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Medically Reviewed by Dr V Rajasekhar , Senior Consultant – Interventional Cardiology & Electrophysiology | Certified TAVR Operator | Clinical Director

बार-बार सांस फूलना किन बीमारियों का संकेत है? डॉक्‍टर से जानें

बार-बार सांस फूलना या डिस्पेनिया (Dyspnea) अक्सर दिल या फेफड़ों की किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत होता है इसल‍िए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्‍टर से जानें कारण।

सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने या ज्यादा मेहनत करने के बाद सांस फूलना शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन अगर थोड़ी-सी गतिविधि करने पर ही सांस फूलने लगे, आराम की स्थिति में भी सांस लेने में परेशानी हो या यह समस्या बार-बार होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सांस फूलने को मेडिकल भाषा में डिस्पेनिया (Dyspnea) कहा जाता है। इसके पीछे फेफड़ों, हृदय या शरीर की कोई दूसरी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में तनाव और चिंता भी सांस फूलने का कारण बन सकते हैं। आइए जानते हैं सांस फूलने के पीछे क्‍या कारण हो सकते है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. V Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

1. चिंता, तनाव और पैनिक अटैक

frequent-Breathlessness

तनाव, चिंता और पैनिक अटैक के दौरान भी सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में इसके साथ दिल तेजी से धड़कना, घबराहट, पसीना, कंपकंपी या चक्कर भी महसूस हो सकते हैं।


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2. मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी

शरीर का वजन बढ़ने और लंबे समय तक शारीरिक रूप से एक्‍ट‍िव न रहने पर भी व्यक्ति को जल्दी सांस फूलने की समस्या हो सकती है। ज्यादा वजन शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है और रोज के काम के दौरान सांस लेने में ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ सकती है।

3. फेफड़ों में इंफेक्‍शन

निमोनिया और दूसरे श्वसन संक्रमण भी सांस फूलने की वजह बन सकते हैं। इनमें फेफड़ों में संक्रमण और सूजन के कारण सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसके साथ खांसी, बुखार, ठंड लगना और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। NHS Inform के मुताब‍िक, निमोनिया (फेफड़ों में सूजन) के कारण सांस फूलने और खांसी की समस्या हो सकती है। यह बीमारी आमतौर पर संक्रमण के कारण होती है। इसके इलाज के लिए कुछ मामलों में डॉक्टर एंटीबायोटिक्स लिख सकते हैं, खासकर जब संक्रमण बैक्टीरिया के कारण हो।

4. हार्ट ड‍िजीज या हार्ट फेल‍ियर

सांस फूलने का संबंध केवल फेफड़ों से नहीं बल्कि हार्ट से भी हो सकता है। हार्ट फेलियर, कार्डियोमायोपैथी, हृदय की धड़कन में गड़बड़ी, सांस फूलने का कारण बन सकती हैं। हार्ट फेलियर में खासतौर पर चलने या मेहनत करने पर सांस फूल सकती है। कुछ लोगों को लेटने पर सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो सकती है।

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5. एनीमिया

एनीमिया में शरीर में पर्याप्त रेड ब्‍लड सेल्‍स नहीं बन पाते हैं। रेड ब्‍लड सेल्‍स शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में अहम भूम‍िका निभाते हैं। इसलिए एनीमिया होने पर शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने में परेशानी हो सकती है और व्यक्ति को कमजोरी, थकान तथा सांस फूलने जैसी समस्या महसूस हो सकती है।

6. अस्‍थमा

अस्थमा फेफड़ों की एक बीमारी है, जिसमें सांस की नलियों में सूजन आ जाती है। इसके कारण सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, खांसी और सीटी जैसी आवाज आने के साथ सांस फूल सकती है। धूल, धुआं, पराग कण, ठंडी हवा, एलर्जी कुछ लोगों में लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार होती है, तो डॉक्टर से जांच कराना न भूलें।

7. क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज

सीओपीडी (COPD) फेफड़ों से जुड़ी एक दीर्घकालिक बीमारी है। इसमें सांस की नलियों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के कारण सांस लेने में परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक धूम्रपान इसका प्रमुख कारक है। सीओपीडी में शुरुआत में चलने या मेहनत करने पर सांस फूल सकती है और बीमारी बढ़ने पर आराम की स्थिति में भी परेशानी हो सकती है।

8. पल्मोनरी एम्बोलिज्म

पल्मोनरी एम्बोलिज्म एक गंभीर स्थिति है, जिसमें आमतौर पर ब्‍लड क्‍लॉट फेफड़ों की किसी ब्‍लड वेसल में पहुंचकर ब्‍लड सर्कुलेशन को प्रभाव‍ित कर सकता है। इसमें सांस अचानक फूल सकती है। इसके साथ सीने में दर्द, तेज धड़कन, चक्कर या बेहोशी जैसी समस्या भी हो सकती है।

सांस फूलने की समस्‍या में कौन से टेस्‍ट क‍िए जाते हैं?

बार-बार सांस फूलने की समस्‍या होने पर चेस्ट इमेजिंग, लंग फंक्शन टेस्ट, ईसीजी और ब्लड टेस्ट क‍िए जा सकते हैं। बीमारी का जल्दी पता चलने से इलाज के बेहतर नतीजे मिलते हैं, खासकर दिल और फेफड़ों की बीमारियों के मामले में।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर सांस अचानक और बहुत ज्‍यादा फूलने लगे, आराम करते समय भी ऐसा हो या इसके साथ सीने में दर्द, बेहोशी, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना, दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना, उलझन या तेज बुखार जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। ये गंभीर संकेत हार्ट अटैक, पल्मोनरी एम्बोलिज्‍म, अस्थमा का गंभीर दौरा या निमोनिया जैसी जानलेवा स्थितियों का संकेत हो सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

बार-बार सांस फूलती है, तो इसके पीछे कई शारीर‍िक समस्‍याएं और बीमार‍ियां हो सकती हैं जैसे- च‍िंता, तनाव और पैन‍िक अटैक, मोटापा और शारीर‍िक गत‍िव‍िधि‍ की कमी, फेफड़ों में इंफेक्‍शन, न‍िमोन‍िया, हार्ट ड‍िजीज या हार्ट फेल‍ियर, एनीम‍िया, अस्‍थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और पल्मोनरी एम्बोलिज्म।

image credit: magnific 

FAQ

  • क्या लेटने पर सांस फूलना किसी बीमारी का संकेत है?

    हां, लेटने पर सांस लेने में परेशानी कुछ हार्ट या फेफड़ों की समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • सांस फूलने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

    अगर सांस फूल रही है, तो शारीर‍िक गतिविधि को रोककर आराम करें और खुद को शांत रखने की कोशिश करें। 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 08, 2026 19:33 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr V Rajasekhar

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