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मौसम में बदलाव के साथ क्यों फूलने लगती है सांस? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

मौसम बदलने पर सांस फूलने की समस्या आम है, जिसका कारण तापमान, प्रदूषण और एलर्जी जैसे कारक हो सकते हैं। अस्थमा, सीओपीडी या दिल के मरीजों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए।

मौसम में बदलाव के साथ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं होना एक आम बात है। ऐसे में इस बदलते मौसम में सांस फूलने की समस्या से भी कई लोग जूझते हैं। दरअसल, ऐसे समय में जब ठंडी या ड्राई हवा अचानक हमारे फेफड़ों में जाती है तो सांस की नली हल्की सिकुड़ जाती है, जो सांस फूलने की समस्या को बढ़ा सकता है। हालांकि, लोग फिर भी कंफ्यूज रहते हैं कि मौसम में बदलाव के बाद भी सांस क्यों फूलती है? और इस समय किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है। आइए Dr. Deepak Prajapat, Pulmonologist, Metro Heart Institute, Noida से जानते हैं।

मौसम बदलने पर सांस फूलने की समस्या क्यों बढ़ जाती है?

Dr. Deepak Prajapat बताते हैं कि मौसम बदलने के दौरान वातावरण में कई तरह के बदलाव होते हैं। ऐसे में तापमान, ह्यूमिडिटी, धूल, पोलन, फफूंद, प्रदूषण और वायरस के बढ़ने जैसे कारणों से सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ये सभी कारक श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, अगर किसी व्यक्ति को पहले से एलर्जी, अस्थमा, सीओपीडी, पुरानी खांसी या दिल से जुड़ी बीमारी है तो मौसम में बदलाव के दौरान सांस फूलने की संभावना और ज्यादा बढ़ जाती है।

क्या कहती है स्टडी?

साल 2014 में European Respiratory Review के अनुसार, मौसम बदलने पर सांस फूलने की समस्या के पीछे कई कारण शामिल हैं। जलवायु में बदलाव के कारण स्थानीय मौसम के पैटर्न जैसे तापमान, बारिश और तूफान में बदलाव आता है, जो अस्थमा और सीओपीडी जैसी फेफड़ों की पुरानी बीमारियों को ज्यादा गंभीर बना देता है। मौसम में बदलाव हवा में मौजूद प्रदूषण जैसे ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के साथ मिलकर काम करता है। यह स्थिति लोगों में एलर्जी के प्रति सेंसिटिविटी को बढ़ा देती है, जिससे सांस लेने में मुश्किल होती है।

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साल 2020 में International Journal of Biometeorology के इस रिव्यू में बताया गया है कि जब मौसम बदलता है और वायुमंडलीय दबाव (atmospheric pressure) कम होता है, तो शरीर में ऑक्सीजन का लेवल थोड़ा गिर सकता है। इस रिव्यू में मौजूद एक रिसर्च में पाया गया है कि वायुमंडलीय दबाव में कमी आने से खून में ऑक्सीजन कम होने की संभावना रहती है,

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

American Lung Association के अनुसार, मौसम में अचानक बदलाव और मौसम की बहुत ज्यादा खराब स्थिति फेफड़ों से जुड़ी तकलीफों को बढ़ा सकती है। Dr. Deepak Prajapat बताते हैं कि मौसम में बदलाव के साथ सांस फूलने की समस्या महसूस होना कुछ लोगों में ज्यादा देखने को मिल सकती है, जिसमें शामिल हैं-

  • अस्थमा के मरीज
  • एलर्जी से पीड़ित लोग
  • सीओपीडी के मरीज
  • स्मोकिंग करने वाले या पहले स्मोकिंग करने वाले लोगों में
  • बुजुर्ग व्यक्ति
  • डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित मरीज
  • प्रदूषित वातावरण या धूल वाले स्थानों पर काम करने वाले लोग

सांस फूलने के कारण क्या हैं?

Dr. Deepak Prajapat के अनुसार, सांस फूलने के पीछे कई कारण शामिल हैं, जैसे-

1. एलर्जी और अस्थमा

मौसम में बदलाव के साथ हवा में मौजूद धूल, पोलन और अन्य एलर्जी के कारण सांस की नलियों में सूजन पैदा हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को अस्थमा है तो उसमें भी सांस फूलने की समस्या ज्यादा हो सकती है। इससे सांस लेने में मुश्किल, सीने में जकड़न और बार-बार खांसी की समस्या हो सकती है।

2. वायरल इंफेक्शन

बरसात और सर्दियों में वायरल इंफेक्शन की समस्या तेजी से फैलती है। इंफेक्शन के बाद कई लोगों में लंबे समय तक खांसी और सांस फूलने की समस्या बनी रह सकती है।

3. वायु प्रदूषण

मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषित हवा फेफड़ों पर ज्यादा प्रेशर डालती है। ऐसे में जिन लोगों को पहले से सांस से जुड़ी बीमारी होती है, उनमें लक्षण ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

4. सीओपीडी

स्मोकिंग या लंबे समय तक धूल, धुएं और केमिकल के संपर्क में रहने से फेफड़ों के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। मौसम बदलने पर सीओपीडी के मरीजों में सांस फूलने की समस्या ज्यादा बढ़ सकती है।

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5. दिल से जुड़ी बीमारियां

हर बार सांस फूलने का कारण फेफड़े ही हों, ऐसा जरूरी नहीं होता है। कई बार दिल के काम करने की क्षमता कम होने पर भी मरीज को सांस लेने में मुश्किल की समस्या हो सकती है। खासकर चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते समय यह समस्या ज्यादा बढ़ सकती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

Dr. Deepak Prajapat बताते हैं कि मौसम में बदलाव होने पर सांस फूलने के साथ अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो तुरंत डॉ. से मिलना चाहिए।

  • सांस लेने के दौरान सीटी जैसी आवाज आना
  • आराम करते समय भी सांस लेने में तकलीफ होना
  • थोड़ी सी मेहनत करने के बाद भी सांस फूलना
  • सीने में दर्द और दबाव महसूस होना
  • होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना
  • तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी होना
  • रात में बार-बार सांस रुकने जैसी समस्या होना

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर मरीज को लगातार सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होती है, शरीर में ऑक्सीजन का लेवल कम है, सीने में तेज दर्द या बेहोशी जैसी स्थिति महसूस होती है तो इन समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में आप तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष

Dr. Deepak Prajapat का कहना है कि मौसम में बदलाव के साथ सांस फूलने की समस्या को नॉर्मल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर आपको यह समस्या बार-बार होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर सही जांच और इलाज की मदद से सांस से जुड़ी समस्याओं को कंट्रोल किया जा सकता है और स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • सांस फूलना कौन सी बीमारी का लक्षण है?

    सांस फूलना मुख्य रूप से फेफड़े, दिल या ब्लड से जुड़ी समस्याओं का लक्षण है। यह अस्थमा, सीओपीडी, निमोनिया या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं के कारण होता है।
  • सांस फूलने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

    सांस फूलने पर तुरंत किसी आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए, आगे की ओर थोड़ा झुकें और अपने मुंह से धीरे-धीर सांस लें और छोड़ें। अगर आपके पास पहले से कोई इनहेलर या दवा है तो उसका इस्तेमाल करें।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 19, 2026 12:50 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Jul 19, 2026 12:50 IST

    Published By : Katyayani Tiwari

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