Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

बच्चों में बार-बार मिडिल ईयर इंफेक्शन क्यों होता है? डॉक्टर ने बताए कारण, लक्षण और इलाज

आमतौर पर छोटे बच्चों में कान में इंफेक्शन होने का रिस्क ज्यादा होता है। इसलिए इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है। इस लेख में डॉक्टर ने न सिर्फ बच्चों के कान में इंफेक्शन होने का कारण बताया है, बल्कि पेरेंट्स को लक्षण और इलाज के तरीके भी समझाए हैं।

बच्चों में कान में इंफेक्शन होने की समस्या बहुत आम है और कई बार पेरेंट्स एंटीबायोटिक दवाएं देकर इसे ठीक करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि कान में इंफेक्शन के कारण बच्चों को बुखार तक भी हो जाता है। अगर किसी बच्चे को बार-बार कान में इंफेक्शन हो रहा है, तो इसकी पहचान करके डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, ENT Expert, MedFirst ENT Centre, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि मध्य कान यानी मिडिल ईयर कान के पर्दे के पीछे वाला हिस्सा होता है। इसमें तरल पदार्थ यानी फ्लूड जमा होने लगता है और उसमें बैक्टीरिया या वायरस पनपने लगते हैं, जो कान में दर्द, इंफेक्शन और बुखार का कारण बन सकते हैं।

बच्चों में मिडिल ईयर इंफेक्शन क्यों ज्यादा होता है?

Cureus में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बार-बार इंफेक्शन 6 से दो साल के बच्चों में ज्यादा होता है, क्योंकि उनमें इम्यूनिटी कमजोर होती है और साथ ही कान की यूस्टेशियन ट्यूब की बनावट वयस्कों की तुलना में ज्यादा सीधी होती है और इस वजह से गले का इंफेक्शन आसानी से कान में पहुंच जाता है। अगर कान का इंफेक्शन ज्यादा समय के लिए रह जाए, तो बच्चा ठीक से सुन नहीं पाता, तो इससे उसके बोलने और भाषा सीखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

इस बारे में Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “बच्चों में बार यूस्टेशियन ट्यूब कान को नाक और गले से जोड़ती है। छोटे बच्चों में यह ट्यूब छोटी, संकरी और सीधी होती है। इस वजह से तरल पदार्थ मिडिल ईयर में फंस जाता है। जब तरल बाहर नहीं निकल पाता, तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।”

बच्चों में सर्दी-जुकाम से कान का इंफेक्शन क्यों बढ़ता है?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj के मुताबिक, “ज्यादातर मामलों में मिडिल ईयर इंफेक्शन की शुरुआत सर्दी-जुकाम से होती है और फिर धीरे-धीरे नाक बंद होना और गले में इंफेक्शन से यूस्टेशियन ट्यूब बंद हो सकती है। इससे कान के अंदर हवा का दबाव बदल जाता है और पर्दे के पीछे तरल जमा होने लगता है। अगर यही कंडीशन लगातार बनी रही है, तो बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं।”

मिडिल ईयर इंफेक्शन का खतरा किन लोगों को ज्यादा है?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया कि कुछ बच्चों में कान में इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि उनकी न सिर्फ इम्यूनिटी कमजोर होती है, बल्कि इसके कई फैक्टर्स होते हैं। जो बच्चे डे-केयर या स्कूल जाते हैं, उन्हें वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज्यादा होती है। इसके अलावा, अगर घर में कोई स्मोक करता है, धूल, एलर्जी या बार-बार सर्दी-जुकाम होता है, तो उन्हें कान में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। अगर मां शिशु को लिटाकर दूध पिलाती है, तो यह आदत भी कान में इंफेक्शन का कारण हो सकती है।

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पेरेंट्स को किन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया है कि कान के इंफेक्शन से बचाव के लिए लक्षणों की पहचान करना जरूरी है, ताकि उनका जल्द से जल्द इलाज हो सके।

  1. छोटे बच्चे अपनी समस्या नहीं बता पाते, इसलिए पेरेंट्स को उनका बिहेवियर देखना चाहिए।
  2. अगर बच्चा बार-बार कान पकड़कर खींच रहा हो, तो यह कान में इंफेक्शन होने का कारण हो सकता है।
  3. बच्चे का ठीक से न सो पाना, दूध या खाना कम लेना भी कान में इंफेक्शन की वजह हो सकता है।
  4. अगर बच्चे को बार-बार बुखार हो रहा हो, तो इसका कारण कान में इंफेक्शन हो सकता है।
  5. अगर बच्चा एक बार में समझ न पाए, तो सुनने की क्षमता भी कम हो सकती है।
  6. कान से मवाद या पानी निकलने पर बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

कान के इंफेक्शन को डायग्नोज करने के लिए क्या चेकअप होते है?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा कि बच्चे के कान के पर्दे की जांच के लिए ओटोस्कोप या माइक्रोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है। अगर डॉक्टर को लगता है कि बच्चे को कम सुनाई दे रहा है, तो उसका टाइम्पेनोमेट्री या हियरिंग टेस्ट भी कराया जा सकता है। कई बार यह भी चेक किया जाता है कि बच्चे को एडेनॉइड, एलर्जी या यूस्टेशियन ट्यूब से जुड़ी समस्या तो नहीं है।

इलाज

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं कि बच्चे की मेडिकल कंडीशन देखकर ही इलाज किया जाता है। इसमें कई बार बच्चे को हल्के डोज की दवा देकर ठीक करने की कोशिश की जाती है, तो गंभीर मामलों में या फिर बार-बार इंफेक्शन होने पर छोटे से सर्जिकल प्रोसीजर के जरिए ईयर ट्यूब लगा दी जाती है।

डॉक्टर की सलाह

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं कि पेरेंट्स को अपने बच्चों को बार-बार एंटीबायोटिक नहीं देना चाहिए। सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही दवा दें। इसके अलावा, कुछ लोग कान की समस्या को मौसमी वायरल या इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन पेरेंट्स को ऐसा नहीं करना चाहिए। अगर बच्चे को कान में दर्द है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि देरी करने से बच्चे के सुनने की क्षमता भी कम हो सकती है, जो उसके सीखने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

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निष्कर्ष
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj पेरेंट्स को सलाह देते हैं कि मिडिल ईयर इंफेक्शन से पूरी तरह बचाव करना तो संभव नहीं है, लेकिन अगर बच्चों का सर्दी-जुकाम और एलर्जी का समय पर इलाज कराएं और बच्चे को लिटाकर दूध न पिलाएं। बच्चों को सभी जरूरी वैक्सीनेशन लगवाएं, क्योंकि कुछ वैक्सीन कान के इंफेक्शन का रिस्क कम करने में भी मदद करती है। इसके अलावा, पेरेंट्स किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे न आजमाएं, बल्कि समय पर डॉक्टर को दिखाएं।

FAQ

  • एडेनोपिथी क्या है जो बच्चों के कान को ब्लॉक करती है?

    बच्चों के गले और नाक के पीछे एडेनोइड्स नाम के छोटे टिश्यूज होते हैं, जो इंफेक्शन से लड़ते हैं। बार-बार सर्दी होने पर ये एडेनोइड्स सूज जाते हैं और यूस्टेशियन ट्यूब के रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं। रास्ता बंद होने से कान के अंदर का फ्लूइड बाहर नहीं निकल पाता और इन्फेक्शन बार-बार लौट आता है।
  • क्या पैसिव स्मोकिंग (घर में धूम्रपान) भी इसका एक कारण है?

    अगर घर में कोई सदस्य सिगरेट या बीड़ी पीता है, तो उसके पैसिव स्मोकिंग से बच्चों की यूस्टेशियन ट्यूब में सूजन आ जाती है और उसके अंदर मौजूद बारीक बाल काम करना बंद कर देते हैं। इससे बच्चों में कान के इन्फेक्शन का खतरा दोगुना हो जाता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 14, 2026 11:14 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj

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