Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान स्तन में गांठ को न करें नजरअंदाज, डॉक्‍टर से जानें इसके संभावित कारण और संकेत

कुछ मांओं को ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान एक या दोनों ब्रेस्‍ट में गांठ महसूस होती है। कुछ गांठ खुद ही थोड़े समय में ठीक हो जाती है और कुछ को इलाज एवं दवाओं की जरूरत होती है। जानें स्‍तनपान के दौरान गांठ के संकेत, कारण और इलाज।

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स्‍तनपान के दौरान मांओं को कई शारीर‍िक चुनौत‍ियों का सामना करना पड़ सकता है ज‍िनमें से एक है स्‍तन में गांठ (Breast Lump)। ऐसा हर मह‍िला के साथ नहीं होता, लेक‍िन कुछ मामलों में यह समस्‍या जेनेट‍िक हो सकती है। हार्मोनल बदलाव का असर ट‍िशूज पर भी होता है ज‍िसके कारण गांठ बन सकती है। कुछ खास तरह की दवाओं का सेवन या स्‍तनपान कराने का गलत तरीका भी ब्रेस्‍ट में गांठ का कारण बन सकता है। ब्रेस्‍ट में होने वाली गांठ को हल्‍के में नहीं लेना चाह‍िए क्‍योंक‍ि कुछ दुर्लभ मामलों में यह ब्रेस्‍ट कैंसर का कारण भी बन सकती है। हालांक‍ि, National Institute Of Health, के मुताब‍िक, ब्रेस्‍ट में गांठ के 60 से 80 प्रत‍िशत मामले गैर-कैंसरयुक्त होते हैं, लेक‍िन लापरवाही की गुंजाइश नहीं रखना चाह‍िए। आगे जानते हैं ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान ब्रेस्‍ट में गांठ बनने के संकेत, कारण और इलाज। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।

Dr. Tanima Singhal ने कहा, ''मैस्टाइटिस ब्रेस्‍ट के ट‍िशूज में होने वाली सूजन है जो अक्‍सर ब्रेस्‍टफीड‍िंग मदर्स में होती है। इसके कारण दर्द, सूजन और गांठ बन जाती है। अगर गांठ के साथ दर्द, रेडनेस, बुखार हो, तो यह मैस्टाइटिस का संकेत हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक फीड न करना या क‍िसी एक स्‍तन से कम दूध प‍िलाने के कारण भी स्‍तन में गांठ हो जाती है।''

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ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान स्‍तन में गांठ बनने के संकेत क्‍या हैं?

  • स्‍तन में सख्‍त गांठ जैसा महसूस होना
  • दर्द या सूजन होना
  • स्‍तन की त्‍वचा का लाल होना
  • स्‍तन में भारीपन महसूस होना

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2023 में मेड‍िकल जर्नल BMJ Case Reports में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताबि‍क, ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान होने वाली गांठ के ज्‍यादातर मामलों में गांठ का कारण दूध का सही ढंग से बाहर न न‍िकल पाना होता है और इस वजह से ब्रेस्‍ट में सूजन होती है। समय पर इसका इलाज न होने पर यह गंभीर इंफेक्‍शन का रूप ले लेती है। स्‍टडी में कुछ सुझाव द‍िए गए हैं जैसे इस दौरान स्‍तनपान जारी रखना चाह‍िए, सही लैच‍िंग तकनीक अपनानी चाह‍ि‍ए, जरूरत से ज्‍यादा ब्रेस्‍ट मसाज या बार-बार पंप‍िंग से बचना चाह‍िए।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान स्तन में गांठ क्यों बनती है?

  • ज्‍यादा टाइप कपड़े पहनना
  • मैस्टाइटिस (Mastitis)
  • स्तन में दूध भर जाना (Engorgement)
  • ल‍िम्‍फ नोड्स में सूजन
  • स्तन पूरी तरह खाली न होना
  • मि‍ल्‍क डक्‍ट ब्लॉक होना
  • गलत लैचिंग प्रक्र‍िया
  • लंबे समय तक श‍िशु को दूध न पिलाना
  • गैलेक्टोसेले (Galactocele) स्‍तनपान के दौरान दूध जमा होने से बनने वाली एक स‍िस्‍ट होती है ज‍िसके कारण गांठ बन जाती है।

गांठ का कारण ब्रेस्‍ट कैंसर तो नहीं?

ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान गांठ होने का कारण कैंसर हो सकता है, लेक‍िन ऐसे बहुत कम मामले होते हैं। ब्रेस्‍ट म‍िल्‍क के अलावा न‍िप्‍पल से ड‍िस्‍चार्ज न‍िकलना, रेडनेस, सूजन ब्रेस्‍ट कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। हालांक‍ि, कैंसर की पुष्‍ट‍ि केवल जांच के जर‍िए हो सकती है। साल 2023 में मेड‍िकल जर्नल International Journal Of Surgery Case Reports में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, मैस्टाइटिस के इलाज के बाद भी अगर गांठ बनी रहे, तो बायोप्‍सी कराई जा सकती है। ब्रेस्‍ट कैंसर के ऐसे मामलों के ल‍िए स्‍टडी में अल्‍ट्रासाउंट और अन्‍य जांच को भी प्राथम‍िकता देने की सलाह दी गई है।

ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान होने वाली गांठ का इलाज कैसे होता है?

  • अगर गांठ बनी रहे, 1 से 2 हफ्तों में ठीक न हो, तो डॉक्‍टर अल्‍ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं।
  • ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान अगर गांठ हो जाती है, तो डॉक्‍टर सही लैच‍िंग तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं।
  • हर फीड के बाद स्‍तन को अच्‍छी तरह से खाली करने के ल‍िए कहा जाता है।
  • बार-बार ब्रेस्‍टफीड‍िंग कराने की सलाह दी जाती है।
  • इंफेक्‍शन होने पर डॉक्‍टर एंटीबायोट‍िक्‍स खाने की सलाह भी दे सकते हैं।
  • ब्रेस्ट एब्सेस (Breast abscess) यानी गांठ में पस भरने के मामले में सुई से पस न‍िकाला जाता है।
  • इस दौरान पर्याप्त आराम करें और तरल पदार्थ अधिक पिएं।

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गांठ होने पर स्‍तनपान जारी रखना चाह‍िए?

ज्‍यादातर मामलों में ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान होने वाली गांठ दवा या सही लैच‍िंग तकनीक से ठीक हो जाती है इसल‍िए ज्‍यादातर मामलों में डॉक्‍टर स्‍तनपान जारी रखने की सलाह देते हैं, लेक‍िन गांठ होने पर हमेशा डॉक्‍टर की सलाह पर ही श‍िशु को स्‍तनपान कराएं।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • जब गांठ जैसा महसूस हो, तो डॉक्‍टर से जांच जरूर कराएं।
  • तेज दर्द या सूजन होने पर।
  • अगर 24 से 48 घंटों में तकलीफ बढ़े, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान स्‍तन में गांठ हो सकती है। गांठ की वजह से दर्द, सूजन, रेडनेस जैसे संकेत द‍िख सकते हैं। इसके पीछे मैस्टाइटिस, स्‍तन में दूध ज्‍यादा भर जाना, ल‍िम्‍फ नोड्स में सूजन, स्‍तन का पूरी तरह से खाली न हो पाना, मि‍ल्‍क डक्‍ट ब्लॉक होना, लैच‍िंग का गलत तरीका अपनाना या गैलेक्टोसेले के कारण गांठ हो सकती है। इसकी जांच अल्‍ट्रासाउंड के जर‍िए होती है। इंफेक्‍शन के केस में डॉक्‍टर एंटीबायोट‍िक्‍स दे सकते हैं, पस न‍िकालने या सही लैच‍िंग प्रक्र‍िया अपनाने से भी आराम म‍िलता है।

FAQ

  • क्‍या स्‍तन की गांठ खुद ठीक हो जाती है?

    म‍िल्‍क डक्‍ट ब्‍लॉक होने से या दूध इकट्ठा होने से बनी गांठ सही देखभाल और फीड‍िंग तकनीक अपनाने से खुद ही ठीक हो जाती हैं। 
  • स्‍तन में ज्‍यादा दूध बनने से भी गांठ होती है?

    ज्‍यादा दूध बनकर जब श‍िशु के न पीने की स्‍थ‍िति‍ में दूध स्‍तन में इकट्ठा रहता है और बाहर नहीं न‍िकल पाता है, तो सूजन और सख्‍त गांठ महसूस हो सकती है। 
  • म‍िल्‍क डक्‍ट ब्‍लॉक कब हो जाती है?

    जब दूध बाहर न न‍िकलने से जमा हो जाता है तब म‍िल्‍क डक्‍ट ब्‍लॉक हो जाती है। बार-बार स्‍तनपान कराने, सही लैच‍िंग तकनीक अपनाने से यह समस्‍या हल हो जाती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 23, 2026 17:32 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

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