Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

PCOS में गर्भनिरोधक दवाओं के फायदे और नुकसान क्‍या हैं?

अनचाहे गर्भ से बचने के ल‍िए आमतौर पर गर्भनि‍रोधक दवाओं का सेवन क‍िया जाता है। ये दवाएं शरीर में हार्मोन्‍स को प्रभाव‍ित करती हैं इसल‍िए PCOS में भी इनका इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। एक्‍सपर्ट और र‍िसर्च से समझते हैं PCOS में गर्भनि‍रोधक दवाओं के फायदे-नुकसान।

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पॉलीस‍िस्‍ट‍िक ओवरी स‍िंड्रोम (PCOS) होने पर मह‍िलाओं में पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होना, मुंहासे, चेहरे पर अनचाहे बाल या ओवरी में स‍िस्‍ट जैसी समस्‍याएं नजर आ सकती हैं। PCOS में अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या को दूर करने के ल‍िए इलाज के तौर पर कुछ मह‍िलाओं को गर्भन‍िरोधक दवाएं दी जाती हैं। सही मायनों में गर्भनि‍रोधक दवाओं का सेवन गर्भन‍िरोध के ल‍िए होता है, लेक‍िन PCOS में हार्माेन्‍स के संतुल‍न के ल‍िए कई बार इन गोल‍ियों का सेवन भी क‍िया जाता है। इससे संबंध‍ित समस्‍या यह है क‍ि कुछ मह‍िलाएं डॉक्‍टर की सलाह ल‍िए बगैर इंटरनेट पर पढ़कर गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन शुरू कर देती हैं ज‍िससे स्‍थ‍ित‍ि खराब हो सकती है। गर्भन‍िरोधक दवाएं, ओवरी के हार्मोन्‍स को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती हैं, लेक‍िन इन्‍हें डॉक्‍टर की सलाह के बाद लेना फायदेमंद हो सकता है। PCOS में गर्भन‍िरोधक दवाओं के सेवन के फायदे, नुकसान और अन्‍य जरूरी सवालों के जवाब जानने के ल‍िए हमने डॉ. स्मृति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, केजीएमयू, यूपी लखनऊ (Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow) से बात की।

PCOS में गर्भन‍िरोधक गोलि‍यां खा सकते हैं?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में डॉक्‍टर की सलाह पर गर्भन‍िरोधक गोल‍ियों का सेवन क‍िया जाता है, ताक‍ि हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने में मदद म‍िले, हालांक‍ि गर्भन‍िरोधक दवाएं, PCOS का इलाज नहीं हैं। PCOS के इलाज में डॉक्‍टर फाइबर, हेल्‍दी डाइट और लीन प्रोटीन युक्‍त डाइट लेने की सलाह देते हैं, ताक‍ि इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस से बचा जा सके। कुछ मरीजों को डॉक्‍टर ओमेगा 3, व‍िटाम‍िन डी या मैग्नीशियम सप्‍लीमेंट लेने की सलाह भी दे सकते हैं, ताक‍ि हार्मोनल और र‍िप्रोडक्‍ट‍िव हेल्‍थ को बेहतर बनाने में मदद म‍िले।

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PCOS में गर्भन‍िरोधक गोल‍ी खाने के फायदे

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या को दूर करने के ल‍िए डॉक्‍टर कई बार गर्भन‍िरोधक गोल‍ी के सेवन की सलाह देते हैं। गर्भन‍िरोधक दवाएं डॉक्‍टर की सलाह के मुताब‍िक ही लेनी चाह‍िए और यह एक तय समय के ल‍िए ही दी जाती हैं, जांच के बाद देखा जाता है क‍ि दवाओं को कब तक लेना है। हार्मोनल एक्‍ने, PCOS में हेयरफॉल और टेस्‍टोस्‍टेरोन (Testosterone) के लेवल को घटाने के ल‍िए भी डॉक्‍टर PCOS में गर्भन‍िरोधक गोल‍ी का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।

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PCOS में गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां खाने के नुकसान क्‍या हैं?

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Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में गर्भनि‍रोधक दवाओं के सेवन से कुछ मह‍िलाओं को मतली जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। मोटापा, स्‍मोक‍िंग या हाई बीपी के मरीजों में इन प‍िल्‍स के सेवन से ब्‍लड क्‍लॉट‍िंग की समस्‍या भी हो सकती है, लेकि‍न हर मामले में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है। इसल‍िए PCOS में ओरल कॉन्‍ट्रासेप्‍ट‍िव प‍िल्‍स लेने से पहले व्‍यक्‍त‍ि की उम्र, वजन, डायब‍िटीज, बीपी और अन्‍य बातों का ध्‍यान रखना जरूरी है।

2019 में Scientific Reports के एक मेटा र‍िव्‍यू के मुताब‍िक, ओरल कॉन्‍ट्रासेप्‍ट‍िव प‍िल्‍स (OCP), PCOS के इलाज में मास‍िक धर्म को न‍ियम‍ित करने और एंड्रोजन हार्मोन के स्‍तर को कंट्रोल करने में मदद कर सकती हैं। इससे त्‍वचा पर अनचाहे बाल, हेयर फॉल और मुंहासों की समस्‍या को दूर करने में मदद म‍िलती है। हालांक‍ि स्‍टडी में यह भी बताया गया है क‍ि ओरल कॉन्‍ट्रासेप्‍ट‍िव प‍िल्‍स का सेवन करने से कुछ मामलों में मोटापा, ह्रदय रोग वगैरह का खतरा बढ़ सकता है। इसल‍िए प‍िल्‍स लेने वाले मरीजों को इलाज के साथ‍ हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल पर भी फोकस करने की सलाह का ज‍िक्र क‍िया गया है। इसके अलावा PCOS में गर्भन‍िरोधक दवाएं खाने पर कुछ अन्‍य नुकसान भी देखने को म‍िलते हैं जैसे-

  • कुछ मरीजों में दवा बंद करने के बाद लक्षण दोबारा लौट सकते हैं।
  • कुछ मामलों में हाई बीपी की समस्‍या भी हो सकती है।
  • हार्मोनल बदलाव की वजह से मह‍िलाओं में चिड़चिड़ापन, मूड स्‍व‍िंग्‍स या उदासी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।
  • कुछ मह‍िलाओं में लिबिडो चेंज (Libido Change) यानी यौन इच्छा (sex drive) कम हो सकती है।
  • कुछ मह‍िलाओं को गर्भन‍िरोधक दवाएं लेने के कारण ब्रेकथ्रू ब्‍लीड‍िंग भी हो सकती है यानी पीर‍ियड्स के बीच हल्‍की ब्‍लीड‍िंग या स्‍पाॅट‍िंग की समस्‍या भी हो सकती है।

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OCP बंद करने के बाद क्या PCOS के लक्षण वापस आ जाते हैं?

हां, OCP बंद करने के बाद ये लक्षण दोबारा नजर आ सकते हैं। OCP केवल लक्षणों को कंट्रोल करती है, जैसे ही दवा बंद होती है, लक्षण दोबारा नजर आ सकते हैं। OCP बंद करने के बाद कई मरीजों को एक्‍ने, अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स और हेयर ग्रोथ जैसे लक्षण महसूस होते हैं। 2007 में The Journal Of Clinical Endocrinology & Metabolism नामक एक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, OCP बंद करने के आठ हफ्तों में एंड्रोजन और SHBG हार्मोन का स्‍तर बढ़ता हुआ देखा गया। SHBG हार्मोन, ब्‍लड में सेक्स हार्मोन (जैसे टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन) की मात्रा और प्रभाव को कंट्रोल करता है। स्‍टडी में देखा गया क‍ि दोनों हार्मोन OCP लेने पर कंट्रोल में थे, लेक‍िन दवा बंद होते ही वे फ‍िर पहले जैसे ही हो गए।

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PCOS में गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां कैसे चुनें?

2017 में Journal of Contraception में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ओरल कॉन्‍ट्रासेप्‍ट‍िव प‍िल्‍स (OCP), PCOS में पीर‍ियड्स को न‍ियम‍ित करने में मदद कर सकती हैं, लेक‍िन कुछ मामलों में इनका उपयोग मेटाबॉल‍िक जोख‍िम जैसे शुगर असंतुलन या ल‍िप‍िड में बदलाव को बढ़ा सकता है इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह के बगैर गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन नहीं करना चाह‍िए।

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि कई बार PCOS को मैनेज करने के ल‍िए मह‍िलाएं डॉक्‍टर की सलाह के बगैर ही गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन शुरू कर देती हैं, इसका नुकसान उनके स्‍वास्‍थ्‍य पर होता है। Dr. Smriti ने बताया क‍ि ओपीडी में अक्‍सर मह‍िलाएं गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन करने के बाद आती हैं। ऐसा करना सही नहीं माना जाता है। PCOS का इलाज केवल डॉक्‍टर की सला‍ह के मुताब‍िक ही कराना चाह‍िए।

ओरल कॉन्‍ट्रासेप्‍ट‍िव प‍िल्‍स से कई मह‍िलाओं में मूड स्‍व‍िंग्‍स, कार्डि‍योमेटाबॉल‍िक समस्याएं (हृदय और मेटाबॉलिज्म से संबंध‍ित समस्याएं) हो सकती हैं। इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह के बगैर प‍िल्‍स न लें। डॉक्‍टर की न‍िगरानी में चेक क‍िया जाता है क‍ि मरीज की उम्र क्‍या है? वह मोटापे का श‍िकार तो नहीं है? साथ ही हाई बीपी, स्‍ट्रोक, डायब‍िटीज या ब्‍लड क्‍लॉट‍िंग की संभावना पर भी गौर क‍िया जाता है। इस आधार पर डॉक्‍टर मरीज को ओरल कॉन्‍ट्रासेप्‍ट‍िव प‍िल्‍स खाने की सलाह देते हैं।

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क्‍या PCOS में गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां खाने से वेट लॉस होता है?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में वेट लॉस के ल‍िए गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां का सेवन ज्‍यादा असरदार नहीं देखा गया है। हालांक‍ि डॉक्‍टर की सलाह पर ली गई गर्भनि‍रोधक दवा PCOS को मैनेज करने में मदद कर सकती है, लेक‍िन इसका संबंध‍ वेट लॉस के ल‍िए देखने को नहीं म‍िला है। साथ ही इस पर पर्याप्‍त स्‍टडीज भी नहीं हैं जो यह बता सकें क‍ि गर्भन‍िरोधक दवाओं का PCOS में वेट लॉस से क‍ितना संबंध‍ है? PCOS में डॉक्‍टर की सलाह, दवाएं, हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल, हेल्‍दी डाइट की मदद से वेट लॉस में मदद म‍िल सकती है।

2024 में Journal of Clinical Endocrinology & Metabolism में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, PCOS के मरीजों में शुगर कंट्रोल करने वाली दवा मेटफॉर्मिन (Metformin) के साथ गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां खाने से वजन में फर्क देखा गया और फैट मास में कमी आई, लेक‍िन इस स्‍टडी की रेंज काफी सीमि‍त है इसल‍िए यह सीधे तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं करती क‍ि गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां खाने से PCOS में वेट लॉस होता है।

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क्‍या गर्भन‍िरोधक दवाएं PCOS का इलाज हैं?

गर्भनि‍रोधक दवाएं PCOS का इलाज नहीं हैं, लेक‍िन बर्थ कंट्रोल प‍िल्‍स की मदद से PCOS में अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स, हार्मोनल एक्‍ने या हेयरफाॅल को दूर करने में मदद मि‍ल सकती है।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि अगर आपको PCOS है, तो डॉक्‍टर की सलाह पर ही इलाज करवाएं। PCOS है और गर्भधारण के बारे में सोच रही हैं, तो डॉक्‍टर से पहले सलाह लें। अगर गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन कर रही हैं, तो डाॅक्‍टर सलाह दे सकते हैं क‍ि गर्भधारण कब करना चाह‍िए और इन दवाओं को बंद करने का सही समय क्‍या है? अचानक वजन या बीपी बढ़ने पर डॉक्‍टर से सलाह लें, मूड में ज्‍यादा बदलाव होने पर यानी डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन महसूस होने पर डॉक्‍टर की सलाह ले सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

Gynaecologist Dr. Smriti Agrawal और कुछ स्‍टडीज के आधार पर हमें इस लेख के जर‍िए पता चलता है क‍ि गर्भन‍िरोधक गोल‍ियां PCOS के लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, लेक‍िन यह गोलि‍यां PCOS का इलाज नहीं है। दवा के साथ-साथ सही न्‍यूट्र‍िशन, लाइफस्‍टाइल में बदलाव और हार्मोनल संतुलन बनाए रखना जरूरी है। गर्भनि‍रोधक दवाओं का सेवन करने से पहले डॉक्‍टर की सलाह लेना न भूलें।

FAQ

  • क्‍या केवल गर्भन‍िरोधक दवाएं PCOS के इलाज के ल‍िए काफी हैं?

    केवल गर्भन‍िरोधक दवाएं खाकर PCOS का इलाज नहीं हो सकता। इससे केवल लक्षणों को कुछ हद तक कंट्रोल क‍िया जा सकता है। PCOS के इलाज में लाइफस्‍टाइल में बदलाव, सही न्‍यूट्र‍िशन और हार्मोन्स को संतुल‍ित करने के तरीकों पर जोर द‍िया जाता है।
  • PCOS में गर्भन‍िरोधक दवाएं कब तक खा सकते हैं?

    PCOS में गर्भन‍िरोधक दवाएं आमतौर पर तीन से छह महीने या उससे कम समय के ल‍िए भी दी जाती हैं। यह मह‍िला की कंडीशन पर न‍िर्भर करता है। गर्भधारण की स्‍थि‍त‍ि या साइड इफेक्‍ट्स नजर आने पर डॉक्‍टर गर्भनि‍रोधक दवाओं का सेवन करने की सलाह नहीं देते हैं।
  • PCOS में डॉक्‍टर की सला‍ह के बगैर ओवर-द-काउंटर गर्भन‍िरोधक दवाएं ले सकते हैं?

    PCOS में डॉक्‍टर की सलाह के बगैर गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन नहीं करना चाह‍िए। इससे मतली, उल्‍टी या अन्‍य गंभीर शारीर‍िक समस्‍या हो सकती है।
  • गर्भन‍िरोधक दवाएं अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स के इलाज में मदद करती हैं?

    PCOS में अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स को ठीक करने के ल‍िए डॉक्‍टर गर्भनि‍रोधक दवाओं का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं, लेक‍िन पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होने पर इलाज के तौर पर सलाह के बगैर गर्भन‍िरोधक दवाओं का सेवन नहीं करना चाह‍िए। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 09, 2026 19:21 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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