आईवीएफ तकनीक के जरिए महिलाओं की प्रेग्नेंसी का स्तर काफी बढ़ सकता है, लेकिन इस तकनीक के इस्तेमाल से पहले उनके मन में कई सवाल होते हैं, जिनमें सबसे जरूरी होता है कि आईवीएफ यानी In Vitro Fertilization(IVF) की सफलता किन बातों पर निर्भर करती है? Dr. Hrishikesh Pai, Consultant Gynecologist & IVF Specialist, Lilavati Hospital, Mumbai ने बताया कि कई बार ओवेरियन रिजर्व की रिपोर्ट में एग्ज काउंट कम देखकर टेंशन में आ जाती है। इसलिए मैं बताना चाहूंगा कि सिर्फ एग्ज की संख्या देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि IVF सफल होगा या नहीं। इसके साथ एक स्वस्थ भ्रूण बनने के बाद सफल ट्रांसप्लांट होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एग काउंट ज्यादा होने के फायदे
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “IVF में एग्ज की संख्या निश्चित रूप से मायने रखती है, क्योंकि ज्यादा एग्ज होने पर फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो बनने के ज्यादा मौके मिल सकते हैं। जब महिलाएं IVF कराती हैं, तो स्टेप बाय स्टेप IVF प्रोसेस होता है। पहले हार्मोनल मेडिसिन के जरिए फोलिकल्स तैयार किए जाते हैं और फिर एग निकाले जाते हैं। जितने ज्यादा मैच्योर एग मिलते हैं, उतना ही एग को फर्टिलाइज करने का मौका मिलता है। इसके साथ, यह भी ध्यान रखना जरूरी होता है कि अगर 15 से 20 एग्ज मिल गए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी की संभावना बढ़ सकती है।”
एग काउंट का कैसे पता चलता है?
Dr. Hrishikesh Pai ने बताया कि IVF से पहले एग्ज और हार्मोनल बदलावों को जानने के लिए कई टेस्ट कराए जाते हैं। ओवेरियन रिजर्व यानी अंडाशय में एग्ज की संख्या पता करने के लिए AMH यानी Anti-Müllerian Hormone (AMH), अल्ट्रासाउंड और एंट्ररल फोलिकल काउंट (AFC) टेस्ट किए जाते हैं। इसके साथ-साथ महिला की उम्र भी चेक की जाती है। अगर AMH या AFC होता है, तो इसका मतलब है कि ओवेरियन रिजर्व कम हो सकता है। ऐसे में एग्ज मिलने की संभावना कम हो सकती है।
हालांकि, कम ओवेरियन रिजर्व होने का मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी संभव नहीं है, बल्कि यह सिर्फ IVF के दौरान मिलने वाले एग्ज की जानकारी देता है। इसलिए सिर्फ एग्ज की संख्या पर ही निर्भर होना काफी नहीं है।

यह भी पढ़ें- IVF बार-बार हो रहा है फेल? इसके 7 सबसे आम कारण बता रही हैं फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. शोभा गुप्ता
एग क्वालिटी होने के फायदे
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “एग क्वालिटी का मतलब यह है कि एग फर्टिलाइज होने के बाद एम्ब्रियो बनने में कितना सक्षम है। इसमें महिलाओं की उम्र काफी मायने रखती है,क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ एग्ज में क्रोमोसोमल असामान्यताएं बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। इसका असर फर्टिलाइजेशन, एम्ब्रियो विकास और ट्रांसप्लांट पर पड़ सकता है। बढ़ती उम्र के साथ मिसकैरेज का रिस्क बढ़ सकता है।”
Dr. Hrishikesh Pai ने बताया कि अगर एक महिला में 10 से ज्यादा एग्ज मिले हैं, लेकिन उसमें से बहुत कम एग्ज ऐसे हैं, जो हेल्दी हैं, तो उनमें से हेल्दी एम्ब्रियो बनने की संभावना काफी कम हो सकती है। वहीं अगर किसी महिला के कुछ ही एग्ज हैं, लेकिन उनमें से सेहतमंद भ्रूण बन रहा है, तो वही भ्रूण प्रेग्नेंसी का आधार बन सकता है।
एग काउंट या एग क्वालिटी, क्या ज्यादा जरूरी है?
Dr. Hrishikesh Pai ने कहा, “एग क्वालिटी और एग काउंट, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। एग काउंट ज्यादा होने पर फर्टिलाइजेशन के कई चांस मिल सकते हैं, लेकिन एग क्वालिटी से स्वस्थ भ्रूण बनने की संभावना बढ़ सकती है।
IVF में एग निकालने के बाद भी कई महत्वपूर्ण स्टेज होते हैं। हर एग फर्टिलाइज हो, ऐसा जरूरी नहीं है और हर फर्टिलाइज एग एम्ब्रियो बन जाए, ये भी जरूरी नहीं है। इसलिए IVF के प्रोसेस में एग की संख्या और एग क्वालिटी दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
क्या कहती है रिसर्च?
Reproductive Medicine and Biology के अनुसार, इनफर्टिलिटी का इलाज करते समय कई फैक्टर्स बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसमें अच्छी क्वालिटी के एग्ज लेना भी जरूरी है। एग की क्वालिटी महिला की उम्र के अलावा, कंट्रोल्ड ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन प्रोटोकॉल भी एग्ज की क्वालिटी पर असर डाल सकते हैं। अगर एग्ज निकालने के तुरंत बाद इन्हें फर्टिलाइज करने के बजाय 3 से 6 घंटे के लिए इसे ओसाइट मैचुरेशन मीडियम में रखा जाए, तो तीसरे दिन अच्छी क्वालिटी के एम्ब्रियो की दर में बढ़ोतरी हो सकती है।
डॉक्टर की सलाह
Dr. Hrishikesh Pai सलाह देते हैं कि महिलाओं को आईवीएफ कराने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, ताकि महिलाओं के लाइफस्टाइल को हेल्दी बनाकर एग क्वालिटी को बेहतर करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, इसका कोई निश्चिंत तरीका नहीं हैं लेकिन संतुलित और पौष्टिक खाना, पर्याप्त नींद, नियमित फिजिकल एक्टिविटी करके और स्मोकिंग व शराब से दूर रहकर प्रोडेक्टिव हेल्थ को बेहतर किया जा सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की दवा या सप्लीमेंट न लें।
यह भी पढ़ें- IVF से जुड़े 7 मिथक, जिन पर आज भी लोग करते हैं भरोसा, जानें Fertility एक्सपर्ट डॉ. शोभा गुप्ता से सच्चाई
निष्कर्ष
IVF की सफलता सिर्फ एग काउंट या एग क्वालिटी पर निर्भर नहीं करती। महिला की उम्र, ओवेरियन रिजर्व, स्पर्म क्वालिटी, फर्टिलाइजेशन, एम्ब्रियो के विकास और यूटरस की स्थिति जैसे कई फैक्टर्स बहुत महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि IVF का इलाज करते समय हर महिला की स्थिति देखकर ही अलग-अलग इलाज प्लान किया जाता है।
All Image Credit: Magnific
FAQ
महिलाओं में एग क्वालिटी खराब होने का सबसे बड़ा कारण क्या है?
बढ़ती उम्र, एग क्वालिटी को प्रभावित करने वाला सबसे मुख्य कारक है। 35 साल की उम्र के बाद अंडों में क्रोमोसोमल असंतुलन की संभावना तेजी से बढ़ जाती है। इसके अलावा,खराब लाइफस्टाइल, धूम्रपान और स्ट्रेस भी जिम्मेदार हैं।पीएमओएस (PMOS) से पीड़ित महिलाओं में एग काउंट ज्यादा होने के बावजूद आईवीएफ में चुनौती क्यों आती है?
PMOS में अंडों की संख्या (AMH) बहुत अधिक होती है, लेकिन हार्मोनल असंतुलन के कारण अंडों की मैच्योरिटी और क्वालिटी प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर दवाओं से क्वालिटी बेहतर करने पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Sep 14, 2026 17:08 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Hrishikesh D Pai