Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

बच्चों के शरीर में कैल्शियम क्‍यों बढ़ जाता है? जानें हाइपरकैल्सीमिया के लक्षण और इलाज

हाइपरकैल्सीमिया (Hypercalcemia) एक मेड‍िकल कंडीशन है ज‍िसके कारण ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम का लेवल ज्‍यादा हो जाता है। कैल्‍श‍ियम शरीर के ल‍िए जरूरी है, लेक‍िन अध‍िक मात्रा शरीर को नुकसान पहुंचाती है। यह कंडीशन बच्‍चों में भी होती है। जानते हैं, बच्‍चों में कैल्‍श‍ियम ज्‍यादा होने के क्‍या कारण हैं और इसे कैसे पहचानें?

इस पेज पर:-


एक कहावत है क‍ि जब क‍िसी भी चीज की अध‍िकता हो जाए, तो वह फायदे की जगह नुकसान पहुंचाने लगती है। कैल्‍श‍ियम के साथ भी कुछ ऐसा ही है। हम बचपन से दादी-नानी से सुनते आए हैं क‍ि दूध प‍िओ, पनीर खाओ। इससे शरीर को कैल्‍श‍ियम म‍िलेगा और हड्डि‍यां मजबूत होंगी। एक्‍सपर्ट्स भी मानते हैं क‍ि कैल्‍श‍ियम हड्ड‍ियों और दांतों को मजबूत बनाता है, लेक‍िन इसकी अध‍िक मात्रा शरीर के ल‍िए हान‍िकारक हो सकती है, खासकर बच्‍चों के शरीर के ल‍िए। हालांक‍ि, बच्‍चों में यह कंडीशन कम देखी जाती है, लेक‍िन माता-प‍िता इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते क्‍योंक‍ि यह स्‍थ‍िति‍ आपके बच्‍चे के शरीर को भी प्रभाव‍ित कर सकती है। ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम की अध‍िकता को मेड‍िकल भाषा में हाइपरकैल्सीमिया (Hypercalcemia) कहा जाता है। सही समय पर इसकी पहचान न हो, तो यह गंभीर समस्‍याएं पैदा कर सकता है। आइए जानते हैं, बच्‍चों में हाइपरकैल्सीमिया क्‍यों होता है और इसका इलाज क्‍या है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Tanima Singhal, Prenatal Care Expert, Gynaecologist & Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow से बात की।

कैल्‍शि‍यम लेवल को कंट्रोल करते हैं ये दो हार्मोन

हमारा शरीर कई चीजों को कंट्रोल करता है ज‍िसमें से एक है ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम लेवल को बनाए रखना। दो ऐसे हार्मोन हैं जो ब्‍लड और हड्ड‍ियों में कैल्‍श‍ियम लेवल को कंट्रोल करने का काम करते हैं। पहला है पैराथायराइड हार्मोन (Parathyroid Hormone) और दूसरा है कैल्सीटोनिन (Calcitonin Hormone)। ऐसे में, हाइपरकैल्सीमिया जैसी मेड‍िकल कंडीशन की वजह से ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम का लेवल ज्‍यादा हो जाता है। सामान्‍य व्‍यक्‍त‍ि के शरीर में कैल्‍शि‍यम लेवल को एब्‍जॉर्ब कराने में व‍िटाम‍िन डी भी अहम भूम‍िका न‍िभाता है।

यह भी पढ़ें- क्या वाकई हड्डी टूटने के बाद विटामिन डी लेना जरूरी होता है? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

बच्चों में हाइपरकैल्सीमिया होने के क्‍या कारण हो सकते हैं?

Hypercalcemia-in-kids

  • गंभीर ड‍िहाइड्रेशन।
  • व‍िटाम‍िन डी की अध‍िक मात्रा। ऐसा बच्‍चों में व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट का अध‍िक सेवन करने की वजह से भी होता है।
  • पैराथायराइड हार्मोन का ज्‍यादा बनना।
  • दुर्लभ जेनेट‍िक रोग।
  • लंबे समय तक खाई जाने वाली कुछ दवाएं।
  • क‍िडनी ड‍िजीज या अन्‍य गंभीर बीमारी।

साल 2025 में Endokrynologia Polska (Polish Journal Of Endocrinology) में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, बच्‍चों में हाइपरकैल्‍सीम‍िया होने के पीछे कई फैक्‍टर्स हो सकते हैं जैसे उम्र, पैराथायराइड हार्मोन, व‍िटाम‍िन डी का लेवल, आनुवंश‍िक कारक वगैरह।

साल 2024 में Journal Of Comprehensive Pediatrics में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, 80 से 90 प्रत‍िशत बच्‍चों के मामलों में हाइपरकैल्सीमिया का कारण जेनेट‍िक होता है।

क‍िन बच्‍चों को हाइपरकैल्‍सीम‍िया हो सकता है?

  • जेनेट‍िक कंडीशन से पीड़ि‍त बच्‍चे
  • पैराथायराइड ग्रंथ‍ि की बीमारी वाले बच्‍चे
  • क‍िडनी की समस्‍या से जूझ रहे बच्‍चे
  • लंबे समय तक दवाएं लेने वाले बच्‍चे
  • जरूरत से ज्‍यादा व‍िटाम‍िन डी या कैल्‍श‍ियम सप्‍लीमेंट लेने वाले बच्‍चे

यह भी पढ़ें- शिशु में विटामिन D की कमी से हो सकती हैं ये 6 गंभीर समस्याएं, समय रहते पहचानें संकेत

बच्चों में हाइपरकैल्सीमिया होने पर कौन से लक्षण नजर आते हैं?

हाइपरकैल्सीमिया के लक्षण, बच्‍चों की उम्र और कैल्‍श‍ियम की मात्रा पर न‍िर्भर करते हैं। जरूरी नहीं है क‍ि शुरू में कोई लक्षण नजर आए, लेक‍िन जैसे-जैसे कैल्‍श‍ियम का लेवल ज्‍यादा होगा ये लक्षण नजर आ सकते हैं-

  • थकान और कमजोरी होना।
  • बच्‍चे का सुस्‍त हो जाना।
  • भूख न लगना।
  • कब्‍ज की श‍िकायत होना।
  • उल्‍टी होना या जी म‍िचलाना।
  • हड्ड‍ियों में दर्द और मांसपेश‍ियों में कमजोरी होना।
  • पेट दर्द होना।
  • ज्‍यादा सोना।

साल 2010 में Current Opinion In Pediatrics में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, गंभीर हाइपरकैल्सीमिया होने पर बच्‍चे की क‍िडनी को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा ज्‍यादा प्‍यास लगना, बार-बार पेशाब आना, कब्‍ज, उल्‍टी, दस्‍त जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं।

बच्चों में हाइपरकैल्सीमिया की पहचान के ल‍िए कौन से टेस्‍ट क‍िए जाते हैं?

  • हाइपरकैल्सीमिया के लक्षण नजर आने पर ब्‍लड टेस्‍ट की मदद से बच्‍चे के शरीर में कैल्‍श‍ियम के लेवल का पता लगाया जाता है। इसे सीरम कैल्‍श‍ियम टेस्‍ट कहते हैं।
  • इसके अलावा व‍िटाम‍िन डी टेस्‍ट, क‍िडनी फंक्‍शन टेस्‍ट, यूर‍िन कैल्‍श‍ियम टेस्‍ट, पैराथायराइड हार्मोन (PTH) टेस्‍ट भी क‍िए जाते हैं।
  • हड्ड‍ियों की जांच के ल‍िए एक्‍स-रे और सीटी स्‍कैन भी क‍िए जा सकते हैं।
  • इसके अलावा, क‍िडनी में कैल्‍श‍ियम के जमा होने की स्‍थ‍िति‍ को चेक करने के ल‍िए अल्‍ट्रासाउंड भी क‍िया जा सकता है।

बच्‍चों के शरीर में कैल्श‍ियम का नॉर्मल लेवल क्‍या है?

  • बच्‍चों और श‍िशुओं के शरीर में कैल्‍श‍ियम का नॉर्मल लेवल 8.5 से 10.5 mg/dL के बीच हो सकता है।
  • अगर शरीर में कैल्‍श‍ियम का लेवल 10.5 mg/dL से ज्‍यादा है, तो यह हाइपरकैल्सीमिया का संकेत हो सकता है।

बच्‍चों में हाइपरकैल्‍सीम‍िया क‍िस उम्र में होता है?

क‍िसी भी उम्र के बच्‍चे को हाइपरकैल्‍सीम‍िया हो सकता है। नवजात श‍िशुओं, 1 साल या उससे अध‍िक उम्र के बच्‍चों और क‍िशोरों में भी यह कंडीशन द‍िख सकती है।

यह भी पढ़ें- क्‍या कांच से छनकर आ रही धूप से भी व‍िटाम‍िन D म‍िलता है? डॉक्‍टर से जानें

बच्चों में हाइपरकैल्सीमिया का इलाज क्‍या है?

माइल्‍ड केस

  • हाइपरकैल्सीमिया के माइल्‍ड केस में डॉक्‍टर फ्लूइड इंटेक को बढ़ाने की सलाह देते हैं।
  • साथ ही कुछ मामलों में कैल्‍श‍ियम, व‍िटाम‍िन डी इंटेक को बंद करने या दवाओं में बदलाव करने की सलाह दी जाती है।

गंभीर केस

  • गंभीर मामलों में बच्‍चे को आईवी के जर‍िए फ्लूइड देने की जरूरत पड़ सकती है।
  • कैल्‍श‍ियम कंट्रोल करने की दवा को ओरली, इंजेक्‍शन या आईवी के जर‍िए भी द‍िया जा सकता है।
  • पैराथायराइड ग्रंथ‍ि के कारण हाइपरकैल्सीमिया हुआ है, तो उसके इलाज के लिए भी दवा दी जाती है।

बच्‍चों को हाइपरकैल्सीमिया से कैसे बचाएं?

इसे पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, हालांकि, कुछ सावधान‍ियां बरत सकते हैं जैसे-

  • डॉक्‍टर की सलाह के बगैर बच्‍चे को व‍िटाम‍िन डी सप्‍लीमेंट या कोई अन्‍य सप्‍लीमेंट या दवा न दें।
  • बच्‍चे को पर्याप्‍त मात्रा में पानी या तरल पदार्थों का सेवन कराएं ताक‍ि ड‍िहाइड्रेशन न हो।
  • बच्‍चों को ज्‍यादा देर धूप में न रहने दें या व‍िटाम‍िन डी ड्रॉप्‍स देने से पहले डॉक्‍टर की सलाह लें।

क्या डाइट से हाइपरकैल्सीमिया ठीक हो सकता है?

अगर हाइपरकैल्‍सीम‍िया के पीछे कैल्‍श‍ियम या व‍िटाम‍िन डी की अध‍िक मात्रा है, तो उसे डाइट में बदलाव करके कंट्रोल क‍िया जा सकता है। हालांक‍ि, दवाओं और जांच के बगैर इस कंडीशन से नि‍जात पाना संभव नहीं है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • बार-बार उल्‍टी होने पर।
  • ज्‍यादा सुस्‍त होने पर या भोजन न खाने पर।
  • ज‍िन बच्‍चों को पहले से हार्मोनल या क‍िडनी की समस्‍या है, उन्‍हें न‍ियम‍ित चेकअप की जरूरत होती है।

न‍िष्‍कर्ष:

बच्‍चों में हाइपरकैल्‍सीम‍िया होने पर भूख न लगना, थकान, कमजोरी, हड्ड‍ियों में दर्द, पेट दर्द जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। बच्‍चों के शरीर में कैल्‍श‍ियम का लेवल 10.5 mg/dL से ज्‍यादा है, तो यह हाइपरकैल्‍सीम‍िया का संकेत हो सकता है। ऐसी स्‍थ‍िति‍ में डॉक्‍टर फ्लूइड इंटेक को बढ़ाने और व‍िटाम‍िन डी, कैल्‍श‍ियम को कम करने की सलाह दे सकते हैं। गंभीर मामलों में, आईवी या इंजेक्‍शन के जर‍िए फ्लूइड देने की जरूरत पड़ सकती है।

FAQ

  • क्‍या हाइपरकैल्‍सीम‍िया जानलेवा हो सकता है?

    ज्‍यादातर मामलों में हाइपरकैल्‍सीम‍िया जानलेवा नहीं होता है। गंभीर मामलों में अन‍ियम‍ित हार्ट रेट, क‍िड‍नी फेलि‍यर जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • हाइपरकैल्सीमिया और हाइपोकैल्सीमिया में क्‍या अंतर है?

    हाइपरकैल्सीम‍िया होने पर ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम लेवल ज्‍यादा हो जाता है वहीं दूसरी ओर हाइपोकैल्सीमिया होने पर ब्‍लड में कैल्‍श‍ियम का लेवल कम हो जाता है। 

Read Next

बच्‍चों में विटामिन D सप्‍लीमेंट की ओवरडोज पड़ सकता है भारी, डॉक्‍टर से जानें नुकसान

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 20, 2026 13:07 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 20, 2026 13:07 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content