रात 11 बजे के बाद अचानक चॉकलेट, आइसक्रीम, चिप्स, नमकीन या कोई और पसंदीदा चीज खाने का मन होना आम बात है। इसे इमोशनल ईटिंग कहा जाता है, जहां भूख पेट की नहीं, बल्कि मन की होती है। दिनभर की थकान, तनाव, बोरियत या अकेलेपन की वजह से लोग अक्सर देर रात अनचाही और अनहेल्दी चीजें खा लेते हैं। दिल्ली की क्लिनिकल डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा के अनुसार, इमोशनल ईटिंग के कारण मोटापा और अन्य कई बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। कभी-कभार देर रात कुछ खाने का मन होना आम बात है, लेकिन यह समस्या तब बनती है, जब यह रोज की आदत बन जाए और व्यक्ति खाने के बाद अच्छा महसूस न करे। इसलिए, इमोशनल ईटिंग काबू पाने के लिए अपनी भावनाओं और आदतों को समझना बहुत जरूरी है।
रात 11 बजे के बाद इमोशनल ईटिंग से बचने के टिप्स
साल 2012 में Eating Behaviors जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, खराब मूड और भोजन से जुड़े बाहरी संकेत रात के समय खाने की आदत को बढ़ावा देते हैं। हालांकि इस अध्ययन में तनाव को सीधे तौर पर नहीं मापा गया, लेकिन शोध बताते हैं कि तनाव और एंग्जायटी नाइट ईटिंग सिंड्रोम और भावनात्मक खान-पान दोनों के लिए नॉर्मल ट्रिगर हो सकते हैं।
न्यूट्रिशनिस्ट रक्षिता मेहरा का कहना है कि देर रात बार-बार लगने वाली भूख को शांत करने के लिए आप इन बातों का ध्यान रखें-
1. भूख है या भावना का अंतर समझें
रात में खाने की क्रेविंग होते ही खुद से एक सवाल पूछें कि क्या आपको सच में भूख लगी है या यह सिर्फ किसी भावना से बचने के लिए खाना चाहते हैं। शारीरिक भूख आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है और कई तरह के फूड्स खाने का मन होता है। इसके अलावा, इमोशनल क्रेविंग अचानक आती है और अक्सर किसी खास फूड, जैसे मिठाई, पिज्जा या चिप्स खाने की तेज क्रेविंग होती है। इसलिए, कुछ मिनट रुककर अपनी स्थिति को पहचानना आपको बिना कारण देर रात खाने से बचा सकता है।
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2. दिनभर पर्याप्त मात्रा भोजन लें
कई लोग वजन कम करने की कोशिश में दिनभर बहुत कम खाते हैं और रात होते-होते ज्यादा भूख महसूस होने लगती है। इस स्थिति को लोग अक्सर इमोशनल ईटिंग से जोड़ देते हैं, जबकि असल में शरीर को एनर्जी की जरूरत हो सकती है।
नाश्ते, लंच और रात के खाने में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, फाइबर, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट शामिल करें। भोजन के बीच बहुत लंबा गैप रखने से बचें। अगर रात के समय सच में भूख लगती है तो उसे सिर्फ दबाने के बजाय हल्का और संतुलित स्नैक लेना बेहतर हो सकता है। सकता है।
3. इमोशनल ट्रिगर्स की पहचान करें
कुछ लोगों को स्ट्रेस में काम करने के बाद, किसी बहस के बाद या अकेले टीवी देखते समय खाने की क्रेविंग होती है। इसलिए, कुछ दिनों तक देर रात भूख लगने के पैटर्न को नोट करें और ध्यान दें कि आप कब और क्यों रात के समय खाते हैं। अगर हर बार तनाव के बाज मिठाई खाने की क्रेविंग होती है तो अगली बार भोजन के बजाय तनाव कम करने का कोई दूसरा तरीका ढूंढें।
4. कुछ भी खाने से पहले 10 मिनट का ब्रेक लें
खाने की क्रेविंग होने पर तुरंत रसोई या फ्रिज की ओर जाने के बजाय खुद को 10 मिनट दें। इस दौरान पानी पी सकते हैं, धीमी सांसें ले सकते हैं, थोड़ी वॉक कर सकते हैं, अपने फेवरेट गाने सुन सकते हैं या किसी दोस्त से बात कर सकते हैं। 10 मिनट खुद को समय देने का उद्देश्य क्रेविंग को जबरदस्ती खत्म करना नहीं है, बल्कि भावना और प्रतिक्रिया के बीच थोड़ा अंतर समझना है। कई बार क्रेविंग कुछ समय बाद कम हो जाती है।
5. रात का एक शांत रूटीन बनाएं
अगर आपका दिमाग हर रात 11 बजे के बाद खाने को दिन खत्म होने का इनाम मानने लगा है तो उस समय के लिए कोई दूसरा रूटीन बनाएं। इससे दिमाग को आराम पाने के लिए भोजन पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।
6. नींद को प्राथमिकता दें
देर रात तक जागना अपने आप में खाने के क्रेविंग को बढ़ा देता है। इसके अलावा, नींद की कमी भूख और तृप्ति को कंट्रोल करने वाली जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है और हाई-कैलोरी फूड्स की क्रेविंग को बढ़ा सकती है।
इसलिए, रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने की कोशिश करें। सोने से पहले लगातार स्क्रीन देखने, बहुत ज्यादा कैफीन लेने और बिना कारण देर रात तक जागने की आदत कम करना भी फायदेमंद हो सकता है।
7. ट्रिगर फूड्स की मात्रा सीमित रखें
अगर हर रात आपके पसंद की चीजें घर में मौजूद है तो इमोशनल क्रेविंग के समय उसे खाना आसान होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि अपने पसंदीदा भोजन को पूरी तरह खाना बंद कर दें। इसके स्थान पर ज्यादा मात्रा की जगह कम मात्रा में खरीदें या स्नैक को पहले से एक छोटी कटोरी में निकालकर खाएं।
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8. खुद को दोष न दें
इमोशनल ईटिंग के बाद खुद को दोष देने से बचना चाहिए, क्योंकि यह आपकी समस्या को बढ़ा सकती है। खुद को दोष देने से तनाव की समस्या बढ़ती है और दोबारा खाने की क्रेविंग बढ़ सकती है। अगर किसी रात ज्यादा खा लिया तो अगले दिन खाना छोड़कर या ज्यादा एक्सरसाइज करके उसकी भरपाई करने की कोशिश न करें।
डॉक्टर या एक्सपर्ट से कब मिलें?
अगर रात में बार-बार बहुत ज्यादा खाना, खाने पर कंट्रोल न रहना, छिपकर खाना या खाने के बाद लगातार अपराधबोध जैसी समस्या हो रही है तो इसे सिर्फ क्रेविंग न समझें। डायटिशियन, मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है। ओवरईटिंग पर कंट्रोल न कर पाने पर मोटापा और सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।
निष्कर्ष
रात 11 बजे के बाद खाने का मन होना इमोशनल इटिंग नहीं होती है। कभी-कभी शरीर को सचमुच की जरूरत हो सकती है। हालांकि, अगर क्रेविंग मुख्य रूप से तनाव, बोरियत या इमोशनल परेशानी के समय आती है, तो उसके कारण को समझना बहुत जरूरी है। ऐसे में आप दिनभर संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, इमोशनल ट्रिगर्स की पहचान और 10 मिनट का समय दें, ताकि देर रात बिना कारण कुछ भी खाने से कंट्रोल कर सकें।
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FAQ
क्या खाने से मानसिक तनाव दूर होता है?
हां, संतुलित और पौष्टिक आहार लेने से मानसिक तनाव को कम करने और एंग्जायटी से राहत पाने में काफी मदद मिल सकती है।ओवर ईटिंग से कैसे बचे?
ओवर ईटिंग से बचने के लिए आपको खाना खाते समय ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहना चाहिए और फाइबर से भरपूर फूड्स का सेवन कर सकते हैं।
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Aug 16, 2026 12:20 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dt Rakshita Mehra
