हाल के साल में पुरुषों में इनफर्टिलिटी के मामले काफी ज्यादा बढ़े हैं। आपको बता दें कि अगर कोई कपल एक साल तक बिना प्रोटेक्शन के नियमित प्रयास के बावजूद कंसीव नहीं कर पाता है, तो उसे ही इनफर्टाइल यानी बांझपन की श्रेणी में रखा जाता है। हाल के सालों में भी पुरुषों में इनफर्टिलिटी के मामले काफी ज्यादा बढ़े हैं। इसके पीछे खराब जीवनशैली, मोटापा, नशीले पदार्थों का सेवन आदि कई कारण जिम्मेदार हैं। आइए, नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से जानते हैं इन कारणों के बारे में विस्तार से।
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1. वैरीकोसील
यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें पुरुषों के अंडकोष में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से प्रभावित हिस्से का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। एक्सपर्ट समझाते हैं कि यह समस्या ठीक पैरों में होने वाली वैरिकोज वेन्स जैसी है। बहरहाल, वैरीकोसील शुक्राणुओं के उत्पादन और उनकी क्वालिटी को नुकसान पहुंचाता है।
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Mayo Clinic की मानें, तो वैरीकोसील के कारण हमेशा बांझपन (इनफर्टिलिटी) नहीं होता है। एक अनुमान के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित केवल 10-20 फीसदी पुरुषों को ही पिता बनने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। हालांकि, यह भी सच है कि बांझपन की समस्या का सामना कर रहे पुरुषों में से लगभग 40 फीसदी पुरुषों में वैरीकोसील की समस्या भी है।
2. हार्मोनल असंतुलन
Mayo Clinic के अनुसार, सिर्फ महिलाओं में ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी हार्मोनल बदलाव के कारण इनफर्टिलिटी की समस्या हो जाती है। असल में, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे टेस्टोस्टेरोन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन, और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन के स्तर में बदलाव आने लगता है, जिससे स्पर्म प्रोडक्शन पर भी असर पड़ता है। जब शरीर में हार्मोन प्रोडक्शन प्रभावित हो, तो स्पर्म काउंट में भी गिरावट आने लगती है, जो कि इनफर्टिलिटी को ट्रिगर करता है।
3. संक्रमण और इंफेक्शन
क्लैमाइडिया और गोनोरिया जैसे यौन संचारित संक्रमण, प्रोस्टेटाइटिस और ऑर्काइटिस (अंडकोष में सूजन) स्पर्म हेल्थ को प्रभावित करते हैं। संक्रमण कितना गंभीर है और उसकी रिकवरी हो सकती है या नहीं, इस बात पर पुरुषों की इनफर्टिलिटी निर्भर करती है। आमतौर पर एंटीबायोटिक की मदद से संक्रमण का इलाज किया जाता है, जिससे फर्टिलिटी बेहतर हो जाती है। हालांकि, डॉक्टर साफ सलाह देते हैं कि इस तरह के संक्रमण का समय पर इलाज किया जाना जरूरी वरना स्थायी बांझपन की समस्या हो सकती है।
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4. जेनेटिक और आनुवंशिक विकार
PubMed के अनुसार, कुछ पुरुषों में जन्मजात कमियां होने के कारण उनमें स्पर्म प्रोडक्शन सही तरह से नहीं हो पाता है, जैसे क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पुरुष में दो एक्स और एक वाई क्रोमोसोम होते हैं, जो कि अंडकोष के सामान्य विकास को रोकता है।
5. इजैक्यूलेशन से जुड़ी समस्या
डॉ. विजय दहिफले बताते हैं, "जब पुरुषों को इजैक्यूलेट होने में दिक्कतें होती हैं, तो भी इनफर्टिलिटी की दिक्कत हो सकती है। इसमें कई तरह की समस्याएं शामिल हैं, जैसे रेट्रोग्रेड इजैक्यूलेशन इस समस्या में वीर्य बाहर निकलने के बजाय पीछे पेशाब की थैली (ब्लैडर) में चला जाता है। वहीं, एनइजैक्यूलेशन होने पर वीर्य बिल्कुल भी बाहर नहीं निकलता है और इजैक्यूलेटरी डक्ट ऑब्स्ट्रक्शन में शारीरिक रुकावट के कारण वीर्य का बहाव बंद हो जाता है।"
6. धूम्रपान और शराब का सेवन
डॉ. विजय दहिफले कहते हैं, "कुछ पुरुष नियमित रूप से धूम्रपान और शराब का सेवन करते हैं। ये दोनों ही बुरी आदतें स्पर्म क्वालिटी और टेस्टोस्टेरोन का स्तर भी प्रभावित करते हैं। अगर पुरुष अपनी इस आदत में सुधार नहीं करते हैं और अत्यधिक नशीले पदार्थ का सेवन करते हैं, तो इससे सिगरेट में मौजूद निकोटिन स्पर्म डीएनए को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में पुरुषों में इनफर्टिलिटी का जोखिम बढ़ जाता है, जिसकी पुरुषों को अनदेखी नहीं करनी चाहिए।"
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7. बढ़ता मोटापा
साल 2024 में Lifestyle and Environmental Influences on Male Fertility में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है, लेकिन यह सच है कि मोटापा भी इनफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण है। इसे डॉ. विजय दहिफले समझाते हैं, "अधिक वजन होने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन बढ़ता है और टेस्टोस्टेरोन कम होता है, जिससे शुक्राणुओं की संख्या घटती है। इसका सीधा-सीधा असर पुरुषों के बांझपन पर पड़ता है।" यही नहीं, तनाव भी पुरुषों में बांझपन का बड़ा कारण है। असल में, तनाव के कारण अच्छी नींद नहीं आती है, जिससे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे प्रजनन हार्मोन सही से रिलीज नहीं हो पाते हैं।
निष्कर्ष
मौजूदा जीवनशैली काफी हद तक पुरुषों की फर्टिलिटी को बुरी तरह प्रभावित करती है। ऐसा नहीं है कि इसमें सुधार नहीं किया जा सकता है। समय पर जीवनशैली से जुड़ी अच्छी आदतों को अपनाकर और बीमारी के अनुसार सही ट्रीटमेंट की मदद से पुरुष इनफर्टिलिटी का शिकार होने से बच सकते हैं। हां, अगर इसके बाद भी किसी दंपति को गर्भधारण करने में समस्या आ रही है, तो पति-पत्नी दोनों को जांच करवानी चाहिए।
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FAQ
क्या नियमित रूप से लैपटॉप को गोद में रखकर काम करने से स्पर्म क्वालिटी खराब हो सकती है?
हां, ऐसा होता है। दरअसल, लैपटॉप से निकलने वाली गर्मी अंडकोष के तापमान को सामान्य से बढ़ा देती है। इससे स्पर्म के उत्पादन और उनकी गतिशीलता को नुकसान पहुंचता है।क्या सीमेन एनालिसिस टेस्ट कराने से पहले कुछ दिनों का सेक्शुअल रेलशनशिप नहीं बनाना चाहिए?
डॉक्टर का कहना है कि सही रिजल्ट के लिए सीमेन एनालिसिस टेस्ट कराने से 2 से 7 दिनों तक यौन संबंध से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
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Aug 18, 2026 18:30 IST
Modified By : Meera Tagore Aug 18, 2026 18:30 IST
Modified By : Meera TagoreAug 18, 2026 18:30 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale