारण। प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचकर आप न सिर्फ खुद को प्रेग्नेंसी में होने वाली समस्याओं से बचाती हैं, बल्कि अपने आने वाले बच्चे के लिए भी एक फायदेमंद होता है।
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FAQ
प्रेग्नेंसी में ज्यादा वजन बढ़ने से क्या होता है?
प्रेग्नेंसी में ज्यादा वजन बढ़ने से हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज और सिजेरियन डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर प्रेग्नेंसी में 10 से 16 किलो तक वजन बढ़ना नॉर्मल होता है, लेकिन इससे ज्यादा वजन बढ़ना मां और बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।क्या गर्भवती होने पर ज्यादा खाने से बच्चे को नुकसान हो सकता है?
हां, प्रेग्नेंसी में ज्यादा खाना खाने से बच्चे में मोटापा, समय से पहले डिलीवरी और मैक्रोसोमिया जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
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Jul 26, 2026 11:25 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani