आमतौर पर कान का इंफेक्शन ठीक होने के बाद भी कई मामलों में लोगों को कान बंद महसूस होता है, आवाज साफ नहीं आती और ऐसा लगता है कि कान में अभी भी पानी भरा हुआ है। अगर किसी को ऐसा महसूस होता है, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। इंफेक्शन का इलाज होने के बाद भी कान में पानी भरने के कारणों को जानने के लिए हमने Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, ENT Expert, MedFirst ENT Centre, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि इस कंडीशन को ओटिटिस मीडिया विद इफ्यूंजन (OME) कहा जाता है। इस स्थिति में कान में इंफेक्शन तो खत्म हो चुका होता है, लेकिन कान के पर्दे के पीछे फ्लूड जमा रह जाता है।
कान के इंफेक्शन के बाद कान में पानी भरने का कारण
Children's Hospital of Philadelphia के अनुसार, OME होने का कारण यूस्टेशियन ट्यूब का ठीक तरीके से काम न करना है। यूस्टेशियन ट्यूब एक छोटी सी नली है, जो मिडिल ईयर को गले से जोड़ती है। अगर यह नली ब्लॉक हो जाती है या ठीक से काम नहीं कर पाती, तो कान के अंदर बनने वाला नेचुरल फ्लूड बाहर नहीं जा पाता और इस वजह से यह लिक्विड धीरे-धीरे जमा होने लगता है।
इस बारे में Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं, “सर्दी-जुकाम, गले में इंफेक्शन, एलर्जी या साइनस की समस्या होने पर नली में सूजन आने लगती है। इस वजह से फ्लूड बाहर नहीं निकल पाता और मरीजों को इंफेक्शन ठीक होने के बाद भी कई दिनों या हफ्तों तक कान बंद महसूस हो सकता है। हालांकि, यह फ्लूड इंफेक्शन नहीं होता, लेकिन इसके कारण सुनने में कमी, कान में भारीपन और दबाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।”
OME की समस्या बच्चों में होने के कारण
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj के मुताबिक, बच्चों में OME की परेशानी ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि बच्चों में यूस्टेशियन ट्यूब छोटी, संकरी और सीधी होती है। इस वजह से फ्लूड आसानी से ट्यूब में फंस सकता है। इस कारण कई बच्चों में कान का इंफेक्शन ठीक होने के बाद भी सुनाई कम देना या कान बंद महसूस होने जैसी समस्याएं कुछ हफ्तों तक रह सकती है।
American Academy of Otolaryngology के अनुसार, आमतौर पर यह समस्या खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है, लेकिन डॉक्टर पहले तीन महीने कान को चेक करते है कि कान का फ्लूड पूरी तरह से साफ हो गया है। अगर कान में पानी का तीन महीने से पहले ही पता चल जाए, तो इसके जल्दी ठीक होने की संभावना ज्यादा होती है। अगर तीन महीने या उसके बाद पता चलात है, तो इस समस्या के लंबे समय तक बने रहने की आशंका बनी रहती है।
OME के वयस्कों में होने के कारण
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया कि हालांकि, यह परेशानी बच्चों में ज्यादा होती है, लेकिन वयस्कों में इंफेक्शन के इलाज के बाद कान में पानी भरने की समस्या देखी गई है। यह परेशानी उन लोगों को ज्यादा होती है, जिन्हें बार-बार एलर्जी, साइनसाइटिस, नाक बंद रहने की समस्या या बार-बार सर्दी-जुकाम होता है। कुछ लोगों को हवाई जहाज में ट्रैवल करने पर कान में दबाव या बंद होने का एहसास होता है। अगर यूस्टेशियन ट्यूब ठीक से काम नहीं करती, तो वयस्कों में यह समस्या काफी समय तक बनी रह सकती है।

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कौन से लक्षण की पहचान करना जरूरी
American Academy of Otolaryngology के अनुसार, बच्चों के कान में हल्का दर्द या असहजता, कान में कुछ भरा हुआ महससू होना और सुनने में दिक्कत होने जैसी समस्याएं देखी जा सकती है। इससे बच्चों को सोने में दिक्कत, बोलने में देरी, चिड़चिड़ापन या किसी काम में फोकस करने में परेशानी हो सकती है।
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj कहते हैं कि अक्सर वयस्कों को कान बंद होने, आवाज पहले जैसी साफ सुनाई न देने, कान बंद महसूस होने, अपनी ही आवाज ज्यादा सुनाई देने, हल्का बैलेंस बिगड़ना या बार-बार टीवी की आवाज तेज करने जैसे समस्याएं हो सकती है। अगर किसी को ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
OME को कैसे चेक किया जाता है?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने कहा, “मरीज की ओटोस्कोप, माइक्रोस्कोप या एंडोस्कोप की मदद से कान के पर्दे की जांच की जाती है। अगर सुनने में दिक्कत होती है, तो टाइम्पेनोमेट्री और हियरिंग टेस्ट भी कराया जा सकता है। ये टेस्ट बताते हैं कि कान के पर्दे के पीछे कितना तरल जमा है और सुनने की क्षमता पर उसका कितना असर पड़ा है।”
OME का इलाज
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया, “OME की कंडीशन में मरीज के कान में जमा फ्लूड खुद ही खत्म हो जाता है, लेकिन इसका रेगुलर चेक रखा जाता है कि यह ठीक हो रहा है या नहीं। अगर कान के पर्दे के पीछे जमा फ्लूड तीन महीने या उससे ज्यादा समय से बना हुआ है, बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो ईयर ट्यूब लगाने की सलाह दी जा सकती है। यह एक छोटा सा प्रोसीजर है, जिसमें कान में जमा लिक्विड को बाहर निकाल दिया जाता है और इससे हवा का प्रेशर सामान्य हो जाता है।”
कान में पानी भरने की समस्या से कैसे बचें?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj सलाह देते हैं कि सबसे जरूरी है कि सर्दी-जुकाम, एलर्जी और साइनस की बीमारी का समय पर इलाज कराना चाहिए। बच्चों को पैसिव स्मोकिंग से दूर रखें और लिटाकर दूध न पिलाएं। साफ-सफाई का खास ख्याल रखें। अगर किसी को कान में बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो घरेलू उपाय बिल्कुल न अपनाएं।
American Academy of Otolaryngology के अनुसार, इस समस्या में दवाएं ज्यादा काम नहीं करती, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स, एलर्जी की दवा, नाक साफ करने वाली दवा या स्टेरॉयड नहीं देनी चाहिए। इसके अलावा, किसी भी तरह के घरेलू या हर्बल प्रोडक्ट्स देने चाहिए।
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निष्कर्ष
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया कि कान के इंफेक्शन ठीक होने के बाद कान में पानी भरने की समस्या कॉमन है, लेकिन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे सुनने की क्षमता और इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए समय पर चेकअप, सही इलाज और रेगुलर फॉलो-अप से इस समस्या को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है और भविष्य में होने वाली गंभीरताओं से भी बचा जा सकता है।
FAQ
क्या हर बार एंटीबायोटिक की जरूरत होती है?
नहीं। यह एक आम गलतफहमी है। अगर इंफेक्शन खत्म हो चुका है और सिर्फ फ्लूड बचा है, तो एंटीबायोटिक का कोई खास फायदा नहीं होता। ऐसे मामलों में डॉक्टर कुछ समय तक निगरानी, एलर्जी का इलाज या नाक के लिए दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं।बच्चों में क्यों जरूरी है समय पर इलाज?
अगर बच्चों के कान में कई महीनों तक तरल जमा रहे, तो इसका असर उनकी सुनने की क्षमता पर पड़ सकता है। लगातार कम सुनाई देने से बोलने की क्षमता, पढ़ाई और मानसिक विकास भी प्रभावित हो सकता है। अगर बच्चा नाम पुकारने पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता, टीवी की आवाज बहुत तेज रखता है या बोलने में देरी हो रही है, तो इसे केवल आदत समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में हियरिंग टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
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Jul 14, 2026 11:11 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj