Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

बच्चों की खांसी में कौन से घरेलू उपाय हैं सुरक्षित? डॉक्‍टर से जानें

सर्दी-जुकाम, खांसी में घरेलू उपाय अपनाना आम बात है, लेक‍िन जब बात बच्‍चों की सेहत से जुड़ी हो, तो र‍िस्‍क नहीं ल‍िया जा सकता इसल‍िए यह जानना जरूरी है क‍ि कौन से घरेलू उपाय खांसी में बच्‍चों के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िए जा सकते हैं और कौन से नहीं?

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मानसून सीजन में अक्‍सर बच्‍चों को सर्दी-जुकाम और खांसी की समस्‍या होती है। खांसी आने पर माता-प‍िता डॉक्‍टर की सलाह के बगैर घरेलू इलाज शुरू कर देते हैं ज‍िससे स्‍थ‍ित‍ि अध‍िक गंभीर हो सकती है। डॉक्‍टरों से म‍िली जानकारी के आधार पर पता चलता है क‍ि ओपीडी में अक्‍सर माता-प‍िता सर्दी-जुकाम से ज्‍यादा उसके ल‍िए क‍िए गए घरेलू उपाय के साइड इफेक्‍ट्स होने पर अस्‍पताल आते हैं। इसल‍िए डॉक्‍टर हमेशा सलाह देते हैं क‍ि क‍िसी भी घरेलू उपाय को एक्‍सपर्ट की सलाह के बगैर नहीं अपनाना चाह‍िए खासकर जब बच्‍चों की सेहत इससे जुड़ी हो। आइए आपको बताते हैं खांसी आने पर कौन से घरेलू उपाय बच्‍चों की सेहत के ल‍िए सुरक्ष‍ित हो सकते हैं और क‍िन घरेलू उपायों से बचना जरूरी है। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

बच्‍चे को खांसी होने पर ये उपाय आएंगे काम

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1. गुनगुना दूध

खांसी से राहत के ल‍िए बच्‍चे को गुनगुना दूध पि‍ला सकते हैं। इससे गले को राहत म‍ि‍लेगी और अच्‍छी नींद आएगी। च‍िकन सूप या सब्‍ज‍ियों का सूप बनाकर प‍िलाने से भी गले की खराश से राहत म‍िल सकती है। ध्‍यान रहे क‍ि बच्‍चों की ड्र‍िंक्‍स गुनगुनी हों, अध‍िक गर्म ड्र‍िंक्‍स से बचें।

2. नमक के पानी से गरारे कराएं

बच्‍चे को खांसी होने पर नमक के पानी से गरारे करा सकते हैं। इससे सूजन कम करने में मदद म‍िलेगी, बलगम कम होगा और गले में इर‍िटेशन से राहत म‍िलेगी। ध्‍यान रहे क‍ि बच्‍चे की उम्र 6 साल से अध‍िक हो और उसे गरारे करने का तरीका पता हो, तभी यह उपाय अपनाएं। एक ग‍िलास हल्‍के गर्म पानी में आधा चम्‍मच नमक म‍िलाकर दे सकते हैं।

3. शहद और नींबू का इस्‍तेमाल

खांसी से राहत के ल‍िए बच्‍चे को एक ग‍िलास गुनगुने पानी में शहद और नींबू का रस म‍िलाकर दे सकते हैं। शहद में एंटीमाइक्रोब‍ियल गुण होते हैं ज‍िससे गले की जलन और इर‍िटेशन दूर करने में मदद म‍िलेगी। इसके फायदे बढ़ाने के ल‍िए नींबू का रस भी म‍िला सकते हैं। कई माता-प‍िता एक साल से कम उम्र के बच्‍चे को खांसी के इलाज के तौर पर शहद देते हैं, लेक‍िन इससे बचना चाह‍िए। यह उपाय केवल एक साल से अध‍िक उम्र के बच्‍चों के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िया जाना चाह‍िए।

4. भाप द‍िलाएं

भाप की मदद से सर्दी-जुकाम और खांसी का इलाज क‍िया जाता है, लेक‍िन बच्‍चों के मामले में तापमान का ख्‍याल रखना जरूरी है। अध‍िक गर्म तापमान से बच्‍चों की त्‍वचा में जलन हो सकती है। कई लोग पानी में मेंथॉल वाले उत्‍पाद म‍िलाकर बच्‍चे को भाप द‍िलाते हैं, लेक‍िन इससे चेहरे और त्‍वचा पर इर‍िटेशन महसूस हो सकता है। डॉक्‍टर की सलाह के बगैर भाप के पानी में कुछ भी डालने से बचें और पानी का तापमान चेक करके बच्‍चे को भाप दे सकते हैं। इससे गले की खराश में आराम म‍िलेगा।

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अस्‍थमा के संकेत पहचानें

गले में खराश अक्‍सर सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसी वायरल बीमार‍ियों के कारण होता है। बच्‍चों में सर्दी-जुकाम या खांसी ज्‍यादातर दो हफ्तों में ठीक हो जाती है। National Health Service, UK  के मुताब‍िक, अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहती है, रात में बढ़ जाती है या बच्चे के दौड़ने-भागने पर शुरू हो जाती है, तो यह अस्थमा का संकेत हो सकता है। अगर आपका बच्चा सामान्य रूप से दूध पी रहा है, पानी पी रहा है, खाना खा रहा है और सांस ले रहा है और सांस लेते समय घरघराहट की आवाज नहीं आ रही है, तो खांसी आमतौर पर चिंता की बात नहीं है।

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बच्‍चे की खांसी में इन घरेलू उपायों से बचें

हर घरेलू नुस्‍खा बच्‍चों की सेहत के ल‍िए सुरक्ष‍ित नहीं होता है। कई ऐसे उपाय हैं ज‍िनके कारण बच्‍चों को एलर्जी, जलन, दम घुटना और अन्‍य गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं जैसे-

अदरक और काली म‍िर्च

घरेलू उपाय के तौर पर बच्‍चों को अदरक और काली म‍िर्च का सेवन भी नहीं कराना चाह‍िए। इससे गले और पेट में जलन हो सकती है।

नाक में तेल डालना

बच्‍चे को खांसी होने पर नाक में तेल डालने से भी बचें। इससे बच्‍चे की नाक और सांस की नली में जलन हो सकती है। तेल को नाक में डालना सुरक्ष‍ित तरीका भी नहीं माना जाता है।

कपूर का इस्‍तेमाल

कई लोग खांसी के घरेलू उपाय में कपूर का इस्‍तेमाल करते हैं, लेक‍िन बच्‍चे को इससे दूर रखें। इसके इस्‍तेमाल से बच्‍चे को बेचैनी या सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

मसालेदार काढ़ा

अक्‍सर खांसी के ल‍िए इस्‍तेमाल होने वाला काढ़ा अदरक, हल्‍दी, काली म‍िर्च, लौंग वगैरह को म‍िलाकर बनाया जाता है। हालांक‍ि, इसकी अध‍िक मात्रा से बच्‍चे के गले और पेट में जलन हो सकती है।

धुआं देकर इलाज करना

खांसी के ल‍िए कपूर, पत्ते या अजवाइन को जलाकर धुआं द‍िया जाता है। यह उपाय बच्‍चों के साथ-साथ बड़ों के ल‍िए भी सुरक्ष‍ित नहीं माना जाता है। इससे खांसी और बढ़ सकती है और सांस की समस्‍या हो सकती है।

खुद से स‍िरप या एंटीबायोट‍िक देने से बचें

बच्‍चे को खांसी होने पर डॉक्‍टर के पास जाएं। बाजार में म‍िलने वाले स‍िरप या एंटीबायोट‍िक्‍स को एक्‍सपर्ट एडवाइज के बगैर बच्‍चे को न खि‍लाएं क्‍योंक‍ि खांसी का कारण हमेशा बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन नहीं होता है।

नोट: इन घरेलू उपायों पर सीम‍ित साइंट‍िफ‍िक र‍िसर्च की गई है इसल‍िए क‍िसी भी घरेलू उपाय को बच्‍चों के ल‍िए अपनाने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लेना न भूलें। 

न‍िष्‍कर्ष:

बच्‍चे को खांसी होने पर भाप द‍िलाएं। गुनगना दूध, च‍िकन या वेजि‍टेबल सूप, शहद और नींबू का सेवन करा सकते हैं। साथ ही बच्‍चे को भाप द‍िला सकते हैं। खांसी होने पर अदरक, काली म‍िर्च के इस्‍तेमाल से बचें, नाक में तेल डालना, कपूर का इस्‍तेमाल, मसालेदार काढ़ा प‍िलाना, धुएं का प्रयोग, कपूर का इस्‍तेमाल करने से भी बचना चाह‍िए। बच्‍चे को खुद से स‍िरप या एंटीबायोट‍िक भी नहीं देना चाह‍िए क्‍योंक‍ि हर बार खांसी का कारण बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन नहीं होता है।

FAQ

  • क्‍या बच्‍चे के ल‍िए सुरक्ष‍ित है सलाइन नेजल ड्रॉप्स?

    हां, सलाइन नेजल ड्रॉप्‍स नाक के अंदर जमा म्यूकस को ढीला और पतला करता है। इससे बच्‍चा आसानी से नाक साफ कर सकता है, लेक‍िन डॉक्‍टर की सलाह पर ही सही ड्रॉप्‍स चुनना चाह‍िए।
  • बच्‍चे को खांसी होने पर क्‍या न ख‍िलाएं?

    खांसी होने पर बच्‍चे को दही, मीठी चीजें, सॉफ्ट ड्र‍िंक्‍स, ठंडी तासीर वाली चीजें जैसे केला, मौसमी वगैरह का सेवन नहीं करना चाह‍िए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 31, 2026 13:41 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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