Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या PCOS के साथ दूसरी प्रेग्नेंसी में आती है मुश्किलें? जानें डॉक्टर से

जिन महिलाओं को PCOS की समस्या है और वे पहली प्रेग्नेंसी के बाद दोबारा मां बनने की कोशिश कर रही हैं, तो उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस लेख में डॉक्टर ने दोबारा मां बनने के दौरान होने वाली दिक्कतों के बारे में विस्तार से बताया है।

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PCOS से पीड़ित महिलाओं में ये देखा गया है कि उनकी पहली प्रेग्नेंसी सफल होने के बाद जब वे दोबारा मां बनने की कोशिश करती हैं, तो उन्हें समस्याएं आ सकती हैं। Women's Health में प्रकाशित 2017 की स्टडी के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कई बार महिलाएं प्रेग्नेंट हो जाती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें मिसकैरेज, हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज और समय से पहले डिलीवरी होना शामिल है। अगर महिला पहली बार सफलतापूर्वक प्रेग्नेंसी और डिलीवरी कर भी लेती है, तो उसे कई बार दोबारा मां बनने में दिक्कत आने लगती है। इसका कारण ओव्यूलेशन की कमी, बढ़ती उम्र और मोटापे जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इस बारे में हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनोकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।

PCOS में पहली सफल प्रेग्नेंसी के बाद दूसरी बार दिक्कत होने के कारण

अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (AJOG) में 2025 में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, एक रिसर्च में पाया गया कि जो महिलाएं PCOS से पीड़ित थीं, उनमें इनफर्टिलिटी 51% थी, जबकि नॉर्मल महिलाओं में यह सिर्फ 21% थी। इसके साथ PCOS वाली महिलाओं के बच्चों की संख्या सामान्य महिलाओं के मुकाबले कम पाई गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि PCOS के कारण महिलाओं को दूसरी प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ सकती है। डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "PCOS से पीड़ित महिलाओं को दोबारा मां बनने में दिक्कत आती है, जिसके कई कारण हैं। मां की उम्र, प्रेग्नेंसी के दौरान बीमारियां, पहली डिलीवरी के बाद PCOS से पीड़ित महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होना मुख्य कारण हो सकते हैं।"

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उम्र और अंडों की क्वालिटी में फर्क होना

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, “जब महिलाओं को पहली प्रेग्नेंसी और डिलीवरी हो जाती है, लेकिन अगर दोबारा प्रेग्नेंट होने में समस्या आने लगती है, इसे सेकेंडरी इनफर्टिलिटी कहते हैं। PCOS के मामले में जब महिलाएं पहले बच्चे को जन्म देती हैं, तो उसके बाद दूसरे बच्चे में गैप रखती हैं। PCOS में एंड्रोजन हार्मोन के कारण ओव्यूलेशन में दिक्कत होने लगती है। अगर PCOS से पीड़ित महिला 35 साल के बाद दोबारा प्रेग्नेंसी के बारे में सोचती है, तो उम्र बढ़ने के साथ उसके अंडों की क्वालिटी में भी कमी आ जाती है और अंडे भी कम बनने लगते हैं। ऐसे में दोबारा प्रेग्नेंट होना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।"

पहली डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, “जब भी महिला की पहली डिलीवरी होती है, तो ब्रेस्टफीडिंग कराने और पीरियड्स के साइकिल में बदलाव आ जाता है। इससे महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। अगर महिला को PCOS की समस्या होती है, तो पहली डिलीवरी के बाद पीरियड्स का चक्र पूरी तरह से बदल जाता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं, जो PCOS पीड़ित महिलाओं की कंडीशन को और भी ज्यादा गंभीर बना सकते हैं। PCOS की समस्या से जूझ रही महिलाओं में सेक्स हार्मोन-बाइंडिंग ग्लोब्युलिन (SHBG) का स्तर कम हो जाता है और  टेस्टोस्टेरॉन बढ़ जाता है। बढ़े हुए टेस्टोस्टेरॉन ओवरी के काम को प्रभावित करने लगते हैं। इससे महिलाओं को कई बार दोबारा मां बनने में दिक्कत होने लगती है।”

इंसुलिन रेजिस्टेंस और मोटापा

डॉ. शोभा कहती हैं, “पहली प्रेग्नेंसी के बाद कई मामलों में महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हो जाती हैं। अगर महिला को पहले से ही PCOS की समस्या है, तो हार्मोनल असंतुलन के कारण शरीर में सूजन बढ़ने लगती है और मोटापे की समस्या बढ़ने लगती है। ऐसे में मोटापा और ओव्यूलेशन सही तरीके से न हो पाना दोबारा मां बनने में बाधा बन सकते हैं। इसके अलावा, PCOS से जूझ रही महिलाओं को मोटापे के चलते इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत होने लगती है। इससे शरीर में एंड्रोजन हार्मोन बनने लगता है, जो अंडों की ग्रोथ होने से रोकता है। इसलिए PCOS से पीड़ित महिलाओं को सेकेंडरी इनफर्टिलिटी का रिस्क ज्यादा रहता है।”

नींद की कमी

डॉ. शोभा कहती हैं कि डिलीवरी के बाद महिलाएं अपने शिशु की देखभाल में इतनी ज्यादा बिजी हो जाती हैं कि वे अपनी नींद भी पूरी नहीं कर पातीं। अगर महिला को PCOS की समस्या है, तो नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस काफी ज्यादा बिगड़ सकता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और महिला की मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ता है। स्ट्रेस और हार्मोनल बदलाव PCOS के लक्षणों को और भी ज्यादा गंभीर कर सकते हैं।

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दोबारा प्रेग्नेंसी के लिए प्री-कन्सेप्शन टेस्टिंग की जरूरत

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "PCOS से पीड़ित महिलाओं को दोबारा प्रेग्नेंसी से पहले प्री-कन्सेप्शन टेस्टिंग (Preconception Testing) कराना महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, पहली प्रेग्नेंसी के बाद महिला के शरीर में मेटाबॉलिक और हार्मोनल बदलाव आ सकते हैं, जिससे दोबारा प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ सकती है। इसलिए जब महिलाएं प्रेग्नेंट होने की कोशिश करती हैं, उन्हें 3 से 6 महीने पहले कुछ टेस्ट कराना जरूरी होता है। इसमें ब्लड टेस्ट (CBC), ब्लड शुगर, थायराइड टेस्ट, HIV, सिफलिस समेत कई अन्य जरूरी टेस्ट कराने महत्वपूर्ण होते हैं।"

IUI या IVF - क्या है बेहतर?

डॉ. सुधा गुप्ता कहती हैं, "आमतौर पर IVF से पहले तीन साइकिल IUI कराने की सलाह देते हैं, लेकिन किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले डॉक्टर, मरीज की कंडीशन और मेडिकल रिपोर्ट को देखते हैं। अगर पार्टनर के स्पर्म काउंट बहुत कम होते हैं, तो डॉक्टर IVF की सलाह देते हैं। इसके अलावा, अगर महिला की उम्र 38 साल से ज्यादा हो जाती है, तो अंडों की क्वालिटी और संख्या तेजी से कम होने लगती है, ऐसे में IVF बेहतर विकल्प माना जा सकता है क्योंकि इसमें सफलता की दर ज्यादा होती है। IUI और IVF की सलाह मरीज की कंडीशन को देखकर दी जाती है।"

दूसरी प्रेग्नेंसी को कैसे बेहतर किया जा सकता है?

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, “हालांकि PCOS में दोबारा मां बनने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन यह असंभव नहीं है। अगर PCOS से पीड़ित महिलाएं 35 साल से ज्यादा उम्र की हैं, तो दोबारा प्रेग्नेंट होना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन वजन कम करके और लक्षणों को मैनेज करने से प्रेग्नेंसी की संभावना को बढ़ाया जा सकता है। महिला को डॉक्टर से रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए और डॉक्टर ने जो दवाएं लेने की सलाह दी है, उसे सही मात्रा में लेना जरूरी है। अगर महिलाएं कुछ खास बातों का ध्यान रखें, तो PCOS के बाद भी दोबारा प्रेग्नेंट हो सकती हैं।”

  1. PCOS की महिलाओं को Oral Glucose Tolerance Test (OGTT) कराने की सलाह दी जा सकती है। इसमें चेक किया जाता है कि शुगर किस तरह प्रोसेस होता है। यह खासतौर पर डायबिटीज, प्री-डायबिटीज और जेस्टेशनल डायबिटीज को डायग्नोज करने के लिए किया जाता है।
  2. पहली प्रेग्नेंसी के बाद महिलाएं अगर अपना वजन कम कर लें, तो ओव्यूलेशन बेहतर हो सकता है।
  3. कमर के आसपास के फैट को कम करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम हो सकता है।
  4. पीरियड्स की साइकिल का ध्यान रखें। अगर पीरियड्स में दिक्कत होती है, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
  5. रोजाना कम-से-कम 30 मिनट तक तेज वॉक करें। इससे हार्मोन बैलेंस्ड रहते हैं।
  6. लो-जीआई डाइट जरूर लें। इसमें साबुत अनाज, ब्राउन राइस, मल्टीग्रेन रोटी और ओट्स काफी फायदेमंद हो सकते हैं।
  7. चीनी और मैदे से बनी चीजों से परहेज करें।
  8. डॉक्टर की सलाह लेकर मल्टीविटामिन या फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स ले सकती हैं।

 pcos second pregnancy by dr sudha

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दोबारा मां बनने का सफल मामला

साल 2024 में प्रकाशित Cureus स्टडी के अनुसार, एक 33 साल की भारतीय महिला को PCOS के कारण सेकेंडरी इनफर्टिलिटी की समस्या थी। इस महिला को रेगुलर पीरियड्स नहीं हो रहे थे, चेहरे पर बहुत ज्यादा बाल आने लगे थे और करीब 6 साल से प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही थी। डॉक्टर ने PCOS के लक्षणों को देखते हुए टेस्ट कराए, तो पता चला कि उनके अंडाशय में छोटे फॉलिकल्स पाए गए। उनके हार्मोनल लेवल भी बहुत बढ़े हुए थे। टेस्ट में पाया गया कि AMH (Anti-Mullerian Hormone) 8.86 ng/mL था, जो बहुत ज्यादा था। इस मामले में डॉक्टर ने लॉन्ग एगोनिस्ट प्रोटोकॉल' (Long Agonist Protocol) को चुना। इस प्रोटोकॉल में महिला के अंडे निकालकर भ्रूण तैयार किए। इसमें एंडोमेट्रियम को मोटा करने के लिए Platelet Rich Plasma (PRP) थेरेपी दी गई। डॉक्टर्स ने OHSS (Ovarian Hyperstimulation Syndrome) से बचाव के लिए कैबर्जोलिन और कैल्शियम ग्लूकोनेट दिए थे। भ्रूण को फ्रोजन-थॉ के जरिए ट्रांसफर किया, जिस वजह से यह सफल इम्प्लांटेशन हुआ। इस तरह महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर पीरियड्स रेगुलर न हों, नेचुरल तरीके से प्रेग्नेंट होने की कोशिश करते हुए सालभर से ज्यादा हो गया हो, मोटापा तेजी से बढ़ रहा हो या मेंटल स्ट्रेस बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। डॉक्टर प्रेग्नेंसी के दूसरे तरीके जैसे IVF की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष

PCOS की समस्या से परेशान महिलाओं को प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ सकती है, लेकिन अगर पहली डिलीवरी सफलतापूर्वक हो गई है, तो दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए महिलाओं को अपने शरीर के मेटाबॉलिज्म को फिर से सही करने की जरूरत होती है। दूसरी प्रेग्नेंसी से पहले महिलाओं को अपने वजन को कम करने की जरूरत होती है, नींद पूरी करना जरूरी है और साथ ही बैलेंस्ड डाइट के साथ लाइफस्टाइल में भी बदलाव करना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर PCOS के कारण सेकेंडरी इनफर्टिलिटी की समस्या हो, तो महिलाओं को डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

FAQ

  • पीसीओएस होने पर गर्भावस्था की संभावना क्या है?

    PCOS में प्रेग्नेंसी संभव है, लेकिन इसके लिए महिला को अपने पीरियड्स के साइकिल पर ध्यान देने की जरूरत है। PCOS में सही तरीके से ओव्यूलेशन होने पर प्रेग्नेंसी हो सकती है। अगर पीरियड्स में दिक्कत हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
  • क्या पीसीओएस के साथ गर्भवती होना उच्च जोखिम माना जाता है?

    WHO के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम दुनिया भर में रिप्रोडक्टिव उम्र की 10 से 13% महिलाओं को प्रभावित करता है। इससे मिसकैरेज, प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर, समय से पहले डिलीवरी और शिशु का कम वजन होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
  • पीसीओएस के साथ गर्भवती होने पर कैसे पता चलेगा?

    PCOS में पीरियड्स रेगुलर नहीं होते, लेकिन अगर पीरियड नहीं हो रहे, तो वह मतली, ब्रेस्ट में सॉफ्टनेस और थकान जैसे सामान्य लक्षणों को देखकर प्रेग्नेंसी की पहचान कर सकती हैं।
  • क्या दूसरी प्रेग्नेंसी में जोखिम अधिक होता है?

    PCOS वाली महिलाओं को दूसरी प्रेग्नेंसी में जेस्टेशनल डायबिटीज और हाई बीपी का रिस्क हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी से पहले शुगर और बीपी को कंट्रोल करना जरूरी है।
  • क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान प्रेग्नेंसी होना मुश्किल है?

    ब्रेस्टफीडिंग के दौरान प्रोलैक्टिन हार्मोन का लेवल बहुत ज्यादा होता है, जो ओव्यूलेशन को रोकता है। अगर किसी महिला को पहले से PCOS की समस्या है, तो उसके लिए प्रेग्नेंट होना मुश्किल हो सकता है। इसलिए PCOS से पीड़ित महिलाओं को दोबारा प्लान करने से पहले डॉक्टर के साथ ओव्यूलेशन ट्रैकिंग के बारे में बात करनी चाहिए।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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