Fri Oct 23, 2026 | 05:38 AM IST

Medically Reviewed by Dr Vijay S Dahiphale , Consultant Urologist, Andrologist & Sexologist

स्पर्म काउंट और स्पर्म की क्वालिटी: जानें इनमें से क्या है ज्यादा जरूरी?

क्या आपको भी यह कंफ्यूजन है कि स्पर्म क्वालिटी और काउंट में से ज्यादा जरूरी क्या होता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। जानकारी के लिए बता दें कि स्पर्म काउंट की तुलना में स्पर्म क्वालिटी अधिक जरूरी है, लेकिन क्यों, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
स्पर्म काउंट और स्पर्म की क्वालिटी: जानें इनमें से क्या है ज्यादा जरूरी?स्पर्म काउंट और स्पर्म की क्वालिटी: जानें इनमें से क्या है ज्यादा जरूरी?

Sperm Count vs Sperm Quality: पुरुषों के प्रजनन की बात आते ही इसे स्पर्म काउंट और स्पर्म की क्वालिटी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा होने की ठोस वजह है। स्पर्म की क्वालिटी और उसका काउंट महिला के अंडों तक जाने के लिए आवश्यक है। अगर स्पर्म क्वालिटी सही नहीं होगी, तो वह अंडों तक पहुंचने के बाद भी निषेचित नहीं हो पाएंगे और महिला कंसीव नहीं कर सकेगी। इसी तरह, अगर काउंट में कमी आती है, तो भी प्रेग्नेंसी में समस्या हो सकती है। ऐसे में पुरुषों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर स्पर्म काउंट और स्पर्म क्वालिटी की तुलना में ज्यादा जरूरी क्या है? इस बारे में जानने के लिए हमने मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले से बात की।

स्पर्म काउंट और स्पर्म क्वालिटी में से क्या है ज्यादा जरूरी?

Sperm count or sperm quality know which is more important 1 (13)Sperm count or sperm quality know which is more important 1 (13)

कंसीव करने के लिहाज से देखा जाए, तो स्पर्म काउंट और क्वालिटी दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं। यह नहीं कहा जा सकता है कि कोई एक चीज अधिक जरूरी है। हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि स्पर्म काउंट और क्वालिटी के लिहाज से जाए, तो स्पर्म क्वालिटी अधिक जरूरी होती है। इस संबंध में डॉ. विजय दहिफले बताते हैं, "स्पर्म काउंट से ज्यादा क्वालिटी पर जोर दिया जाना चाहिए, क्योंकि यही ज्यादा जरूरी है। वास्तव में, अगर करोडों की संख्या में स्पर्म मौजूद हों, लेकिन उनकी क्वालिटी सही न हो, वे सही दिशा में तैर नहीं सकते या उनकी बनावट ठीक नहीं है, तो वे अंडे तक पहुंचकर उसे फर्टिलाइज नहीं कर पाएंगे।" डॉ. विजय दहिफले अपनी बात आगे समझाते हैं, "दूसरी तरफ, अगर स्पर्म काउंट की बात करें, उसकी संख्या में कमी होने के बावजूद अगर उनकी तैरने की स्पीड सही है और हेल्थ बेहतर है, तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।"

स्पर्म क्वालिटी क्यों है ज्यादा जरूरी है?

स्पर्म क्वालिटी कई मायनों में बहुत जरूरी होती है। इसे विस्तार से डाॅ. विजय दहिफले समझाते हैं-

स्पर्म मोटिलिटी

हेल्दी स्पर्म के लिए मूवमेंट करना आसान होता है और उनकी गति भी तेज होती है ताकि वे आसानी से अंडे तक पहुंच सके। वहीं, अगर स्पर्म क्वालिटी खराब हो, तो उसकी आगे बढ़ने की गति धीमी होगी। ऐसे में अगर स्पर्म करोड़ों की संख्या में भी मौजूद हों, तो भी उसके लिए अंडे तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जिससे कंसीव करने में दिक्कतें आती हैं। साल 2008 में Sperm Motility में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, शुक्राणु की गतिशीलता पुरुषों की प्रजनन क्षमता का सबसे जरूरी पहलू होता है।

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स्पर्म का आकार

स्पर्म क्वालिटी का एक हिस्सा उसके आकार को भी माना जा सकता है। आमतौर पर स्पर्म का आकार अंडाकार और एक लंबी पूंछ होनी चाहिए। विशेषज्ञ बताते हैं कि स्पर्म की मोबिलिटी यानी गतिशीलता उसके आकार पर निर्भर करती है। अगर स्पर्म का आकार टेढ़ा या खराब हो, तो उसके लिए अंडे की बाहरी परत को भेदते हुए अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। 

स्पर्म डीएनए फ्रैग्मेंटेशन (Sperm DNA Fragmentation)

इसका मतलब होता है कि स्पर्म के अंदर मौजूद DNA का क्षतिग्रस्त होना। कहने का अर्थ यह है कि स्पर्म क्वालिटी सिर्फ उसके आकार और गतिशीलता पर ही निर्भर नहीं करती है। असल में, स्पर्म क्वालिटी डीएनए फ्रैग्मेंटेशन पर भी आधारित है यानी उसका मजबूत होना बहुत जरूरी है। अगर स्पर्म का डीएनए कमजोर है, तो गर्भधारण हो भी जाए तो भी गर्भपात होने या भ्रूण का विकास रुकने का खतरा बढ़ जाता है। JBRA Assisted Reproduction (2024) जर्नल में प्रकाशित एक वैज्ञानिक रिव्यू आर्टिकल से भी पता चलता है कि स्पर्म डीएनए फ्रैग्मेंटेशन के कारण प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना को घटाता है। साथ ही यह IVF और ICSI जैसी प्रजनन तकनीकों में भ्रूण की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जिससे सफलता दर गिरती है और बार-बार मिसकैरेज का रिस्क भी बढ़ता है।

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स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित करने वाले कारक

स्पर्म क्वालिटी को कई तरह के फैक्टर्स प्रभावित करते हैं। इनकी अनदेखी न करें। डाॅ. विजय दहिफले के अनुसार-

  1. नशीले पदार्थों का सेवन: जो पुरुष किसी भी रूप में नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, जैसे स्मोकिंग या शराब का सेवन, उनमें स्पर्म क्वालिटी खराब हो सकती है। असल में, इनमें मौजूद टाॅक्सिंस स्पर्म के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं।
  2. बढ़ता वजन और मोटापा: पुरुषों का बढ़ता वजन और मोटापा भी स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन सी, ई और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी के चलते स्पर्म की गुणवत्ता गिरती है। साल 2023 में प्रकाशित Reproductive Health के अनुसार, डाइट का भी स्पर्म काउंट पर भी असर पड़ता है।
  3. मेडिकल कंडीशनः कई बीमारियां भी स्पर्म क्वालिटी को खराब करती है और उसके काउंट को कम करती है। इसमें एसटीआई, वैरीकोसेल (पुरुषों के अंडकोष की नसों का एक सूजा हुआ हिस्सा) और हार्मोनल इंबैलेंस भी पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। Oncoscience नामक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च आर्टिकल से भी पता चलता है कि जीवनशैली से जुड़े कारक और हार्मोनल असंतुलन, स्पर्म क्वालिटी और शुक्राणु के DNA को गहराई से प्रभावित करते हैं।
  4. बढ़ती उम्रः जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे उनमें स्पर्म क्वालिटी, काउंट और उसकी मोटिलिटी कम होने लगती है। इसलिए, अगर अधिक उम्र में स्पर्म काउंट बहुत ज्यादा हो, तो भी स्पर्म क्वालिटी बिगड़ जाती है, क्योंकि उनकी तैरने की क्षमता कमजोर हो जाती है। जाहिर है ऐसे स्पर्म आसानी से अंडे तक नहीं पहुंच पाते।

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निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि स्पर्म क्वालिटी, स्पर्म काउंट की तुलना में ज्यादा जरूरी होते हैं। स्पर्म क्वालिटी में कई चीजें शामिल होती हैं, जिसमें स्पर्म की मोटिलिटी, उसका आकार आदि सब शामिल होते हैं। अगर स्पर्म काउंट ज्यादा है, लेकिन उसका आकार सही नहीं है और न ही उसकी गतिशीलता सही है, तो ऐसे में उसके लिए अंडे तक जाना बहुत मुश्किल हो जाता है। साथ ही, अंडे की क्वालिटी उसके डीएनए पर भी निर्भर करती है। अगर किसी पुरुष को लगे कि उसके स्पर्म की गुणवत्ता खराब है, तो ऐसे में वे डाॅक्टर के पास जाकर अपना ट्रीटमेंट करवा सकते हैं।

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FAQ

  • क्या वीर्य के रंग और गाढ़ेपन से स्पर्म क्वालिटी का पता चल सकता है?

    आमतौर पर सीमेन हल्का सफेद या स्लेटी और गाढ़ा होता है। यदि यह पानी जैसा पतला है या इसका रंग पीला, हरा या लाल दिखाई दे, तो यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • पुरुषों में स्पर्म पैरामीटर्स (काउंट और मोटिलिटी) जांचने के लिए कौन सा टेस्ट कराया जाता है?

    डॉक्टर की सलाह पर सीमेन एनालिसिस या स्पर्मियोग्राम टेस्ट कराया जाता है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 22, 2026 11:26 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jul 22, 2026 11:26 IST

    Published By : Meera Tagore
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