Tue Sep 15, 2026 | 04:49 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

सिर्फ PMOS नहीं, अनियमित पीरियड्स के हो सकते हैं ये 5 कारण, बता रहे हैं डॉक्टर

अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स का कारण हम ज्‍यादातर केस में प्रेग्‍नेंसी या PMOS (पहले PCOS) को ही मानते हैं, लेक‍िन इसके अन्‍य कारण भी हो सकते हैं। डॉक्‍टर से जानें क्‍या हैं सामान्‍य और गंभीर कारण ज‍िससे पीर‍ियड साइक‍िल प्रभाव‍ित होती है?

एक सामान्‍य पीर‍ियड साइक‍िल 21 से 35 द‍िनों के बीच होती है। यह साइक‍िल करीब 3 से 7 द‍िनों तक रहती है। अगर पीर‍ियड साइक‍िल के द‍िन और अवध‍ि में बदलाव होता है, तो इसे अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की स्‍थि‍त‍ि कहा जाता है। अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स में ब्‍लीड‍िंग कम या ज्‍यादा हो सकती है। National Health Service, UK के मुताब‍िक, अगर पीर‍ियड्स के बीच का गैप 21 द‍िन से कम या 35 द‍िनों से ज्‍यादा हो, तो उसे अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स कहा जाता है। अनि‍यम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या क‍िसी को भी हो सकती है। जो मह‍िलाएं बहुत अध‍िक स्‍ट्रेस लेती हैं या ज‍िनका वजन ज्‍यादा होता है, उनमें अक्‍सर अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या देखने को म‍िलती है। जानते हैं आख‍िर PMOS के अलावा इसके पीछे और क्‍या कारण हो सकते हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का संकेत है अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स

साल 2023 में Cureus में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, अनियमित पीरियड्स का संबंध मेटाबोलिक सिंड्रोम, टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट ड‍िजीज, एनीमिया, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, बांझपन और गर्भावस्था से जुड़ी समस्‍याओं से जोड़कर देखा गया है। स्टडी के मुताबि‍क, अनियमित पीरियड्स कई बार ओव्यूलेशन की समस्या का संकेत हो सकता है। अगर ओवरीज से एग नियमित रूप से रिलीज नहीं होता है, तो गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।

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अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स के गंभीर कारण

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1. ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट

जब अंडाशय में स‍िस्‍ट होती है, तो पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं। स‍िस्‍ट की स्‍थ‍ि‍ति‍ में ओवरीज में थैली या गांठ बन जाती है ज‍िसमें तरल पदार्थ भरा होता है। NCBI में StatPearls द्वारा प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, ओवेरियन सिस्ट होने पर पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे बहुत ज्‍यादा ब्‍लीडि‍ंग होना, अनियमित पीरियड्स या स्पॉटिंग। ये समस्‍याएं तब होती हैं जब सिस्ट ऐसे हार्मोन्‍स बनाती है जिनसे गर्भाशय की परत ज्‍यादा बढ़ने लगती है।

2. एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) की स्‍थ‍िति‍ में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा ट‍िशू गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है इससे असामान्‍य ब्‍लीड‍िंग, पीर‍ियड्स के समय ज्‍यादा दर्द और अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या हो सकती है। साल 2021 में मेड‍िकल जर्नल Frontiers In Reproductive Health में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, अनियमित या असामान्य मासिक धर्म पैटर्न, जैसे ज्यादा ब्लीडिंग या दर्दनाक पीरियड्स, एंडोमेट्रियोसिस के खतरे से जुड़े हो सकते हैं।

3. थायराइड

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि हाइपोथायराइड‍िज्‍म में थायराइड ग्‍लैंड पर्याप्‍त थायराइड हार्मोन को नहीं बना पाती है। इस वजह से पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं। वहीं हाइपरथायराइडिज्म की स्‍थ‍िति‍ में थायराइड ग्‍लैंड जरूरत से ज्‍यादा हार्मोन्‍स बनाती है ज‍िसका असर भी पीर‍ियड साइक‍िल पर पड़ सकता है।

4. गर्भाशय फाइब्रॉइड

यूटेराइन या गर्भाशय फाइब्रॉइड (Uterine Fibroids) यानी गर्भाशय में बनने वाली गांठ की वजह से ब्‍लीड‍िंग, लंबे समय तक चलने वाले पीर‍ियड्स और अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। साल 2024 में मेड‍िकल जर्नल The British Journal Of Translational Global Health में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताबि‍क, यूटेराइन फाइब्रॉइड के कारण मह‍िलाओं में असामान्‍य ब्‍लीड‍िंग हो सकती है और प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य प्रभाव‍ित हो सकता है।

5. डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस

डायब‍िटीज या इंसुलि‍न रेज‍िस्‍टेंस (इंसुलिन का असर कम होना) के मामलों में पीर‍ियड साइक‍िल प्रभाव‍ित हो सकती है और पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं।

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अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स के अन्‍य कारण

  • कुछ हार्मोनल दवाएं ऐसी होती हैं जो पीर‍ियड्स साइक‍िल में बदलाव कर सकती हैं या मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के ल‍िए ली जाने वाली दवाओं के असर से भी पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं।
  • कई बार ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करने की वजह से भी अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या हो सकती है। ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करने से शरीर और द‍िमाग में स्‍ट्रेस बढ़ता है और कोर्टि‍सोल हार्मोन के बढ़ने से पीर‍ियड साइक‍िल ब‍िगड़ सकती है।
  • कम कैलोरी लेना, पोषण की कमी या अचानक डाइट में बदलाव के कारण भी शरीर में हार्मोन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है ज‍िससे पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं।
  • नींद की कमी से हार्मोन्‍स का संतुलन ब‍िगड़ सकता है और पीर‍ियड साइक‍िल में बदलाव आ सकता है।
  • अगर आप यात्रा कर रहे हैं, लाइफस्‍टाइल में बदलाव आता है, तो शरीर की बायोलॉज‍िकल क्‍लॉक प्रभाव‍ित हो सकती है ज‍िसका असर पीर‍ियड साइक‍िल पर होता है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • तीन महीने से अध‍िक समय से पीर‍ियड्स न आएं।
  • पीर‍ियड्स में बहुत कम या अध‍िक ब्‍लीड‍िंग हो।
  • वजन तेजी से बढ़ रहा हो।
  • गर्भधारण में पर‍ेशानी हो।

न‍िष्‍कर्ष:

अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स का कारण स‍िर्फ प्रेग्‍नेंसी या PMOS नहीं होता। इसके पीछे कुछ गंभीर मेड‍िकल कंडीशन जैसे ओवेर‍ियन स‍िस्‍ट, एंडोमेट्रियोसिस, थायराइड, गर्भाशय फाइब्रॉइड, डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस वगैरह हो सकती हैं। इसके पीछे कुछ अन्‍य कारण भी हो सकते हैं जैसे- हार्मोनल दवाओं का सेवन, ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करना, पोषण की कमी, अन‍िद्रा या लाइफस्‍टाइल में अचानक बदलाव। अगर तीन महीने से ज्‍यादा समय तक पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित रहें या पीर‍ियड्स न आएं, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

FAQ

  • क्‍या वजन कम होने से भी पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हो सकते हैं?

    हां, अगर शरीर में कैलोरी या पोषण की कमी है, वजन कम है, तो हार्मोन्‍स प्रभाव‍ित हो सकते हैं और अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या हो सकती है।
  • अनियमित पीरियड्स में डॉक्टर कौन सी जांच कर सकते हैं?

    लक्षणों और कारण के अनुसार डॉक्‍टर थायराइड टेस्ट, हार्मोन टेस्ट, प्रेग्नेंसी टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और अन्य ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 29, 2026 15:35 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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