Tue Oct 6, 2026 | 08:15 AM IST

Medically Reviewed by Dr Chetna Jain , Gynecologist

ब्रेस्टफीडिंग करने वाले शिशु को दस्त होने पर मां क्या करें और क्या नहीं? जानें डॉक्टर की सलाह

अगर नवजात को दस्त हो जाए और वह ब्रेस्टफीडिंग पर हो, तो मां के लिए बड़ी परेशानी हो जाती है, क्योंकि मां अक्सर कंफ्यूजन में रहती है कि वह ब्रेस्टफीड कराए या न कराए? इस लेख में डॉक्टर ने मांओं को शिशु के दस्त से जुड़ी कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
ब्रेस्टफीडिंग करने वाले शिशु को दस्त होने पर मां क्या करें और क्या नहीं? जानें डॉक्टर की सलाहब्रेस्टफीडिंग करने वाले शिशु को दस्त होने पर मां क्या करें और क्या नहीं? जानें डॉक्टर की सलाह

नवजात शिशुओं में दस्त होना एक आम समस्या है, लेकिन जब ब्रेस्टफीड पर निर्भर नवजात शिशु को दस्त होने लगते हैं, तो पेरेंट्स को अक्सर चिंता हो जाती है कि दस्त को दौरान ब्रेस्टफीड कराए या कुछ और दें। दस्त होने की कंडीशन में मां को अपना स्तनपान कराना बिल्कुल बंद नहीं करना चाहिए। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Dr. Chetna Jain, Director Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon से बात की। उन्होंने बताया कि ब्रेस्टफीड करने वाले शिशुओं में दस्त होने पर घबराने के बजाय सही देखभाल और कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है।

क्या दस्त होने पर ब्रेस्टफीडिंग बंद कर दें?

Dr. Chetna Jain कहते हैं, “कई बार मेरे पास ऐसी मांएं आती हैं, जो नवजात शिशुओं को ब्रेस्टफीड कराना कम कर देती है, ताकि शिशु को दस्त कम हो, लेकिन यह तरीका बिल्कुल गलत है। मां के दूध में ऐसे न्यूट्रिशन, एंटीबॉडी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्व मौजूद होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। दस्त के दौरान शिशु को रेगुलर ब्रेस्टफीड कराना चाहिए, बल्कि रेगुलर दिनों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा बार स्तनपान कराया जा सकता है।”

मां को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Dr. Chetna Jain के मुताबिक, “मां को शिशु दस्त कितनी बार कर रहा है और शिशु किस तरह बिहेव कर रहा है, ये सब देखना बहुत जरूरी है। इसके साथ ब्रेस्टफीड करा रही मां को भी अपने पोषण पर खास ध्यान देना चाहिए।”

breastfeeding infants diaherrabreastfeeding infants diaherra

यह भी पढ़ें- क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है? जानें डॉक्टर से

डिहाइड्रेशन चेक करें

Dr. Chetna Jain के अनुसार, “दस्त के कारण शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल सकते हैं। इस वजह से शिशुओं की कंडीशन गंभीर हो सकती है। इसलिए मां ध्यान रखना चाहिए कि शिशु के पेशाब की मात्रा कितनी है, मुंह सूख रहा है, आंखे अंदर की तरफ धंसी हुई है, रोते समय आंसू कम आना और दूध न पी रहा है या नहीं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण शिशु में दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”

मां को अपनी डाइट पर ध्यान देना चाहिए

Dr. Chetna Jain ने कहा कि ब्रेस्टफीड कराने वाली मां का खानपान सीधे तौर पर बच्चे के न्यूट्रिशन से जुड़ा हुआ होता है। इसलिए शिशु के दस्त के दौरान मां को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, ताजे फल और सब्जियां खाने के साथ दाल, दूध और प्रोटीन युक्त डाइट लेनी चाहिए।

साफ-सफाई का ध्यान

Dr. Chetna Jain कहती हैं, “दस्त कई बार इंफेक्शन से जुड़े होते हैं। इसलिए साफ-सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। जब भी शिशु को ब्रेस्टफीड कराए, तो पहले मां को हाथ धोने चाहिए, डायपर बदलने के बाद हाथों को साबुन से साफ करें और शिशु के आसपास साफ-सफाई रखने से इंफेक्शन फैलने का खतरा काफी कम हो सकता है।”

यह भी पढ़ें- क्या जुकाम-बुखार में शिशु को ब्रेस्टफीड कराना सुरक्षित है? जानें डॉक्टर की राय

बिना डॉक्टर की सलाह दवा न दें

Dr. Chetna Jain ने कहा, “मेरे पास कई केस आते हैं, जो शिशु का इलाज घर पर ही करने लगते हैं। घरेलू इलाज से लेकर बिना सलाह दवा देना शुरू कर देते हैं। ये तरीका नवजात शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शिशु को किसी भी तरह की दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।”

निष्कर्ष
Dr. Chetna Jain कहती हैं कि अगर शिशु को बार-बार दस्त होने के साथ तेज बुखार, लगातार उल्टी और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ब्रेस्टफीड कर रहे शिशुओं के लिए सबसे जरूरी है कि मां ब्रेस्टफीड जारी रखें।

FAQ

  • क्या मां के दूध पीने से भी शिशु को दस्त हो सकते हैं?

    कुछ शिशुओं को मां के दूध के जरिए गाय के दूध के प्रोटीन से एलर्जी हो सकती है। अगर मां के दूध या डेयरी उत्पाद (पनीर, चीज) खाने के बाद शिशु के दस्त बढ़ जाते हैं, तो मां को कुछ दिनों के लिए डेयरी उत्पाद पूरी तरह बंद करके देखना चाहिए।
  • इस दौरान शिशु की त्वचा की सुरक्षा के लिए मां को क्या करना चाहिए?

    बार-बार दस्त होने से शिशु की संवेदनशील त्वचा पर गंभीर डायपर रैश हो सकते हैं। मां को हर बार दस्त के बाद शिशु के निचले हिस्से को गीले कपड़े या गुनगुने पानी से साफ करना चाहिए, उसे अच्छी तरह सुखाना चाहिए और रैश क्रीम या नारियल तेल लगाना चाहिए। केमिकल्स वाले वाइप्स का इस्तेमाल न करें।

Read Next

→ प्रीमैच्योर शिशुओं की आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है ROP, डॉक्टर से जानें स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jun 19, 2026 19:16 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jun 19, 2026 19:16 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Chetna Jain