Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

बच्‍चों में विटामिन D सप्‍लीमेंट की ओवरडोज पड़ सकता है भारी, डॉक्‍टर से जानें नुकसान

हड्ड‍ियों की मजबूती, मांसपेश‍ियों के व‍िकास के ल‍िए व‍िटाम‍िन डी जरूरी है। ज‍िन श‍िशुओं में व‍िटाम‍िन डी की कमी होती है उन्‍हें ड्रॉप्‍स के फॉर्म में व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट द‍िया जाता है, लेक‍िन अगर मात्रा ज्‍यादा है, तो शरीर में कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है और कई नुकसान हो सकते हैं।

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व‍िटाम‍िन डी हड्डि‍यों, दांत और मसल्‍स को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। अगर व‍िटाम‍िन डी की कमी है, तो शरीर में हड्डि‍यों के टेढ़े-मेढ़े होने की समस्‍या र‍िकेट्स व‍िक‍स‍ित हो जाती है। श‍िशुओं के व‍िकास के ल‍िए व‍िटाम‍िन डी एक जरूरी पोषक तत्‍व है, लेक‍िन कभी-कभी श‍िशुओं को माता-प‍िता ज्‍यादा व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट दे देते हैं ज‍िसके कारण फायदे की जगह नुकसान हो सकते हैं। कई बार माता-प‍िता डॉक्‍टर की सला‍ह के बगैर बाजार से म‍िलने वाले वि‍टाम‍िन डी ड्रॉप्‍स बच्‍चे को देते हैं और ज्‍यादा बूंदें देने के कारण श‍िशु के शरीर में व‍िटाम‍िन डी की मात्रा बढ़ सकती है। आगे जानेंगे श‍िशुओं में व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट की ओवरडोज कैसे भारी पड़ सकती है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।

व‍िटाम‍िन D सप्‍लीमेंट की ओवरडोज में ये लक्षण द‍िख सकते हैं

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  • चिड़चिड़ापन
  • दूध न पीना
  • पेट में दर्द होना
  • उल्‍टी होना
  • बेचैनी बढ़ना

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बच्‍चों में व‍िटाम‍िन D की क‍ितनी मात्रा सुरक्ष‍ित होती है?

  • Dr. Tanima Singhal ने बताया क‍ि अगर श‍िशु की उम्र 1 साल या उससे कम है, तो करीब 8.5 से 10 माइक्रोग्राम व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट प्रत‍ि द‍िन द‍िया जाता है। अगर बच्‍चा फॉर्मूला म‍िल्‍क पीता है, तो यह मात्रा कम भी हो सकती है इसल‍िए बच्‍चे का वजन, सेहत और जरूरत के मुताब‍िक डॉक्‍टर से सलाह लेकर मात्रा तय करें।
  • 1 से 4 साल तक के बच्‍चों को डॉक्‍टर रोजाना 10 माइक्रोग्राम व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट देने की सलाह देते हैं।
  • 10 साल तक के बच्‍चों को 50 माइक्रोग्राम से ज्‍यादा व‍िटामि‍न डी सप्‍लीमेंट की मात्रा नहीं देना चाह‍िए।

श‍िशुओं में व‍िटाम‍िन D सप्‍लीमेंट की ओवरडोज है नुकसादायक

1. डाइजेशन खराब हो सकता है

जब श‍िशु के शरीर में व‍िटाम‍िन डी ज्‍यादा होता है, तो कैल्‍श‍ियम लेवल भी बढ़ जाता है। कैल्‍श‍ियम लेवल बढ़ने के कारण पेट दर्द, डायर‍िया या कब्‍ज जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

2. कैल्‍श‍ियम की मात्रा बढ़ सकती है

जब शरीर में व‍िटाम‍िन डी ज्‍यादा होता है, तो ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम की मात्रा भी बढ़ जाती है। ज्‍यादा कैल्‍श‍ियम क‍िडनी में जमा होकर नुकसान पहुंचा सकता है। ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम बढ़ जाने की स्‍थ‍ित‍ि को हाइपरकैल्‍सीम‍िया कहते हैं।

3. कमजोरी और थकान

व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट की ओवरडोज से श‍िशुओं में थकान और कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। साथ ही श‍िशु सुस्‍त हो सकता है और उसकी गत‍िव‍िध‍ि कम हो सकती है।

4. मतली और उल्टी

जब श‍िशु के शरीर में व‍िटाम‍िन डी की मात्रा ज्‍यादा हो जाती है, तो उसे मतली, उल्‍टी या पाचन समस्‍याएं हो सकती हैं। बार-बार उल्‍टी करने से शरीर में कमजोरी बढ़ सकती है।

5. क‍िडनी को नुकसान हो सकता है

गंभीर मामलों में, व‍िटामिन डी की ओवरडोज से कैल्‍श‍ियम की मात्रा बढ़ने पर वो क‍िडनी में जमा हो सकता है और क‍िडनी फंक्‍शन खराब हो सकता है।

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क्‍या कहती हैं स्‍टडीज?

  • साल 2023 में Clinical Toxicology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, अगर श‍िशु को लंबे समय तक व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट ज्‍यादा मात्रा में देंगे, तो ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम बढ़ सकता है ज‍िससे कब्‍ज, बार-बार पेशाब, क‍िडनी संबंधि‍त समस्‍याएं, उल्‍टी, मतली जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • साल 2017 में Global Pediatric Health में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी में दो बच्‍चों के केस पर बात की गई ज‍िन्‍हें ड्रॉप्‍स के जर‍िए व‍िटाम‍िन डी की अध‍िक मात्रा दी गई। उन बच्‍चों में कम खाना, सुस्‍ती, ड‍िहाइड्रेशन, च‍िड़च‍िड़ापन जैसे लक्षण देखे गए। स्‍टडी में पैरेंट्स द्वारा श‍िशुओं को व‍िटाम‍िन डी ड्रॉप्‍स देने से पहले सतर्क रहने की सलाह दी गई।
  • साल 2016 में The BMJ में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, व‍िटाम‍िन डी की ज्‍यादा मात्रा के कारण बच्‍चों में कब्‍ज, भूख कम लगना, बार-बार पेशाब आना, सुस्‍ती, कमजोरी जैसे लक्षण नजर आए।

श‍िशुओं के ल‍िए व‍िटाम‍िन D सप्‍लीमेंट सुरक्ष‍ित है?

हां, श‍िशुओं के ल‍िए खास बनाया गया व‍िटामि‍न D सप्‍लीमेंट सुरक्ष‍ित होता है। वयस्‍कों और बच्‍चों के साथ-साथ श‍िशुओं में भी व‍िटाम‍िन डी की कमी हो सकती है। श‍िशुओं के ल‍िए भी व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट्स आते हैं, लेक‍िन वे गोली के फॉर्म में नहीं बल्‍क‍ि ल‍िक्‍व‍िड के फॉर्म में होते हैं और ड्रॉपर के जर‍िए दि‍ए जाते हैं। व‍िटाम‍िन डी की कमी से श‍िशु को बचाने के ल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर व‍िटाम‍िन डी द‍िया जाता है।

व‍िटाम‍िन D सप्‍लीमेंट देने के साथ ये ट‍िप्‍स अपनाएं

  • श‍िशुओं को व‍िटाम‍िन डी की कमी से बचाने के ल‍िए मांओं को गर्भावस्‍था के समय से ही व‍िटाम‍िन डी र‍िच फूड्स को प्राथम‍िकता देनी चाह‍िए।
  • प्रेग्‍नेंसी के दौरान और बाद में श‍िशु को सनलाइट में लेकर जाएं। हालांक‍ि, तेज धूप श‍िशु के ल‍िए हान‍िकारक साब‍ित हो सकती है। श‍िशु को सुबह 6 से 7 के बीच 10 से 15 म‍िनट के ल‍िए बाहर ले जा सकते हैं।
  • 15 द‍िन से कम उम्र के श‍िशुओं को सन एक्‍सपोजर से दूर रखें।

श‍िशुओं को व‍िटाम‍िन D देते समय क‍िन बातों का ध्‍यान रखें?

  • Dr. Tanima Singhal ने बताया क‍ि श‍िशुओं को विटामिन D सप्लीमेंट हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही द‍िया जाता है। सही मात्रा और सही अवधि तक ही व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट देना चाहिए। श‍िशु की उम्र, वजन और जरूरत से मुताब‍िक डॉक्‍टर डोज तैयार करते हैं।
  • व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट की ओवरडोज से शरीर में कैल्‍श‍ियम की मात्रा बढ़ सकती है इसल‍िए सप्‍लीमेंट के पैक पर द‍िए न‍िर्देश और डॉक्‍टर की सलाह को ध्‍यान रखें।
  • व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट देने से पहले चेक करें क‍ि क‍हीं सप्‍लीमेंट या ड्रॉप्‍स एक्‍सपायर्ड तो नहीं हैं? खरीदते समय डेट चेक करना न भूलें।
  • डॉक्‍टर ने ज‍ितने समय के ल‍िए दवा या डोज दी है, तभी तक श‍िशु को सप्‍लीमेंट दें।
  • व‍िटाम‍िन डी कमी दूर करने के ल‍िए सन एक्‍सपोजर और हेल्‍दी डाइट पर फोकस करें।

न‍िष्‍कर्ष:

श‍िशुओं को विटामिन D सप्लीमेंट की ओवरडोज से पाचन समस्‍याएं जैसे गैस, अपच, उल्‍टी हो सकती हैं, कमजोरी और थकान हो सकती है, क‍िडनी की कार्यक्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है, कैल्‍श‍ियम की मात्रा बढ़ने से हाइपरकैल्‍सीम‍िया जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं इसल‍िए डॉक्‍टर की सलाह पर ही श‍िशु को व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट देना चाह‍िए। श‍िशु की उम्र 1 साल या उससे कम है, तो करीब 8.5 से 10 माइक्रोग्राम से ज्‍यादा व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट नहीं देना चाह‍िए।

source: freepik

FAQ

  • बच्‍चे में व‍िटाम‍िन D की कमी का पता कैसे चलता है?

    अगर बच्‍चों की हड्ड‍ियों में दर्द, कमजोरी, थकान, सुस्‍ती, व‍िकास और लंबाई-वजन बढ़ने में देरी होना, व‍िटाम‍िन डी की कमी के लक्षण हो सकते हैं। व‍िटाम‍िन डी की कमी का पता लगाने के ल‍िए 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी टेस्ट क‍िया जाता है। 
  • क‍िन बच्‍चों में व‍िटाम‍िन D की कमी हो सकती है?

    ज‍िन बच्‍चों को धूप कम म‍िलती है, ज‍िनके आहार में व‍िटाम‍िन डी की भरपूर मात्रा मौजूद नहीं है, प्रीमेच्‍योर बेबी, हड्ड‍ियों की समस्‍या होने पर व‍िटाम‍िन डी की कमी हो सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 17, 2026 18:35 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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