जब महिलाएं डॉक्टर के पास अनियमित पीरियड्स की समस्या को लेकर जाती हैं, तो डॉक्टर उन्हें ब्लड शुगर लेवल को चेक करने की सलाह देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हाई ब्लड शुगर लेवल का सीधा असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी होता है। हालांकि, हाई ब्लड शुगर लेवल या डायबिटीज में हर महिला को अनियमित पीरियड्स की समस्या होना जरूरी नहीं है, लेकिन यह मासिक चक्र को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टर से समझते हैं कि आखिर हाई ब्लड शुगर लेवल और अनियमित पीरियड्स में क्या कनेक्शन है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।
साल 2018 में Journal Of Clinical Endocrinology & Metabolism की एक स्टडी के मुताबिक, टाइप 2 डायबिटीज में 20% लड़कियों में अनियमित पीरियड्स की समस्या पाई गई। हालांकि, स्टडी में शामिल हर लड़की में टेस्टोस्टेरोन बढ़ा हुआ नहीं था। इसका मतलब है कि हर अनियमित पीरियड्स के केस को केवल PMOS या डायबिटीज से संबंधित नहीं माना जा सकता है।
हाई ब्लड शुगर पीरियड्स को प्रभावित कर सकता है
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Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल लंबे समय तक ज्यादा रहता है, तो इसका असर शरीर के एनर्जी लेवल के साथ-साथ कई मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं पर दिखता है। इस वजह से वजन भी बढ़ता है और टाइप 2 डायबिटीज, थायराइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इस वजह से इंसुलिन की कमी या अधिक होने के कारण हार्मोन्स का असंतुलन, अनियमित पीरियड्स की समस्या का कारण बन सकता है।
मेंस्ट्रुअल साइकिल को प्रभावित करता है इंसुलिन हार्मोन
वैसे, तो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेगुलेट करने वाले प्रमुख हार्मोन हैं, लेकिन इंसुलिन जो कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाला हार्मोन है, यह भी मेंस्ट्रुअल साइकिल को प्रभावित कर सकता है। अगर इंसुलिन लेवल ज्यादा है या कम है, तो हार्मोनल असंतुलन पैदा हो सकता है। इस वजह से पीरियड्स मिस हो सकते हैं, अनियमित हो सकते हैं, पीरियड्स में ब्लीडिंग कम या सामान्य से ज्यादा हो सकती है।
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हाई शुगर लेवल और PMOS का संबंध
PMOS में अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन में समस्या और शरीर में एड्रोजन हार्मोन बढ़ सकता है। PMOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या भी देखी जाती है। इस वजह से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए शरीर को ज्यादा इंसुलिन बनाने की जरूरत पड़ सकती है। इसका असर हार्मोनल फंक्शन को प्रभावित करता है और पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।
क्या डायबिटीज में पीरियड्स मिस हो सकते हैं?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि डायबिटीज में शुगर लेवल कंट्रोल न होने के कारण कुछ महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। डायबिटीज और थायराइड जैसी बीमारियां मासिक चक्र को प्रभावित कर सकती हैं।
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ब्लड शुगर लेवल को कब चेक करें?
- अगर पीरियड्स मिस हो रहे हैं,
- पीरियड्स में तेज दर्द होता है या हैवी ब्लीडिंग होती है,
- बार-बार मूड स्विंग्स होते हैं और थकान महसूस होती है, तो अपना ब्लड शुगर लेवल चेक कराएं।
अनियमित पीरियड्स के अन्य कारण
- हाइपोथायराइड और हाइपरथायराइड
- PMOS
- प्रोलैक्टिन हार्मोन में बदलाव
- गर्भावस्था
- मेनोपॉज के आसपास होने वाले हार्मोनल बदलाव
- कुछ दवाओं का प्रभाव
- खान-पान और लाइफस्टाइल में बड़े बदलाव
अनियमित पीरियड्स को कैसे ठीक करें?
- लंबे समय से अगर अनियमित पीरियड्स की समस्या से जूझ रही हैं, तो डाइट में बदलाव करना या एक्सरसाइज करना काफी नहीं है, डॉक्टर की सलाह पर सही दवाओं का सेवन करें। डायबिटिक मरीजों को सही समय पर इंसुलिन और दवाओं का सेवन करना जरूरी है।
- इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार के लिए लो शुगर डाइट और एक्सरसाइज की मदद लें। एक्सरसाइज के लिए घंटों पसीना बहाने के बजाय पहले कंसिस्टेंट रहने का प्रयास करें। कम समय से शुरू करें और समय से ज्यादा इसे रोज की दिनचर्या में ढालने का प्रयास करें।
- स्ट्रेस कम करें और भरपूर नींद लें। अक्सर जब महिला अधिक स्ट्रेस में होती है, तो अनियमित पीरियड्स की समस्या होती है जिससे बचने के लिए माइंड को रिलैक्स करने वाली तकनीक जैसे डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज या आजकल इस्तेमाल होने वाली ASMR तकनीक की मदद लें।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर पीरियड्स कभी-कभी अनियमित हो रहे हैं, तो जरूरी नहीं है यह किसी गंभीर समस्या के कारण हो। रूटीन में बदलाव या स्ट्रेस लेवल के कारण ऐसा हो सकता है। हालांकि अगर पीरियड्स लगातार कई महीनों तक अनियमित हों, तो गौर करने की जरूरत है।
- अगर बार-बार पीरियड्स मिस हों, कम या ज्यादा ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
- पीरियड्स के बीच असामान्य ब्लीडिंग या स्पॉटिंग हो।
- चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल अधिक बढ़ रहे हों।
- अचानक वजन बढ़ रहा हो।
- मुंहासे और ऑयली स्किन की समस्या बढ़ गई हो।
- प्रेग्नेंसी की संभावना हो।
निष्कर्ष:
अगर शरीर में इंसुलिन हार्मोन कम या ज्यादा है, तो हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं जिसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। हाई ब्लड शुगर लेवल के कारण यह समस्या हो सकती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण भी पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। इससे महिलाएं PMOS का शिकार भी हो सकती हैं। हाई शुगर लेवल और अनियमित पीरियड्स से बचने के लिए समय पर दवाएं और इंसुलिन लेना, हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज, नींद पूरी करना और स्ट्रेस मैनेजमेंट जरूरी है। वजन बढ़ने लगे, पीरियड्स अनियमित हों, मिस हो जाएं, पीरियड्स के बीच स्पॉटिंग हो या हैवी या कम ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें।
FAQ
क्या अनियमित पीरियड्स में प्रेग्नेंसी हो सकती है?
हां, अनियमित पीरियड्स होने का मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी संभव नहीं है। हालांकि, अनियमित ओव्यूलेशन के कारण प्रेग्नेंसी में परेशानी हो सकती है।अनियमित पीरियड्स के लिए कौन सी जांच की जाती है?
अनियमित पीरियड्स में प्रेग्नेंसी टेस्ट, थायराइड टेस्ट, ब्लड ग्लूकोज टेस्ट, हार्मोन टेस्ट, पेल्विक अल्ट्रासाउंड जैसी जांच की जा सकती हैं।
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Aug 20, 2026 20:22 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal
