जब कपल को लगातार कई सालों से बिना प्रोटेक्शन के सेक्शुअल इंटरकोर्स करने के बाद भी प्रेग्नेंसी नहीं होती, ततो ऐसे में कपल के टेस्ट होने के बाद डॉक्टर उन्हें IVF (In Vitro Fertilization) की सलाह दे सकते हैं। कई बार लोग टेस्ट ट्यूब बेबी कराने की भी बात करते हैं, तो क्या IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी करना, दो अलग-अलग प्रक्रिया है या फिर एक? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Hrishikesh Pai, Consultant Gynaecologist & IVF Specialist, Lilavati Hospital Mumbai and Fortis Hospitals Delhi & Chandigarh से बात की। उन्होंने कहा कि आम लोगों के बीच टेस्ट ट्यूब बेबी शब्द ज्यादा बोला जाता है। इसलिए लोगों को दिमाग में कन्फ्यूजन रहती है।
IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी में क्या अंतर है?
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “IVF और टेस्ट ट्यूब बेबी दोनों एक ही प्रोसेस है। मेडिकल साइंस में IVF कहा जाता है, तो लोग आम बोलचाल की भाषा में इसे टेस्ट ट्यूब बेबी कह देते हैं। दोनों के बीच कोई भी तकनीकी अंतर नहीं है। मेरे पास भी कई कपल आते हैं, जो मानते हैं कि बच्चा किसी टेस्ट ट्यूब में होता है, जबकि यह बिल्कुल गलत है। असल में IVF के शुरुआती दौर में फार्टिलाइजेशन प्रोसेस को समझाने के लिए टेस्ट ट्यूब बेबी शब्द का इस्तेमाल हुआ था और इस वजह से लोगों ने IVF को टेस्ट ट्यूब बेबी कहना शुरू कर दिया। अब फर्टिलाइजेशन खास लैब, इनक्यूबेटर और मॉडर्न एम्ब्रायोलॉजी सिस्टम में किया जाता है, न कि किसी टेस्ट ट्यूब में। इसके बाद भ्रूण बनने के बाद महिला के यूटरस में ट्रांसफर कर दिया जाता है और उसके बाद बच्चे का विकास बिल्कुल उसी तरह होता है, जैसे नेचुरल प्रेग्नेंसी में होता है।”
IVF क्या होता है?
Statpearls Publishing के अनुसार, दुनिया का पहला टेस्ट ट्यूब बेबी लुईस ब्राउन का जन्म 1978 में यूनाइटेड किंगडम (इग्लैंड) में हुआ था। तब से अब तक दुनिया भर में करीब एक करोड़ बच्चों का जन्म असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) के जरिए हो चुका है। अमेरिका में होने वाले कुल जन्म में IVF का हिस्सा 2.6% है।
Dr. Hrishikesh Pai के मुताबिक, “IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) है। इसमें हार्मोनल दवाओं के जरिए महिला के एग्ज को बाहर निकाला जाता है और इसे लैब में पुरुष के स्पर्म के साथ मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है, जहां आगे गर्भावस्था सामान्य तरीके से विकसित होती है।”
ivf and test tube baby
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IVF की जरूरत किन महिलाओं को पड़ सकती है?
Statpearls Publishing के इसी जर्नल में बताया गया है कि डॉक्टर्स IVF कराने के लिए इन कपल्स को सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा, डॉक्टर मरीज की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए ही IVF की सलाह देते हैं।
- जिन महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक या क्षतिग्रस्त होती है।
- यूटरस की परत के बाहर क्रोनिक सूजन के कारण एग्स के बनने और भ्रूण के चिपकने की क्षमता पर असर पड़ता है। यह स्थिति एंडोमेट्रियोसिस कही जाती है।
- अगर पुरुषों का स्पर्म काउंट में कमी, स्पर्म की स्पीड न होना या खराब आकार होने पर IVF की सलाह दी जा सकती है।
- बढ़ती उम्र में महिलाओं के एग्स की संख्या और क्वालिटी में कमी हो जाती है।
- अगर एग्स ठीक से नहीं बनते, जिन महिलाओं को PMOS की समस्या होती है, उन्हें IVF की सलाह दी जा सकती है।
- कैंसर के मरीजों की कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी से पहले एग्स फ्रीज करा देते हैं। इलाज पूरा होने के बाद प्रेग्नेंसी के लिए IVF तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
IVF की प्रक्रिया क्या है?
Dr. Hrishikesh Pai कहते हैं, “IVF की प्रक्रिया के कई चरण होते हैं। इसलिए इसे एक दिन में पूरा नहीं किया जा सकता। सबसे पहले महिला और पुरुष के सभी मेडिकल चेकअप होते हैं और फिर महिला को कुछ दिनों तक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि एक के बजाय कई एग्स बनें। इस दौरान अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट के जरिए रेगुलर चेकअप होता है। इसके बाद जब एग्स मैच्योर हो जाते, तो इन्हें एनेस्थीसिया देकर निकाल लिया जाता है और पुरुष के स्पर्म लेकर लैब में एग और स्पर्म को फर्टिलाइज किया जाता है। इसमें एक स्वस्थ स्परम को एग में डालकर एम्ब्रियो तैयार किया जाता है। इस दौरान एम्ब्रायोलॉजिस्ट उसकी क्वालिटी को लगातार मॉनिटर करते हैं। इसके बाद स्वस्थ एम्ब्रियो को पतली कैथेटर की मदद से गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है। करीब 10 से 14 दिन बाद ब्लड टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि गर्भधारण सफल हुआ या नहीं।”
IVF की सफलता किन बातों पर निर्भर करती है?
Dr. Hrishikesh Pai के अनुसार, “हर कपल का IVF रिजल्ट अलग-अलग हो सकता है, क्योंकि इसमें महिला की उम्र, ओवरी रिजर्व, एग और स्पर्म क्वालिटी, यूटरस की कंडीशन, मोटापा और फर्टिलिटी सेंटर पर निर्भर करता है। आमतौर पर 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में सफलता की संभावना ज्यादा होती है।”
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निष्कर्ष
Statpearls Publishing के इसी जर्नल में कहा गया है कि जिन महिलाओं को हार्ट से जुड़ी बीमारियां जैसे गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन या ईसेनमेंगर सिंड्रोम है, उन्हें IVF की सलाह नहीं दी जाती। इसके अलावा, पेल्विक इंफेक्शन, अनियंत्रित लिवर/किडनी की बीमारी, अनियंत्रित डायबिटीज या गंभीर हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में पहले इन बीमारियों को दवाइयों से नियंत्रित किया जाता है, उसके बाद ही IVF की प्रक्रिया शुरू की जाती है। IVF कराने की सलाह डॉक्टर कपल की मेडिकल हिस्ट्री और टेस्ट के रिजल्ट के बाद ही लेते हैं।
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FAQ
IVF का वैज्ञानिक मतलब क्या होता है?
In Vitro का लैटिन में मतलब होता है कांच के भीतर या शरीर से बाहर और Fertilization का मतलब है अंडे और स्पर्म का मिलना। यानी वह प्रक्रिया जिसमें प्रेग्नेंसी की शुरुआती क्रिया महिला के गर्भाशय के बजाय लैब के एक नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में की जाती है।क्या IVF से पैदा होने वाले बच्चे सामान्य बच्चों से अलग होते हैं?
डॉ. ऋषिकेश पाई बताते हैं कि आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक से पैदा हुए बच्चे शारीरिक, मानसिक और आनुवंशिक रूप से पूरी तरह सामान्य बच्चों जैसे ही होते हैं।
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Jul 20, 2026 20:02 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Hrishikesh D Pai
