Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

बार-बार कान बहना हो सकता है Cholesteatoma का संकेत, डॉक्टर से जानें इसके लक्षण और इलाज

अगर कान से बार-बार पानी निकलता है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि कान से निकलने वाला मवाद अंदरूनी हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसे कंडीशन को Cholesteatoma कहा जाता है। यह बीमारी क्या है और इसके कारण और इलाज के तरीकों के बारे में डॉक्टर ने विस्तार से बताया है।

कई बार लोग कान से निकलने वाले पानी या मवाद को छोटी समस्या समझकर इग्नोर कर देते हैं। अगर फिर से यही समस्या होती है, तो लोग दोबारा दवा लेकर इसे ठीक करने की कोशिश करते हैं, लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि कान से बार-बार बदबूदार मवाद निकलना Cholesteatoma बीमारी होने का संकेत हो सकता है। इस बीमारी में कान की अंदरूनी हड्डियों को नुकसान पहुंचने लगता है और लोगों की सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। Cholesteatoma क्या है और इस बीमारी की पहचान और इलाज जानने के लिए हमने Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, ENT Expert, MedFirst ENT Centre, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि कान बहने पर अक्सर लोग महीनों तक ईयर ड्रॉप्स या एंटीबायोटिक लेते रहते हैं, लेकिन बीमारी कान के अंदर बढ़ती रहती है और यह Cholesteatoma बीमारी भी हो सकती है।

Cholesteatoma क्या है?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “Cholesteatoma कान के मध्य भाग या कान के पर्दे के पीछे बनने वाली स्किन की असामान्य परत होती है। आमतौर पर पुरानी कोशिकाएं शरीर से बाहर निकल जाती है, लेकिन इस बीमारी में ये कोशिकाएं कान के अंदर जमा होने लगती हैं। धीरे-धीरे जमा कोशिकाएं एक थैली बन जाती है और समय के साथ इसका आकार बढ़ने लगता है। अगर समय पर इस बीमारी का इलाज न किया जाए, तो ये कान की छोटी-छोटी हड्डियों और आसपास की नसों को नुकसान पहुंचाने लगती है।”

Cholesteatoma होने का कारण

NCBI में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, Cholesteatoma बनने के कई कारण हो सकते हैं और इसमें सबसे आम लंबे समय तक कान में होने वाला इंफेक्शन और यूस्टेशियन ट्यूब का ठीक से काम न करना है। जब यह ट्यूब सही तरीके से हवा का प्रेशर नहीं बना पाती, तो कान के पर्दे के पीछे नेगेटिव प्रेशर बनाने लगता है। इस वजह से कान का पर्दा अंदर की ओर धंस जाता है और वहां डेड स्किन जमा होने लगती है। कुछ मामलों में यह समस्या जन्म से हो सकती है, तो कुछ मामलों में कान के पर्दे में छेद, इंफेक्शन, कान की सर्जरी या चोट के बाद भी इसका खतरा बढ़ सकता है।

Cholesteatoma होने का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj के मुताबिक, “वैसे तो यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन जिन लोगों के कान का पर्दा फटा हुआ है, जिन लोगों को बार-बार सर्दी-जुकाम रहता है या कान में बार-बार इंफेक्शन हो रही है, उन्हें Cholesteatoma होने का रिस्क सबसे ज्यादा रहता है। अगर बच्चे के कान से बार-बार पानी या मवाद निकल रहा हो, तो इसका घरेलू इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”

Cholesteatoma

यह भी पढ़ें- नाक से खून आने पर क्या करें और क्या नहीं? मानें डॉक्टर की सलाह

Cholesteatoma के किन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा, “मेरे पास कई मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें कान में डिस्चार्ज की समस्या होती है। दवा लेने से कुछ समय तक डिस्चार्ज बंद हो जाता है, लेकिन कुछ हफ्तों बाद फिर से कान से पानी बहने लगता है। यह कंडीशन Cholesteatoma का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा, Cholesteatoma के कई लक्षण है, जिसकी पहचान करके डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी है, क्योंकि समय पर इलाज कराने से बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

  1. कान से बार-बार बदबूदार पानी या मवाद निकलना
  2. सुनने की क्षमता कम होना
  3. कान में भारीपन महसूस होना
  4. लगातार कान में आवाज महसूस होना
  5. चक्कर आना
  6. शरीर का बैलेंस न रख पाना
  7. कान में दर्द होना

Cholesteatoma को कैसे डायग्नोज किया जाता है?

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “Cholesteatoma की बीमारी की जांच के लिए पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की जानकारी ली जाती है। इसके बाद ओटोस्कोप, माइक्रोस्कोप या एंडोस्कोप के जरिए कान के पर्दे और मध्य कान को चेक किया जाता है। कई बार जांच के दौरान डॉक्टर को कान के अंदर सफेद मोती जैसी परत दिखाई देती है। इससे Cholesteatoma होने का संकेत मिल सकता है। अगर डॉक्टर को इस बीमारी के होने का रिस्क लगता है, तो मरीज कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।”

  1. हियरिंग टेस्ट - इससे पता चलता है कि सुनने की क्षमता पर कितना असर पड़ता है।
  2. टिम्पेनोमेट्री - यह चेक कान के पर्दे और मध्य कान की कार्यक्षमता का आकलन करती है।
  3. सीटी स्कैन - इससे Cholesteatoma कान की हड्डियों, नसों या आसपास कितना फैल चुका है।

Cholesteatoma का इलाज

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “अक्सर मुझसे पूछते हैं कि क्या Cholesteatoma का इलाज दवा से हो सकता है। सच्चाई यह है कि इस बीमारी को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है। एंटीबायोटिक्स और ईयर ड्रॉप्स इंफेक्शन को कुछ समय के लिए कम कर सकते हैं, लेकिन कान के अंदर जमा स्किन को हटा नहीं सकते। इसे हटाने के लिए मास्टोइडेक्टॉमी सर्जरी या टिम्पेनोप्लास्टी सर्जरी की जा सकती है। कई मामलों में ये दोनों एक साथ की जाती है, ताकि बीमारी को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए।”

Cholesteatoma से बचाव के तरीके

Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj लोगों को सलाह देते हैं कि अगर Cholesteatoma जन्म से है या कान का पर्दा ही फट गया है, तो इसे रोकना मुश्किल है, लेकिन लोग कुछ सावधानियां बरतकर इस तरह के रिस्क को कम कर सकते हैं।

  1. कान बहने की समस्या को कभी नजरअंदाज न करें।
  2. बार-बार होने वाले कान के इंफेक्शन का पूरा इलाज कराएं।
  3. कान में पानी जाने से बचाएं।
  4. कॉटन बड, हेयर पिन या नुकीली चीज कान में न डालें।
  5. लंबे समय तक सर्दी, एलर्जी या नाक बंद रहने की समस्या का इलाज कराएं।
  6. बच्चों में कान बहने या सुनने की समस्या दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  7. डॉक्टर की सलाह के बिना कान में ड्रॉप्स न डालें।

Schizophrenia early symptoms

डॉक्टर से कब मिले?

अगर कान से मवाद बार-बार निकल रहा हो, सुनने की क्षमता कम हो गई हो, कान में दर्द हो, शरीर को बैलेंस करने में दिक्कत हो या कान में भारीपन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

निष्कर्ष
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं कि बार-बार कान बहना सिर्फ एक इंफेक्शन ही नहीं होता, बल्कि इसका कारण Cholesteatoma जैसी गंभीर बीमारी हो सकता है। इससे कान की हड्डियों और नसों को नुकसान हो सकता है और साथ ही सुनने की क्षमता भी जा सकती है। इसलिए लक्षणों की पहचान करके समय पर इलाज कराना जरूरी है।

FAQ

  • यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह कितना खतरनाक हो सकता है?

    कोलेस्टेटोमा धीरे-धीरे बढ़कर कान की उन तीन नाजुक हड्डियों को गला देता है जो सुनने में मदद करती हैं, जिससे मरीज हमेशा के लिए बहरा हो सकता है। इसके अलावा, यह चेहरे की नस को डैमेज करके चेहरे का लकवा और कान के संतुलन को बिगाड़कर भयंकर चक्कर का कारण बन सकता है।
  • क्या यह बीमारी दिमाग तक भी पहुंच सकती है?

    मध्य कान की ऊपरी हड्डी दिमाग के बेहद करीब होती है। यदि कोलेस्टेटोमा उस हड्डी को गला देता है, तो इंफेक्शन सीधे दिमाग तक पहुंच सकता है। इसके कारण दिमाग में मवाद पड़ना या मैनिंजाइटिस (दिमागी बुखार) जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

Read Next

नाक से खून आने पर क्या करें और क्या नहीं? मानें डॉक्टर की सलाह

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 13, 2026 18:22 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj
  • Jul 13, 2026 18:22 IST

    Published By : Aneesh Rawat

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content