Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

क्या स्तनपान के दौरान कॉफी और चाय पीना सुरक्षित है? डॉक्‍टर से जानें

स्‍तनपान के दौरान अक्‍सर मांएं थकान और नींद की कमी से परेशान होकर कैफीन ड्र‍िंक्‍स जैसे चाय या कॉफी का सहारा ले लेती हैं। डॉक्‍टर से जानें क्‍या यह आदत उनके और बच्‍चे की सेहत के ल‍िए वाकई सुरक्ष‍ित है?

ब्रेस्‍टफीड‍िंग मदर्स का रूटीन श‍िशु की जरूरतों के मुताब‍िक बदलता रहता है। श‍िशु की देखभाल में मांएं नींद पूरी नहीं कर पातीं और अक्‍सर थकान महसूस करती हैं। शरीर की थकावट दूर करने के ल‍िए वे कैफीन का सहारा ले लेती हैं। आमतौर पर यह देखा जाता है क‍ि ज्‍यादातर घरों में रोजाना चाय या कॉफी बनना आम बात है, लेक‍िन स्‍तनपान के दौरान मां जो भी खानपान लेती है, उसका असर श‍िशु पर भी पड़ता है। यही कारण है क‍ि डॉक्‍टर ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान डाइट पर व‍िशेष ध्‍यान देने की सलाह देते हैं। कैफीन का सेवन करने से भले ही कुछ देर के ल‍िए माइंड एलर्ट हो जाता है और शरीर एनर्जेट‍िक महसूस करता है, लेक‍िन क्‍या स्‍तनपान के दौरान कैफीन का सेवन वाकई सुरक्ष‍ित है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।

200 से 300 एमजी कैफीन से ज्‍यादा न लें

drinking-tea-or-coffee-during-breastfeeding

Dr. Tanima Singhal ने कहा, ''स्तनपान के दौरान सीमित मात्रा में कॉफी और चाय पीना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। एक्‍सपर्ट्स प्रतिदिन करीब 200 से 300 मिलीग्राम कैफीन तक लेने की सलाह देते हैं। मां के ज्‍यादा कैफीन लेने से ब्रेस्‍टफीड‍िंग पर न‍िर्भर कुछ शिशुओं में चिड़चिड़ापन, बेचैनी या अन‍िद्रा जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं, खासकर नवजात शिशुओं में। अगर बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो कैफीन की मात्रा कम करें और जरूरत होने पर डॉक्टर से सलाह लें।''
Australian Breastfeeding Association के मुताब‍िक, चाय, कॉफी, चॉकलेट, यहां तक क‍ि एनर्जी ड्र‍िंक्‍स में भी कैफीन मौजूद होता है। हालांक‍ि, कैफीन का लगभग 1 प्रत‍िशत ही ब्रेस्‍टम‍िल्‍क तक पहुंचता है, लेक‍िन जो मह‍िलाएं ज्‍यादा मात्रा में कैफीन पीती हैं, उनके ल‍िए यह संख्‍या ज्‍यादा भी हो सकती है। कैफीन पीने के करीब 1 घंटे बाद इसका असर ज्‍यादा होता है।

यह भी पढ़ें- क्या ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है? जानें डॉक्टर से

नवजात शि‍शुओं को कैफीन से ज्‍यादा नुकसान हो सकता है

Dr. Tanima Singhal ने बताया क‍ि अगर मां कैफीन का ज्‍यादा सेवन करती है, तो ब्रेस्‍टफीड‍िंग के जर‍िए नवजात श‍िशु में कैफीन का नुकसान ज्‍यादा हो सकता है। 3 से 4 महीने के बच्‍चों के मुकाबले, नवजात श‍िशुओं का शरीर ज्‍यादा सेंस‍िट‍िव होता है और कैफीन के नुकसान उन पर ज्‍यादा होते हैं। इसल‍िए नवजात श‍िशुओं की मांओं को व‍िशेष सावधानी बरतनी चाह‍िए। खासकर, अगर मां धूम्रपान करती है, तो श‍िशु को कैफीन का ज्‍यादा नुकसान हो सकता है क्‍योंक‍ि धूम्रपान से कैफीन का असर बढ़ सकता है।

क्‍या कहती हैं स्‍टडीज?

साल 2024 में मेड‍िकल जर्नल Clinical Lactation में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी र‍िव्‍यू के मुताब‍िक, ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान ज्‍यादा कैफीन का सेवन श‍िशुओं में न्‍यूरोडेवल्‍पमेंट प्रभाव‍ित कर सकता है और अन‍िद्रा, बेचैनी जैसे कुछ खतरों को बढ़ा सकता है। स्‍टडी में बताया गया है क‍ि ये नुकसान उन मामलों में देखे गए हैं ज‍िनमें मह‍िलाओं ने प्रत‍ि‍द‍िन 300 एमजी से ज्‍यादा कैफीन का सेवन क‍िया है।

साल 2018 में मेड‍िकल जर्नल Swiss Medical Weekly में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ज‍िन श‍िशुओं की मांओं ने कैफीन का सेवन क‍िया उन बच्‍चों में बेचैनी, पेट दर्द और त्‍वचा संबंध‍ित समस्‍याएं देखी गईं। हालांक‍ि, सीधा कारण समझने के ल‍िए इस व‍िषय पर और अध्ययन की जरूरत है।

यह भी पढ़ें- स्तनपान कराती हैं तो जरूर खाएं कैल्शियम से भरपूर ये फूड्स, कमी से हो सकती हैं समस्याएं

ब्रेस्‍टफीड‍िंग और कैफीन के बीच 3 से 4 घंटे का गैप करें

Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow ने कहा, ''एक कप कॉफी में करीब 95 से 100 एमजी कैफीन हो सकता है। एक कप चाय में करीब 25 से 30 ग्राम कैफीन हो सकता है। श‍िशु को ब्रेस्‍टफीड‍िंग कराते समय या कुछ देर पहले चाय या कॉफी पीने से बचें। ब्रेस्‍टफीड‍िंग से 3 से 4 घंटे पहले कैफीन ले सकती हैं। इस तरह गैप करने से कैफीन को शरीर में प्रोसेस होने का समय म‍िल जाएगा।''

कैफीन इंटेक के ल‍िए जरूरी ट‍िप्‍स

  • ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान कैफीन लेने के बजाय उसके बाद कैफीन का सेवन कर सकती हैं।
  • ज्‍यादा कैफीन के सेवन से शरीर में ड‍िहाइड्रेशन हो सकता है इसल‍िए पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन भी करें।
  • कैफीन के बजाय नींबू पानी, छाछ, सौंफ के पानी का सेवन कर सकती हैं।
  • हर्बल चाय या ड्र‍िंक्‍स का सेवन करने से पहले डॉक्‍टर से सलाह लें।

डॉक्‍टर से सलाह कब लें?

  • श‍िशु कम सोता है या च‍िड़च‍िड़ापन लगे, तो मेड‍िकल हेल्‍प लें।
  • श‍िशु प्रीमेच्‍योर है या श‍िशु का वजन कम है, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • अगर आप ऐसी दवाएं ले रही हैं ज‍िसमें कैफीन है, तो भी डॉक्‍टर से सलाह लें। कुछ पेनक‍िलर्स में कैफीन हो सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान 200 से 300 एमजी कैफीन का सेवन कर सकती हैं, लेक‍िन इससे अध‍िक मात्रा से श‍िशु और मां की सेहत को नुकसान हो सकता है। ब्रेस्‍टफीड‍िंग और कैफीन के सेवन के बीच कम से कम 3 से 4 घंटे का गैप रखें। ब्रेस्‍टफीड‍िंग के बाद कैफीन का सेवन ज्‍यादा सुरक्ष‍ित माना जाता है। ज्‍यादा कैफीन से ड‍िहाइड्रेशन भी हो सकता है इसल‍िए पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करना न भूलें। साथ ही अगर नवजात श‍िशु को ब्रेस्‍टफीड करा रही हैं, तो डाइट में व‍िशेष सावधानी बरतें क्‍योंक‍ि 3 से 4 महीने के श‍िशु के मुकाबले, कैफीन नवजात श‍िशुओं की सेहत को ज्‍यादा प्रभाव‍ित कर सकता है।

FAQ

  • ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान क्‍या नहीं पीना चाह‍िए?

    ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान चाय, कॉफी, अल्‍कोहल, एनर्जी ड्र‍िंक्‍स या ज्‍यादा मीठी ड्र‍िंक्‍स के सेवन से परहेज करना चाह‍िए। 
  • ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान हर्बल ड्र‍िंक्‍स का सेवन सुरक्ष‍ित है?

    नहीं। ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान जड़ी-बूटियों का सेवन केवल एक्‍सपर्ट गाइडेंस के तहत क‍िया जाना चाह‍िए इसल‍िए बाजार में म‍िलने वाले हर्बल ड्र‍िंक्‍स का सेवन खुद से न करें। ब्रेस्‍टफीड‍िंग के दौरान पानी, दूध और पौष्टिक पेय को प्राथम‍िकता दें।

Read Next

बरसात में प्रग्नेंसी के दौरान खानपान से जुड़ी इन बातों का रखें खास ध्यान

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 23, 2026 13:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content