Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

ल‍िवर की समस्‍याओं के पीछे कहीं डायब‍िटीज तो नहीं? डॉक्‍टर से समझें दोनों का संबंध और बचाव के उपाय

टाइप 2 डायब‍िटीज में फैटी ल‍िवर का खतरा बढ़ सकता है। अगर क‍िसी व्‍यक्‍त‍ि को डायब‍िटीज और फैटी ल‍िवर दोनों है, तो गंभीर बीमार‍ी जैसे ल‍िवर स‍िरोस‍िस का खतरा हो सकता है। जानें डायब‍िटीज और ल‍िवर की समस्‍याओं में क्‍या संबंध है?

डायब‍िटीज के मरीजों को अक्‍सर ल‍िवर का खास ख्‍याल रखने की सलाह दी जाती है क्‍योंक‍ि असंतुल‍ित शुगर लेवल का असर ल‍िवर की सेहत पर पड़ता है। ल‍िवर की समस्‍याओं में अक्‍सर शुरुआत में कोई लक्षण नजर नहीं आता। ऐसे में कई लोगों को लंबे समय तक पता नहीं चलता है क‍ि ल‍िवर में फैट जमा हो रहा है। Mayo Clinic के मुता‍ब‍िक, अगर समय रहते ल‍िवर की समस्‍या का इलाज न क‍िया जाए, तो सूजन या स‍िरोस‍िस का खतरा बढ़ सकता है। ल‍िवर की बीमारी आगे चलकर ल‍िवर कैंसर का रूप ले सकती है, हार्ट और क‍िडनी की बीमार‍ियों का खतरा भी दोगुना हो सकता है। अगर आपको डायब‍िटीज है और भूख कम लगना, ज्‍यादा थकान, पेट के दाईं तरफ दर्द, ब‍िना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं, तो डायब‍िटीज के साथ-साथ ल‍िवर की भी जांच कराएं। इसके पीछे MASLD और MASH जैसी ल‍िवर समस्‍याएं हो सकती हैं। आगे जानेंगे डायब‍िटीज और ल‍िवर की समस्‍याओं में क्‍या संबंध है और ल‍िवर की समस्‍याओं से कैसे बचें? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

डायबिटीज और लिवर का क्या संबंध है?

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रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताब‍िक डायब‍िटीज और ल‍िवर का गहरा संबंध है। खासकर टाइप 2 डायब‍िटीज का। जब ल‍िवर में ज्‍यादा फैट होता है, तो शुगर लेवल बढ़ सकता है ज‍िससे डायब‍िटीज होने का खतरा रहता है। वहीं दूसरी ओर जब ब्‍लड शुगर लेवल हाई रहता है, तो ल‍िवर को नुकसान पहुंचता है। CDC के मुताब‍िक, कई स्‍टडीज में देखा गया है क‍ि टाइप 2 डायब‍िटीज के 70 प्रत‍िशत लोगों में मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) हो सकता है। इसे ही पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) के नाम से जाना जाता था।

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हाई शुगर लेवल और ल‍िवर फैट से MASLD का खतरा

International Diabetes Federation के मुताब‍िक, जब डायब‍िटीज में ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ता है, तो ल‍िवर में फैट जमा होता है। ल‍िवर फैट आगे चलकर MASLD का रूप ले लेता है। MASLD होने पर शरीर में मेटाबॉलिक समस्याओं जैसे डायबिटीज, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ने लगता है।

लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस

Dr. Rajeev Chowdry ने बताया क‍ि जब शरीर में लंबे समय तक ब्‍लड शुगर लेवल ज्‍यादा होता है, तो ल‍िवर में सूजन हो सकती है। सूजन के कारण लिवर में स्कार टिशूज बनने लगते हैं। इसे फाइब्रोसिस कहते हैं। ज्यादा बढ़ने पर सिरोसिस हो सकता है, जिसमें लिवर का सामान्य काम प्रभावित हो जाता है।

डायब‍िटीज में ल‍िवर की समस्‍याओं का खतरा क‍िन लोगों में होता है?

  • ज‍िन लोगों को हाई कोलेस्‍ट्रॉल की समस्‍या है।
  • ज‍िन्‍हें हाई बीपी की समस्‍या है।
  • ज‍िन लोगों का वजन ज्‍यादा है।

अनहेल्‍दी डाइट और एक्‍सरसाइज की कमी भी डायब‍िटीज और MASLD के खतरे को बढ़ा सकती है।

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डायब‍िटीज में ल‍िवर की समस्‍याओं से बचने के ल‍िए क्‍या करें?

  • ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करें और समय-समय पर डायब‍िटीज की जांच कराएं।
  • हाई बीपी फैटी लिवर और हृदय रोग दोनों का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाएं।
  • एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड लेवल ज्‍यादा होने से डायब‍िटीज और ल‍िवर दोनों पर बुरा असर होता है इसल‍िए इन्‍हें कंट्रोल करें।
  • रोजाना एक्‍सरसाइज करें। इससे ल‍िवर में जमा फैट कम करने में मदद म‍िल सकती है। हर हफ्ते कम से कम 150 म‍िनट एक्‍सरसाइज करें।
  • 5 से 10 प्रत‍िशत तक वजन कम करने से ल‍िवर में जमा फैट कम करने में मदद म‍िलती है।
  • शुगर, कार्ब्स या ज्‍यादा फैट वाली चीजों के सेवन से बचें। इससे ल‍िवर पर दबाव से बढ़ता है।
  • अल्‍कोहल के सेवन से बचें। अगर आपको ल‍िवर की समस्‍या है, तो अल्‍कोहल और धूम्रपान से परहेज करना चाह‍िए।

न‍िष्‍कर्ष:

डायब‍िटीज और ल‍िवर की समस्‍याएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। अगर शुगर लेवल ज्‍यादा होगा, तो ल‍िवर में फैट जमा होगा और अगर ल‍िवर में फैट जमा होगा, तो मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं जैसे मोटापा, डायब‍िटीज का खतरा बढ़ सकता है। डायब‍िटि‍क मरीजों में हाई शुगर लेवल के कारण ल‍िवर में सूजन हो सकती है ज‍िससे लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही फैटी ल‍िवर की स्‍थि‍त‍ि आगे चलकर MASLD का रूप ले लेती है। डायब‍िटीज में ल‍िवर की समस्‍याओं से बचने के ल‍िए हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल अपनाएं, एक्‍सरसाइज करें, धूम्रपान और अल्‍कोहल से परहेज करें और समय-समय पर ब्‍लड शुगर लेवल की जांच कराएं।

FAQ

  • ल‍िवर फाइब्रोस‍िस के कारण क्‍या हैं?

    फैटी ल‍िवर ड‍िजीज जैसे MASLD, ज्‍यादा अल्‍कोहल का सेवन, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस सी होने के कारण भी ल‍िवर फाइब्रोस‍िस का खतरा बढ़ सकता है। 
  • ल‍िवर फंक्‍शन टेस्‍ट से क्‍या पता चलता है?

    इस जांच से ल‍िवर के काम करने की क्षमता को चेक क‍िया जाता है। ल‍िवर में सूजन, इंफेक्‍शन और कोश‍िकाओं को होने वाले नुकसान की भी जानकारी म‍िलती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 06, 2026 20:06 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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