Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

डायबिटीज मरीजों में दर्दनाक इंफेक्‍शन शिंगल्स का खतरा ज्‍यादा क्यों रहता है? डॉक्‍टर से जानें 

डायब‍िटीज में असंतुल‍ित शुगर लेवल के कारण ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान पहुंचता है और श‍िंगल्‍स के लक्षण गंभीर हो सकते हैं और र‍िकवरी में समय लग सकता है।

शिंगल्स (Shingles) एक वायरल संक्रमण है जो त्वचा पर दर्दनाक रैशेज का कारण बनता है। डायब‍िटीज में इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है इसल‍िए इसका संबंध डायब‍िटीज के साथ जोड़ा जाता है। श‍िंगल्‍स होने पर तेज दर्द होता है। दर्द के अलावा त्‍वचा पर रैशेज उभरने लगते हैं। रैशेज कुछ समय बाद, फफोलों में बदल जाते हैं। फफोले वाली जगह पर खुजली, जलन या सूजन महसूस हो सकती है। शिंगल्स (को हर्पीस जोस्टर (Herpes Zoster) भी कहा जाता है। यह वही वायरस है जो चिकनपॉक्स का कारण बनता है। जब किसी व्यक्ति को चिकनपॉक्स होता है, तो वेरिसेला-जोस्टर वायरस उसके शरीर में निष्क्रिय होकर नसों में छिपा रहता है और सालों बाद किसी समय फिर से एक्‍ट‍िव हो सकता है। जब यह वायरस फिर से सक्रिय होता है, तो यह शिंगल्स के रूप में देखने को म‍िलता है। आइए समझते हैं डायब‍िटीज और श‍िंगल्‍स का क्‍या कनेक्‍शन है और डायब‍िटीज में इससे कैसे बचें? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, शिंगल्स आमतौर पर जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन इसमें काफी तेज दर्द हो सकता है। वैक्सीन लगवाने से शिंगल्स होने का खतरा कम किया जा सकता है। अगर शिंगल्स का समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए, तो संक्रमण की अवधि कम हो सकती है और इससे होने वाली समस्‍याओं का खतरा भी घट सकता है।

डायब‍िटीज और श‍िंगल्‍स में क्‍या संबंध है?

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डायबिटीज और शिंगल्स के बीच गहरा संंबंध है। डायब‍िटीज में ब्‍लड शुगर लेवल असंतुल‍ित या ज्‍यादा रहने के कारण ब्‍लड वेसल्‍स डैमेज होने लगते हैं ज‍िस वजह से शरीर को वायरल इंफेक्‍शन से लड़ने में मुश्किल हो सकती है। शिंगल्स एक वायरल इंफेक्‍शन है जो चिकनपॉक्स के कारण होता है।

डायबिटि‍क मरीजों में शिंगल्स का जोखिम बढ़ जाता है क्योंकि उनकी इम्यून सिस्टम कमजोर होती है, जिससे वायरस को फिर से सक्रिय होने का मौका मिल जाता है। इसके अलावा, डायबिटीज शिंगल्स के लक्षणों को भी गंभीर बना सकता है और उनकी रिकवरी में भी अधिक समय लग सकता है। इसलिए, डायबिटीज के मरीजों को शिंगल्स से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे कि हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल अपनाएं और शिंगल्स वैक्सीन लगवाएं।

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र‍िकवरी में कुछ महीने या हफ्ते लग सकते हैं

शिंगल्स आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन यह एक लंबी और दर्दनाक प्रक्रिया हो सकती है। ज्‍यादातर लोग कुछ हफ्तों से लेकर एक महीने के भीतर शिंगल्स से ठीक हो जाते हैं। हालांकि, शिंगल्स के कुछ मामलों में र‍िकवरी में लंबा वक्‍त लग सकता है।

शि‍ंगल्‍स के नुकसान क्‍या हैं?

  • शिंगल्स में त्वचा पर दर्दनाक दाने और छाले हो सकते हैं।
  • कुछ मामलों में लोगों को हल्‍का बुखार, स‍िरदर्द और थकान महसूस होती है।
  • शिंगल्स एक संक्रामक रोग नहीं है, लेकिन इसकी वजह से होने वाले चकत्तों से दूसरों को चिकनपॉक्स हो सकता है।
  • अगर शिंगल्स आंखों के आसपास होता है, तो यह आंखों में संक्रमण और दृष्टि हानि का कारण बन सकता है।
  • शिंगल्स कभी-कभी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी पैदा कर सकता है, जैसे कि ब्रेन इंफेक्शन, सुनने में कठिनाई या चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियों का कमजोर होना।
  • अगर समय पर इलाज न क‍िया जाए, तो शिंगल्स एक गंभीर स्थिति बन सकती है।

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डायब‍िटि‍क मरीज श‍िंगल्‍स से बचाव कैसे करें?

  • श‍िंगल्‍स से बचाव के ल‍िए सबसे पहले ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना जरूरी है। शुगर लेवल कंट्रोल रहेगा, तो श‍िंगल्‍स का खतरा भी कम हो सकता है।
  • श‍िंगल्‍स वैक्‍सीन की डोज लेने से इस वायरल इंफेक्‍शन से बचाव होता है।
  • श‍िंगल्‍स के लक्षण नजर आने पर जल्‍द डॉक्‍टर से संपर्क करें ताक‍ि गंभीर स्‍टेज से बचा जा सके। साथ ही, न‍ियम‍ित रूप से ब्‍लड शुगर लेवल की जांच कराएं।
  • श‍िंगल्‍स से बचाव के ल‍िए हेल्‍दी डाइट, न‍ियम‍ित एक्‍सरसाइज और पर्याप्‍त नींद लें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

शरीर के किसी एक हिस्से में जलन, दर्द, झुनझुनी या लाल चकत्ते और छोटे-छोटे पानी वाले छाले दिखाई दें, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। तेज दर्द होने पर भी डॉक्‍टर से तुरंत जांच कराएं।

न‍िष्‍कर्ष:

श‍िंगल्‍स एक वायरल संक्रमण है। डायब‍िटीज में असामान्‍य ब्‍लड शुगर लेवल के कारण ब्‍लड वेसल्‍स डैमेज हो सकती हैं और श‍िंगल्‍स का खतरा बढ़ सकता है। बचाव के ल‍िए शुगर लेवल को कंट्रोल करना, न‍ियम‍ित जांच कराना और श‍िंगल्‍स वैक्‍सीन लेना जरूरी है। शरीर के क‍िसी एक ह‍िस्‍से में जलन, दर्द, लाल चकत्ते, झुनझुनी, पानी वाले छोटे-छोटे छाले द‍िखें या तेज दर्द हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। यह एक संक्रामक रोग नहीं है, लेक‍िन इससे होने वाले चकत्तों से दूसरों में च‍िकनपॉक्‍स हो सकता है।

image credit: magnific

FAQ

  • शिंगल्स का गंभीर खतरा क्या है?

    शिंगल्स में प्रमुख जटिलता पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया (Postherpetic Neuralgia) है। इसमें छाले ठीक होने के बाद भी प्रभावित हिस्से में लंबे समय तक दर्द या जलन बनी रह सकती है।
  • क्या शिंगल्स दोबारा हो सकता है?

    हां, कुछ लोगों को जीवन में एक से ज्यादा बार शिंगल्स हो सकता है। उम्र बढ़ने पर दोबारा होने का खतरा बढ़ सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 01, 2026 17:22 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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