20 से 30 साल की उम्र में हार्मोन्स में बदलाव होता है। इस दौरान प्रजनन स्वास्थ्य और जीवनशैली में भी बदलाव आता है। इस दौरान हल्का तनाव या सेहत में छोटा बदलाव भी पीरियड साइकिल को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, एक या दो बार पीरियड मिस होना सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर बार-बार पीरियड्स मिस हो रहे हैं, तो इस पर गौर करना जरूरी है। यह समस्या आगे चलकर इंफर्टिलिटी में बदल सकती है। आगे जानते हैं अनियमित पीरियड्स होने पर डॉक्टर को कब दिखाएं और यह कब चिंता की बात हो सकती है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।
पीरियड साइकिल को कंट्रोल करते हैं ये दो हार्मोन्स
National Health Service, UK में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, पीरियड साइकिल को एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नाम के दो हार्मोन्स कंट्रोल करते हैं। शरीर में होने वाले बदलावों का असर इन दोनों हार्मोन्स को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए प्रेग्नेंसी, प्यूबर्टी, मेनोपॉज जैसी स्थितियों में इन हार्मोन्स में बदलाव आता है। शरीर में होने वाले बदलावों का पता लगाने के लिए पीरियड्स को नियमित रूप से ट्रैक करना जरूरी है।
अनियमित पीरियड्स में डॉक्टर से संपर्क कब करें?

1. ज्यादा ब्लीडिंग या दर्द होने पर
अगर पीरियड्स में ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो, हर घंटे पैड बदलना पड़ रहा हो या खून के बड़े-बड़े थक्के निकल रहे हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें। पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द होना भी सामान्य नहीं है, ऐसे में जांच करानी चाहिए। CDC के मुताबिक, अगर लंबे समय तक होने वाली ब्लीडिंग का इलाज न किया जाए, तो एनीमिया भी हो सकता है।
2. स्पॉटिंग
अगर दो पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग हो, तो उसे स्पॉटिंग कहा जाता है। इस केस में भी डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। साल 2022 में मेडिकल जर्नल American Journal Of Obstetrics & Gynecology में प्रकाशित एक स्टडी में 18,875 प्रतिभागियों के पीरियड ट्रैकिंग डेटा का विश्लेषण किया गया। स्टडी में पाया गया कि लगभग 16.4% महिलाओं में असामान्य ब्लीडिंग और स्पॉटिंग का पैटर्न देखा गया। इसके पीछे PMOS (पूर्व नाम PCOS) थायराइड, एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड जैसी समस्याओं की संभावना अधिक पाई गई।
3. लगातार पीरियड्स मिस होना
अगर लगातार तीन पीरियड्स मिस हो जाएं और प्रेग्नेंसी न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
4. कम ब्लीडिंग होना
पीरियड्स में अगर बहुत कम ब्लीडिंग होती है। पूरे दिन पैड बदलने की जरूरत नहीं होती, तो भी डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। यह भी अनियमित पीरियड्स का लक्षण हो सकता है।
5. गर्भधारण न हो पाना
अगर प्रेग्नेंसी का ट्राई कर रही हैं और कोशिश के बावजूद असफल हो जाएं या पीरियड्स अनियमित हो जाएं, तो डॉक्टर से सलाह लें।
6. शारीरिक संकेत नजर आने पर
अगर चेहरे पर ज्यादा बाल नजर आएं, ज्यादा थकान हो, हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता हुआ महसूस हो, जैसे चिड़चिड़ापन या अनिद्रा जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
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अनियमित पीरियड्स में कब चिंता करना चाहिए?
- अगर ज्यादा ब्लीडिंग के कारण थकान और कमजाेरी भी महसूस हो रही है, तो यह खून की कमी या एनीमिया का संकेत है, ऐसे में डॉक्टर से जल्द इलाज कराएं।
- अगर त्वचा पर अधिक मुंहासे, बाल झड़ना या चेहरे पर ज्यादा बाल नजर आएं, तो यह हार्मोनल समस्या या PMOS का संकेत हो सकता है।
- अगर अनियमित पीरियड्स के साथ पेल्विक एरिया में तेज दर्द उठता है, तो यह एंडोमेट्रियोसिस (गर्भाशय की परत बाहर बढ़ने) का संकेत हो सकता है।
- अनियमित पीरियड्स के साथ वजन तेजी से बढ़ रहा है, तो इसका कारण मोटापा या थायराइड हो सकता है।
- अगर अनियमित पीरियड्स के साथ तेज बुखार, योनि से बदबू और स्राव या असहनीय दर्द हो, तो इसके पीछे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज भी हो सकता है।
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पीरियड साइकिल बिगड़ने पर फर्टिलिटी की जांच कब कराएं?
अनियमित पीरियड्स के कारण आगे चलकर इंफर्टिलिटी हो सकती है। हालांकि, समय पर इलाज कराने से प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ सकती है। अगर 6 महीने या एक साल से प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई कर रही हैं और पीरियड्स अनियमित रहते हैं, तो फर्टिलिटी की जांच कराएं। PMOS या थायराइड जैसी कंडीशन ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं जिससे इंफर्टिलिटी हो सकती है। ओव्यूलेशन बढ़ाने के लिए दवाएं, हार्मोनल उपचार, वेट मैनेजमेंट की मदद ली जाती है और फर्टिलिटी रेट बढ़ सकता है।
अनियमित पीरियड्स का इलाज कैसे किया जाता है?
- पेल्विक एग्जामिनेशन, अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, हार्मोन टेस्ट, डायबिटीज टेस्ट, थायराइड टेस्ट और अन्य जांचों की मदद से अनियमित पीरियड्स का कारण पता लगाया जाता है। इसके बाद कारणों के आधार पर इलाज होता है।
- महिलाओं को डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह देते हैं जैसे हेल्दी डाइट लेना, एक्सरसाइज करना, वजन घटाना, दिनचर्या सुधारना वगैरह।
- थायराइड या PMOS जैसी स्थिति में हार्मोनल या थायराइड दवाएं दी जाती हैं।
- अगर अनियमित पीरियड्स का कारण फाइब्राॅइड या गांठ है, तो सर्जरी की मदद से गांठ को रिमूव कर दिया जाता है।
Mayo Clinic के मुताबिक, कुछ मामलों में गर्भनिरोधक गोलियां, पीरियड साइकिल को नियमित करने में मदद कर सकती हैं। ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्याओं का इलाज करने से भी अनियमित पीरियड्स की समस्या को ठीक करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष:
अनियमिल पीरियड्स अगर एक या दो बार हों, तो चिंता की बात नहीं है। स्ट्रेस या लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण ऐसा होता है, लेकिन यह स्थिति बार-बार आए, तो डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें। ज्यादा ब्लीडिंग होना, खून के बड़े-बड़े थक्के निकलना, स्पॉटिंग होना, लगातार पीरियड्स मिस होना, ब्लीडिंग कम होना, गर्भधारण न हो पाना, वजन बढ़ना या चेहरे पर अनचाहे बाल नजर आने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
FAQ
पीरियड्स 5 से 10 दिन आगे-पीछे होना सामान्य है?
कभी-कभी कुछ दिनों का अंतर हो सकता है, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो या लगातार कई महीनों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।अनियमित पीरियड्स और कमर दर्द का क्या संबंध है?
कुछ महिलाओं में हार्मोनल बदलाव या गर्भाशय से संबंधित समस्याओं के कारण अनियमित पीरियड्स के साथ-साथ कमर दर्द भी हो सकता है।
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Jul 29, 2026 15:02 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal