Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

PCOS में हल्‍की ब्‍लीड‍िंग के क्या कारण हो सकते हैं?

PCOS के दौरान कई मह‍िलाओं को स्‍पॉट‍िंग की समस्‍या होती है। इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन और अनि‍यम‍ित ओव्‍यूलेशन जैसे कारण हो सकते हैं। इस लेख में जानेंगे PCOS में स्‍पॉट‍िंग के कारण और इलाज के बारे में।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) मह‍िलाओं में होने वाली एक हार्मोनल समस्‍या है। यह समस्‍या प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभाव‍ित करती है। PCOS होने पर पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ मह‍िलाओं को स्‍पॉट‍िंग (हल्‍की ब्‍लीड‍िंग) की समस्‍या भी होती है। ओव्‍यूलेशन सही समय पर न होने के कारण यह लक्षण नजर आ सकता है। कई मह‍िलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं, लेक‍िन इस स्‍थ‍िति‍ में डॉक्‍टर से सही समय पर संपर्क करना चाह‍िए।

2022 में American Journal Of Obstetrics And Gynecology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, PCOS वाली मह‍िलाओं में असामान्‍य ब्‍लीड‍िंग और स्‍पॉट‍िंग का जोख‍िम ज्‍यादा होता है। स्‍टडी के मुताबि‍क, PCOS के अलावा, सर्वाइकल डिसप्लेसिया (गर्भाशय ग्रीवा में असामान्य बदलाव), मोटापा, फाइब्राॅइड (एक प्रकार की गांठ), थायराइड जैसी समस्‍याओं में भी स्‍पॉट‍िंग का जोख‍िम रहता है। कई बार स्‍पॉट‍िंग के कोई गंभीर संकेत नजर नहीं आते हैं, लेकि‍न अगर यह समस्‍या बार-बार हो या लंबे समय तक हो, तो जांच कराएं। इस लेख में PCOS में स्‍पॉट‍िंग के कारण और इलाज से संबंध‍ित सवालों के जवाब जानने के ल‍िए हमने डॉ. स्मृति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, केजीएमयू, यूपी लखनऊ (Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow) से बात की।

PCOS में स्‍पॉट‍िंग के लक्षण क्‍या हैं?

  • Dr. Smriti Agrawal के मुताब‍िक, PCOS में स्‍पॉट‍िंग होने पर हल्‍की ब्‍लीड‍िंग होती है जो अक्‍सर कुछ बूंद या हल्‍के दाग के रूप में नजर आ सकती है।
  • दो पीर‍ियड्स के बीच भी ब्‍लीड‍िंग हो सकती है जो हल्‍की या हैवी हो सकती है।
  • भूरे या हल्‍के गुलाबी रंग का ड‍िस्‍चार्ज नजर आ सकता है।

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पीर‍ियड्स और स्‍पॉट‍िंग के लक्षणों में अंतर

  पीर‍ियड्स स्‍पॉट‍िंग
ब्‍लीड‍िंग  ज्‍यादा फ्लो  कम फ्लो
रंग  गहरा लाल  हल्‍का लाल, हल्‍का गुलाबी या भूरा
अवध‍ि  3 से 7 द‍िन  कुछ घंटे या 1 से 2 द‍िन
समय  28 से 35 द‍िन  अन‍ियम‍ित, कभी भी
पैड  पैड की जरूरत होती है  पैड की जरूरत हो यह जरूरी नहीं है
दर्द  पेट दर्द या क्रैंप्‍स  आमतौर पर दर्द नहीं होता

Dr. Smriti Agrawal की मानें, तो पीर‍ियड्स में ब्‍लीड‍िंग ज्‍यादा होती है, दाग से बचने के ल‍िए सैन‍िटरी पैड की जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा पीर‍ियड्स में ब्‍लोट‍िंग, चेस्‍ट में भारीपन, क्रैंप्‍स, थकान, मूड स्‍विंग्‍स जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर स्‍पॉट‍िंग, पीर‍ियड्स से हल्‍की ब्‍लीड‍िंग होती है। कभी-कभी स्‍पॉट‍िंग में पैड की जरूरत भी नहीं पड़ती है। स्‍पॉट‍िंग में असामान्‍य पीर‍ियड्स, दो पीर‍ियड्स के बीच हल्‍की या हैवी ब्‍लीड‍िंग, यूर‍िनेशन के दौरान जलन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

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PCOS में स्पॉटिंग के कारण क्‍या हैं?

PCOS-and-spotting

PCOS में कई मह‍िलाओं को स्‍पॉट‍िंग (हल्‍की या बीच-बीच में होने वाली ब्‍लीड‍िंग) होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में हार्मोनल असंतुलन के कारण स्‍पॉट‍िंग या बीच-बीच में हल्‍की ब्‍लीड‍िंग होती है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के असंतुल‍न के कारण ऐसा हो सकता है।

  • PCOS में अक्‍सर ओव्‍यूलेशन न‍ियम‍ित समय पर नहीं होता। इस वजह से पीर‍ियड्स के बीच में स्‍पॉट‍िंग की संभावना बढ़ सकती है। 2023 में Diagnostics Journal में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, PCOS में हार्मोनल और मेटाबॉल‍िक बदलाव के कारण मास‍िक धर्म से संबंध‍ित समस्‍याएं जैसे अन‍ियम‍ित ब्‍लीड‍िंग या स्‍पॉट‍िंग हो सकती है।
  • PCOS के ट्रीटमेंट के तौर पर गर्भन‍िरोधक पि‍ल्‍स लेने के कारण भी कुछ मामलों में शुरुआत में स्‍पॉट‍िंग हो सकती है।
  • इंफेक्‍शन या गर्भाशय से जुड़ी समस्‍या में भी स्‍पाॅट‍िंग हो सकती है इसल‍िए लक्षण नजर आने पर डॉक्‍टर की सलाह लेना न भूलें।
  • 2019 में Ginekologia Polska नामक मेड‍िकल जर्नल में प्रकाश‍ित स्‍टडी के मुताब‍िक, असामान्‍य ब्‍लीड‍िंग वाली कि‍शोर‍ियों में PCOS और इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस ज्‍यादा पाया गया। Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस के कारण भी कुछ मह‍िलाओं में इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस की समस्‍या हो सकती है, हालांक‍ि इस पर फ‍िलहाल सीम‍ित शोध मौजूद हैं।

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युवत‍ियों और क‍िशोरि‍यों में भी स्‍पॉट‍ि‍ंग हो सकती है

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि स्‍पॉट‍िंग मह‍िलाओं के साथ-साथ युवत‍ियों और क‍िशोरि‍यों में भी नजर आ सकती है। 2017 में Journal of Pediatric and Adolescent Gynecology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, किशोरियों में असामान्‍य ब्‍लीड‍िंग का एक कारण PCOS भी हो सकता है। ऐसे में अगर स्‍पॉट‍िंग बार-बार हो या बहुत ज्‍यादा हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्‍टर से सलाह लेना न भूलें।

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स्‍पॉट‍िंग क‍ितने द‍िन तक चलती है?

कुछ मामलों में स्‍पॉट‍िंग एक से दो द‍िन तक रहती है वहीं कुछ मह‍िलाओं में तीन से चार द‍िन या कुछ महीनों तक भी यह समस्‍या बनी रह सकती है। स्‍पॉट‍िंग के लक्षण नजर आने पर तुरंत च‍िक‍ित्‍सक की मदद लें।

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PCOS में स्पॉटिंग का इलाज क्‍या है?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में स्‍पाॅट‍िंग या हल्‍की ब्‍लीड‍िंग होने पर सबसे पहले डॉक्‍टर से संपर्क करें। अगर स्‍पॉट‍िंग हार्मोनल असंतुलन के कारण हो रही है, तो डॉक्‍टर हार्मोनल दवाएं या गर्भन‍िरोधक दवाएं दे सकते हैं। वहीं स्‍पॉट‍िंग जैसे लक्षण को दूर करने के ल‍िए डॉक्‍टर वजन कंट्रोल, हेल्‍दी डाइट और न‍ियम‍ित एक्‍सरसाइज करने की सलाह देते हैं। इस तरह हार्मोन्‍स को कंट्रोल करने में मदद म‍िल सकती है। अगर ब्‍लीड‍िंग बार-बार होती है, तो डॉक्‍टर कुछ मामलों में आयरन सप्‍लीमेंट लेने की सलाह भी देते हैं ताक‍ि शरीर में खून की कमी और कमजोरी न हो।

2024 में Journal Of Clinical Medicine में प्रकाश‍ित एक क्रॉस सेक्‍शनल स्‍टडी के मुताबि‍क, स्‍पॉट‍िंग के इलाज के ल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर हार्मोनल थेरेपी और गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन क‍िया जाता है। स्‍टडी के मुताब‍िक, इन उपायों को इलाज में प्रभाव‍ी देखा गया है।

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PCOS में स्‍पॉट‍िंग से कैसे बचें?

  • PCOS के बाद स्‍पॉट‍िंग या हल्‍की ब्‍लीड‍िंग से बचने के ल‍िए ध्‍यान दें क‍ि पीर‍ियड्स समय से पहले या देर से आ रहे हैं या नहीं।
  • सुनिश्चित करें क‍ि यह समस्‍या गर्भावस्‍था से संबंध‍ित तो नहीं है।
  • पीर‍ियड्स को लगातार ट्रैक करें और फ‍िर डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • मास‍िक धर्म से संबंध‍ित अन्‍य समस्‍या जैसे हैवी ब्‍लीड‍िंग या तेज दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्‍टर से म‍िलें।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर स्‍पॉट‍िंग बार-बार हो रही हो
  • बहुत ज्‍यादा या लंबे समय तक ब्‍लीड‍िंग हो
  • पेट में दर्द या कमजोरी महसूस हो

ऐसी स्‍थ‍ित‍ि में डॉक्‍टर से जांच जरूर कराएं ताक‍ि सही समय पर कारण का पता लगाकर इलाज किया जा सके।

न‍िष्‍कर्ष:

Gynaecologist Dr. Smriti Agrawal और स्‍टडीज के आधार पर पता चलता है क‍ि PCOS में स्‍पॉट‍िंग आमतौर पर हार्मोनल असंतुलन और अन‍ियम‍ित ओव्‍यूलेशन के कारण होती है। हार्मोन्‍स के संतुलन, पीर‍ियड्स को न‍ियम‍ित करने, जीवनशैली में बदलाव करके स्‍पॉट‍िंग की समस्‍या को कंट्रोल क‍िया जा सकता है। अगर बार-बार स्‍पॉट‍िंग हो, तो डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें।

FAQ

  • स्‍पॉट‍िंग क्‍या होता है?

    स्‍पॉट‍िंग का मतलब है पीर‍ियड्स के बीच में हल्‍की ब्‍लीड‍िंग या ब्‍लड के दाग नजर आना। स्‍पॉट‍िंग का रंग हल्‍का गुलाबी, लाल या भूरा हो सकता है। हार्मोनल बदलाव, ओव्‍यूलेशन, गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां, स्‍ट्रेस के कारण स्‍पॉट‍िंग हो सकती है।
  • PCOS में स्‍पॉट‍िंग होना सामान्‍य है?

    PCOS में हर मह‍िला को स्‍पॉट‍िंग या हल्‍की ब्‍लीड‍िंग हो ऐसा जरूरी नहीं है। PCOS में कई मह‍िलाओं को पीर‍ियड्स के बीच हल्‍की ब्‍लीड‍िंग या स्‍पॉट‍िंग हो सकती है, लेक‍िन अगर यह समस्‍या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें।
  • स्पॉटिंग को कब गंभीरता से लेने की जरूरत है?

    अगर स्‍पॉट‍िंग कई द‍िनों तक हो या बार-बार हो और स्‍पॉट‍िंग के साथ तेज दर्द हो या कमजोरी एवं चक्‍कर जैसे लक्षण नजर आएं, तो यह क‍िसी अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या का संकेत हो सकता है।
  • क्‍या PCOS में स्‍पॉट‍िंग के पीछे कोई गंभीर समस्‍या हो सकती है?

    PCOS में स्‍पॉट‍िंग के पीछे कुछ मामलों में गंभीर कारण हो सकते हैं जैसे गर्भाशय की परत का ज्‍यादा मोटा होना, इंफेक्‍शन या थायराइड। अगर स्‍पॉट‍िंग के साथ ज्‍यादा ब्‍लीड‍िंग हो या दर्द हो, तो डॉक्‍टर से सलाह लें।

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 10, 2026 12:27 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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