प्रेग्नेंसी में महिलाओं को स्वास्थ्य को अधिक ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, खासकर पहले से PMOS की स्थिति से परेशान महिलाओं को। आज के समय में कई महिलाएं PMOS की समस्या से परेशान रहती हैं, जिसके कारण उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है, जिसमें फर्टिलिटी पर बुरा असर होने, प्रेग्नेंसी में परेशानी और प्रेग्नेंसी पर बुरा असर होने जैसी समस्याएं शामिल हैं। कई बार इस स्थिति में प्रेग्नेंसी होने पर मिसकैरेज का खतरा भी बना रहता है, लेकिन ऐसा क्यों होता है? यह सवाल अक्सर महिलाओं के मन में आता है। ऐसे में आइए गुरुग्राम के बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. प्राची बेनारा से जानें।
PMOS में मिसकैरेज का खतरा क्यों बढ़ता है?
डॉ. प्राची के अनुसार, PMOS (पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम) को PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) के नाम से भी जाता जाता है। इस स्थिति में महिलाओं को कंसीव करने में परेशानी होने लगती है। पीएमओएस को अक्सर प्रेग्नेंसी में आने वाली परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह सिर्फ ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या नहीं है। इसमें होने वाले हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव प्रेग्नेंसी के दौरान भी महिला के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
साल 2026 में Frontiers in Endocrinology में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, पीसीओएस (PCOS) से पीड़ित जिन महिलाओं को मिसकैरेज का खतरा (threatened abortion) था, उनमें खून में टेस्टोस्टेरोन का बढ़ा हुआ स्तर, फास्टिंग इंसुलिन और फास्टिंग ग्लूकोज प्रेगनेंसी न टिक पाने के सबसे अहम कारण हैं। इससे यह साफ होता है कि हार्मोनल असंतुलन (hyperandrogenism) और मेटाबॉलिक समस्याएं ही इस खतरे वाली स्थिति में मिसकैरेज की वजह हैं, भले ही मरीज को प्रोजेस्टेरोन का नॉर्मल सपोर्ट दिया जा रहा हो।
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प्रेग्नेंसी में किन समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है?
डॉ. प्राची आगे कहती हैं, पीएमओएस वाली महिलाओं को प्रेग्नेंसी से जुड़ी कॉम्पलीकेशन्स का खतरा अन्य महिलाओं को मुकाबले ज्यादा होता है। इनमें जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी समस्या चिंता का कारण होती है। बता दें, जेस्टेशनल डायबिटीज वह स्थिति है, जिसमें प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड शुगर बढ़ जाता है।
इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर और प्रीएक्लेम्पसिया जैसी समस्याओं पर भी नजर रखना जरूरी होता है। बता दें, प्रीएक्लेम्पसिया प्रेग्नेंसी में होने वाली एक गंभीर स्थिति है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर के साथ शरीर के कुछ अंगों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की नियमित जांच कराएं।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2006 में The Libyan Journal of Medicine में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस तब होता है, जब कोई महिला प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़े हुए इंसुलिन रेजिस्टेंस की भरपाई के लिए पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाती है। भ्रूण हाइपरग्लाइसीमिया के कारण बड़ी मात्रा में इंसुलिन बनाता है।
वहीं, कुछ अध्ययनों में मिसकैरेज और टाइम से पहले डिलीवरी के मामले भी ज्यादा देखे गए हैं। इसका एक प्रमुख कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है, जिससे शरीर के लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
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PMOS के साथ प्रेग्नेंसी में किन बातों पर ध्यान दें?
डॉ. प्राची बताती हैं, पीएमओएस की स्थिति में प्रग्नेंसी से जुड़ी समस्याएं होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी होगी। उम्र, वजन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति अलग हो सकती है। जरूरी नहीं सभी में एक जैसे लक्षण दिखें।
डॉ. प्राची का कहना है, कंसीव से पहले वजन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य की जांच कराना फायदेमंद होता है। अगर पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोई अन्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसे मैनेज करना जरूरी है।
हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए क्या करें?
डॉ. प्राची बताती हैं, प्रेग्नेंसी को हेल्दी और स्वस्थ रखने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के लिए नियमित रूप से बैलेंस डाइट लें, नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटीज, पर्याप्त नींद और हेल्दी वजन को बनाए रखना मददगार होता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित जांच कराना क्यों है जरूरी?
डॉ. प्राची के अनुसार, कंसीव करने बाद नियमित रूप से डिलीवरी से पहले जांच के माध्यम से डॉक्टर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और बच्चे की ग्रोथ की निगरानी कर सकते हैं। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार देखभाल के साथ हेल्दी प्रेग्नेंसी और सुरक्षित डिलीवरी संभव है।
निष्कर्ष
पीएमओएस की स्थिति में महिलाओं को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या होने और कंसीव करने के बाद मिसकैरेज का खतरा बढ़ सकता है। पीएमओएस में हार्मोन्स के असंतुलित होने और मेटाबॉलिक बदलाव आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इनके कारण प्रग्नेंसी प्रभावित होती है। ऐसे में पीएमओएस की स्थिति में महिलाओं को नियमित रूप से ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच कराएं एंव हेल्दी वजन को बनाए रखें। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी में स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा, हेल्दी लाइफस्टाइल को नियमित रूप से फॉलो करें।
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FAQ
पीसीओएस के 5 लक्षण क्या हैं?
पीसीओएस की समस्या होने पर महिलाओं को चेहरे पर अनचाहे बाल आने, तेजी से वजन बढ़ने, चेहरे पर मुंहासे होने, सिर के बाल झड़ने और पीरियड्स के अनियमित होने की समस्या हो सकती है।प्रेगनेंसी मिसकैरेज होने पर क्या होता है?
मिसकैरेज होने पर महिलाओं को पीठ में तेज ऐंठन होने, पेट के निचले हिस्से में दर्द होने, खून के थक्के आने, उल्टी या जी मिचलाने और वेजाइनल ब्लीडिंग होने की समस्या हो सकती है। प्रेग्नेंसी में इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
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Aug 12, 2026 16:11 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Prachi Benara