गर्भवती महिलाओं का भरपेट खाना खाना बहुत जरूरी है। भोजन से मिले पोषक तत्वों की मदद से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है। अगर महिला के शरीर में पोषक तत्वों जैसे आयरन, फॉलिक एसिड आदि की कमी हो जाती है, तो न सिर्फ शिशु का मानसिक-शारीरिक विकास बाधित होता है, बल्कि डिलीवरी से संबंधित कई समस्याएं भी हो सकती हैं। बहरहाल, कई बार देखने को मिलता है कि गर्भवती महिलाएं नियमित रूप से भरपेट खाने के बाद भी पोषण की कमी से जूझ रही होती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इसके क्या कारण हैं? आइए, जानते हैं वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से।
गर्भावस्था में अधिक पोषण की जरूरत क्यों होती है?
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साल 2022 में American Journal of Obstetrics & Gynecology में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, गर्भावस्था में महिला के लिए पोषक तत्व बहुत जरूरी होते हैं। अगर गर्भावस्था और ब्रेस्टफीड के दौरान महिला पोषण का ध्यान नहीं रखती है, तो शिशु को भविष्य में डायबिटीज, मोटापा जैसी कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इस रिव्यू आर्टिकल से यह स्पष्ट होता है कि महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान अपनी सेहत के साथ जरा भी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। सही डाइट शिशु के विकास को सपोर्ट करती है और महिला के लिए डिलीवरी को भी आसान करती है।
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भरपेट खाने पर भी गर्भावस्था में पोषण की कमी के कारण
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खान-पान का पर्याप्त ध्यान रखने के बावजूद प्रेग्नेंट महिला में पोषक तत्वों की कमी कई कारणों से हो सकती है, जैसे-
शरीर की बढ़ती जरूरत
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "प्रेग्नेंसी में कुछ विशेष पोषक तत्वों की जरूरत अधिक बढ़ जाती है। इसमें आयरन, फोलेट और कैल्शियम मुख्य रूप से शामिल हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि शिशु के विकास के लिए इन पोषक तत्वों की डिमांड लगभग दोगुनी हो जाती है। यही पोषक तत्व शिशुओं के ब्रेन, बॉडी और ब्लड वॉल्यूम को बढ़ाते हैं। इस स्थिति में पर्याप्त खान-पान के बावजूद आयरन, फोलेट और कैल्शियम की मात्रा में डाइट में कम रखी जाए, तो समस्या बढ़ सकती है।"
मतली और उल्टी होना
कुछ महिलाएं प्रेग्नेंसी के 9 महीनों तक लगातार मतली और उल्टी की समस्या झेलती हैं। ऐसे में वे भले ही पर्याप्त पोषक तत्वों का सेवन करें, इसके बावजूद मतली और उल्टी होने के कारण शरीर इनको सही तरह से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता है। यहां तक कि उल्टी के कारण कई महिलाएं इस समस्या को ट्रिगर करने वाली चीजों का सेवन करने से बचती हैं।
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हार्मोनल बदलाव
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में तरह-तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। मुख्य रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे प्रेग्नेंसी हार्मोन्स का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। ये बढ़े हुए हार्मोन हमारे मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र की क्षमता को प्रभावित करते हैं। ऐसे में शरीर कुछ विटामिन्स जैसे फोलेट या फॉलिक एसिड को पूरी तरह से एब्जाॅर्ब नहीं कर पाता है।
प्लाजमा का बढ़ना
डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में खून की कुल मात्रा लगभग 50 फीसदी तक बढ़ जाती है। असल में खून में प्लाज्मा बढ़ जाता है। प्लाज्मा खून का पानी जैसा लिक्विड हिस्सा होता है। प्लाज्मा फैलने के कारण खून में मौजूद पोषक तत्व जैसे विटामिन और मिनरल्स नेचुरली पतले हो जाते हैं। यही कारण है कि प्रेग्नेंसी में ब्लड टेस्ट करने पर विटामिन और मिनरल्स के स्तर में गिरावट दिखाई देती है, जबकि महिला में पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है।
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प्रेग्नेंसी में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण
संपूर्ण डाइट लेने के बावजूद महिलाओं के शरीर में कुछ विशेष किस्म के पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जैसे-
- आयरनः यह बहुत जरूरी तत्व है, जो कि खून के जरिए ऑक्सीजन को पूरे शरीर तक पहुंचाने का काम करता है। ऐसा होने पर महिलाओं में थकान, कमजोरी, सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यहां तक कि आयरन की कमी महिलाओं में बर्फ आदि खाने की क्रेविंग को बढ़ा सकता है।
- विटामिन बी12 और फोलेटः प्रेग्नेंसी के दौरान इस पोषक तत्व की कमी होने पर मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और सुई की चुभन जैसा दर्द महसूस होता है। अगर समस्या का समाधान न किया जाए, तो महिला के मुंह में छाले हो सकते हैं और इसका बुरा प्रभाव याददाश्त पर भी पड़ता है।
- विटामिन डीः प्रेग्नेंसी में महिलाओं के लिए विटामिन डी भी एक जरूरी पोषक तत्व है। इसकी कमी होने पर हड्डियों में दर्द, कमजोरी और इम्यूनिटी पर भी असर पड़ता है।
- आयोडीन की कमीः इस पोषक तत्व की कमी होने पर महिला का वजन बहुत अधिक बढ़ने लगता है, अक्सर ठंड महसूस होती है और थायराइड ग्लैंड का आकार बदलने लगता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को इन चीजों का ध्यान आवश्यक तौर पर रखना चाहिए।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में जरूरी है कि महिलाएं क्या खा रही हैं और क्या नहीं, इस पर नजर रखें। कई बार पेट भर खाना खाने के बावजूद शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रेग्नेंसी में महिलाएं सिर्फ पेट भरने पर जोर देती हैं, जबकि उन्हें पोषक तत्वों पर भी गौर करना चाहिए। उन्हें अपनी डाइट में सभी तरह के मिनरल्स और विटामिन्स शामिल करने चाहिए। जरा सी लापरवाही या शरीर में हो रही पोषक तत्वों की कमी न सिर्फ प्रेग्नेंसी की जर्नी को मुश्किल बना सकती है, बल्कि भविष्य में शिशु को भी भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
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FAQ
प्रेग्नेंसी में पोषक तत्वों की कमी से कौन-कौन से रोग होते हैं?
पोषक तत्वों जैसे विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन की कमी होने पर से कई तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जैसे आयरन की कमी से एनीमिया, फोलिक एसिड की कमी से शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में गंभीर जन्मजात दोष (न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट) और कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोमलेशिया हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में किसी भी तरह के पोषक तत्व की कमी होने पर डॉक्टर से मिलना जरूरी है, क्योंकि यह किसी न किसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।गर्भावस्था में पोषण की कमी का भविष्य में शिशु के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
गर्भावस्था में पोषक तत्वों की कमी के कारण शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता ही है और भविष्य में डायबिटीज और मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है।
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Jul 03, 2026 13:18 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 03, 2026 13:18 IST
Modified By : Meera TagoreJul 03, 2026 13:18 IST
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Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta