Wed Oct 14, 2026 | 08:42 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineet Malhotra , Consultant Urologist, Andrologist & Microsurgeon

पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने के 6 कारण, डॉक्टर से जानें इसे बढ़ाने के तरीके

पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना एक गंभीर समस्या बना हुआ है। इस कारण फर्टिलिटी से जुड़ी दिक्कतें भी देखने को मिलती हैं। स्पर्म काउंट कम होने का सबसे बड़ा कारण लाइफस्टाइल और डाइट से जुड़ा हो सकता है। इस लेख में डॉक्टर ने स्पर्म काउंट को बढ़ाने के कई तरीके भी बताए हैं।
पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने के 6 कारण, डॉक्टर से जानें इसे बढ़ाने के तरीकेपुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने के 6 कारण, डॉक्टर से जानें इसे बढ़ाने के तरीके

पुरुषों में स्पर्म काउंट यानी शुक्राणुओं की संख्या कम होना गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। इसका असर सिर्फ फर्टिलिटी पर ही नहीं पड़ता, बल्कि पुरुषों की सेहत भी प्रभावित होती है। आमतौर पर पुरुष स्पर्म काउंट को लेकर ज्यादा बात करना पसंद नहीं करते और इस वजह से कई बार गलत तरीकों से स्पर्म काउंट बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसलिए हमने Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि भारत में लोग स्पर्म काउंट जैसे मुद्दों पर बात करने से हिचकते हैं और इस वजह से कई बार सही इलाज भी नहीं हो पाता। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि स्पर्म काउंट कम होने का कारण क्या है? आमतौर पर स्पर्म काउंट कम होने की वजह मोटापा, स्मोकिंग, स्ट्रेस, बदलता लाइफस्टाइल और प्रदूषण हो सकता है।

पुरुषों का स्पर्म काउंट क्यों कम हो रहा है?

Human Reproduction Update में प्रकाशित एक विश्लेषण में 1973 से 2018 के बीच के आंकड़ों पर रिसर्च की गई थी। इसमें 223 अध्ययनों के नतीजे शामिल थे। रिसर्चर्स ने पाया कि स्टडी में पुरुषों को उनकी प्रजनन क्षमता के आधार पर नहीं चुना गया था। साल 1973 से 2018 के बीच लगभग स्पर्म कंसंट्रेशन में 51.6% की गिरावट दर्ज की आई थी। इसमें सबसे दिलचस्प यह था कि साल 2000 के बाद पुरुषों के स्पर्म काउंट तेजी से गिरने शुरू हुए थे।

इसका यह मतलब नहीं है कि अब तक हर पुरुष का स्पर्म काउंट आधा हो गया है या सभी पुरुषों में बांझपन की समस्या बढ़ गई है। स्पर्म कंसंट्रेशन का मतलब वीर्य के एक मिलीलीटर में शुक्राणुओं की संख्या है, जबकि कुल स्पर्म काउंट पूरे वीर्य में मौजूद शुक्राणुओं की संख्या बताता है। इसलिए फर्टिलिटी के लिए स्पर्म काउंट को समझने के लिए स्पर्म की गतिशीलता, आकार, वीर्य की मात्रा और दोनों पार्टनर की हेल्थ कंडीशन को ध्यान में रखा जाता है।

स्पर्म काउंट कम होने के 6 कारण

Cleveland Clinic के मुताबिक, आमतौर पर ज्यादातर मामलों में स्पर्म काउंट कम होने का पता ही नहीं चलता, लेकिन अगर बिना किसी गर्भनिरोधक के एक साल तक लगातार कोशिश करने के बावजूद पार्टनर प्रेग्नेंट नहीं होती, तो स्पर्म काउंट चेक कराए जा सकते हैं। स्पर्म काउंट कम होने पर पुरुषों के शरीर और चेहरे पर बाल कम हो सकते हैं, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, कम सेक्स ड्राइव और टेस्टिकल्स में सूजन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए इसके कारणों को जानना बहुत महत्वपूर्ण है।

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “स्पर्म काउंट कम होने का कारण हर पुरुष में अलग-अलग हो सकता है, लेकिन आमतौर पर इसके ये 6 कारण देखे जाते हैं।

1. मोटापा और कम फिजिकल एक्टिविटी करना

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “अगर किसी पुरुष का खासतौर पर पेट के आसपास फैट जमा है, तो यह शरीर के हार्मोन पर असर डाल सकता है। मोटापे के कारण टेस्टोस्टेरोन के स्तर में बदलाव, शरीर में सूजन और स्पर्म की क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। जो पुरुष दिनभर बैठे रहते हैं या एक्सरसाइज नहीं करते, उनके मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है।”

2. स्मोकिंग, तंबाकू और ज्यादा शराब लेना

Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “आजकल लोग अपने स्ट्रेस को कम करने के लिए स्मोक या ज्यादा शराब पीने लगते हैं। दरअसल, सिगरेट के धुएं में मौजूद केमिकल्स शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। इससे स्पर्म के डीएनए को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। स्मोकिंग के कारण स्पर्म काउंट और उनकी गतिशीलता में कमी भी हो सकती है। कुछ इसी तरह बहुत ज्यादा शराब पीने से हार्मोन और फर्टिलिटी से जुड़ी सेहत पर असर पड़ सकता है। ऐसे ही जो लोग तंबाकू खाते हैं या वेपिंग करते हैं, उनमें भी स्पर्म काउंट कम होना या इनफर्टिलिटी का कारण हो सकता है।”

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3. प्रदूषण

Dr. Vineet Malhotra बताते हैं कि प्रदूषण, केमिकल्स और प्लास्टिक के इस्तेमाल के कारण फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है। हार्मोंस में बदलाव हो सकता है और ये स्पर्म काउंट को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, किसी एक केमिकल की वजह से स्पर्म काउंट कम होने का कोई पर्याप्त सबूत नहीं है।

4. लंबे समय तक बहुत ज्यादा गर्मी में रहना

Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, स्पर्म बनने के लिए अंडकोष का तापमान शरीर के सामान्य तापमान से थोड़ा कम रहना जरूरी है। जो पुरुष लगातार गर्मी में रहते हैं, बार-बार सोना बाथ लेते हैं, लैपटॉप गोद में रखते हैं या बहुत तंग कपड़े पहनते हैं, उनके स्पर्म काउंट प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए पुरुषों को जांघ पर लैपटॉप जैसे डिवाइस न रखने की सलाह दी जाती है।

5. स्ट्रेस और नींद की कमी

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “जो पुरुष लंबे समय तक स्ट्रेस में रहते हैं, उन्हें रात में देर से नींद आना या फिर नींद में बार-बार उठने की समस्या होती है। ऐसे में स्ट्रेस और नींद की कमी हार्मोनल हेल्थ पर असर डालते हैं। हार्मोंस में बदलाव से स्पर्म काउंट कम हो सकते हैं। कई बार बैलेंस्ड डाइट न लेना और इसकी बजाय प्रोसेस्ड फूड खाने की आदत भी सेहत के लिए अच्छी नहीं होती।”

6. बीमारियां और कुछ दवाएं

Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, डायबिटीज, हार्मोन से जुड़ी समस्याएं, अंडकोष की नसों का फैलना यानी वैरिकोसील, कुछ इंफेक्शन और प्रजनन अंगों से जुड़ी बीमारियों का असर प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के टेस्टोस्टेरोन इंजेक्शन या एनाबॉलिक स्टेरॉयड लेने लगते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे कुछ मामलों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन और स्पर्म बनना कम या बंद भी हो सकते हैं।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के उपाय

Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि स्पर्म काउंट बढ़ाने का कोई ऐसा तरीका नहीं है, जो हर व्यक्ति में काम करे या तुरंत नतीजा दे। फिर भी, लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इसे बेहतर बनाया जा सकता है।

  • पुरुषों को अपने वजन पर ध्यान देना चाहिए और इसे कम करने के लिए बैलेंस्ड डाइट और फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए।
  • तेज चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी एक्टिविटीज के जरिए पुरुष अपनी फर्टिलिटी से जुड़ी क्षमता को बेहतर कर सकते हैं।
  • खाने में दालें, बीन्स, सोया, साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल, अखरोट और मेवे शामिल करने चाहिए। किसी भी तरह के सुपरफूड से स्पर्म काउंट बढ़ने की गारंटी नहीं होती है।
  • स्मोकिंग और शराब से बिल्कुल परहेज करना चाहिए। जो लोग तंबाकू चबाते हैं, उन्हें यह बिल्कुल छोड़ देना चाहिए।
  • बिना किसी डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड्स न लें।
  • रोजाना अपनी नींद पूरी करें।
  • बहुत ज्यादा गर्मी वाले वातावरण से बचें।
  • जिंक, सेलेनियम, फोलिक एसिड, विटामिन या एंटीऑक्सिडेंट की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। इनसे हर पुरुष का स्पर्म काउंट बढ़ता है, इसका भी कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए जरूरत से ज्यादा और बिना डॉक्टर की सलाह सप्लीमेंट लेना भी नुकसान पहुंचा सकता है।

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स्पर्म काउंट में सुधार आने में कितना समय लगता है?

Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि स्पर्म को बनने और परिपक्व होने में लगभग तीन महीने लग सकते हैं। इसलिए लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव के बाद डॉक्टर करीब तीन महीने में दोबारा सीमन एनालिसिस कराने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, स्पर्म में सुधार कितना होगा, यह व्यक्ति की मेडिकल कंडीशन पर भी निर्भर करता है।

निष्कर्ष
स्पर्म काउंट के लगातार कम होने के कारण मोटापा, स्मोकिंग, शराब, लाइफस्टाइल बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में पुरुषों को अपनी जीवनशैली में बदलाव करने चाहिए और अगर स्पर्म काउंट कम होने की आशंका हो, तो खुद से दवा या टेस्टोस्टेरोन लेना शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलेह लेना जरूरी होता है।

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FAQ

  • स्पर्म काउंट की जांच के लिए कौन सा मेडिकल टेस्ट कराया जाता है?  

    इसके लिए सबसे पहले सीमेन एनालिसिस टेस्ट कराया जाता है। इसमें स्पर्म काउंट, गतिशीलता और बनावट की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर हार्मोनल टेस्ट या स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड किया जाता है।
  • क्या मोबाइल फोन जेब में रखने से स्पर्म काउंट पर बुरा असर पड़ता है?

    पेंट की सामने वाली जेब में मोबाइल रखने से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन और फोन की गर्मी से अंडकोष के तापमान पर असर पड़ता है, जिससे स्पर्म काउंट और उसकी क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 14, 2026 19:48 IST

    Published By : Aneesh Rawat
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