कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी सबसे महत्वपूर्ण स्टेज है और इसमें मरीज के शरीर में कैंसर के सेल्स को खत्म करने की कोशिश की जाती है। कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों के बालों का झड़ना और स्किन का डार्क होना तो दिखाई देता है, लेकिन मरीजों को यह नहीं पता होता कि कीमोथेरेपी के दौरान दांतों और मुंह की देखभाल भी जरूरी है। कीमोथेरेपी के दौरान कई मरीजों को मुंह में छाले, मसूड़ों से खून आना, मुंह सूखना, स्वाद बदल जाना और संक्रमण जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर इन लक्षणों का समय रहते इलाज न किया जाए, तो मरीज को लिए खाना निगलना तक मुश्किल हो सकता है। कीमोथेरेपी के दौरान दांतों की देखभाल क्यों जरूरी है? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Keshav Naithani, Principal Director & HOD, Department of Dental & Maxillofacial Surgery, Max Multi-Speciality Hospital, Noida (UP) से बात की।
कीमोथेरेपी के दौरान मुंह और दांतों पर असर
Dr. Keshav Naithani कहते हैं, “कीमोथेरेपी के दौरान कई ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जो शरीर में तेजी से बढ़ने वाले कैंसर सेल्स को खत्म कर देती हैं, लेकिन साथ ही शरीर के हेल्दी सेल्स को भी नुकसान पहुंचता है। तेजी से बढ़ने वाले सेल्स में मुंह की अंदरूनी परत की कोशिकाएं भी शामिल होती हैं, इसलिए कीमोथेरेपी की दवाएं उन्हें भी प्रभावित करने लगती हैं। इस वजह से इलाज के दौरान मरीज को मुंह में छाले होना, मसूड़ों से खून आना, मुंह का सूखना, स्वाद में बदलाव आना, बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ना, खाना निगलने या चबाने में परेशानी होना और सांसों से बदबू आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन परेशानियों के कारण मरीज कम खाना खाने लगता है और इस वजह से कई बार मरीज को बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होने लगती है।
कीमोथेरेपी से पहले डेंटल चेकअप क्यों जरूरी है?
National Cancer Institute के अनुसार, कैंसर के इलाज में मरीज की देखभाल करने वाली मेडिकल टीम में डेंटिस्ट को भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए, क्योंकि कैंसर के मरीजों के दांतों का रेगुलर चेकअप जरूरी है। अगर मरीज को दांतों से जुड़ी कोई समस्या जैसे दांत निकालने या किसी तरह की डेंटल सर्जरी की जरूरत है, तो इसे कैंसर के इलाज से चार हफ्ते पहले करा लेना चाहिए, ताकि कैंसर थेरेपी शुरू होने से पहले दांतों के घाव पूरी तरह से भर जाएं। इसके अलावा, कैंसर के इलाज के दौरान दांतों के बड़े इलाज से बचाव के लिए पहले ही मरीज के उन दांतों का इलाज कर दिया जाता है, जिनमें इंफेक्शन या सड़न का खतरा ज्यादा होता है।
Dr. Keshav Naithani भी इससे इत्तेफाक रखते हैं। उनका कहना है, “मेरे पास कई बार मरीज इलाज शुरू होने के बाद दांतों की समस्या लेकर आते हैं, तो उस समय इलाज करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इलाज के दौरान मरीज की इम्यूनिटी काफी कम हो चुकी होती है। इसलिए मैं सलाह देता हूं कि कीमोथेरेपी शुरू होने से पहले दांतों और मसूड़ों की पूरी जांच जरूर करानी चाहिए। अगर पहले से कैविटी, दांतों में संक्रमण, मसूड़ों की बीमारी या टूटे हुए दांत मौजूद हैं, तो उनका इलाज पहले ही कर लेना बेहतर होता है। इससे इलाज के दौरान संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है।”

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इलाज के दौरान मुंह और दांतों की देखभाल कैसे करें?
Dr. Keshav Naithani ने मरीजों को सलाह दी है कि कीमोथेरेपी के दौरान थोड़ी सी सावधानी बरतने से दांतों से जुड़ी कई परेशानियों से बचा जा सकता है।
- दिन में कम से कम दो बार मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश से धीरे-धीरे दांत साफ करें।
- फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार गुनगुने पानी में नमक या बेकिंग सोडा मिलाकर कुल्ला करें।
- अल्कोहल वाले माउथवॉश का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे मुंह और ज्यादा सूख सकता है।
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं ताकि मुंह में नमी बनी रहे।
- बैलेंस्ड डाइट लेने से शरीर को एनर्जी मिलती है।
इलाज के दौरान किन आदतों से बचना चाहिए?
CDC के मुताबिक, कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों को अपने दांतों को मजबूत रखने के लिए इन आदतों से दूर रहना चाहिए।
- जो खाने की कुरकुरी चीजें हैं, जैसे टैको चिप्स, पापड़, टोस्ट या सूखे मेवे खाने से बचना चाहिए। इससे मुंह के अंदरूनी हिस्से में खरोंच आ सकती है।
- बहुत ज्यादा गर्म, तीखे मसाले वाले, मिर्च और खट्टे फल या उनका जूस नहीं पीना चाहिए। इससे मुंह में जलन और इरिटेशन हो सकती है।
- बहुत ज्यादा मीठी चीजें जैसे टॉफी, चॉकलेट, मिठाई या कोल्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए, क्योंकि इलाज के दौरान लार कम बनने से ये चीजें सड़न पैदा कर सकती हैं।
- दांतों के बीच फंसा खाना निकालने के लिए टूथपिक का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे मसूड़े या गाल कटने का खतरा रहता है।
- तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट या गुटका पूरी तरह से बंद कर दें, क्योंकि ये मुंह के छालों को गंभीर कर सकते हैं और मुंह में हुए इंफेक्शन को ठीक नहीं होने देते।
- शराब या शराब से जुड़े ड्रिंक्स बिल्कुल नहीं लेने चाहिए, क्योंकि ये मुंह के अंदरूनी हिस्से को सुखा देते हैं, जिससे दर्द और इंफेक्शन बढ़ सकता है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
Dr. Keshav Naithani ने बताया कि अगर कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों को मुंह के छालों में बहुत ज्यादा दर्द होने लगे, मसूड़ों से खून आने लगे, मुंह में सफेद परत या फंगल इंफेक्शन दिखाई दे, तेज बुखार के साथ मुंह में जख्म हों, खाना या पानी निगलना मुश्किल होने लगे, मुंह से तेज बदबू आए, जबड़े या दांतों में असामान्य दर्द होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
निष्कर्ष
Dr. Keshav Naithani कहते हैं कि कैंसर का इलाज कराते समय मरीज को दांतों और मुंह को संक्रमण से बचाने के लिए खान-पान का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अगर मुंह हेल्दी रहेगा, तो मरीज को खाने-पीने में दिक्कत नहीं होगी और उसका स्वास्थ्य बेहतर होगा। कीमोथेरेपी के दौरान मरीज को अपने दांतों से जुड़ी समस्याओं के बारे में डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए, ताकि इलाज के दौरान कोई दिक्कत न हो।
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FAQ
क्या कीमोथेरेपी के दौरान दांतों का इलाज कराया जा सकता है?
Dr. Keshav Naithani के अनुसार, कीमोथेरेपी के दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की डेंटल प्रक्रिया नहीं करानी चाहिए। इस दौरान शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और प्लेटलेट्स भी घट सकते हैं। ऐसे में दांत निकालना, मसूड़ों का ऑपरेशन या अन्य इनवेसिव डेंटल ट्रीटमेंट इंफेक्शन और ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकते हैं।कीमोथेरेपी के दौरान क्या 'डेंटल फ्लॉस' करना सुरक्षित है?
जो लोग कीमोथेरेपी शुरू होने से पहले नियमित रूप से फ्लॉस करने के आदी रहे हैं, तो इसे सावधानी से जारी रख सकते हैं, लेकिन अगर प्लेटलेट्स बहुत कम हैं या मसूड़ों से आसानी से खून आता है, तो फ्लॉस करना तुरंत बंद कर देना चाहिए। इस दौरान दांतों के बीच फंसे खाने को निकालने के लिए जोर लगाने के बजाय गुनगुने पानी से बार-बार कुल्ला करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
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Jul 18, 2026 11:16 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 18, 2026 11:16 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Keshav Naithani