जब कैंसर मरीज कीमोथेरेपी कराते हैं, तो स्किन काली पड़ना, बाल झड़ना और भूख न लगने जैसी कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। कीमोथेरेपी में मरीज की इम्यूनिटी पर भी असर पड़ता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में कीमोथेरेपी कराना काफी चुनौतीभरा हो सकता है, क्योंकि गर्मी के कारण मरीज को पसीना, थकान और इंफेक्शन जैसी समस्याएं होने का रिस्क काफी ज्यादा बढ़ सकता है। गर्मी में कीमोथेरेपी करा रहे मरीजों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? यह जानने के लिए हमने Dr. Vishnu Hari, Associate Director & Head- Medical Oncology, Haematology & BMT, Sarvodaya Hospital, Sector-8, Faridabad से बात की।
गर्मी में कीमोथेरेपी कराने वाले मरीज ध्यान रखें
Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “कीमोथेरेपी के दौरान मरीजों को डिहाइड्रेशन और स्किन से जुड़ी कई तरह की परेशानियां हो सकती है। दरअसल, कैंसर के मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है और इस वजह से गर्मी में इंफेक्शन तेजी से फैल सकता है। इसलिए कीमोथेरेपी कराने वाले मरीजों को कुछ सावधानियां बरतने की खास जरूरत होती है।”
शरीर को हाइड्रेट रखें
Dr. Vishnu Hari के मुताबिक, “गर्मी के मौसम में शरीर से पसीने के जरिए काफी मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। कीमोथेरेपी के दौरान कई मरीजों को उल्टी, दस्त, भूख कम लगना या कमजोरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में मरीजों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। सादे पानी के अलावा, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, ताजे फलों का रस और ओआरएस जैसे पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकते हैं। किसी भी तरह के ड्रिंक को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें।”

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तेज धूप से बचना जरूरी
Dr. Vishnu Hari ने कहा, “गर्मियों में दोपहर के समय बाहर निकलना कीमोथेरेपी मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप सबसे अधिक तेज होती है। इस दौरान बाहर जाने से शरीर का तापमान बढ़ सकता है और डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए मरीजों को इस समय बिल्कुल भी निकलना चाहिए और अगर इलाज के लिए बाहर निकलना जरूरी है, तो मरीज को हल्के रंग के ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनने चाहिए। सिर को टोपी, स्कार्फ या छाते से ढककर रखें। कई कीमोथेरेपी दवाएं स्किन को सेंसिटिव बना सकती है, इस वजह से धूप में निकलने पर स्किन में जलन की समस्या हो सकती है।”
गर्मी में बाहर के खाने से परहेज जरूरी
Dr. Vishnu Hari ने बताया कि कीमोथेरेपी के दौरान इंफेक्शन का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होता है। इसलिए गर्मी में बाहर का खुला, बासी या साफ तरीके से न बने खाने में बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। ऐसा खाना कीमोथेरेपी के दौरान मरीज को बीमार बना सकता है। इसलिए मरीजों को हमेशा ताजा, साफ-सुथरा और घर का बना भोजन ही लेना चाहिए। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाना जरूरी है। बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और भारी भोजन से बचना बेहतर रहता है क्योंकि यह पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है।
डाइट का रखें ध्यान
Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “कीमोथेरेपी के दौरान मरीज को भूख नहीं लगती और इस वजह से कई बार खाना नहीं खा पाता। कई बार मरीजों को मुंह में छाले हो सकते हैं, ऐसे में मरीज को खाने-पीने का मन नहीं करता। खासतौर से गर्मियों में मरीजों ज्यादा परेशान होते हैं। इसलिए मरीजों को थोड़ा-थोड़ा घर का बना साफ-सुथरा कम मसाले वाला खाना देते रहे। मौसमी फल डॉक्टर की सलाह पर दें। इसके अलावा, उबला हुआ सादा पानी नॉर्मल होने पर मरीज को देते रहे। जब मरीज कीमोथेरेपी सेशन के लिए अस्पताल जाते हैं, उन्हें अपने साथ घर का बना खाना लेकर जाना चाहिए ताकि लंबे समय तक भूखे रहने की स्थिति न बने।”
थकान और कमजोरी होने पर आराम करें
Dr. Vishnu Hari ने बताया कि कीमोथेरेपी के दौरान थकान और कमजोरी आम समस्याएं हैं। गर्मी का मौसम इन लक्षणों को और बढ़ा सकता है। इसलिए मरीजों को पर्याप्त आराम करना चाहिए और जरूरत से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटीज नहीं करनी चाहिए। कमरा साफ और हवादार होना चाहिए। गर्मी में पंखा, कूलर या एसी से कमरे को ठंडा कर देना चाहिए, लेकिन बहुत ज्यादा ठंडे वातावरण में रहने से भी बचना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की वॉक करनी चाहिए।”
निष्कर्ष
Dr. Vishnu Hari मानते हैं कि गर्मी में कीमोथेरेपी करा रहे मरीजों को थोड़ी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए ताकि इंफेक्शन से बचा जा सके। मरीजों को पानी, डाइट और आराम करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अगर किसी मरीज को बुखार, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ, बहुत ज्यादा कमजोरी, पेशाब कम होना या अचानक तबीयत बिगड़ना महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
FAQ
कीमोथेरेपी के दौरान गर्मियों में 'कीमो पोर्ट' (Chemo Port) की देखभाल कैसे करें?
गर्मियों में पसीने के कारण कीमो पोर्ट (नसों में दवा डालने का फिक्स उपकरण) के पास फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। पोर्ट के आसपास के हिस्से को पूरी तरह सूखा और साफ रखें। यदि वहां लालिमा, सूजन या खुजली दिखे, तो तुरंत डॉक्टर को बताएं।क्या कैंसर के मरीज गर्मियों में एसी या कूलर की हवा में रह सकते हैं?
मरीजों को ठंडे और आरामदायक माहौल में रखना जरूरी है ताकि पसीना न आए। हालांकि, ध्यान रखें कि एसी या कूलर की हवा सीधे मरीज के चेहरे या छाती पर न पड़े और कूलर के पानी को रोज बदलें ताकि उसमें फंगस या बैक्टीरिया न पनपें।
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Jun 01, 2026 17:41 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jun 01, 2026 17:41 IST
Modified By : Aneesh RawatJun 01, 2026 17:41 IST
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Reviewed By : Dr Vishnu HariJun 01, 2026 17:41 IST
Published By : Aneesh Rawat