जब शिशु करीब 6 महीने का हो जाता है, तो पेरेंट्स को शिशु को ठोस आहार देना शुरू करना होता है। 6 महीने तक तो शिशु सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग या फॉर्मूला मिल्क पर भी निर्भर होता है, लेकिन शिशु के 6 महीने का होने पर पेरेंट्स के दिमाग में कई सवाल होते हैं। जैसे पहली बार क्या खिलाएं? कितनी मात्रा दें? दिन में कितनी बार खाना दें? क्या बच्चा खाना निगल पाएगा? और अगर वह मुंह ही न खोले तो क्या करें? ऐसी जरूरी बातों को जानने के लिए हमने Dr. Rajat Grover, Senior Consultant, Department of Paediatrics and Neonatology, Cloud Group of Hospitals, Patparganj से बात की।
शिशु को पहली बार ठोस आहार देते समय 7 बातों का रखें ध्यान
Dr. Rajat Grover कहते हैं, “पेरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पहली फीडिंग का मकसद शिशु का पेट भरना नहीं होता, बल्कि उसे धीरे-धीरे खाने का स्वाद, टेक्चर और खाने का तरीका समझाना होता है। जब भी शिशु को पहली बार फीडिंग कराएं, तो पेरेंट्स को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।”
1. 6 महीने की उम्र में ठोस आहार दें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जब शिशु लगभग 6 महीने का हो जाता है, तो उसे एनर्जी और पोषक तत्वों की ज्यादा जरूरत होती है और इन जरूरतों को पूरा करने के लिए खाना देने जरूरी है। इसकी गाइडलाइंस के मुताबिक, शिशु को समय पर, पर्याप्त मात्रा में, सुरक्षित और सही तरीके से खिलाना बहुत जरूरी है।
Dr. Rajat Grover ने बताया कि करीब 6 महीने के शिशु को ब्रेस्टफीडिंग के साथ ठोस आहार देना चाहिए। हालांकि, सिर्फ बच्चे की उम्र देखना ही काफी नहीं है। उसके विकास से जुड़े पैरामीटर्स भी चेक करते रहना चाहिए। अगर शिशु अपना सिर और गर्दन अच्छी तरह संभाल पा रहा है, सहारे के साथ बैठ सकता है और खाने में दिलचस्पी दिखाता है, यह अच्छे संकेत हैं। अगर शिशु 6 महीने का होने के बाद भी सिर को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है या बार-बार खाना बाहर निकाल रहा है, तो जल्दबाजी करने के बजाय डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
2. पहली बार बहुत ज्यादा खाना न खिलाएं
Dr. Rajat Grover ने कहा, “कुछ पेरेंट्स पहली ही बार में शिशु को ज्यादा खिलाने की कोशिश करते हैं। इससे शिशु चिड़चिड़ा हो सकता है। पहली फीडिंग में शिशु को पूरी कटोरी भर कर खाना खिलाने की कोशिश न करें, बल्कि शुरुआत कम खाना देने से करें। कुछ चम्मच बहुत ही नरम भोजन देकर देखें कि शिशु उसे कैसे खा रहा है। इसके बाद ही धीरे-धीरे उसकी जरूरत और डाइजेशन के अनुसार मात्रा बढ़ाई जा सकती है। पेरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इस उम्र में शिशु सिर्फ भोजन खाना ही नहीं सीख रहा होता, बल्कि चम्मच से खाना, नए स्वाद पहचानना और खाने के अलग-अलग टेक्सचर्स को भी जानने की कोशिश करता है। इसलिए शिशु को जबरदस्ती न खिलाएं।”
3. खाना नरम रखें, लेकिन बिल्कुल पतला न करें
Dr. Rajat Grover का कहना है, “शुरुआत में खाना ऐसा होना चाहिए, जिसे शिशु आसानी से निगल सके। अच्छी तरह पकी हुई सब्जियों को मैश करके या उम्र के अनुसार नरम टेक्चर में दिया जा सकता है। शुरुआत में थोड़ा पतला खाना दिया जा सकता है, लेकिन जैसे-जैसे शिशु खाने का आदी होने लगे,तो उसे लिक्विड या बहुत पतली प्यूरी न दें। खाने को थोड़ा मैश करके ही खाना दें और इसमें वैरायटी जरूर रखें।”
4. खाने पोषक तत्वों से भरपूर हो
WHO के मुताबिक, शिशु को न्यूट्रिशन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए खाने में पर्याप्त मात्रा में एनर्जी, प्रोटीन, विटामिन, विटामिन D और मिनरल्स हो। Dr. Rajat Grover मानते हैं कि 6 महीने के आस-पास शिशु की न्यूट्रिशनल जरूरतें बढ़ने लगती हैं। इसलिए कम्पलीमेंटरी फूड्स में सिर्फ चावल या फल जैसी एक-दो चीजों पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। शिशु के लिए उम्र के अनुसार दालें, अनाज, सब्जियां, फल और अंडे जैसी चीजों को डाइट का हिस्सा बनाएं। अगर शिशु कुछ नहीं ले रहा है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
first time food to infants
यह भी पढ़ें- शिशु का रोना बंद नहीं हो रहा? इसे केवल जिद न समझें, डॉक्टर से जानें 5 बड़े कारण
5. शिशु के साथ जबरदस्ती न करें
Dr. Rajat Grover कहते हैं, “पहली बार फूड को देखकर शिशु मुंह बंद कर सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि उसे वह खाना हमेशा पसंद नहीं आएगा। बच्चों को नए स्वाद और टेक्सचर से आदी होने में समय लग सकता है। इसलिए अगर शिशु किसी फूड को पहली बार मना करता है, तो उसे तुरंत डाइट से न हटाएं। इसके अलावा, शिशु की भूख पर भी ध्यान दें। अगर वह मुंह बंद कर रहा है, सिर दूसरी तरफ घुमा रहा है या खाना लेने में रुचि नहीं दिखा रहा, तो थोड़ी देर के लिए रुक जाना बेहतर है। खिलाने के लिए शिशु के साथ जबरदस्ती बिल्कुल न करें।”
6. शिशु के गले में खाना खिलाने का सही तरीका
Dr. Rajat Grover कहते हैं कि जब शिशु को शुरुआत में खाना दिया जाता है, तो उसे खिलाते समय सीधा बिठाकर रखें और फीडिंग के दौरान हमेशा उसके साथ रहें। शिशु को खिलाते समय उसे अकेला न छोड़ें। शिशु को ऐसी चीजें बिल्कुल न खिलाएं, जिससे उसके गले में फंसने का खतरा हो। शुरुआत में बच्चे के दांत भी पूरी तरीके से नहीं आए होते हैं और न ही उसे चबाने का तरीका आता है, तो इसलिए खाना ऐसा दें ताकि वह आसानी से निगल सके। खाने के साथ-साथ हाथ, कटोरी, और चम्मच की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें।
7. फूड के साथ ब्रेस्टफीडिंग जारी रखें
WHO और यूनिसेफ सलाह देते हैं कि सभी शिशुओं को जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीड शुरू कर देना चाहिए और पहले 6 महीने सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए। 6 महीने के बाद शिशु को ऊपरी आहार के साथ दो साल या उससे ज्यादा समय के लिए ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए।
Dr. Rajat Grover कहते हैं, “अक्सर पेरेंट्स यह सवाल लेकर आते हैं कि क्या 6 महीने के बाद खाना शुरू कर दिया है, तो ब्रेस्टफीडिंग बंद की जा सकती है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता। शिशु की ब्रेस्टफीडिंग बंद करना सही नहीं है। शुरुआती दिनों में शिशु को बहुत कम मात्रा में सॉलिड फूड देना चाहिए और सामान्य तौर पर ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए।
यह भी पढ़ें- जन्म के तुरंत बाद शिशु को कौन-कौन से वैक्सीन लगते हैं? डॉक्टर से जानें किन बीमारियों से होता है बचाव
निष्कर्ष
Dr. Rajat Grover पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि 6 महीने के बाद बच्चे को खाना शुरू कराने में कोई जल्दबाजी न दिखाएं। हर शिशु का फूड को स्वीकार करने या खाने का अलग तरीका हो सकता है। पहली बार फीडिंग के दौरान शिशु को बहुत कम मात्रा में भोजन दें और शिशु के फूड की वैरायटी और टेक्सचर बढ़ाएं। अगर शिशु का वजन नहीं बढ़ रहा या वह बिल्कुल नहीं खा रहा है, तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।
All Image Credit: Magnific
FAQ
शिशु के पहले सॉलिड फूड्स में क्या-क्या देना सबसे सुरक्षित माना जाता है?
पतली मूंग दाल का पानी, सूप, अच्छी तरह मैश किया हुआ केला, आलू ,शकरकंद, उबली हुई गाजर की प्यूरी, या चावल का पानी और दलिया शामिल किया जा सकता है। भोजन पूरी तरह से नरम और बिना गुठली वाला होना चाहिए।सॉलिड फूड्स शुरू करने के बाद बच्चे को कब्ज हो जाए तो क्या उपाय करें?
आहार में फाइबर युक्त प्यूरी जैसे पपीता, नाशपाती, या उबली हुई आलूबुखारा शामिल कर सकते हैं। इसके साथ पानी की मात्रा थोड़ी बढ़ाएं और बच्चे के पेट की हल्के हाथों से मालिश करें।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Sep 03, 2026 15:13 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Rajat Grover
