मां बनने का एहसास हर महिला के लिए खास होता है। जब वह उसे पहली बार छूती है और गले लगाती है, तो उसे यूं लगता है मानो सब कुछ मिल गया हो। शिशु के जन्म से ही मां को उसकी चिंता शुरू हो जाती है। शिशु के स्वास्थ्य से लेकर व्यवहार तक मां हर बात का ख्याल रखती है, लेकिन अगर मां इन बातों का ख्याल न रख पाए, तो उसे आत्मग्लानि का एहसास होता है। ऐसा ही कुछ प्रतीक्षा के साथ हुआ। 14 अक्टूबर 2025 को पुणे की रहने वाली 31 वर्षीय प्रतीक्षा जोशी ने स्वस्थ शिशु को सी-सेक्शन के जरिए जन्म दिया। प्रतीक्षा पेशे से फूड टेक्नोलॉजिस्ट हैं। जन्म के समय सब कुछ ठीक था, लेकिन बाद में प्रतीक्षा ने गौर किया कि वह अपनी बच्ची को ठीक से स्तनपान नहीं करवा पा रहीं थीं, कारण था लो मिल्क सप्लाई। इस समस्या ने प्रतीक्षा के आगे कई और चुनौतियों को जन्म दे दिया। ब्रेस्टफीडिंग एक मुश्किल सफर है जिसमें कई चुनौतियां आती हैं, तो चलिए प्रतीक्षा की कहानी के जरिए समझते हैं स्तनपान के दौरान होने वाली समस्याओं के बारे में। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Tanima Singhal, Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।
शिशु को दूध न पिलाना का गम पोस्टपार्टम डिप्रेशन में बदल गया
प्रतीक्षा बताती हैं कि बतौर फूड टेक्नोलॉजिस्ट यह मानती हैं कि नेचुरल फूड्स के मुकाबले, प्रोसेस्ड फूड्स उतने हेल्दी नहीं होते हैं इसलिए वह हमेशा से अपने बच्चे को कम से कम प्रोसेस्ड फूड्स देने का प्रयास करना चाहती थींं, लेकिन प्रेग्नेंसी के बाद मिल्क सप्लाई कम होने के कारण प्रतीक्षा को अपने बच्चे को ठीक से स्तनपान नहीं करा पाईंं और उन्हें बच्चे का पेट भरने के लिए फार्मूला मिल्क का इस्तेमाल करना पड़ा। इसका मलाल उन्हें हमेशा रहेगा, लेकिन इससे भी खराब बात यह थी कि शिशु को स्तनपान न करा पाने का गम प्रतीक्षा के लिए पोस्टपार्टम डिप्रेशन में बदल गया। इस वजह से वह अपने मांं बनने के खास एहसास का ठीक से अनुभव ही नहीं कर पाईं। हर बार जब वह अपने शिशु को फार्मूला मिल्क देती थीं, तो उन्हें अच्छा महसूस नहीं होता था।
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लैक्टेशन एक्सपर्ट से संपर्क किया
डिलीवरी के बाद दो महीने प्रतीक्षा ने लगातार डिप्रेशन का सामना किया। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि लो मिल्क सप्लाई के लिए आखिर वह किससे बात करें? तभी उन्होंने एक विज्ञापन के जरिए लैक्टेशन एक्सपर्ट से संपर्क किया और उनकी ब्रेस्टफीडिंग जर्नी पूरी तरह से बदल गई। मांं सी केयर क्लीनिक की लैक्टेशन एक्सपर्ट Dr. Tanima Singhal की देखरेख में डॉ. आकांक्षा और डॉ. श्रुति ने प्रतीक्षा को ब्रेस्टफीडिंग से संबंधित जरूरी बातों पर गाइडेंस दी।
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काउंसलिंग सेशन लेकर हफ्ते भर में स्तनपान दोबारा शुरू किया

Dr. Tanima Singhal ने बताया कि जब प्रतीक्षा से बात हुई, तो वह बहुत घबराई हुई थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर बच्चे को कैसे फीड कराएं? एक्सपर्ट्स ने उनकी समस्या को समझा, शिशु को ब्रेस्टफीड कराने की पोजीशन के बारे में प्रतीक्षा को बताया, उनकी डाइट बदली और हफ्ते भर में प्रतीक्षा को बदलाव महसूस हुआ और उन्होंने शिशु को ठीक से स्तनपान कराना शुरू कर दिया। इसके लिए उन्हें एक्सपर्ट्स के साथ काउंसलिंग सेशन्स दिए गए।
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शिशु को फार्मूला मिल्क देना बंद कर दिया

प्रतीक्षा ने बताया कि काउंसलिंग में उन्हें इतनी अच्छी गाइडेंस मिली कि उन्होंने शिशु को फार्मूला मिल्क देना पूरी तरह से बंद कर दिया। जब बच्ची 3.5 महीने की हो गई तब प्रतीक्षा उसे आसानी से स्तनपान करवा पा रही थीं। इससे बच्ची का वजन भी हेल्दी तरीके से बढ़ा और उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव भी नजर आए। यह देखकर प्रतीक्षा को बहुत खुशी हुई।
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स्तनपान के दौरान लो मिल्क सप्लाई के कारण- Low Milk Supply During Breastfeeding
- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, प्रेग्नेंसी में कम ब्रेस्थ ग्रोथ, ज्यादा उम्र या जेस्टेशनल डायबिटीज के कारण मिल्क सप्लाई कम हो सकती है। अगर लो मिल्क सप्लाई का कारण पता चल जाए, तो दूध की मात्रा को बढ़ाना संभव है।
- Dr. Tanima Singhal ने बताया कि लो मिल्क सप्लाई के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे हार्मोनल असंतुलन, गलत लैचिंग तकनीक, तनाव, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन, थायराइड वगैरह। ऐसी समस्याएं नजर आने पर तुरंत एक्सपर्ट से सलाह लेना चाहिए ताकि सही समय पर इलाज हो सके।
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन से भी लड़ी जंग
प्रतीक्षा ने बताया कि डिलीवरी के बाद शिशु को स्तनपान न करा पाने के अनुभव ने उन्हें इतना परेशान कर दिया कि वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार हो गईं। उन्हें हर वक्त रोने का मन करता था, डाइट भी घट गई थी। अब वह हर मां को सलाह देती हैं कि ऐसी समस्याओं से जूझने के बजाय एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। एक्सपर्ट की मदद से प्रतीक्षा ने अपनी डाइट में प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर जैसे पोषक तत्वों को शामिल किया और सकारात्मक ऊर्जा के साथ शुरुआत की और धीरे-धीरे वह डिप्रेशन से बाहर निकल पाईं। इसके लिए उन्होंने खुद को समझाया और संघर्ष को जारी रखा।
निष्कर्ष:
प्रतीक्षा ने समय पर एक्सपर्ट गाइडेंस ली ताकि उन्हें अपने बच्ची को ब्रेस्टफीडिंग से दूर न रखना पड़े। अगर आप भी ऐसी किसी समस्या का शिकार हैं, तो एक्सपर्ट से सलाह लेने में बिल्कुल देरी न करें।
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Feb 06, 2026 19:17 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Feb 06, 2026 19:17 IST
Modified By : Yashaswi MathurFeb 06, 2026 19:17 IST
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Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Tanima Singhal