शिशुओं के विकास में विटामिन डी अहम भूमिका निभाता है इसलिए इसकी अहमियत गर्भ में ही शुरू हो जाती है। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे दो जरूरी मिनरल्स के एब्जॉर्ब होने की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। कई माता-पिता यह सोचते हैं कि शिशु को ब्रेस्टफीड कराने से विटामिन डी की कमी नहीं होती, लेकिन यह समस्या किसी भी शिशु को हो सकती है। शिशुओं में यह एक कॉमन समस्या बनती जा रही है। अगर शरीर में विटामिन डी की कमी होगी, तो आगे चलकर भविष्य में क्रॉनिक डिजीज जैसे डायबिटीज या हड्डियों से जुड़ी किसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। आगे जानेंगे शिशुओं में विटामिन डी की कमी क्यों होती है और कमी को पहचानने के क्या संकेत हैं? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।
शिशुओं में विटामिन D की कमी क्यों होती है?

Dr. Tanima Singhal ने बताया कि कई शिशुओं में विटामिन डी की कमी हो जाती है। अगर शरीर में विटामिन डी की कमी है, तो शरीर में कैल्शियम की मात्रा भी कम हो जाएगी। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। 6 माह या उससे कम उम्र के बच्चों में विटामिन डी की कमी के पीछे स्तनपान न कराना, प्रेग्नेंसी के दौरान हेल्दी डाइट न लेना, जन्म के 6 माह बाद विटामिन डी रिच फूड्स न खाना, सनलाइट एक्सपोजर न होना, किडनी डिजीज या अन्य कोई गंभीर बीमारी के कारण शिशुओं में विटामिन डी की कमी हो जाती है।
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किन शिशुओं में विटामिन D की कमी हो सकती है?
- जो शिशु फॉर्मूला मिल्क का सेवन करते हैं।
- जिन बच्चों का सन एक्सपोजर कम है।
- जो बच्चे पहले से किसी गंभीर बीमारी का शिकार हैं।
- जो बच्चे जन्म से कमजोर हैं।
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शिशुओं में विटामिन D की कमी के गंभीर नुकसान
- शिशुओं में विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। मामूली चोट या गिरने से भी हड्डी में फ्रैक्चर हो सकता है।
- विटामिन डी की कमी से हाथ-पैर टेढ़े हो सकते हैं। इसे मेडिकल भाषा में रिकेट्स कहा जाता है। रिकेट्स के कारण हड्डियों के आकार में बदलाव आ सकता है।
- जिन बच्चों में विटामिन डी की कमी होती है उनकी मांसपेशियों की ताकत कमजोर होीत है और उन्हें उठने, बैठने, घुटने के बल चलने में दिक्कत हो सकती है।
- विटामिन डी की कमी से मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है और बच्चा सुस्त नजर आ सकता है। विटामिन डी की कमी से आगे चलकर डेंटल समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
- विटामिन डी की कमी से इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और शिशु आसानी से बीमारी और इंफेक्शन का शिकार हो सकते हैं।
- विटामिन डी की कमी से कैल्शियम एब्जॉर्ब करने में मदद मिलती है, लेकिन इसकी कमी होने पर कैल्शियम एब्जॉर्प्शन कम हो सकता है और मांसपेशियों में ऐंठन या दर्द हो सकता है।
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क्या कहती है स्टडी?
साल 2023 में Nutrients नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, विटामिन डी की कमी से शिशुओं में रिकेट्स यानी हड्डियों का टेढ़ा‑मेढ़ा होना, फ्रैक्चर का खतरा बढ़ना, चलने की स्पीड कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। स्टडी में यह भी बताया गया है कि विटामिन डी की कमी इम्यूनिटी को भी प्रभावित करती है जिसके कारण सर्दी-खांसी, निमोनिया जैसे रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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कैसे पता चलेगा शिशुओं में विटामिन D की कमी है?
शिशुओं में विटामिन डी की कमी होने पर कमजोरी, जोड़ों में दर्द, थकान, ड्राई स्किन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांकि, विटामिन डी की कमी के लक्षण अन्य बीमारियों जैसे लग सकते हैं इसलिए अक्सर माता-पिता को कंफ्यूजन होता है।
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क्या शिशु को विटामिन D सप्लीमेंट दे सकते हैं?
शिशुओं के विकास के लिए विटामिन डी फायदेमंद है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बगैर विटामिन डी सप्लीमेंट्स का सेवन शिशु को नहीं कराना चाहिए। धूप और फोर्टिफाइड आहार में पहले से विटामिन डी होता है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बगैर विटामिन डी सप्लीमेंट्स नहीं देने चाहिए।
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जरूरत से ज्यादा विटामिन D देना क्यों हानिकारक है?
शिशुओं को जरूरत से ज्यादा कैल्शियम या विटामिन डी सप्लीमेंट्स नहीं देना चाहिए, वरना शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है और शिशु हाइपरकैल्सीमिया का शिकार हो सकता है। ऐसा होने पर उल्टी, कब्ज, दस्त जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। विटामिन डी की ओवरडोज किडनी और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
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शिशु में विटामिन डी की कमी होने पर क्या करें?
- विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए शिशु के लिए सनलाइट एक्सपोजर जरूरी है, लेकिन तेज धूप में बच्चे को ले जाने से बचें।
- सप्लीमेंट्स की मदद से शिशुओं में विटामिन डी की कमी को दूर किया जाता है। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी सप्लीमेंट शिशु को दे सकते हैं।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- हड्डियों में दर्द होना
- बार-बार फ्रैक्चर होना
- विकास की स्पीड धीमी होना
- बार-बार इंफेक्शन होना
निष्कर्ष:
शिशुओं की सेहत के लिए विटामिन डी की कमी कई गंभीर नुकसान लेकर आती है जैसे हड्डियों का कमजोर होना, इम्यूनिटी खराब होना, बीमारी और इंफेक्शन का खतरा बढ़ना, डेंटल समस्याएं, क्रॉनिक डिजीज, रिकेट्स, फ्रैक्चर वगैरह। कमजोरी, जोड़ों में दर्द, थकान, ड्राई स्किन विटामिन डी की कमी के संकेत हैं।
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FAQ
विटामिन डी की कमी का पता कैसे चलता है?
डॉक्टर विटामिन डी की कमी का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट करते हैं जिसके जरिए पता चलता है कि शरीर में विटामिन डी की मात्रा कम या है नहीं।शिशुओं को विटामिन डी कमी से कैसे बचाएं?
शिशुओं को स्तनपान कराएं, सुबह की धूप शिशुओं के लिए अच्छी होती है और सनलाइट से विटामिन डी की पूर्ति भी होती है। साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान विटामिन डी रिच फूड्स का सेवन करना चाहिए।
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Jul 15, 2026 21:27 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Tanima Singhal