कई बार लोगों को सीढ़ियां चढ़ते समय या फिर तेज चलने पर सांस फूलने लगती है, तो अक्सर सवाल यह उठता है कि क्या सांस फूलने का कारण अस्थमा है या फिर मन में स्ट्रेस है, जो पैनिक अटैक में बदल रहा है। हालांकि, सांस फूलने पर इन दोनों के अंतर को समझना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हमने Dr. Sunil Kumar K, Senior consultant, Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bangalore से बात की। उन्होंने बताया कि दोनों ही कंडीशन में सांस लेने में दिक्कत और सीने में जकड़न जैसा महसूस हो सकता है। इसलिए कई बार इस फर्क को समझना मरीज के लिए मुश्किल हो जाता है, लेकिन इसके सही कारण का पता लगाना भी जरूरी है, क्योंकि एंग्जायटी और अस्थमा का इलाज पूरी तरह अलग होता है।
एंग्जायटी में सांस फूलने के कारण
Dr. Sunil Kumar K कहते हैं, “जब इंसान को बहुत ज्यादा डर, घबराहट या स्ट्रेस होता है, तो शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है। ऐसे में हार्ट बीट तेज हो जाती है और व्यक्ति नॉर्मल से ज्यादा तेजी से सांस लेने लगता है। इस कंडीशन को हाइपरवेंटिलेशन कहा जाता है और ऐसी कंडीशन में मरीज को महसूस होता है कि उसे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही। हालांकि, सच्चाई यह है कि फेफड़ों में किसी भी तरह की रुकावट नहीं होती, लेकिन सांस तेजी से लेने पर सांस फूलने लगती है।”
अस्थमा में सांस फूलने के कारण
Dr. Sunil Kumar K के मुताबिक, “अस्थमा में सांस की नलियों में सूजन आने लगती है और वे संकरी हो जाती है। इससे हवा का अंदर-बाहर जाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए मरीज को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और घरघराहट महसूस होती है। अस्थमा के लक्षण धूल, धुआं, परागकण और ठंडी हवा के कारण ट्रिगर हो सकते हैं। अस्थमा के मरीजों की सांस की नली में सूजन आती है, तो उसे सांस लेने के लिए जोर लगाना पड़ता है और सांस लेने की स्पीड तेज हो सकती है।”

एंग्जायटी और अस्थमा में फर्क करने का तरीका?
Dr. Sunil Kumar K के अनुसार, दोनों ही कंडीशन में सांस फूलती है, लेकिन अगर सांस फूलने के साथ हार्ट बीट तेज होने लगे, पसीना आए, हाथ कांपने लगे, चक्कर आए, मुंह या हाथों में झुनझुनी महसूस हो या बेचैनी फील हो, तो यह एंग्जायटी के लक्षण हो सकते हैं। कई बार व्यक्ति को लगता है कि कुछ तो बुरा होने वाला है, अगर ऐसा महसूस हो, तो इसका कारण एंग्जायटी ही है। जैसे ही स्ट्रेस कम होता है, सांस फूलना भी कम हो जाता है। वहीं अगर सांस लेने के दौरान सीने से सीटी जैसी आवाज आए, लगातार खांसी हो, सांस छोड़ने में ज्यादा परेशानी हो या इनहेलर लेने के बाद आराम मिल जाए, तो यह अस्थमा का संकेत हो सकता है।
क्या एंग्जायटी और अस्थमा की समस्या एक साथ हो सकती है?
NCBI में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, कई लोगों को अस्थमा और एंग्जायटी एक साथ हो सकते हैं। अस्थमा के मरीजों को सामान्य लोगों के मुकाबले एंग्जायटी और पैनिक डिसऑर्डर का खतरा ज्यादा देखा गया है। वहीं कुछ लोगों को बार-बार होने वाली हाइपरवेंटिलेशन का कारण अस्थमा हो सकता है, लेकिन इस फर्क को समझने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
डॉक्टर दोनों समस्याओं की कैसे पहचान करते हैं?
Dr. Sunil Kumar K ने कहा, “अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही हो, तो डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण और ट्रिगर्स के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। मरीज की शारीरिक जांच होती है और अगर जरूरत पड़ती है, तो स्पाइरोमेट्री, पीक फ्लो मीटर या अन्य फेफड़ों की जांच कराई जाती है। इन तरीकों से पता करने की कोशिश की जाती है कि सांस की नलिया सही तरीके से काम कर रही हैं या नहीं। अगर फेफड़ों की समस्या होती है, तो एंग्जायटी होने की संभावना बढ़ जाती है।”
इलाज कैसे किया जाता है?
Dr. Sunil Kumar K ने बताया कि अगर समस्या अस्थमा की है, तो डॉक्टर इनहेलर और सूजन कम करने वाली दवाएं देते हैं। इसके अलावा, अस्थमा के ट्रिगर से बचने की सलाह दी जाती है। वहीं सांस फूलने की वजह एंग्जायटी है, तो स्ट्रेस कम करने की टेक्नीक, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और काउंसलिंग की सलाह दी जाती है। सही जानकारी और मरीज को भरोसा दिलाने से भी एंग्जायटी के लक्षण काफी हद तक कम हो जाते हैं।
निष्कर्ष
Dr. Sunil Kumar K सलाह देते हैं कि अगर सांस लेने में तकलीफ होने लगे और साथ ही छाती में तेज दर्द हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। वैसे सांस फूलना हर बार अस्थमा नहीं होता। कई बार इसका कारण पेनिक अटैक या एंग्जायटी हो सकता है, लेकिन इस समस्या को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर बार-बार सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलने लगे, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
FAQ
क्या अस्थमा और एंग्जायटी के ट्रिगर्स अलग-अलग होते हैं?
अस्थमा का अटैक आमतौर पर धूल-मिट्टी, प्रदूषण, मौसम के बदलाव, एलर्जी या ठंडी हवा के संपर्क में आने से ट्रिगर होता है। वहीं, एंग्जायटी के कारण सांस फूलना अचानक किसी मानसिक तनाव, भीड़भाड़ वाली जगह, स्टेज फियर या पेनिक अटैक के कारण शुरू हो सकता है।इनहेलर का असर दोनों स्थितियों में क्या संकेत देता है?
अगर सांस फूलने पर ब्रोंकोडायलेटर इनहेलर लेने के10 से15 मिनट के भीतर मरीज को तुरंत आराम मिल जाए, तो यह स्पष्ट रूप से अस्थमा या ब्रोंकाइटिस है। एंग्जायटी के कारण सांस फूलने पर इनहेलर का कोई खास असर नहीं होता, वह केवल शांत बैठने या ध्यान भटकाने से ठीक होती है।
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Jul 07, 2026 19:11 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 07, 2026 19:11 IST
Modified By : Aneesh RawatJul 07, 2026 19:11 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Sunil Kumar K