अगर कोई महिला गर्भवती नहीं हो पा रही है, तो इसका कारण सिर्फ महिला ही नहीं होती। पुरुषों में भी बांझपन की समस्या हो सकती है। कई मामलों में पुरुषों के वीर्य यानी सीमन में स्पर्म ही नहीं होते। इसे मेडिकल भाषा में एजोस्पर्मिया कहा जाता है। यह पुरुषों के बांझपन की गंभीर स्थितियों में से एक हो सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जीरो स्पर्म की कंडीशन में पेरेंट्स बनना कितना मुश्किल हो सकता है? इस कंडीशन में कपल के प्रेग्नेंट होने की स्थिति के बारे में जानने के लिए हमने Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi से बात की।
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि जब पुरुषों में जीरो स्पर्म की समस्या होती है, तो उसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है और साथ ही यह भी चेक किया जाता है कि क्या अंडकोष में स्पर्म बन रहे हैं या नहीं। इसके अलावा, पेरेंट्स बनने के सपने को IVF के जरिए पूरा करना आसान हो गया है।
एजोस्पर्मिया क्या होता है?
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “जब दो या इससे ज्यादा बार वीर्य की जांच के दौरान स्पर्म न पाए जाए, तो इस कंडीशन को एजोस्पर्मिया कहा जाता है। पुरुषों में स्पर्म न होना दो तरह से हो सकता है। इसे ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया और नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया कहा जाता है।”
1. ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया - इसमें अंडकोष में स्पर्म बनते हैं, लेकिन बाहर आने के रास्ते में रुकावट आ सकती है। इसका कारण जन्मजात समस्या, संक्रमण, चोट या पहले हुई किसी सर्जरी हो सकती है। ऐसे मामलों में शरीर में मौजूद स्पर्म को खास तकनीक के जरिए निकाला जाता है और फिर IVF में इस्तेमाल किया जा सकता है।
2. नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया - Asian Journal of Andrology के मुताबिक, पुरुषों के बांझपन का यह सबसे गंभीर रुप होता है, जिसके करीब पुरुषों में 10 से 15% मामले पाए जाते हैं। इस स्थिति में समस्या स्पर्म बनने की प्रक्रिया में होती है। इसके पीछे हार्मोनल गड़बड़ी, आनुवंशिक कारण, अंडकोष की कार्यक्षमता में कमी, कुछ दवाएं, कीमोथेरेपी या रेडिएशन जैसे कारण हो सकते हैं।
Dr. Vineet Malhotra मानते हैं कि यह स्थिति थोड़ी मुश्किल होती है, लेकिन यहां भी कुछ पुरुषों के अंडकोष में बहुत कम मात्रा में स्पर्म बनने की संभावना रहती है। इसलिए केवल सीमन रिपोर्ट में स्पर्म न मिलने से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि अंडकोष में बिल्कुल भी स्पर्म नहीं बन रहे।
IVF helps in zero sperm
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एजोस्पर्मिया में IVF कैसे मदद करता है?
Dr. Vineet Malhotra का कहना है, “एजोस्पर्मिया की पुष्टि होने के बाद सबसे पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, हार्मोनल टेस्ट, जेनेटिक टेस्टिंग और जरूरत पड़ने पर टेस्टिकुलर बायोप्सी की जा सकती है। अगर अंडकोष में स्पर्म मिल जाते हैं, तो उसे इस प्रक्रिया से निकाला जा सकता है। इसमें ये तकनीकें शामिल की जा सकती है।”
- ESA (Testicular Sperm Aspiration)
- PESA (Percutaneous Epididymal Sperm Aspiration)
- TESE (Testicular Sperm Extraction)
- Micro-TESE (Microsurgical Testicular Sperm Extraction)
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि स्पर्म निकालने के बाद उसे आईसीएसआई (Intracytoplasmic Sperm Injection) तकनीक के जरिए सीधा महिला के एग्ज के अंदर डाला जाता है। इसके बाद बने भ्रूण को कुछ दिनों तक लैब में विकसित करके वापस गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।
IVF कैसे मदद करता है?
Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया में स्पर्म निकालना आसान होता है, जबकि नॉन ऑब्सट्रक्टिव एजोस्पर्मिया में कुछ पुरुषों में टेस्टिस के अंदर छोटी-छोटी जगहों पर स्पर्म प्रोडक्शन होता है। जब पुरुषों के स्पर्म विशेष तकनीक के जरिए बाहर निकाले जाते हैं और उसके बाद लैब में स्वस्थ स्पर्म को एग के साथ फर्टिलाइज किया जाता है और फिर भ्रूण को महिला के यूटरस में वापस रख दिया जाता है। इस तकनीक को आईवीएफ कहा जाता है।
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “हालांकि, एजोस्पर्मिया के हर मामले में आईवीएफ नहीं किया जा सकता। कुछ मामलों में हार्मोनल दवाओं से स्पर्म बनने की प्रक्रिया में सुधार किया जा सकता है। वहीं कुछ मरीजों में स्पर्म बिल्कुल नहीं मिलते। ऐसी स्थिति में डॉक्टर डोनर स्पर्म जैसे विकल्पों पर भी बात कर सकते हैं।”
इलाज से पहले पुरुषों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
Dr. Vineet Malhotra ने पुरुषों को सलाह दी है कि अगर सीमन की जांच में स्पर्म न मिल रहे हो, तो घबराने की जरूरत नहीं होती। इलाज से पहले पुरुषों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि इलाज बेहतर तरीके से हो सके।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार दोबारा सीमन एनालिसिस कराएं।
- जरूरत पड़ने पर हार्मोनल और जेनिटिक टेस्ट भी कराएं।
- स्मोकिंग, शराब और किसी तरह के नशीली चीजें बिल्कुल न लें।
- वजन, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन या सप्लीमेंट्स बिल्कुल न लें।
- इलाज शुरू करने में बिल्कुर भी देरी न करें।
- किसी अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ या एंड्रोलॉजिस्ट से सलाह लें।
निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि अगर कपल को एक साल तक नियमित संबंध बनाने के बाद भी प्रेग्नेंसी न हो, तो पुरुष और महिला दोनों की फर्टिलिटी टेस्ट कराना चाहिए, ताकि समय पर कारणों का पता चल सके। पुरुषों में इनफर्टिलिटी टेस्ट में सिर्फ स्पर्म काउंट ही नहीं होता, बल्कि मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर हार्मोनल टेस्ट भी शामिल होते हैं। जिन पुरुषों को एजोस्पर्मिया यानी जीरो स्पर्म की दिक्कत होती है, वे IVF की मदद से पिता बन सकते हैं।
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FAQ
क्या एजोस्पर्मिया की जांच के लिए जेनेटिक टेस्ट कराना जरूरी है?
नॉन-ऑब्स्ट्रक्टिव मामलों में Karyotyping और Y-chromosome Microdeletion टेस्ट कराया जाता है। इससे यह पता चलता है कि स्पर्म न बनने के पीछे कोई आनुवंशिक कारण तो नहीं है, जिससे इलाज की सफलता तय होती है।धूम्रपान, शराब और अत्यधिक गर्मी (Hot Baths/Laptops) क्या एजोस्पर्मिया का कारण बन सकते हैं?
ये सीधे तौर पर ब्लॉकेज नहीं करते, लेकिन अंडकोष के तापमान को बढ़ाकर स्पर्म बनने की प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। इससे स्पर्म काउंट तेजी से गिरकर बेहद कम हो सकता है।
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Current Version
Aug 28, 2026 11:31 IST
Modified By : Aneesh Rawat Aug 28, 2026 11:31 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra
