आजकल हार्ट में समस्या होने पर अचानक मृत्यु होने की खबर आम होती जा रही है। इसे सडन कार्डियक डेथ या SCD कहा जाता है। ऐसा हार्ट में ब्लॉकेज के कारण होता है और इसका एक मुख्य कारण डायबिटीज को माना जाता है। डायबिटिक मरीजों में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है। सडन कार्डियक डेथ के पीछे हाई शुगर लेवल के अलावा हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल जैसे कारण हो सकते हैं। इस लेख में हम समझेंगे सडन कार्डियक डेथ और डायबिटीज का संबंध। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City Hyderabad से बात की।
सडन कार्डियक डेथ क्या है?
सडन कार्डियक डेथ को आसान भाषा में समझें, तो सडन कार्डियक डेथ तब होती है जब हार्ट काम करना बंद कर देता है। हार्ट तक ब्लड ले जाने के लिए तीन आर्टरीज होती हैं जिसमें से दो मुख्य मानी जाती हैं। अगर किसी एक में ब्लॉकेज हो जाए, तो बाकि दो ब्लड सप्लाई को संभाल लेती हैं और इस स्थिति में मृत्यु की संभावना कम होती है, लेकिन 70 प्रतिशत ब्लड सप्लाई करने वाली आर्टरीज में ब्लॉकेज हो, तो व्यक्ति की मृत्यु तुरंत हो जाती है और इसे ही सडन कार्डियक डेथ कहते हैं।
सडन कार्डिएक अरेस्ट और सडन कार्डिएक डेथ में अंतर
सडन कार्डिएक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest or SCA) एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें हार्ट अचानक धड़कना बंद कर देता या धड़कन अनियमित हो जाती हैं। इस स्थिति में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है, लेकिन उसे CPR से बचाया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर सडन कार्डिएक डेथ (Sudden Cardiac Death Or SCD) में व्यक्ति की अचानक मौत हो जाती है। सडर कार्डियक अरेस्ट के बाद भी अगर इलाज समय पर न मिले, तो व्यक्ति की मौत हो सकती है।
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सडन कार्डियक डेथ और डायबिटीज का संबंध

डायबिटीज होने पर अचानक दिल की धड़कन बंद होने (Sudden Cardiac Death) का खतरा बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से धमनियों में चर्बी जमा हो सकती है जो हार्ट तक जाने वाली नसों को नुकसान पहुंच सकता है। खासकर टाइप 2 डायबिटीज और 50 साल से कम उम्र के लोगों में यह खतरा ज्यादा देखा गया है। अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक कंट्रोल में न रहे या पहले से हार्ट डिजीज हो, तो खतरा और बढ़ सकता है।
2022 में मेडिकल जर्नल Canadian Journal Of Cardiology में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों को अचानक होने वाली कार्डियक डेथ का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होता है। स्टडी में यह भी बताया गया है कि शुगर लेवल कंट्रोल करने से और बीपी एवं कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करके कार्डियक डेथ के खतरे को कम कर सकते हैं।
कार्डियक डेथ का खतरा टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज दोनों में होता है?
हां, सडन कार्डियक डेथ का खतरा टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज दोनों में हो सकता है। European Society of Cardiology के मुताबिक, कार्डियक डेथ का खतरा टाइप 1 और टाइप 2 दोनों प्रकार की डायबिटीज में होता है। एक अनुमान के मुताबिक, टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में अचानक कार्डियक डेथ 3.7 गुना ज्यादा कॉमन पाया गया और टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में यह 6.5 गुना ज्यादा कॉमन दिखा।
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टाइप 2 डायबिटीज में सडन कार्डिएक अरेस्ट का खतरा ज्यादा
टाइप 2 डायबिटीज अक्सर मोटापा, हाई बीपी या हाई कोलेस्ट्रॉल से संबंधित होता है इसलिए टाइप 2 में टाइप 1 के मुकाबले, सडन कार्डियक अरेस्ट का खतरा ज्यादा होता है। European Medical Journal के मुताबिक, टाइप 2 डायबिटीज में अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है। हार्ट डिजीज के बगैर भी मरीज कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो सकता है।
डायबिटीज में सडन कार्डियक डेथ से कैसे बचें?
शुगर लेवल कंट्रोल करें
हाई शुगर लेवल हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे बचने के लिए समय-समय पर HbA1c की जांच कराएं और डाइट में रिफाइंड शुगर की मात्रा कम कर दें।
बीपी और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें
सडन कार्डियक डेथ के पीछे हाई बीपी और बैड कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना भी बड़ा कारण है। इससे बचने के लिए नियमित बीपी और लिपिड प्रोफाइल की जांच होना जरूरी है। साथ ही बीपी और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने के लिए लो सोडियम और लो फैट डाइट लें।
नियमित एक्सरसाइज करें
रोजाना 30 से 45 मिनट एक्सरसाइज करें। इससे शुगर लेवल और वजन दोनों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। वॉक, साइकिलिंग या योग जैसे आसान विकल्प चुन सकते हैं। अगर हार्ट के मरीज हैं, तो हैवी वर्कआउट से बचें।
अल्कोहल और स्मोकिंग से परहेज करें
स्मोकिंग करने से आर्टरीज सख्त हो जाती हैं और ब्लड फ्लो कम हो जाता है। इससे सडन कार्डियक डेथ का खतरा बढ़ता है। साथ ही ज्यादा अल्कोहल पीना भी हार्ट के लिए नुकसानदायक होता है।
हार्ट की नियमित जांच कराएं
हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर ECG, ECHO और Stress Test करें। इससे हार्ट की बीमारियों का पता जल्दी चल जाता है। अगर चेस्ट पेन, पल्पिटेशन या सांस फूलने जैसे लक्षण नजर आएं, तो नजरअंदाज न करें।
वजन और लाइफस्टाइल मैनेज करें
ज्यादा वजन और सेडेंट्ररी लाइफस्टाइल के कारण हार्ट पर दबाव बढ़ता है। हेल्दी डाइट में फल, सब्जियां, होल ग्रेन्स को शामिल करें। जंक फूड्स और मीठी चीजों के ज्यादा सेवन से दूरी बनाएं।
समय पर दवाएं और फॉलोअप लें
हार्ट और डायबिटीज की दवाओं को समय पर लें। दवा खुद से छोड़ने से डोज बदलने से खतरा बढ़ सकता है। सडन कार्डियक डेथ से बचने के लिए फॉलोअप रखें और असामान्य लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
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किन लोगों को खतरा ज्यादा होता है?
- सडन कार्डियक डेथ का खतरा उन लोगों में ज्यादा हो सकता है जो 50 साल से ज्यादा उम्र के हैं।
- लंबे समय से डायबिटीज से पीड़ित हैं।
- किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं।
- पहले कभी ब्लड शुगर बहुत कम (Hypoglycemia) होने की समस्या का सामना कर चुके हैं या जिन्हें हार्ट फेलियर जैसी अन्य हृदय संबंधी बीमारियां भी हैं।
डायबिटीज में हार्ट की समस्या के शुरुआती संकेत
- बिना वजह ज्यादा थकान होना।
- मेहनत करने पर सांस फूलना, सीने में दबाव या भारीपन महसूस होना।
- चक्कर आना, पैरों या टखनों में सूजन आना।
- दिल की धड़कन अनियमित लगना।
सडन कार्डियक डेथ से बचने के लिए कौन सी जांच कराएं?
- ईसीजी
- इको
- स्ट्रेस टेस्ट
- कोरोनरी एंजियोग्राम
- HbA1c टेस्ट
- फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर सीने में अचानक दर्द या असहजता महसूस हो।
- बहुत ज्यादा थकान लगे।
- बेहोशी आए या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।
- खासकर डायबिटीज वाले लोगों में दिल की समस्या के लक्षण कई बार सामान्य से अलग हो सकते हैं, इसलिए समय पर जांच कराना जरूरी है।
निष्कर्ष:
लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से धमनियों में चर्बी जमा हो सकती है जो हार्ट तक जाने वाली नसों को नुकसान पहुंच सकता है और सडन कार्डियक डेथ का खतरा बढ़ सकता है। सडन कार्डियक डेथ से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह से ईसीजी, इको, स्ट्रेस टेस्ट, HbA1c टेस्ट जैसे टेस्ट कराएं। 50 साल से ज्यादा उम्र के लोग और डायबिटिक मरीजों में सडन कार्डियक डेथ का खतरा ज्यादा हो सकता है। इससे बचने के लिए नियमित एक्सरसाइज करें, डायबिटीज कंट्रोल करें, अल्कोहल और धूम्रपान से परहेज करें और समय पर दवाएं लें। इन उपायों से खतरे को कम किया जा सकता है।
FAQ
डायबिटीज में हार्ट की कौन सी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है?
डायबिटीज के कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, अनियमित दिल की धड़कन, स्ट्रोक जैसी हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।डायबिटिक कार्डियोमायोपैथी क्या है?
लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर सीधे हार्ट की मांसपेशियों के काम करने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है और इस कंडीशन को डायबिटिक कार्डियोमायोपैथी कहते हैं।
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Jul 31, 2026 09:52 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Vidya Tickoo