Fri Oct 9, 2026 | 04:34 AM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Chopra , Pediatrician and Neonatologist

शिशुओं में दस्त को हल्के में न लें, डिहाइड्रेशन से लेकर कुपोषण तक हो सकती हैं ये 5 गंभीर समस्याएं

अगर शिशु दिन में कई बार बहुत ही पतला दस्त करता है, तो पैरेंट्स को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि अगर समय रहते शिशु के दस्त पर ध्यान न दिया जाए, तो उन्हें कई बीमारियां हो सकती है। इससे बच्चे की ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है।
शिशुओं में दस्त को हल्के में न लें, डिहाइड्रेशन से लेकर कुपोषण तक हो सकती हैं ये 5 गंभीर समस्याएंशिशुओं में दस्त को हल्के में न लें, डिहाइड्रेशन से लेकर कुपोषण तक हो सकती हैं ये 5 गंभीर समस्याएं

शिशुओं में दस्त यानी बार-बार पतला या पानी जैसा मल आना काफी आम है, लेकिन अगर इस समस्या को तुरंत न ठीक किया जाए, तो यह शिशु के विकास को प्रभावित कर सकती है। कई बार पैरेंट्स इसे दांत निकलने, मौसम बदलने या हल्का इंफेक्शन समझकर इग्नोर कर देते हैं। अगर शिशु एक साल से कम उम्र के होते हैं, तो उनके दस्त होने की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में बच्चे का शरीर बेहद नाजुक होता है और शरीर में पानी तथा जरूरी न्यूट्रिशन की कमी बहुत तेजी से हो सकती है। दस्त लगने पर शिशु को कौन सी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं? यह जानने के लिए हमने Dr. Abhishek Chopra, Consultant Pediatrician and Neonatologist, Cloudnine Group of Hospitals, New Delhi से बात की।

शिशु को दस्त से होने वाली पांच गंभीर समस्याएं

Dr. Abhishek Chopra ने बताया कि शिशु अपनी समस्या को बता नहीं पाते और अगर पैरेंट्स सतर्क नहीं होते या दस्त का इलाज समय पर नहीं कराते, तो शिशु को कई गंभीर समस्याएं हो सकती है।

डिहाइड्रेशन

Dr. Abhishek Chopra के मुताबिक, “शिशुओं में दस्त की सबसे गंभीर समस्या डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है। जब बच्चे को बार-बार दस्त होते हैं, तो शरीर से पानी के साथ-साथ सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं। शिशुओं के शरीर में पानी बहुत ज्यादा नहीं होता, इसलिए अगर दस्त गंभीर होते हैं, तो शिशु की कंडीशन गंभीर हो सकती है। अगर शिशु का मुंह और जीभ सूखने लगे, आंखें अंदर की तरफ धंस जाए और शिशु सुस्त दिखाई देने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।”

कुपोषण का खतरा

Dr. Abhishek Chopra ने बताया कि लगातार दस्त होने पर शरीर से न्यूट्रिशन की कमी होने लगती है। इसका असर बच्चे के विकास पर पड़ सकता है। अगर दस्त लंबे समय तक बना रहे, तो बच्चा धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। कुछ मामलों में कुपोषण की कंडीशन पैदा हो सकती है। कुपोषित बच्चों में इंफेक्शन का खतरा भी ज्यादा रहता है, क्योंकि दस्त से इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो जाती है। इससे शिशु की मांसपेशियों में ऐंठन, सुस्ती और हार्ट बीट तेज या कम होना शामिल है।

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वजन कम होने का रिस्क

Dr. Abhishek Chopra के अनुसार, जिन बच्चों के दस्त का इलाज समय पर नहीं होता, उनका वजन तेजी से कम हो सकता है, क्योंकि शरीर में न्यूट्रिशन की कमी हो जाती है। दस्त लगने के कारण शिशु सही तरीके से फीड या छह महीने के बाद शिशु ज्यादा खाना नहीं खाता। दस्त लगने पर छह महीने से कम शिशु को समय-समय पर ब्रेस्टफीड जरूर कराते रहना चाहिए ताकि शरीर को लगातार न्यूट्रिशन मिलता रहे।

इंफेक्शन का खतरा

Dr. Abhishek Chopra ने कहा, “कई बार दस्त का कारण बैक्टीरिया या वायरस होता है। अगर ऐसे मामलों में सही इलाज न मिलें, तो इंफेक्शन और ज्यादा गंभीर हो सकता है। इसके साथ बुखार, उल्टी, कमजोरी और भूख कम लगने जैसी समस्याएं जुड़ सकती हैं। अगर ऐसा हो, तो शिशु को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, ताकि समय पर इलाज हो सके।”

शिशु के विकास पर असर

Dr. Abhishek Chopra कहते हैं, “अगर बच्चे को बार-बार दस्त लगते हैं, तो इससे शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है, क्योंकि शिशु के शरीर को पूरा न्यूट्रिशन नहीं मिल पाता। न्यूट्रिशन की कमी के चलते शिशु की लंबाई, वजन और दिमाग के विकास पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए पैरेंट्स को इसे सिर्फ पेट की बीमारी नहीं समझना चाहिए। बार-बार दस्त लगने से शिशु के पूरे शरीर पर असर पड़ सकता है।”

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निष्कर्ष
Dr. Abhishek Chopra कहते हैं कि दस्त लगने पर शिशु की साफ-सफाई का खास ख्याल रखें और पैरेंट्स को अपनी सफाई का भी ध्यान रखा चाहिए। अगर दस्त के साथ बुखार, खून वाला मल, लगातार उल्टी, पेशाब कम होना या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

FAQ

  • दस्त के कारण बच्चे की त्वचा पर कौन सी समस्या तेजी से पनपती है?

    बार-बार पतला मल आने और बार-बार साफ करने के कारण शिशु के संवेदनशील निचले हिस्से में गंभीर डायपर रैश और फंगल इंफेक्शन हो जाता है। त्वचा छिलने के कारण बच्चे को मलत्याग के समय असहनीय दर्द और जलन होती है।
  • माता-पिता कैसे पहचानें कि बच्चा गंभीर खतरे (Severe Dehydration) में है?

    अगर बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त या बेहोश सा लगे, रोने पर उसकी आंखों से आंसू न निकलें, उसका मुंह और जीभ एकदम सूखे दिखें, आंखें अंदर धंसी हुई लगें या वह छह घंटे से ज्यादा समय से पेशाब न करे, तो यह मेडिकल इमरजेंसी है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 17, 2026 20:23 IST

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