Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Gunjan Sarin , Obstetrics and Gynaecology

PCOS के लिए हार्मोन थेरेपी क्या है? जानें ये क्यों जरूरी होती है?

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को कंट्रोल करने के लिए PCOS हार्मोन थेरेपी की जाती है, जिसमें बर्थ कंट्रोल पिल्स, प्रोजेस्टिन थेरेपी आदि शामिल है। यह थेरेपी PCOS में महिला की उम्र, लक्षण और बेबी प्लानिंग के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में होने वाली एक हार्मोनल समस्या है, जो 15 से 45 साल की उम्र की महिलाओं को प्रभावित करती है। PCOS से पीड़ित महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, एक्ने, वजन बढ़ना, शरीर पर ज्यादा बाल या कभी-कभी कंसीव करने में मुश्किल होना जैसी समस्याएं शामिल हैं। इस स्थिति का कोई स्थायी इलाज नहीं होता है, लेकिन इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। PCOS को मैनेज करने के लिए मेडिकल में कई तरह की हार्मोन थेरेपी होती हैं, जो इसके लक्षणों को संतुलित करने में मदद करती हैं। इसलिए, आइए इस लेख में हम दिल्ली के आनंद निकेतन में स्थित गायनिका: एवरी वुमन मैटर क्लीनिक की सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन से जानते हैं कि PCOS के लिए हार्मोन थेरेपी क्या हैं?

PCOS में हार्मोन थेरेपी के प्रकार

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन ने कहा कि, PCOS के लिए हार्मोन थेरेपी कई तरह की होती है, जो मरीज की उम्र, लक्षण और कंसीव करने की प्लानिंग के हिसाब से ही दी जाती है।

1. बर्थ कंट्रोल पिल्स

PCOS में बर्थ कंट्रोल पिल्स देना सबसे कॉमन हार्मोन थेरेपी है, खासकर उन महिलाओं में जो प्रेग्नेंसी नहीं चाहती हैं। इन दवाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन हार्मोन होते हैं, जो पीरियड को रेगुलर करने और एंड्रोजन के लेवल को कम करते हैं। PCOS में इसे लेने से पीरियड्स नियमित होते हैं, एक्ने और अनचाहे बालों की समस्या कम होती है।

PCOS में हार्मोन थेरेपी के रूप में बर्थ कंट्रोल पिल्स उन महिलाओं के लिए फायदेमंद माना जाता है, जिन्हें अनियमित पीरियड, चेहरे पर अनचाहे बाल या बहुत ज्यादा एक्ने की समस्या होती हैं। इन दवाओं के सेवन से शरीर में एंड्रोजन के लेवल को कम करके उसे संतुलित बनाने में मदद मिलती है। World Health Organization के अनुसार, कुछ महलिाओं को इन पिल्स को लेने के बाद ब्लीडिंग में बदलाव, सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, मूड में बदलाव आदि समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में ये गोलियां उन महिलाओं को लेने से बचना चाहिए, जिन्हें ये समस्याएं होती हैं, जो प्रेग्नेंट होना चाहती हैं या जिन्हें माइग्रेन है।

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2. प्रोजेस्टिन थेरेपी

प्रोजेस्टिन थेरेपी उन महिलाओं को दी जाती है, जिनके पीरियड्स अनियमित होते हैं। Cleveland Clinic के अनुसार, प्रोजेस्टिन का इस्तेमाल हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी में किया जाता है, जो PCOS के लक्षणों को मैनेज करने में मदद करता है। PCOS में अनियमित पीरियड्स या अन्य समस्याओं को कम करने के लिए प्रोजेस्टिन थेरेपी की जरूरत पड़ती है जो पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों का इलाज करने में मदद करती हैं। इस थेरेपी में महिला को हर 1-2 महीने में प्रोजेस्टिन दिया जाता है, जिससे गर्भाशय की लाइनिंग सुरक्षित रहती है।

American College of Obstetricians And Gynecologists के अनुसार, "अगर आपको कुछ खास तरह की मेडिकल समस्याएं जैसे ल्यूपस है तो प्रोजेस्टिन-ओनली पिल्स आपके लिए एक अच्छा विकल्प नहीं हो सकती हैं। इसके साथ ही, अगर आपको ब्रेस्ट कैंसर है या पहले कभी ब्रेस्ट कैंसर रहा है, तो भी प्रोजेस्टिन-ओनली पिल्स लेने से बचें।"

3. एंटी-एंड्रोजन दवाएं

एंटी एंड्रोजन दवाएं शरीर में पुरुष हार्मोन के प्रभाव को कम करती हैं, जिससे चेहरे और शरीर के अनचाहे बाल कम होते हैं और बालों का झड़ना भी कम हो सकता है। eClinical Medicine 2023 में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, "एंटी-एंड्रोजन दवाएं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के हाइपरएंड्रोजेनिज्म से जुड़े लक्षणों को कम कर सकती हैं।"

2023 में eClinical Medicine में प्रकाशित सिस्टमैटिक रिव्यू के अनुसार, "अगर एंटी-एंड्रोजन दवाओं की खुराक ज्यादा मात्रा में ली जाए तो इससे ब्रेन ट्यूमर या नसों में खून जमने का जोखिम हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि जो लोग सेक्सुअली एक्टिव हैं, उन्हें इन दवाओं के साथ गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर इन दवाओं के सेवन के दौरान अनजाने में आप प्रेग्नेंट हो जाएं तो भ्रूण के शारीरिक विकास में समस्या आ सकती है।"

4. इंसुलिन सेंसिटाइजर

PCOS में अक्सर इंसुलिन रेसिस्टेंस होता है। ऐसे में इंसुलिन सेंसिटाइजर दवा इंसुलिन के लेवल को कंट्रोल करती है, वजन कम करने में मदद कर सकती है और ओवुलेशन में सुधार कर सकती है। 2017 में PPAR Research में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, “इंसुलिन सेंसिटाइजर न सिर्फ अग्न्याशय (pancreas) बल्कि शरीर के अन्य टिशू पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे बीमारी को पलटने और इसकी समस्याओं को रोकने में मदद मिल सकती है। इसकी मदद से इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर में पानी भरना, वजन बढ़ना, सूजन और हार्ट फेलियर के जोखिम को कम किया जा सकता।”

डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन के अनुसार, इंसुलिन सेंसिटाइजर थेरेपी के कारण हड्डियों के कमजोर होने, दिल की बीमारी, हार्ट फैलियर, लिवर और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

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हार्मोन थेरेपी क्यों जरूरी है?

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन का कहना है कि, PCOS से पीड़ित महिलाओं में हार्मोन थेरेपी इन कारणों से जरूरी हो सकती है-

  • PCOS में एंड्रोजन बढ़ जाता है और एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में ये थेरेपी महिलाओं के शरीर में हार्मोन संतुलन में सुधार करती है।
  • अनियमित पीरियड्स से गर्भाशय की परत मोटी हो सकती है, जिससे आगे चलकर कई गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं। हार्मोन थेरेपी से पीरियड्स को नियमित किया जा सकता है।
  • हार्मोन थेरेपी करवाने से PCOS के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है, जिससे एक्ने, अनचाहे बाल और हेयरफॉल को कम किया जा सकता है।
  • इस थेरेपी को करवाने से PCOS महिलाओं में ओव्यूलेशन को सही रखने में मदद मिलती है और कंसीव करना आसान हो जाता है।
  • हार्मोन थेरेपी से PCOS के बड़े जोखिम जैसे टाइप 2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, एंडोमेट्रियल कैंसर आदि को कम करने में मदद मिलती है।

हार्मोन थेरेपी के साइड इफेक्ट्स

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. (कर्नल) गुंजन मल्होत्रा सरीन ने बताया कि, “हर ट्रीटमेंट की तरह हार्मोन थेरेपी के भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जो हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं।” हालांकि, ये सभी में नहीं होते हैं-

  • मतली
  • सिर में दर्द
  • वजन बढ़ना या कम होना
  • मूड स्विंग्स
  • ब्रेस्ट में दर्द
  • ब्लड क्लॉट का जोखिम
  • लिवर से जुड़ी समस्याएं

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हार्मोन थेरेपी के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

  • डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी तरह की दवा या ट्रीटमेंट से बचें।
  • PCOS से जुड़ी नियमित जांच करवाते रहें।
  • अगर आप स्मोकिंग करती हैं तो डॉक्टर को बताएं और इसे छोड़ने की कोशिश करें।
  • प्रेग्नेंसी प्लानिंग कर रहे हैं तो डॉक्टर को बताकर अपनी दवाओं में बदलाव करें।
  • शरीर में किसी भी तरह के असामान्य लक्षण नजर आने पर उन्हें नजरअंदाज न करें।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर आपको शरीर में PCOS के लक्षण दिखाई देते हैं या आप पहले से इसका इलाज करा रही हैं और उसके साथ आपको लंबे समय तक अनियमित पीरियड या पीरियड्स न आना, ज्यादा बाल झड़ने, एक्ने की समस्या, कंसीव करने में मुश्किल होना, अचानक वजन बढ़ना या किसी दवा का साइड इफेक्ट होता है तो बिना देर किए आपको डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।

निष्कर्ष

PCOS एक गंभीर, लेकिन कंट्रोल की जा सकने वाली स्थिति होती है। ऐसे में आप PCOS के लक्षणों को कंट्रोल करने और हेल्दी रहने के लिए इन हार्मोन थेरेपी को डॉक्टर की सलाह पर करवा सकते हैं। इन थेरेपी और दवाओं की मदद से शरीर के हार्मोनल असंतुलन को संतुलित करने में मदद मिलती है, जिससे PCOS के हल्के से लेकर गंभीर लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है। ध्यान रहे, इन थेरेपी के अलावा हेल्दी डाइट, लाइफस्टाइल और शारीरिक गतिविधियां भी आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

Image Credit: Freepik 

FAQ

  • पीसीओएस के लिए सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

    PCOS के लिए कोई एक सबसे अच्छी दवा नहीं है, बल्कि इलाज इसके लक्षणों पर निर्भर करता है। ओव्यूलेशन के लिए कई तरह की थेरेपी अपनाई जा सकती है या डॉक्टर की सलाह पर दवा ली जा सकती है।
  • PCOS दर्द कहां स्थित है?

    PCOS का दर्द आमतौर पर पेट के निचले हिस्से में महसूस होता है। यह दर्द आमतौर पर पीरियड के दौरान, अंडाशय में सिस्ट के कारण या सूजन की वजह से होता है।
  • पीसीओएस में कौन सा हार्मोन असंतुलन होता है?

    PCOS मुख्य रूप से एंड्रोजन के लेवल के बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और LH व FSH के असंतुलन के कारण होता है। इसमें अंडाशय नॉर्मल से ज्यादा पुरुष हार्मोन पैदा करते हैं। प्रोजेस्टेरोन कम हो जाता है, जबकि एस्ट्रोजन का स्तर कभी-कभी नॉर्मल से ज्यादा हो सकता है, जो ओव्यूलेशन को रोकता है।
  • क्या पीसीओएस का इलाज संभव है?

    हां, PCOS का इलाज और इसे मैनेज करना संभव है। हालांकि, यह कोई ऐसी बीमारी नहीं है, जो एक बार में पूरी तरह ठीक हो जाए। सही लाइफस्टाइल, संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज की मदद से इसे मैनेज किया जा सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 08, 2026 16:47 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
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