PCOS महिलाओं में होने वाला हार्मोनल असंतुलन का एक विकार है। PCOS में अंडाशय (Ovaries) की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है जिसके कारण ओव्यूलेशन प्रक्रिया (ओवरीज से एग रिलीज होने की प्रक्रिया) प्रभावित होती है। इस प्रक्रिया में गड़बड़ी से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और गर्भधारण करने में दिक्कत हो सकती है। जब प्राकृतिक तरीके से ओव्यूलेशन की प्रक्रिया नहीं हो पाती है, तब ओव्यूलेशन इंडक्शन (Ovulation Induction) की मदद ली जाती है।
PCOS में अंडाशय या ओवरी में छोटी-छोटी सिस्ट (Cyst) बन सकती हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में बाधा आ सकती है। प्रेग्नेंसी के लिए ओव्यूलेशन आवश्यक प्रक्रिया है। ओव्यूलेशन (Ovulation) महिलाओं के मासिक चक्र की एक खास प्रक्रिया है जिसमें अंडाशय या ओवरी से एक परिपक्व अंडा निकलता है। ओव्यूलेशन इंडक्शन में दवाओं की मदद से ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को ठीक किया जाता है। PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन से संबंधित जरूरी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने डॉ. स्मृति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, केजीएमयू, यूपी लखनऊ (Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow) से बात की।
PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन का इस्तेमाल कब करते हैं?
- जब PCOS में महिला प्रेग्नेंसी प्लान करना चाहती हो।
- जब प्राकृतिक तरीके से ओव्यूलेशन न हो पा रहा हो।
- आसान भाषा में समझें तो PCOS में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है। इस रुकावट को ठीक करने के लिए ओव्यूलेशन इंडक्शन की मदद ली जाती है।
2006 में Fertility and Sterility नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, PCOS में ओव्यूलेशन न होने के कारण गर्भधारण में समस्या आ सकती है, इसके लिए ओव्यूलेशन इंडक्शन अच्छा इलाज माना जाता है। इसे स्टेप-वाइज अप्रोच माना गया है जिसमें लाइफस्टाइल, दवाएं और एडवांस ट्रीटमेंट से PCOS में गर्भधारण की प्रक्रिया आसान बनाई जा सकती है।
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ओव्यूलेशन इंडक्शन क्या होता है?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि ओव्यूलेशन इंडक्शन एक मेडिकल प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल उन महिलाओं के लिए किया जाता है जिनमें अंडाशय या ओवरीज से एग रिलीज नहीं हो पाता है। यह समस्या PCOS जैसी स्थिति में आम हो जाती है जिससे गर्भधारण करने में मुश्किल हो सकती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य होता है अंडाशय को एग बनाने और छोड़ने के लिए प्रेरित करना।
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ओव्यूलेशन इंडक्शन की प्रक्रिया कैसी होती है?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि-
- पीरियड्स के दूसरे दिन से पांच दिन तक दवाएं दी जाती हैं जिससे एग ग्रोथ और रिलीज की प्रक्रिया आसान हो जाए क्योंकि PCOS में एग ग्रोथ और रिलीज एक चुनौती बन जाती है। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए दवाएं दी जाती हैं।
- इसके बाद एग की ग्रोथ को मॉनिटर करने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है और कुछ मामलों में ब्लड टेस्ट भी किया जा सकता है।
- जब एग की ग्रोथ हो जाती है, तो ओव्यूलेशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं।
- इसके बाद ओव्यूलेशन प्रक्रिया के सुधरते ही उस साइकिल में गर्भधारण की आशंका बढ़ सकती है।
2025 में Biomedicines नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन फर्टिलिटी का मुख्य इलाज माना जाता है। बेहतर परिणाम के लिए दवाओं के सेवन और लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने की सलाह दी जाती है। स्टडी में यह भी बताया गया कि जब ओव्यूलेशन इंडक्शन में दवाएं या इंजेक्शन काम नहीं करते, तब सर्जरी के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
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ओव्यूलेशन इंडक्शन शुरू करने से पहले कौन-सी जांच जरूरी होती है?
ओव्यूलेशन इंडक्शन से पहले-
- अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट हो सकते हैं।
- इसके अलावा हार्मोन टेस्ट जैसे टीएसएच (TSH or Thyroid Stimulating Hormone), एलएच (LH or Luteinizing Hormone) या एफएसएच (FSH or Follicle Stimulating Hormone) जैसी जांच भी हो सकती हैं।
- TSH टेस्ट थायराइड ग्रंथि के काम को जांचने के लिए किया जाता है। इसकी नॉर्मल रेंज 0.4 से 4.0 mIU/L के बीच हो सकती है।
- LH टेस्ट महिलाओं में ओव्यूलेशन और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन से संबंधित होता है। महिलाओं में इसकी नॉर्मल रेंज 5 से 25 और पुरुषों में 1.7 से 8.6 के बीच हो सकती है।
- FSH टेस्ट ओवरीज और स्पर्म बनने की प्रक्रिया को जांचने के लिए किया जाता है। महिलाओं में इसकी नॉर्मल रेंज 4 से 30 और पुरुषों में 1.5 से 12.4 के बीच हो सकती है।
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ओव्यूलेशन इंडक्शन के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि ओव्यूलेशन इंडक्शन के दौरान डॉक्टर कई बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं जैसे-
- वजन को संतुलित रखना।
- हेल्दी डाइट लेना।
- स्ट्रेस मैनेजमेंट।
- डॉक्टर की सलाह के बगैर दवाओं का सेवन न करें।
- ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखें।
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क्या ओव्यूलेशन इंडक्शन दर्दनाक प्रक्रिया है?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि ज्यादातर मामलों में ओव्यूलेशन इंडक्शन की प्रक्रिया पेनलेस ही होती है। इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट जैसी जांच होती हैं और दवाएं दी जाती हैं। इंजेक्शन में हल्का दर्द महसूस हो सकता है।
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ओव्यूलेशन इंडक्शन कितनी बार किया जा सकता है?
यह हर महिला की स्थिति पर निर्भर करता है इसलिए हर महिला में ओव्यूलेशन इंडक्शन की सीमा अलग हो सकती है। इसे कितनी बार करना सुरक्षित है? इस पर डॉक्टर मरीज की कंडीशन देखकर विचार करते हैं। आमतौर पर दो से पांच साइकिल तक इस प्रक्रिया को किया जा सकता है। इसके बाद परिणाम न मिलने पर डॉक्टर इलाज बदल सकते हैं।
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PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन के फायदे
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि-
- PCOS में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को ठीक करने में मदद मिलती है और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।
- PCOS में अनियमित पीरियड्स की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।
- नियमित ओव्यूलेशन होने से मेंस्ट्रुअल साइकिल में सुधार होता है।
- ओव्यूलेशन इंडक्शन की प्रक्रिया को आसान समझा जाता है क्योंकि पहली स्टेज पर दवाओं से इलाज करने का प्रयास होता है और डॉक्टर ऐसा मानते हैं कि पहली स्टेज में ही महिला की समस्या को काफी हद तक दूर करने में मदद मिल सकती है।
- ओव्यूलेशन इंडक्शन की मदद से दो से तीन साइकिल्स में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को सामान्य किया जा सकता है।
2022 में Frontiers In Medicine नामक एक जर्नल में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, PCOSमें ओव्यूलेशन इंडक्शन एक स्टेप-वाइज अप्रोच है यानी पहले लाइफस्टाइल और दवाओं से ओव्यूलेशन में रुकावट का इलाज किया जाता है ताकि गर्भधारण की संभावना बेहतर हो सके। जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन और सर्जरी की मदद बाद में ली जाती है।
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PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन के नुकसान
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि-
- PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन की सफलता दर सौ प्रतिशत नहीं है, इसलिए यह जरूरी नहीं है कि ओव्यूलेशन इंडक्शन के बाद महिला गर्भधारण कर सके।
- इस प्रक्रिया में लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत होती है इसलिए बार-बार जांच से महिला को असुविधा हो सकती है।
- इस प्रक्रिया के दौरान सेल्फ मेडिकेशन हानिकारक हो सकता है इसलिए इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की सलाह के बगैर सेहत से संबंधित कोई कदम नहीं उठाना चाहिए।
- 2025 में Biomedicines नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन के कारण कुछ मामलों में ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम (Ovarian Hyperstimulation Syndrome) का खतरा हो सकता है। यह स्थिति प्रक्रिया में इंजेक्शन के प्रति अंडाशय की ज्यादा प्रतिक्रिया के कारण हो सकती है। ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान ओवरीज में सूजन आ जाती है और शरीर में तरल जमा होने लगता है।
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अगर दवाओं से ओव्यूलेशन न हो तो आगे क्या विकल्प हैं?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि दवाओं से ओव्यूलेशन प्रक्रिया पर असर न होने की स्थिति में डोज बढ़ाई जा सकती है और सर्जरी, ओवेरियन ड्रिलिंग, आईयूआई (IUI) या आईवीएफ की मदद ली जा सकती है।
1. ओवेरियन ड्रिलिंग- Ovarian Drilling
यह एक छोटी सर्जरी होती है जिसमें अंडाशय (Ovaries) में छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं। इससे ओव्यूलेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अक्सर इसे PCOS के मरीजों में किया जाता है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल तब किया जाता है जब दवाओं से असर न हो।
2. आईयूआई- IUI or Intrauterine Insemination
IUI कम जटिल इलाज है जिसे फर्टिलिटी की छोटी समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया की मदद से मेल स्पर्म को महिला के गर्भाशय में डाला जाता है।
3. आईवीएफ- IVF or In Vitro Fertilization
IVF ज्यादा एडवांस और असरदार तरीका माना जाता है। जब अन्य तरीकों से गर्भधारण संभव न हो, तो इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर मिलाकर भ्रूण बनाया जाता है।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- प्रेग्नेंसी की कोशिश के बाद सफलता न मिलने पर डॉक्टर से सलाह लें।
- PCOS में प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें।
- PCOS के लक्षण बढ़ें जैसे वजन तेजी से बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
- अगर PCOS के इलाज में कोई परेशानी हो, तो भी डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।
निष्कर्ष:
Gynaecologist Dr. Smriti Agrawal से हुई बातचीत और स्टडीज के आधार पर हमें पता चलता है कि PCOS में ओव्यूलेशन इंडक्शन उन महिलाओं के लिए एक उपचार माना जाता है जो प्रेग्नेंसी प्लान करना चाहती हैं और जिनकी ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से सही नहीं है। PCOS के कारण ओव्यूलेशन की प्राकृतिक प्रक्रिया में कई बार रुकावट आ जाती है और ओव्यूलेशन इंडक्शन इसी समस्या का इलाज है।
FAQ
PCOS में ओव्यूलेशन क्यों नहीं होता?
PCOS में ओव्यूलेशन होता है, लेकिन उसका चक्र अनियमित हो सकता है। जब ओवरीज में मौजूद एग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता, तो उस स्थिति में ओव्यूलेशन नहीं होता।क्या PCOS में हमेशा ओव्यूलेशन रुक जाता है?
PCOS में हमेशा ओव्यूलेशन रुक जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ महिलाओं में ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है, लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं होता।क्या हर PCOS मरीज को ओव्यूलेशन इंडक्शन की जरूरत होती है?
PCOS में हर महिला में ओव्यूलेशन इंडक्शन की जरूरत नहीं होती। जो महिलाएं प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हों या जिनमें ओव्यूलेशन नहीं हो रहा हो उनके लिए यह प्रक्रिया मददगार साबित हो सकती है।ओव्यूलेशन इंडक्शन का इलाज कितने दिनों तक चलता है?
एक साइकिल लगभग चार से पांच दिन की होती है जिसमें दवा दी जाती है और अगले 15 दिन मॉनिटर किया जाता है। पूरे ट्रीटमेंट में दो से पांच साइकिल तक कोशिश की जा सकती है।क्या ओव्यूलेशन इंडक्शन हर महिला में सफल होता है?
ओव्यूलेशन इंडक्शन हर महिला में सफल हो ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन यह ज्यादातर मामलों में असरदार देखा गया है।
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Apr 11, 2026 15:38 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 11, 2026 15:38 IST
Modified By : Yashaswi MathurApr 11, 2026 15:38 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal