Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

श‍िशुओं में ठोस आहार शुरू करते समय हो सकती है कब्‍ज, डॉक्‍टर से जानें लक्षण और बचाव के उपाय

श‍िशु को जन्‍म के छह माह बाद स्‍तनपान के साथ-साथ ठोस आहार द‍िया जाता है ज‍िसके कारण कभी-कभी श‍िशु को कब्‍ज की समस्‍या हो सकती है। जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय।

कब्‍ज की समस्‍या बड़ों के साथ-साथ श‍िशुओं में भी देखने को म‍िलती है। कई बच्‍चों को ठोस आहार देने पर कब्‍ज या अन्‍य पाचन समस्‍या हो सकती है। हालांक‍ि हर श‍िशु को यह समस्‍या हो, ऐसा जरूरी नहीं है। छह माह तक श‍िशु केवल मांं के दूध पर न‍िर्भर होते हैं। इसके बाद जैसे ही उन्‍हें ठोस आहार द‍िया जाता है, कई बच्‍चों में कब्‍ज की समस्‍या देखी जाती है जि‍सके कारण बच्‍चे अक्‍सर रोने लगते हैं और उनमें च‍िड़च‍िड़ापन नजर आ सकता है। डॉक्‍टर से जानते हैं ऐसा क्‍योंं होता है, इसके लक्षण और उपाय। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।

ठोस आहार से कब्‍ज होने पर कौन से लक्षण नजर आते हैं?

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  • डायपर में ब्‍लड नजर आ सकता है।
  • बाउल मूवमेंट की समस्‍या हो सकती है।
  • स्‍टूल हार्ड और ड्राई हो सकता है।
  • स्‍टूल पास करते समय दर्द हो सकता है।
  • पेट में दर्द महसूस हो सकता है।

अगर श‍िशु स्‍टूल पास करना कम कर दे और स्‍टूल पास करने के दौरान रोए, तो यह कब्‍ज के लक्षण हो सकते हैं। एक स्‍वस्‍थ श‍िशु द‍िनभर में 5 से 6 बार स्‍टूल पास करता है, अगर श‍िशु स्‍टूल पास न करे, तो इसका कारण कब्‍ज हो सकता है।

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सभी श‍िशुओंं को ठोस आहार देने पर कब्‍ज होता है?

ऐसा जरूरी नहीं है क‍ि हर शि‍शु को ठोस आहार देने पर कब्‍ज की समस्‍या हो। हालांक‍ि छह महीने स्‍तनपान के बाद जब श‍िशु ठोस आहार का सेवन शुरू करता है, तो उसके पाचन तंत्र में बदलाव आता है। श‍िशु के पाचन तंत्र को आहार समझने में थोड़ा समय लगता है और इस दौरान कुछ बच्‍चों में कब्‍ज की समस्‍या हो सकती है। साथ ही कुछ माता-प‍िता श‍िशु को फाइबर फूड देने के बजाय केवल बेबी फूड ख‍िलाते हैं, जबक‍ि कब्‍ज से बचने के ल‍िए फाइबर जरूरी है, लेक‍िन श‍िशुओं को सीमि‍त मात्रा में ही फाइबर देना चाह‍िए वरना पाचन समस्‍याएं हो सकती हैं।

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श‍िशु को कब्‍ज से बचाने के ल‍िए क्‍या करें?

  • ठोस आहार देते समय ध्‍यान रखें क‍ि कोई भी नई चीज श‍िशु के पाचन पर कैसे असर करेगी, इसकी जानकारी पहले से नहींं हो सकती इसल‍िए क‍िसी भी नई चीज को देने से पहले उसकी सामग्रि‍यांं अच्‍छी तरह चेक करें और कम मात्रा में श‍िशु को ख‍िलाएंं।
  • हमारे पाचन की तरह शि‍शु का पाचन तंत्र इतना मजबूत नहीं होता है इसल‍िए उसे एक साथ अध‍िक मात्रा में खाना न ख‍िलाएं, इससे कब्‍ज की समस्‍या हो सकती है।
  • श‍िशु को कब्‍ज से बचाने के ल‍िए उसे हाइड्रेट रखें। मील्‍स के बीच में श‍िशु को पानी देना न भूलें, इससे स्‍टूल पास करने में आसानी होगी और कब्‍ज की समस्‍या नहीं होगी।

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इन लक्षणों को गंभीरता से लें

MedlinePlus के मुताब‍िक, छह माह या उससे अध‍िक उम्र के श‍िशु अगर तीन द‍िनों तक स्‍टूल पास न करें, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। अगर उल्‍टी या इर‍िटेशन जैसे लक्षण नजर आएं, तो भी डॉक्‍टर से संपर्क करें। श‍िशु स्‍टूल पास करने से बचे, तो भी सावधानी बरतें। अगर स्टूल में ब्‍लड आए, तो भी डॉक्‍टर से सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

अगर श‍िशु को स्‍टूल पास करते समय दर्द हो, स्‍टूल हार्ड और ड्राई हो, तो यह कब्‍ज का लक्षण हो सकता है। ठोस आहार की शुुरुआत करने पर कुछ बच्‍चों में ये लक्षण नजर आ सकते हैं क्‍योंक‍ि श‍िशु के पाचन को सॉल‍िड फूड को स्‍वीकार करने में समय लगता है या श‍िशु में पानी की कमी या फाइबर की कमी भी कब्‍ज का कारण हो सकते हैं।

FAQ

  • फाइबर की कमी दूर करने के ल‍िए श‍िशु को क्‍या ख‍िलाएं?

    फाइबर र‍िच फूड्स जैसे ओटमील, बेरीज, स्‍वीट पोटैटो, फलों का ताजा पल्‍प श‍िशु को ख‍िला सकते हैं।
  • ठोस आहार शुरू करने के बाद क‍ितने समय तक कब्‍ज रहता है?

    ठोस आहार शुरू करने के कुछ महीने या कुछ हफ्ते तक कब्‍ज हो सकता है जो धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। कब्‍ज ठीक न होने पर डॉक्‍टर से संपर्क करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Jun 30, 2026 21:32 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 30, 2026 21:32 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

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