Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

हेल्‍दी समझकर पीते हैं फ्रूट जूस? बढ़ सकता है फैटी लिवर का खतरा, एक्‍सपर्ट से जानें नुकसान

क्‍या आप भी फ्रूट जूस को हेल्‍दी समझकर इसका सेवन करते हैं? एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि इससे फैटी ल‍िवर का खतरा बढ़ सकता है। जानें दोनों में क्‍या संबंध है?

गर्मी के मौसम में लोग खुद को हाइड्रेटेड और हेल्दी रखने के लिए अक्सर फ्रूट जूस का सेवन करते हैं। कई लोग मानते हैं कि पैक्ड या घर पर बना फ्रूट जूस शरीर के लिए फायदेमंद होता है और इससे विटामिन्स की कमी पूरी होती है। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फ्रूट जूस ल‍िवर के ल‍िए हान‍िकारक हो सकता है। कुछ मामलों में यह फैटी लिवर और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकता है। ल‍िवर के ल‍िए फ्रूट जूस के खतरे जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

फल खाने और जूस पीने में अंतर है

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पूरे फल खाने और उनका जूस पीने में फर्क होता है। जब फल का जूस बनाया जाता है, तो उसमें मौजूद फाइबर की मात्रा काफी कम हो जाती है। वहीं, प्राकृतिक शुगर यानी फ्रुक्टोज की मात्रा ज्‍यादा तेजी से शरीर में पहुंचती है, जिससे लिवर पर असर पड़ सकता है।

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कैसे बढ़ सकता है फैटी लिवर का खतरा?

फ्रूट जूस में फ्रुक्टोज होता है जो सीधे लिवर पर असर करता है। अगर शरीर में जरूरत से ज्यादा फ्रुक्टोज होगा, तो लिवर इसे फैट में बदलना शुरू कर सकता है। धीरे-धीरे यह फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (Metabolic Dysfunction–Associated Steatotic Liver Disease या MASLD) का खतरा बढ़ सकता है। पैक्ड फ्रूट जूस में अक्सर अतिरिक्त चीनी और प्रिजर्वेटिव्स भी मिलाए जाते हैं जो समस्या को और बढ़ा सकते हैं। नियमित रूप से ज्यादा मात्रा में ऐसे ड्रिंक्स लेने से वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर असंतुलन का खतरा भी बढ़ सकता है।

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पूरे फल ज्यादा फायदेमंद क्यों हैं?

पूरे फल खाने से शरीर को फाइबर मिलता है, जो शुगर को धीरे-धीरे अब्‍जॉर्ब होने में मदद करता है। इससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ती और पेट भी लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। वहीं, जूस पीने से व्यक्ति कम समय में ज्यादा कैलोरी और शुगर ले सकता है क्योंकि उसमें फाइबर कम होता है।

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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

  • फैटी लिवर के मरीज
  • डायबिटीज या प्री-डायबिटीज वाले लोग
  • मोटापे से परेशान लोग
  • हाई ट्राइग्लिसराइड्स की स्‍थ‍ित‍ि होने पर

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क्या पूरी तरह जूस छोड़ देना चाहिए?

जरूरी नहीं कि फ्रूट जूस पूरी तरह हान‍िकारक हो, लेकिन इसकी मात्रा और प्रकार का ध्यान रखना जरूरी है। अगर जूस पीना चाहते हैं, तो बिना चीनी वाला ताजा घर का बना जूस सीमित मात्रा में लें। साल 2022 में Diabetes Care नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, फ्रूट जूस पीने से फैटी लिवर का खतरा बढ़ा सकता है। रिसर्च के अनुसार, फ्रूट जूस में मौजूद फ्रुक्टोज लिवर में फैट बनने की प्रक्रिया को बढ़ा सकता है।

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फैटी लिवर से बचने के लिए क्या करें?

  • रोजाना संतुलित आहार लें
  • ज्यादा मीठे पेय पदार्थों से बचें
  • नियमित एक्‍सरसाइज करें
  • वजन कंट्रोल करें
  • प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड कम खाएं
  • पर्याप्त पानी पिएं

निष्कर्ष:

फ्रूट जूस को हमेशा हेल्दी मानना सही नहीं है, खासकर जब उसका सेवन ज्यादा मात्रा में किया जाए। जरूरत से ज्यादा जूस पीने से शरीर में अतिरिक्त शुगर पहुंच सकती है, जो फैटी लिवर, MASLD और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि जूस की बजाय फलों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जाए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 19, 2026 20:21 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 19, 2026 20:21 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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